# अमेरिकी डॉलर में लगातार चौथे हफ्ते मजबूती, बाजार की नजरें अब महंगाई आंकड़ों और ब्याज दरों पर टिकीं

> फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति के संकेतों और कच्चे तेल में उछाल से अमेरिकी डॉलर 18 महीने के उच्च स्तर के करीब पहुंचा, अगले हफ्ते आने वाले महंगाई आंकड़े आगे की दिशा तय करेंगे।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/us-dollar-men-lagatara-chauthe-haphte-majabuti-bajara-ki-najaren-aba-mahngai-ankaron-aura-byaja-daron-para-tikin-45677 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमेरिकी डॉलर, फेडरल रिजर्व, मुद्रास्फीति, ब्याज दरें, डॉलर इंडेक्स, कच्चा तेल, विदेशी मुद्रा बाजार, वित्त

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर ने अपनी बढ़त की रफ्तार को लगातार चौथे हफ्ते भी बरकरार रखा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी के दोबारा बनते समीकरणों और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने अमेरिकी मुद्रा को मजबूत सहारा दिया है। डॉलर इंडेक्स अपने पिछले 18 महीनों के सबसे मजबूत दायरे के पास पहुंच चुका है और इसने अहम तकनीकी स्तरों को भी पार कर लिया है। विदेशी मुद्रा बाजार के निवेशक अब अगले सप्ताह जारी होने वाले महंगाई और उपभोक्ता खर्च के ताजा आंकड़ों पर अपनी नजरें जमाए हुए हैं, जिससे साल के अंतिम महीनों में नीतिगत ब्याज दरों की सही दिशा स्पष्ट हो सकेगी।

## फेडरल रिजर्व की सख्त नीति और डॉलर की चाल
अमेरिकी केंद्रीय बैंक की हालिया नीतियों और अधिकारियों के बयानों ने बाजार में सख्त मौद्रिक रुख का स्पष्ट संदेश दिया है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की सितंबर 15 और 16 की बैठक के विवरण से यह साफ हुआ था कि 25 आधार अंकों की दर वृद्धि को सर्वसम्मति से समर्थन मिला था। इसके साथ ही अधिकांश नीति निर्माताओं का मानना था कि साल के अंत से पहले एक और ब्याज दर वृद्धि पूरी तरह से उचित हो सकती है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में घरेलू मांग की मजबूती और लगभग पूर्ण रोजगार की स्थिति ने नीति निर्माताओं को मूल्य स्थिरता और महंगाई पर ध्यान केंद्रित रखने का पर्याप्त आधार प्रदान किया है।

सितंबर महीने के गैर-कृषि रोजगार आंकड़ों में 29 हजार नए रोजगार जुड़ने की रिपोर्ट आने के बाद बाजार की चिंताएं रोजगार से हटकर फिर से महंगाई की तरफ केंद्रित हो गई हैं। इससे पहले अक्टूबर बैठक में दर वृद्धि की संभावना बेहद कम मानी जा रही थी, लेकिन साल 2026 की आखिरी दो बैठकों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। फेडरल रिजर्व का लक्ष्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को 2.0 प्रतिशत के स्तर पर लाना है, जबकि वर्तमान में कीमतें इस लक्ष्य से काफी ऊपर बनी हुई हैं। ऐसे में जब तक महंगाई में लगातार और ठोस गिरावट दर्ज नहीं की जाती, तब तक दरों में कटौती या नरमी की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।

## अधिकारियों के बयान और भविष्य के संकेत
केंद्रीय बैंक के प्रमुख अधिकारियों के बयानों से भी यह स्पष्ट हुआ है कि मौद्रिक सख्ती का दौर अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य क्रिस्टोफर वॉलर ने कहा कि आगे और दर वृद्धि की जरूरत है, हालांकि इसके लिए हर लगातार बैठक में बढ़ोतरी होना अनिवार्य नहीं है। वहीं कंसास सिटी के जेफरी श्मिड ने रेखांकित किया कि लंबी अवधि के बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बावजूद केंद्रीय बैंक को अल्पकालिक ब्याज दरों पर ध्यान देने की आवश्यकता बनी हुई है। सेंट लुइस के अल्बर्टो मुसालेम ने अधिक स्पष्टता के साथ कहा कि महंगाई को वापस 2 प्रतिशत के लक्ष्य पर लाने और इसके दूसरे दौर के प्रभावों को रोकने के लिए अतिरिक्त नीतिगत सख्ती जरूरी होगी।

