अमेरिकी डॉलर में ब्याज दरों की तेजी थमी, फेड और वैश्विक मुद्राओं पर टिकी नजरें अगस्त में अमेरिकी महंगाई दर में उछाल के बाद ब्याज दरें बढ़ने की आशंका गहरा गई है, लेकिन राजनीतिक दबाव और मुद्रा विनिमय बाजार की चाल ने डॉलर की रफ्तार सीमित कर दी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी मुद्रा की चाल ने वित्तीय विश्लेषकों को गहन सोच में डाल दिया है, क्योंकि महंगाई के ताजा आंकड़े सामने आने के बाद भी डॉलर उम्मीद के मुताबिक मजबूती नहीं दिखा पा रहा है। अमेरिका में अस्थिर घटकों को अलग रखकर आंके जाने वाले उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में अगस्त के दौरान अनुमान से अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके तुरंत बाद केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं, क्योंकि फेड ने पहले ही स्पष्ट संकेत दिए थे कि यदि महंगाई लक्ष्य की ओर लौटती नहीं दिखी तो ब्याज दरों में सख्ती की जाएगी। इसके चलते वित्तीय बाजारों ने बुधवार की बैठक में ब्याज दर में बढ़ोतरी की लगभग 90% संभावना मान ली है, साथ ही साल के अंत से पहले एक और संभावित वृद्धि की उम्मीदें भी मजबूत हुई हैं। मुद्रा बाजारों की अप्रत्याशित प्रतिक्रिया आमतौर पर जब ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना 90% तक पहुंच जाती है, तो संबंधित मुद्रा में जोरदार तेजी देखी जाती है। आंकड़ों के सार्वजनिक होने के ठीक बाद अमेरिकी डॉलर में उछाल आया, लेकिन यह मजबूती बेहद क्षणिक साबित हुई। कुछ ही समय के भीतर इस चाल की रफ्तार मंद पड़ गई। EUR/USD मुद्रा जोड़ी आंकड़ों के आने से पहले के स्तर को पार कर गई और दिन का कारोबार समाप्त होते-होते यह जोड़ी लगभग उसी दायरे में लौट आई जहां से उसने सत्र की शुरुआत की थी। यह घटनाक्रम दिखाता है कि मुद्रा बाजार केवल ब्याज दरों के आंकड़ों पर प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं, बल्कि उनके भीतर अन्य गंभीर चिंताएं भी समाहित हैं। फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता और राजनीतिक दबाव इस अनपेक्षित कमजोरी के पीछे एक प्रमुख कारण केंद्रीय बैंक पर पड़ने वाला राजनीतिक दबाव है। व्हाइट हाउस की ओर से लगातार बनने वाला दबाव फेडरल रिजर्व की स्वायत्तता के लिए चुनौती खड़ी कर सकता है। केंद्रीय बैंक की यह दुविधा उस समय खुलकर सतह पर आ जाती है जब उसका मुख्य नीतिगत जनादेश अमेरिकी प्रशासन या विशेष रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति की प्राथमिकताओं से सीधे टकराव में आ जाता है। यदि यह राजनीतिक दबाव आगे भी बना रहता है, तो अमेरिकी नीतिगत दरों में होने वाली बढ़ोतरी का सकारात्मक असर डॉलर पर धीरे-धीरे बेअसर या कमजोर हो सकता है। निवेशक यह भांपने की कोशिश कर रहे हैं कि नीतिगत फैसले आर्थिक तर्कों पर लिए जा रहे हैं या राजनीतिक परिस्थितियों के साए में। वैश्विक मुद्राओं का हालिया प्रदर्शन अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं में भी सोमवार को एशियाई सत्र के दौरान मिला-जुला रुख देखने को मिला। AUD/USD जोड़ी सोमवार को एशियाई कारोबारी सत्र में गिरकर लगभग डेढ़ हफ्ते के निचले स्तर 0.7140 के करीब पहुंच गई, हालांकि इसमें लगातार बिकवाली का अभाव रहा। हाजिर कीमतें 0.7100 के मध्य स्तर से थोड़ा ऊपर बनी रहीं और दिन के दौरान इसमें करीब 0.25% की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर, USD/JPY जोड़ी ने कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में कुछ लिवालों को आकर्षित किया। एशियाई सत्र में यह जोड़ी 154.00 के स्तर के करीब चढ़ी, जिससे शुक्रवार को हुए नुकसान की कुछ भरपाई हो सकी। इसके बावजूद हाजिर भाव पिछले एक सप्ताह के सीमित दायरे में ही फंसे रहे और पिछले मंगलवार को छुए गए करीब सात महीने के निचले स्तर के काफी करीब बने रहे, क्योंकि कारोबारी इस सप्ताह होने वाली प्रमुख केंद्रीय बैंक बैठकों का इंतजार कर रहे हैं। क्रिप्टोकरेंसी और कनाडा के आगामी आंकड़े डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में पाई नेटवर्क (PI) ने लगातार दो हफ्तों के लाभ के बाद सोमवार को भी अपनी रिकवरी जारी रखी और $0.097 के स्तर से ऊपर कारोबार किया। इसके पारिस्थितिकी तंत्र में लगातार हो रहे विकास और डेवलपर टूल्स में सुधार से इसकी उपयोगिता बढ़ रही है। तकनीकी संकेतक एक