अमेरिकी डॉलर में नरमी से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7000 के स्तर से संभला सप्ताह भर की भारी गिरावट के बाद शुक्रवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7000 के अहम स्तर से 0.20% सुधरकर 0.7025 के करीब पहुंचा, हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और बॉन्ड यील्ड के चलते दबाव बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर शुक्रवार को गिरावट से उबरते हुए निचले स्तरों से सुधरने में कामयाब रहा। सप्ताह के दौरान अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में जोरदार तेजी और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति में सख्ती के संकेतों से अमेरिकी डॉलर को भारी मजबूती मिली थी। इसके बावजूद कारोबारी हफ्ते के अंतिम दिन अमेरिकी डॉलर में आए हल्के सुधार ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसलने से बचा लिया। शुक्रवार को एशियाई सत्र के दौरान एक समय शुरुआती अगस्त के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंचने के बाद यह जोड़ी दिन के कारोबार में लगभग 0.20% की बढ़त के साथ 0.7025 के आसपास कारोबार करती देखी गई। हालांकि, दैनिक स्तर पर आई इस मामूली राहत के बावजूद यह मुद्रा जोड़ी साप्ताहिक आधार पर एक बड़ी गिरावट की ओर बढ़ रही है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में गिरावट और ट्रेजरी यील्ड का दबाव अमेरिकी डॉलर की चाल को छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की तुलना में मापने वाला यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) शुक्रवार को 0.30% गिरकर 100.95 के स्तर पर आ गया। डॉलर इंडेक्स में यह गिरावट सप्ताह भर चली जोरदार तेजी के बाद मुनाफावसूली और तकनीकी सुधार का नतीजा मानी जा रही है। इससे पहले पूरे हफ्ते अमेरिकी मुद्रा खासी मजबूत स्थिति में रही थी, जिसे सरकारी बॉन्ड यील्ड में लगातार हो रही बढ़ोतरी से भारी सहारा मिला था। बाजार सहभागियों ने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और अधिक सख्ती किए जाने की संभावनाओं पर अपने दांव बढ़ा दिए हैं। इन उम्मीदों ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड को कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया, जिससे अमेरिका और दुनिया की अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच ब्याज दर का अंतर और चौड़ा हो गया है। इसके साथ ही, कच्चे तेल की कीमतों में दो दिनों तक लगातार आई तेजी ने ऊर्जा लागत को बढ़ाते हुए मुद्रास्फीति की चिंताओं को फिर से हवा दी है। बढ़ती महंगाई की इन आशंकाओं और भू-राजनीतिक तनावों ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश की तलाश में अमेरिकी डॉलर की ओर आकर्षित किया, जिससे डॉलर दो महीने के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि शुक्रवार को बॉन्ड यील्ड में दर्ज की गई हल्की नरमी से ग्रीनबैक पर ताजा बिकवाली दबाव देखा गया, जिसने अन्य संपत्तियों और मुद्राओं को संभलने का मौका दिया। महंगाई उम्मीदें और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति मुद्रास्फीति के मोर्चे पर निवेशकों की नजरें अमेरिकी उपभोक्ताओं के रुख पर टिकी हुई हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, एक साल की उपभोक्ता मुद्रास्फीति अपेक्षाएं 4.6% पर अपरिवर्तित रहीं। वहीं, दीर्घकालिक दृष्टिकोण को दर्शाने वाला पांच साल का मुद्रास्फीति सूचकांक भी 3.4% पर स्थिर बना रहा। उपभोक्ताओं के बीच महंगाई की इन लगातार ऊंची बनी हुई अपेक्षाओं ने यह साफ कर दिया है कि फेडरल रिजर्व आने वाले समय में नीतिगत दरों को लेकर अपनी सतर्क और सख्त रणनीति जारी रख सकता है। महंगाई के इन आंकड़ों के स्थिर बने रहने के कारण अमेरिकी डॉलर में किसी बहुत बड़ी या टिकाऊ गिरावट की गुंजाइश सीमित मानी जा रही है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान दोनों ने पिछले हफ्ते ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की