अमेरिकी डॉलर पर दबाव: ट्रेजरी के बॉन्ड बायबैक और महंगाई के बढ़ते जोखिमों से बदली बाजार की चाल अमेरिकी ट्रेजरी के लंबे समय के बॉन्ड बायबैक को दोगुना करने के फैसले और बढ़ती महंगाई की आशंकाओं के बीच गर्मियों के दौरान अमेरिकी डॉलर में नरमी देखने को मिली है। इस कदम से दीर्घकालिक पैदावार और मुद्रा की स्थिति प्रभावित हुई है। गर्मी के महीनों के दौरान अमेरिकी डॉलर की स्थिति कमजोर हुई है, जिसकी मुख्य वजह अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा लंबी अवधि के बॉन्ड बायबैक के आकार को कम से कम दोगुना करने का निर्णय रहा है। इस घोषणा ने निवेशकों का भरोसा हिला दिया है, खासकर ऐसे समय में जब अर्थव्यवस्था में महंगाई के मोर्चे पर जोखिम लगातार बढ़ते जा रहे हैं। एमयूएफजी के ली हार्डमैन के अनुसार, ट्रेजरी के इन कदमों के कारण बाजार की धारणा प्रभावित हुई है। बॉन्ड बायबैक के आकार में बड़ा बदलाव अमेरिकी ट्रेजरी की ओर से अपने विस्तारित बॉन्ड बायबैक कार्यक्रम के बारे में आगे की जानकारी सामने आई है, जिससे पता चलता है कि पहले बड़े बॉन्ड बायबैक अभियान का अधिकतम आकार 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर तीन गुना यानी 6 अरब डॉलर कर दिया गया है। इस घोषणा के बाद शुरुआती दौर में अमेरिकी दीर्घकालिक पैदावार में उछाल आया, जिसमें 30 साल की यील्ड में लगभग 5 आधार अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि बाद में यह थोड़ा संभलकर 2 से 3 आधार अंक ऊपर स्थिर हो गई। इस मूल्य प्रतिक्रिया से यह संकेत मिलता है कि बाजार को उम्मीद थी कि बॉन्ड बायबैक का आकार शायद इससे भी बड़ा होगा। डॉलर की चाल और ऑपरेशन ट्विस्ट की तुलना इसके विपरीत, अमेरिकी डॉलर में शुरुआती दौर में मामूली राहत भरी तेजी देखने को मिली थी, लेकिन वह बढ़त अब काफी हद तक गायब हो चुकी है। यदि अमेरिकी ट्रेजरी हर तिमाही में 9 बॉन्ड बायबैक आयोजित करना जारी रखती है और प्रत्येक अभियान में 6 अरब डॉलर तक की खरीदारी करती है, तो सालाना खरीदारी का संभावित आंकड़ा 200 अरब डॉलर से थोड़ा अधिक हो सकता है। यह अमेरिकी फेडरल रिजर्व के जाने-पहचाने ऑपरेशन ट्विस्ट कार्यक्रम का एक छोटा रूप साबित हो सकता है। हालांकि, यह अभी पूरी तरह अनिश्चित है कि ये बड़े पैमाने पर खरीदारी कब तक जारी रहेगी और भविष्य में अभियानों का आकार और बढ़ाया जा सकता है या नहीं। एशियाई सत्र में प्रमुख मुद्राओं और परिसंपत्तियों का हाल गुरुवार को एशियाई सत्र के दौरान अन्य प्रमुख मुद्रा जोड़े और संपत्तियां भी महत्वपूर्ण गतिविधियों से गुजर रही हैं। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर मिश्रित संकेतों के बीच 0.7200 के स्तर से ऊपर समेकन चाल को आगे बढ़ा रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती उम्मीदों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को 14 मई के बाद से अपने उच्चतम स्तर के करीब बनाए रखा है। इसके बावजूद, फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख की उम्मीदों और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अमेरिकी डॉलर को कुछ समर्थन दिया है, जिससे अमेरिकी मुद्रा के सामने आ रहे दबाव पर कुछ हद तक लगाम लगी है क्योंकि व्यापारी अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। येन, सोने और अन्य बाजारों का प्रदर्शन दूसरी ओर, अमेरिकी सत्र के दौरान जापानी येन के मोर्चे पर भी हलचल बनी हुई है। जापानी येन को बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीतियों के पुनःमूल्यांकन से समर्थन मिल रहा है। इसके साथ ही, सोने की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखा गया है और यह 4,400 डॉलर से नीचे के स्तर से रिकवरी करते हुए आगे बढ़ रहा है, हालांकि अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों के प्रकाशन से पहले बहुमूल्य धातु 4,450 डॉलर के महत्वपूर्ण प्रतिरोध स्तर से नीचे बनी हुई