# अमेरिकी डॉलर में लगातार चौथे दिन मजबूती, फेडरल रिजर्व के कड़े रुख और भू-राजनीतिक तनाव से सोना सात हफ्ते के निचले स्तर पर

> अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 101.30-101.40 के दायरे में चढ़कर तीन महीने के उच्च स्तर के करीब पहुंच गया है। वहीं फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका और बॉन्ड यील्ड में तेजी से सोने के भाव लुढ़ककर सात हफ्ते के निचले स्तर पर आ गए हैं।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/us-dollar-men-lagatara-chauthe-dina-majabuti-fed-ke-kare-rukha-aura-bhu-rajanitika-tanava-se-sona-sata-haphte-ke-nichale-stara-par-38079 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमेरिकी डॉलर, सोने का भाव, कच्चा तेल, फेडरल रिजर्व, विदेशी मुद्रा बाजार, बैंक ऑफ जापान

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में गुरुवार को अमेरिकी डॉलर में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी दर्ज की गई, जिससे यह जुलाई के आखिर के बाद के अपने उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गया। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की तरफ से मौद्रिक नीति को और अधिक सख्त बनाए रखने की संभावनाओं ने बाजार में चर्चा को तेज कर दिया है। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने भी सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में अमेरिकी मुद्रा की मांग को मजबूत सहारा दिया है।

## डॉलर इंडेक्स में उछाल और अहम अमेरिकी आंकड़ों पर नजर
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) चढ़कर 101.30 से 101.40 के दायरे में पहुंच गया है, जो इसके लगभग तीन महीने के उच्च स्तर के बेहद करीब है। मुद्रा बाजार के कारोबारी अब टिकाऊ सामानों के ऑर्डर (ड्यूरेबल गुड्स ऑर्डर्स) के आंकड़ों और मिशिगन विश्वविद्यालय (U-Mich) के उपभोक्ता धारणा सूचकांक के अंतिम आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा फेडरल रिजर्व के अधिकारी विलियम्स, श्मिड और हैमैक के आगामी बयानों पर भी निवेशकों की कड़ी नजर टिकी हुई है, जिससे ब्याज दरों के भावी रुख के संकेत मिल सकते हैं।

## ब्रिटिश पाउंड और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव
अमेरिकी मुद्रा में मजबूती के कारण अन्य प्रमुख विदेशी मुद्राओं पर दबाव देखा गया। ब्रिटिश पाउंड बनाम अमेरिकी डॉलर (GBP/USD) गिरकर नए तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे निकट भविष्य में इसके 1.3200 के समर्थन स्तर को चुनौती मिलने की संभावना बन गई है। ब्रिटेन की तरफ से बाजार को प्रभावित करने वाला एकमात्र प्रमुख आंकड़ा जीएफके (GfK) उपभोक्ता विश्वास सूचकांक होगा।

वहीं ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) में आई गिरावट 0.7000 के अहम स्तर से ठीक पहले थम गई, हालांकि यह दो महीने के निचले स्तर के दायरे में बना हुआ है। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव बढ़ा, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया की अगस्त रोजगार रिपोर्ट में बेरोजगारी दर अनुमानित 4.5% के मुकाबले बढ़कर 4.6% पर आ गई। हालांकि इसी दौरान कुल रोजगार में 39,500 की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो बाजार के अनुमानों से बेहतर रही। इसके अलावा आगामी ट्रंप-शी बैठक को लेकर भी मुद्रा कारोबारियों में सतर्कता और घबराहट का माहौल देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया में अगली बड़ी नीतिगत घटना रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) का ब्याज दरों पर 29 सितंबर को आने वाला फैसला होगा।

## बैंक ऑफ जापान ने बढ़ाई ब्याज दरें, येन में सुधार
जापानी बाजार में बैंक ऑफ जापान (BoJ) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया। यह निर्णय 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो देश की मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम है और यह निर्णय व्यापक रूप से हफ्तों से लगाई जा रही बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा।

अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) तीन हफ्ते के उच्च स्तर से पीछे हटते हुए एशियाई सत्र में 158.00 के करीब आ गया। जापान में सरकारी बॉन्ड यील्ड में आई तेजी और मुद्रा बाजार में संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिमों ने येन को समर्थन दिया है। हालांकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और फेडरल रिजर्व की सख्त नीतियों की उम्मीदों के कारण अमेरिकी डॉलर दो महीने के उच्च स्तर के आसपास मजबूत बना हुआ है।

## कच्चे तेल में तेजी और सोने में भारी गिरावट
जिंस बाजार में पश्चिम एशिया में लगातार बने हुए तनाव और अनिश्चितता के चलते कच्चे तेल को मजबूती मिली। फ्रंट-मंथ डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड फ्यूचर्स में तेजी लौटी और यह उछलकर 96.00 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के करीब पहुंच गया। तेल आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं ने ऊर्जा बाजार में कीमतों को ऊंचा बनाए रखा है।