अस्थाई सुधार का संकेत दे रहे हैं, यद्यपि ऊपर स्थित एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज इसके लाभ को सीमित कर रहे हैं। इस बीच, कनाडा में सांख्यिकी विभाग सोमवार को अगस्त के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आंकड़े जारी करने जा रहा है, जिस पर बाजारों का विशेष ध्यान रहेगा। ये आंकड़े 2 सितंबर को बैंक ऑफ कनाडा की बैठक के बाद मूल्य दबावों का नया खाका पेश करेंगे, जिसमें अधिकारियों ने नीतिगत ब्याज दर को 2.25% पर स्थिर रखा था, जो बाजार विश्लेषकों के अनुमानों के अनुरूप था। इसका आप पर असर अमेरिकी मौद्रिक नीति और वैश्विक मुद्राओं में आने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विनिमय दरों पर पड़ता है। • भारत में प्रभाव: डॉलर की चाल में असमंजस से रुपया स्थिर रहने में मदद पा सकता है। इससे विदेश यात्रा, पढ़ाई या आयात करने वाले उपभोक्ताओं पर अचानक अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ने की आशंका कम हो जाती है। • वैश्विक निवेशकों पर: ब्याज दरों में 90% बढ़ोतरी की संभावना अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड यील्ड और इक्विटी बाजारों को प्रभावित करेगी। सुरक्षित परिसंपत्तियों और विदेशी मुद्रा में निवेश करने वालों को केंद्रीय बैंक के फैसलों तक सतर्कता बरतनी होगी। • कनाडा और व्यापारिक लेन-देन: कनाडा के मुद्रास्फीति आंकड़े वैश्विक कमोडिटी और सीमा पार व्यापार की लागत को प्रभावित करेंगे। 2.25% ब्याज दर पर बैंक ऑफ कनाडा के रुख के बाद आया यह डेटा आयात-निर्यात लागत को स्पष्ट करेगा। • डिजिटल परिसंपत्ति धारक: पाई नेटवर्क जैसी डिजिटल परिसंपत्तियों में तकनीकी सीमाओं के कारण मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है। निवेशकों को $0.097 के स्तर के आसपास तकनीकी रेजिस्टेंस का ध्यान रखना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ अगस्त महीने के मुद्रास्फीति आंकड़े उम्मीद से ज्यादा रहने के कारण ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका प्रबल हुई, लेकिन राजनीतिक और तकनीकी कारणों से डॉलर में अपेक्षित तेजी नहीं आ सकी। • महंगाई का दबाव: अस्थिर घटकों को हटाकर देखा गया अगस्त उपभोक्ता मूल्य सूचकांक अनुमान से अधिक दर्ज किया गया। फेडरल रिजर्व ने स्पष्ट किया था कि यदि मुद्रास्फीति नियंत्रित नहीं होती है तो वह मौद्रिक सख्ती जारी रखेगा, जिससे बुधवार की दर वृद्धि की संभावना 90% तक पहुंच गई। • राजनीतिक हस्तक्षेप की चिंता: व्हाइट हाउस की ओर से केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता पर बढ़ते दबाव ने विदेशी मुद्रा बाजार को आशंकित कर दिया है। जब केंद्रीय बैंक का मुख्य कार्य प्रशासन या राष्ट्रपति की प्राथमिकताओं से टकराता है, तो मौद्रिक फैसलों का असर कमजोर पड़ने लगता है। • मुद्रा बाजार की तकनीकी स्थिति: प्रारंभिक तेजी के बाद EUR/USD वापस अपने पुराने स्तरों पर आ गया। इससे यह संकेत मिलता है कि व्यापारी नीतिगत दरों के साथ-साथ व्यापक राजनीतिक जोखिमों को भी कीमतों में शामिल कर रहे हैं। सवाल-जवाब 1. अगस्त के महंगाई आंकड़ों का फेड की ब्याज दरों पर क्या असर पड़ा है? अगस्त में कोर मुद्रास्फीति बढ़ने के बाद बाजारों ने आगामी बुधवार की बैठक में ब्याज दर बढ़ने की संभावना को लगभग 90% तक आंका है। 2. ब्याज दर बढ़ने की संभावना के बावजूद डॉलर क्यों नहीं बढ़ सका? व्हाइट हाउस के संभावित राजनीतिक दबाव और केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता से जुड़ी चिंताओं ने डॉलर की शुरुआती बढ़त को सीमित कर दिया। 3. सोमवार को AUD/USD और USD/JPY का क्या प्रदर्शन रहा? AUD/USD 0.7140 के करीब डेढ़ हफ्ते के निचले स्तर पर आ गया, जबकि USD/JPY चढ़कर 154.00 के करीब पहुंचा लेकिन सीमित दायरे में बना रहा। 4. बैंक ऑफ कनाडा ने हाल ही में ब्याज दरों पर क्या फैसला लिया था? बैंक ऑफ कनाडा ने 2 सितंबर की बैठक में अपनी मुख्य ब्याज दर को 2.25% पर स्थिर बनाए रखने का निर्णय लिया था। 5. पाई नेटवर्क (PI) का ताजा कारोबारी स्तर क्या है? लगातार दो सप्ताह की बढ़त के बाद पाई नेटवर्क $0.097 के स्तर से ऊपर कारोबार कर रहा है। https://trendkia.com/market/us-dollar-men-byaja-daron-ki-teji-thami-fed-aura-vaishvika-mudraon-para-tiki-najaren-34067 TrendKia — Har trend, sabse pehle.