फेडरल रिजर्व के अधिकारियों ने यह भी माना कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बढ़ता निवेश मध्यम अवधि में आपूर्ति की तुलना में कुल मांग को आगे बढ़ा सकता है, जिससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव आ सकता है। हालांकि लंबी अवधि के ट्रेजरी यील्ड में नरमी आई है, लेकिन व्यापक वित्तीय स्थितियां अब भी आर्थिक वृद्धि का समर्थन कर रही हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भविष्य के कदम किसी निश्चित समय सारणी पर नहीं, बल्कि आने वाले आर्थिक आंकड़ों और मुद्रास्फीति की व्यापकता पर निर्भर करेंगे। सप्ताह के अंत में फेड चेयर वॉर्श का संबोधन भी प्रस्तावित है, जिस पर विश्लेषकों की गहरी नजर रहेगी।

## वायदा बाजार में सट्टेबाजी और तकनीकी संकेत
कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन के 29 सितंबर को समाप्त सप्ताह के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि डॉलर में तेजी के सौदों में सुधार हुआ है। गैर-व्यावसायिक शुद्ध लंबी पोजीशन बढ़कर करीब 11.9 हजार अनुबंधों पर पहुंच गई, जिससे पिछले सप्ताह की गिरावट में सुधार देखा गया है। इसके अतिरिक्त चार सप्ताह का बदलाव सुधरकर -5,144 अनुबंध हो गया, जो पूर्व में -8,352 अनुबंध पर था। यह सुधार दर्शाता है कि डॉलर की स्थिति में आई हालिया कमजोरी अब स्थिर हो रही है।

बाजार में ओपन इंटरेस्ट लगातार दूसरे सप्ताह बढ़कर 48.3 हजार अनुबंधों से थोड़ा ऊपर पहुंच गया है। शुद्ध लॉन्ग पोजीशन और कुल भागीदारी का एक साथ बढ़ना यह दर्शाता है कि बाजार में केवल शॉर्ट कवरिंग नहीं हो रही, बल्कि नई खरीदारी का रुझान लौट रहा है। हालांकि सट्टा जोखिम बढ़कर 24.6 प्रतिशत और इसका परसेंटाइल 45.5 पर आ गया है, जबकि नेट पोजीशन परसेंटाइल सुधरकर 48.2 हो गया है। ये दोनों आंकड़े ऐतिहासिक रूप से तटस्थ स्तर के करीब हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि व्यापारी पूरी आक्रामकता के बजाय सावधानीपूर्वक बाजार में नई खरीदारी कर रहे हैं।

## डॉलर इंडेक्स और प्रमुख मुद्रा जोड़ों की स्थिति
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स यानी DXY ने 102.50 के स्तर को पार कर लिया है और यह अपने 200-सप्ताह के सरल मूविंग एवरेज से ऊपर निकल गया है। तकनीकी मोर्चे पर यह स्तर डॉलर के लिए एक महत्वपूर्ण मजबूती का संकेत देता है। यदि आगामी मुद्रास्फीति के आंकड़े उम्मीद से अधिक मजबूत रहते हैं, तो डॉलर इंडेक्स 102.50 के स्तर से ऊपर टिककर और अधिक बढ़त दर्ज कर सकता है। वहीं यदि आंकड़े कमजोर आते हैं या उपभोक्ता खर्च में कमी के संकेत मिलते हैं, तो डॉलर में कुछ मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा विनिमय बाजार के अन्य प्रमुख जोड़ों में भी डॉलर के रुख का असर दिखा है। एशियाई सत्र में AUD/USD ने सप्ताह के निचले स्तर से उबरते हुए 0.7000 के स्तर की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिसे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सख्त नीतिगत उम्मीदों से सहारा मिला। उधर USD/JPY करीब 158.00 के आसपास बना रहा, जहां जापान में घरेलू खर्च में लगातार नौवें महीने आई गिरावट ने जापानी येन को कमजोर किया। कीमती धातुओं में सोने की कीमतों में शुरुआती तेजी के बाद गिरावट आई और यह 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के नीचे कारोबार करता नजर आया।

## कच्चे तेल का दबाव और बाजार का दृष्टिकोण
ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी महंगाई की चिंताओं को बढ़ाने का काम किया है, जिससे डॉलर को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन मिल रहा है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार क्रूड ऑयल (CL=F) का हालिया भाव 91.12 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया, जो पिछले बंद 91.49 डॉलर से 0.40 प्रतिशत नीचे है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर के बीच रहा है और तकनीकी स्तर पर इसका आरएसआई 49 पर तटस्थ बना हुआ है। 50-दिवसीय ईएमए 90.17 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 81.21 डॉलर के साथ इसमें गोल्डन क्रॉस बना हुआ है, जो दीर्घकालिक मजबूती को दर्शाता है।

कुल मिलाकर, वैश्विक स्तर पर नीतिगत अंतर, भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और ऊर्जा बाजार से जुड़े जोखिम डॉलर को मजबूत बनाए रख रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि आगामी आंकड़ों के बाद डॉलर में कोई अल्पकालिक गिरावट आती भी है, तो वह दीर्घकालिक मंदी का संकेत देने के बजाय नए खरीदारों को आकर्षित करने का अवसर साबित हो सकती है।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी डॉलर की निरंतर मजबूती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अंतरराष्ट्रीय व्यापार और घरेलू मुद्रा पर सीधा असर डाल सकती हैं।