इसके विपरीत कीमती धातुओं में भारी बिकवाली का रुख देखा गया। सोना लुढ़ककर सात हफ्ते के निचले स्तर पर आ गया है और अब यह 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर की तरफ बढ़ रहा है। अमेरिकी कारोबारी सत्र के उत्तरार्ध में सोना 4,250 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के नीचे फिसलने के बाद हल्की वापसी की कोशिश करता दिखा, लेकिन यह प्रयास कमजोर साबित हुआ। अमेरिकी डॉलर में लगातार बढ़त, पूरी यील्ड कर्व पर अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की उम्मीदों ने सोने पर भारी दबाव बना रखा है।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल में उछाल से वैश्विक बाजारों के साथ-साथ घरेलू आयात लागत और मुद्रास्फीति पर सीधा असर पड़ सकता है।

- **भारत में प्रभाव:** मजबूत अमेरिकी डॉलर और 96.00 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुके कच्चे तेल से देश के आयात बिल में वृद्धि का जोखिम बढ़ सकता है। इसके चलते ईंधन और परिवहन की लागत पर दबाव रह सकता है, जिससे आम उपभोक्ताओं के दैनिक बजट पर असर पड़ सकता है।
- **सोने के खरीदारों के लिए:** अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने के दाम 4,200 डॉलर प्रति औंस के करीब आने से हाजिर बाजार में कीमतों में नरमी का रुख देखने को मिल सकता है। जो निवेशक या परिवार आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं, उन्हें मौजूदा मूल्य सुधार पर करीबी नजर रखनी चाहिए।
- **विदेशी मुद्रा और यात्रा:** डॉलर में मजबूती के चलते अंतरराष्ट्रीय यात्रा या विदेश में पढ़ाई का खर्च बढ़ सकता है। छात्रों और यात्रियों को मुद्रा विनिमय दरों पर ध्यान रखकर समय रहते वित्तीय योजना बनानी चाहिए।
- **जिंस और ईंधन निवेशक:** भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल में तेजी जारी रहने से ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में हलचल बढ़ सकती है। ऐसे में बाजार निवेशकों को ऊर्जा आधारित निवेशों में अस्थिरता के लिए सतर्क रहना होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
अमेरिकी डॉलर में यह तेजी मुख्य रूप से फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर बने कड़े रुख और वैश्विक तनावों के कारण आई है। साथ ही अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों के फैसलों और रोजगार आंकड़ों ने विभिन्न मुद्राओं में हलचल बढ़ा दी है।

- **फेडरल रिजर्व की मौद्रिक सख्ती:** अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों को और अधिक समय तक कड़ा बनाए रखने या बढ़ाने की संभावनाओं ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को ऊपर खींच लिया है। यील्ड बढ़ने से वैश्विक निवेशकों के लिए डॉलर अधिक आकर्षक बन गया, जिससे सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों पर दबाव बना।
- **भू-राजनीतिक अनिश्चितता:** पश्चिम एशिया में लगातार जारी तनाव और आगामी ट्रंप-शी वार्ता को लेकर बनी सतर्कता ने सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग को समर्थन दिया। इसी तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतें भी 96.00 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गईं।
- **केंद्रीय बैंकों के कदम और आर्थिक आंकड़े:** जहां बैंक ऑफ जापान ने दरें बढ़ाकर 1.25% कर दीं, वहीं ऑस्ट्रेलिया में बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6% होने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव बना। इन मिले-जुले वैश्विक घटनाक्रमों ने अमेरिकी डॉलर की बढ़त को और पुख्ता कर दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) किस स्तर पर पहुंच गया है?
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 101.30 से 101.40 के दायरे में पहुंच गया है, जो इसके तीन महीने के उच्च स्तर के करीब है।

### 2. सोने की कीमतों में कितनी गिरावट दर्ज की गई है?
सोना गिरकर सात हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गया है और यह 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर की तरफ बढ़ रहा है।

### 3. बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है?
बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है।

### 4. ऑस्ट्रेलिया की हालिया रोजगार रिपोर्ट में क्या आंकड़े सामने आए?
अगस्त की रिपोर्ट में ऑस्ट्रेलिया की बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6% हो गई, जबकि रोजगार में 39,500 पदों की वृद्धि दर्ज हुई।

### 5. कच्चे तेल की कीमतें किस स्तर पर कारोबार कर रही हैं?
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच डब्ल्यूटीआई क्रूड फ्यूचर्स उछलकर 96.00 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है।

### 6. रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) का अगला नीतिगत फैसला कब आना है?
रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) का ब्याज दरों पर अगला अहम फैसला 29 सितंबर को तय है।

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