थी। दोनों ही केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति के जोखिमों का सीधे तौर पर सामना कर रहे हैं। दोनों संस्थानों ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में लिए जाने वाले नीतिगत फैसले आने वाले आर्थिक आंकड़ों की दिशा और दशा पर निर्भर करेंगे। नीतिगत स्तर पर इस सख्ती ने वैश्विक बाजारों में डॉलर की स्थिति को मजबूत आधार प्रदान किया है। ट्रंप और शी जिनपिंग की बैठक का मिलाजुला असर वैश्विक मंच पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई उच्चस्तरीय शिखर बैठक पर भी मुद्रा बाजार की करीबी नजर रही। इस बैठक से दोनों नेताओं की ओर से रिश्ते सुधारने और तनाव घटाने के सुर जरूर सुनाई दिए, लेकिन संवेदनशील मुद्दों पर किसी ठोस समझौते का अभाव रहा। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वाशिंगटन और बीजिंग के संबंधों को एक नए ऐतिहासिक मील के पत्थर पर पहुंचने वाला करार दिया। दोनों देशों ने आपसी सहयोग बढ़ाने और अपने द्विपक्षीय व्यापार संघर्ष पर जारी सीजफायर यानी व्यापार युद्ध विराम को आगे बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की। इसके बावजूद, दोनों पक्षों के बीच व्यापार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ताइवान जैसे बेहद अहम और विवादित मुद्दों पर कोई बड़ी सफलता हासिल नहीं हो सकी। ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था के लिए चीन के घटनाक्रम अत्यधिक महत्व रखते हैं, क्योंकि चीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। आमतौर पर अमेरिका और चीन के बीच रिश्तों में किसी भी तरह के सुधार या व्यापारिक तनाव में कमी से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के प्रति बाजार की धारणा को सकारात्मक मजबूती मिलती है। हालांकि इस बार बैठक से कोई ठोस परिणाम सामने न आने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को इस भू-राजनीतिक घटनाक्रम से बेहद सीमित समर्थन ही मिल सका। ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक से दर वृद्धि की उम्मीदें और घरेलू अर्थव्यवस्था घरेलू मोर्चे पर बात करें तो रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा अगले हफ्ते होने वाली मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावनाओं ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को नीचे से सहारा दिया है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया की बेरोजगारी दर पिछले महीने के 4.5% से बढ़कर अगस्त में 4.6% पर पहुंच गई। श्रम बाजार में आई इस मामूली गिरावट के बावजूद केंद्रीय बैंक के सख्त रुख में किसी ढील की संभावना नहीं देखी जा रही है। निवेशकों का मानना है कि श्रम बाजार की यह धीमी रफ्तार केंद्रीय बैंक को ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने से नहीं रोकेगी। अगले हफ्ते RBA की ओर से संभावित मौद्रिक सख्ती और शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर में आई गिरावट के तालमेल ने AUD/USD जोड़ी को 0.7000 के बेहद नाजुक स्तर से उबरने में मदद की। फिर भी, बड़े पैमाने पर अमेरिकी यील्ड के ऊंचे बने रहने और फेडरल रिजर्व के आक्रामक रवैये के चलते ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर साप्ताहिक आधार पर दबाव की स्थिति बनी हुई है। तकनीकी स्तर और लाइव बाजार रुझान तकनीकी चार्ट पर AUD/USD एशियाई सत्र के दौरान रातों-रात 200-दिवसीय एसएमए के नीचे फिसलने के बाद 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास काफी कमजोर नजर आ रहा था। ऊपर की दिशा में, मुद्रा जोड़ी के लिए पहला प्रतिरोध 0.7045 के स्तर पर स्थित है। यदि तेजी जारी रहती है, तो 100-अवधि के एसएमए के करीब 0.7070 और उसके पास 0.7075 पर एक मजबूत आपूर्ति क्षेत्र मौजूद है। इसके बाद अगला अवरोध 0.7095 और 0.7105 पर देखा जाएगा, जबकि दूर का मुख्य ऊपरी स्तर 0.7140 पर बना हुआ है। गिरावट की स्थिति में, पहला समर्थन स्तर 0.7004 पर है, जिसके नीचे 0.6984 का निचला संरचनात्मक आधार आता है। इन स्तरों के नीचे स्पष्ट रूप से जाने पर नए सिरे से तेज बिकवाली का दबाव बन सकता है, जबकि इन स्तरों के ऊपर बने रहने पर इस मंदी के माहौल के बीच सुधारात्मक उछाल की संभावना बरकरार रहेगी। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, AUD/USD जोड़ी मौजूदा समय में 0.7027 पर कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद स्तर 0.7034 की तुलना में 0.10% नीचे है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 0.6422 से 0.7277 के बीच रहा है, जबकि ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत के 1.00 गुना पर दर्ज हुआ है। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय आरएसआई 33 पर चल रहा है, जबकि एमएसीडी -0.00 पर मंदी का संकेत दे रहा है। मूविंग एवरेज में 20-दिवसीय ईएमए 0.7118, 50-दिवसीय ईएमए 0.7102 और 200-दिवसीय ईएमए 0.6963 पर है। 50-दिवसीय एसएमए 0.7093 और 200-दिवसीय एसएमए 0.7020 पर है। लंबी अवधि के दृष्टिकोण से 50 ईएमए और 200 ईएमए के बीच गोल्डन क्रॉस बना हुआ है। बोलिंगर बैंड (20,2) की सीमा 0.7037 से 0.7254 (मध्य 0.7145) है, और मौजूदा कीमत निचले बैंड से नीचे बनी हुई है। ट्रेंड शक्ति को मापने वाला एडीएक्स 26 पर ट्रेंडिंग स्थिति दर्शा रहा है, जबकि स्टोकेस्टिक की फास्ट लाइन 9 और सिग्नल लाइन 20 पर है। दैनिक अस्थिरता एटीआर 0.00 पर है। आने वाले सत्रों के लिए धुरी स्तर 0.7024, प्रतिरोध R1 0.7041, R2 0.7055 तथा समर्थन S1 0.7010 और S2 0.6993 पर स्थित हैं। सोने, येन और क्रिप्टोकरेंसी का हाल वैश्विक वित्तीय बाजारों के अन्य वर्गों में भी शुक्रवार को डॉलर की नरमी का असर देखने को मिला। सोने की कीमतों में सप्ताह के अंत में कुछ लिवाली देखी गई और इसमें मामूली बढ़त दर्ज की गई। इसने अपनी साप्ताहिक गिरावट की आंशिक भरपाई की, हालांकि यह अभी भी 4,300 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे कारोबार कर रहा है। ग्रीनबैक पर ताजा बिकवाली के रुझान और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मामूली गिरावट ने इस कीमती धातु को संभलने में मदद की। मुद्रा बाजार में जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर यानी USD/JPY जोड़ी शुक्रवार को एशियाई सत्र में नीचे की ओर खिसकी। 159.00 के तीन सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद यह रफ्तार सुस्त पड़ गई क्योंकि निवेशकों को जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित बाजार हस्तक्षेप का डर सताने लगा। हालांकि फेड के सख्त नजरिए और बॉन्ड यील्ड के चलते डॉलर में अंतर्निहित मजबूती बरकरार है, जबकि बैंक ऑफ जापान द्वारा पिछले सप्ताह की गई दरों में वृद्धि के बावजूद येन की बढ़त सीमित रह सकती है। व्यापक क्रिप्टोकरेंसी बाजार शुक्रवार को स्थिरता के दौर में दिखा, जहां बिटकॉइन 84,000 डॉलर के स्तर से थोड़ा ऊपर अपने नुकसान की भरपाई करता नजर आया। इथेरियम बिटकॉइन के साथ ही दबाव में दिखा, जबकि रिपल यानी XRP ने विपरीत दिशा में अलग रुझान प्रस्तुत किया। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में जारी हलचल का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, मुद्रा विनिमय दरों और वैश्विक निवेश प्रवाह पर पड़ता है। • मुद्रा विनिमय और यात्रा: विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मजबूती अन्य मुद्राओं पर दबाव बनाए रखती है। अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वालों और विदेश में शिक्षा पर खर्च करने वाले परिवारों के लिए विदेशी मुद्रा की लागत बढ़ सकती है। • कच्चा तेल और आयात लागत: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और मजबूत डॉलर से ऊर्जा आयात महंगा हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप घरेलू बाजार में परिवहन लागत और आयातित वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं। • सोने और आभूषणों के खरीदार: डॉलर की नरमी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों को हल्का सहारा मिला है। खुदरा खरीदारों और आभूषण निर्माताओं को खरीदारी की योजना बनाते समय डॉलर और यील्ड के रुझानों पर नजर रखनी चाहिए। • विदेशी मुद्रा और कमोडिटी ट्रेडर्स: तकनीकी स्तरों पर AUD/USD के 0.7000 के करीब बने रहने से अस्थिरता बढ़ गई है। ट्रेडर्स को 0.7045 के प्रतिरोध और 0.6984 के समर्थन स्तरों को ध्यान में रखकर अपने स्टॉप-लॉस सेट करने चाहिए। • वैश्विक इक्विटी और बॉन्ड निवेशक: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर रहने से जोखिम वाली संपत्तियों पर असर पड़ सकता है। बॉन्ड यील्ड ऊंची रहने से उभरते बाजारों से पूंजी निकासी का जोखिम बढ़ जाता है। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी डॉलर में पूरे हफ्ते रही जोरदार तेजी के बाद शुक्रवार को बॉन्ड यील्ड में हल्की गिरावट और तकनीकी मुनाफावसूली के कारण यह सुधारात्मक मोड़ आया। साथ ही ऑस्ट्रेलिया के केंद्रीय बैंक की ओर से संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को निचले स्तरों से सहारा दिया। • ट्रेजरी यील्ड में तकनीकी नरमी: पूरे हफ्ते बहु-वर्षीय उच्च स्तर छूने के बाद शुक्रवार को अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में हल्की गिरावट दर्ज हुई। इसके चलते डॉलर इंडेक्स 0.30% गिरकर 100.95 पर आ गया और विदेशी मुद्राओं को राहत मिली। • फेड और बीओजे की दर वृद्धि: फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान दोनों द्वारा पिछले हफ्ते ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की गई थी। केंद्रीय बैंकों की सख्त मौद्रिक नीति और तेल की ऊंची कीमतों ने महंगाई की चिंताओं को बनाए रखा है। • आरबीए की संभावित नीतिगत सख्ती: ऑस्ट्रेलिया में बेरोजगारी दर 4.5% से बढ़कर 4.6% होने के बावजूद रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा अगले हफ्ते ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें बनी हुई हैं। इस घरेलू उम्मीद ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को 0.7000 के नीचे जाने से रोक दिया। • भू-राजनीतिक वार्ता में ठोस नतीजों की कमी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बातचीत में रिश्ते सामान्य करने की बात तो हुई, लेकिन व्यापार और तकनीक पर कोई ठोस समझौता नहीं हुआ। इस वजह से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को इस शिखर वार्ता से कोई बड़ा बूस्ट नहीं मिल सका। सवाल-जवाब 1. शुक्रवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर किस स्तर पर कारोबार कर रहा था? शुक्रवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.20% की बढ़त के साथ लगभग 0.7025 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। 2. यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) में शुक्रवार को कितनी गिरावट आई? यूएस डॉलर इंडेक्स में 0.30% की गिरावट दर्ज की गई और यह 100.95 के स्तर पर आ गया। 3. ऑस्ट्रेलिया की बेरोजगारी दर के ताजा आंकड़े क्या रहे? अगस्त के महीने में ऑस्ट्रेलिया की बेरोजगारी दर पिछले 4.5% से बढ़कर 4.6% दर्ज की गई। 4. डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की बैठक का क्या परिणाम रहा? बैठक में दोनों नेताओं ने संबंध सुधारने और व्यापार युद्ध विराम बढ़ाने के संकेत दिए, लेकिन व्यापार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ताइवान पर कोई ठोस समझौता नहीं हुआ। 5. AUD/USD के लिए अहम तकनीकी प्रतिरोध और समर्थन स्तर कौन से हैं? जोड़ी के लिए पहला प्रतिरोध 0.7045 और 0.7070 पर है, जबकि पहला समर्थन 0.7004 और उसके बाद 0.6984 के स्तर पर स्थित है। 6. सोने की कीमत किस स्तर के नीचे कारोबार कर रही है? सोने में हल्की बढ़त के बावजूद यह 4,300 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के प्रमुख स्तर से नीचे कारोबार कर रहा है। https://trendkia.com/market/us-dollar-men-narami-se-australian-dollar-0-7000-ke-stara-se-snbhala-38641 TrendKia — Har trend, sabse pehle.