- **भारतीय आयात और व्यापार पर:** मजबूत डॉलर से भारत का आयात बिल, विशेषकर कच्चे तेल की खरीद, अधिक महंगा हो जाता है। इसके चलते घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बढ़ सकता है।
- **वैश्विक निवेशकों और बाजार पर:** फेडरल रिजर्व की सख्त ब्याज दर नीति के कारण विदेशी संस्थागत निवेशक उभरते बाजारों से पूंजी निकाल सकते हैं। इससे घरेलू शेयर बाजार और मुद्रा विनिमय दरों में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
- **विदेश यात्रा और शिक्षा पर:** डॉलर की मजबूती के कारण भारतीय छात्रों के लिए विदेश में पढ़ाई और अंतरराष्ट्रीय यात्रा की लागत बढ़ जाती है। यात्रियों और छात्रों को ट्यूशन फीस या विदेशी मुद्रा रूपांतरण के लिए अधिक रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
- **सोने और कमोडिटी खरीदारों पर:** अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत डॉलर आमतौर पर सोने की कीमतों पर दबाव बनाता है। हालांकि घरेलू बाजार में कमजोर रुपये के कारण आभूषण खरीदारों को कीमतों में सीमित राहत ही मिल पाती है।

## ऐसा क्यों हुआ
अमेरिकी डॉलर में हालिया तेजी कई महत्वपूर्ण आर्थिक और नीतिगत कारकों के संयोजन के कारण देखने को मिली है।

- **फेडरल रिजर्व का सख्त मौद्रिक रुख:** नीति निर्माताओं ने संकेत दिया है कि मुद्रास्फीति 2% के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है और इसे नियंत्रित करने के लिए एक और दर वृद्धि आवश्यक हो सकती है। इस सख्त रुख ने निवेशकों को डॉलर में निवेश बनाए रखने के लिए प्रेरित किया है।
- **कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें:** ऊर्जा बाजार में मजबूती के कारण आने वाले महीनों में महंगाई के फिर से बढ़ने का जोखिम उत्पन्न हो गया है। इस संभावित मुद्रास्फीति दबाव ने केंद्रीय बैंक द्वारा दरों में कटौती की संभावनाओं को टाल दिया है।
- **सकारात्मक डेरिवेटिव पोजीशनिंग:** कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन के आंकड़ों से पता चला है कि डॉलर में शुद्ध लॉन्ग पोजीशन और ओपन इंटरेस्ट दोनों में सुधार हुआ है। यह डेरिवेटिव बाजार में नए खरीदारों के लौटने का संकेत देता है।
- **आगामी आर्थिक आंकड़ों की प्रतीक्षा:** बाजार प्रतिभागी आगामी मुद्रास्फीति और उपभोक्ता व्यय आंकड़ों से पहले डॉलर में अपनी पोजीशन सुरक्षित कर रहे हैं। इन आंकड़ों से 2026 की आगामी बैठकों में नीतिगत फैसलों की दिशा स्पष्ट होगी।

## सवाल-जवाब

### 1. अमेरिकी डॉलर में लगातार चौथे हफ्ते मजबूती का मुख्य कारण क्या है?
फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी के संकेत और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने डॉलर को लगातार चौथे हफ्ते मजबूत बनाए रखा है।

### 2. फेडरल रिजर्व की पिछली बैठक में क्या निर्णय लिया गया था?
सितंबर 15 और 16 की बैठक में 25 आधार अंकों की ब्याज दर वृद्धि को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई थी और साल के अंत तक एक और वृद्धि के संकेत दिए गए थे।

### 3. सितंबर के रोजगार आंकड़ों का बाजार पर क्या असर पड़ा?
सितंबर में 29 हजार नए रोजगार जुड़ने की रिपोर्ट के बाद बाजार का ध्यान रोजगार से हटकर वापस मुद्रास्फीति के दबाव पर केंद्रित हो गया।

### 4. डॉलर इंडेक्स ने हाल ही में किस प्रमुख स्तर को पार किया है?
डॉलर इंडेक्स (DXY) ने 102.50 के स्तर को पार कर लिया है और यह अपने 200-सप्ताह के सरल मूविंग एवरेज से ऊपर निकल गया है।

### 5. वायदा बाजार में डॉलर की पोजीशन में क्या बदलाव देखा गया?
कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन के अनुसार गैर-व्यावसायिक शुद्ध लंबी पोजीशन बढ़कर 11.9 हजार अनुबंधों पर पहुंच गई और ओपन इंटरेस्ट 48.3 हजार अनुबंधों से ऊपर रहा।

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