है। दूसरी तरफ, विक decentralized exchange रेडियम ने अपनी तेजी का रुख बरकरार रखा है और नए टोकन लॉन्च के बीच नेटवर्क गतिविधि में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बाजार का व्यापक परिदृश्य व्यापक आर्थिक मोर्चे पर, यूरोपीय सेंट्रल बैंक से मुख्य रिफाइनिंग ऑपरेशंस और डिपॉजिट फैसिलिटी पर ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि करके क्रमशः 2.65% और 2.50% करने की उम्मीद है। बाजार इन फैसलों और आने वाले अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक तथा उत्पादक मूल्य सूचकांक के आंकड़ों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं, जो आने वाले दिनों में वैश्विक वित्तीय बाजारों की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। इसका आप पर असर अमेरिकी ट्रेजरी के फैसलों और वैश्विक मुद्रा बाजार के इन उतार-चढ़ावों का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, मुद्रा विनिमय दरों और आयातित वस्तुओं की लागत पर सीधा पड़ता है। - भारत में: डॉलर के कमजोर होने और वैश्विक स्तर पर बॉन्ड यील्ड में बदलाव से रुपये के मूल्य, विदेशी संस्थागत निवेश (FII) के प्रवाह और आयातित कच्चे तेल तथा अन्य वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ सकता है। - वैश्विक स्तर पर: मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव और केंद्रीय बैंकों की नीतियों से निवेशकों की धारणा प्रभावित होती है, जिससे वैश्विक शेयर बाजारों, सोने और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में ट्रेडिंग रणनीतियां बदलती हैं। - निवेशकों के लिए: मुद्रा और ऋण बाजारों में अनिश्चितता के दौर में निवेशकों को अपनी परिसंपत्ति का आवंटन करते समय सतर्क रहना चाहिए और व्यापक आर्थिक आंकड़ों का बारीकी से विश्लेषण करना चाहिए। - महंगाई का प्रभाव: अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बढ़ रहे महंगाई के जोखिम वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों के दृष्टिकोण को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे ऋण लेने की लागत बदलती है। - कमोडिटी बाजार: डॉलर के मूल्य में उतार-चढ़ाव का सीधा असर सोने और अन्य जिंसों (commodities) की कीमतों पर पड़ता है, जिससे ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन समायोजित करनी पड़ती है। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी डॉलर के मूल्य में गिरावट और बॉन्ड बाजारों में हलचल अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा अपनी उधारी रणनीतियों में किए गए बदलावों और बढ़ती महंगाई की चिंताओं का परिणाम है। - बॉन्ड बायबैक का विस्तार: अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा लंबी अवधि के बॉन्ड बायबैक को दोगुना करने और पहले बड़े ऑपरेशन के आकार को 3 अरब से बढ़ाकर 6 अरब डॉलर करने से दीर्घकालिक पैदावार अस्थिर हुई है। - मुद्रास्फीति के बढ़ते जोखिम: अर्थव्यवस्था में महंगाई के मोर्चे पर लगातार बढ़ रहे जोखिमों ने निवेशकों के बीच अमेरिकी मुद्रा को लेकर विश्वास को कमजोर किया है। - केंद्रीय बैंक की नीतियां: फेडरल रिजर्व के आगामी ब्याज दरों के फैसलों और वैश्विक केंद्रीय बैंकों के रुख को लेकर बाजार में अनुमान लगाए जा रहे हैं, जिससे मुद्रा की चाल प्रभावित हो रही है। - भू-राजनीतिक तनाव: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा अन्य भू-राजनीतिक कारकों ने बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया है, जिससे डॉलर को सीमित समर्थन मिला है। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी डॉलर में गर्मियों के दौरान कमजोरी क्यों आई? अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा लंबी अवधि के बॉन्ड बायबैक को कम से कम दोगुना करने की घोषणा और बढ़ते महंगाई के जोखिमों के कारण डॉलर में नरमी आई। 2. पहले बड़े बॉन्ड बायबैक ऑपरेशन का आकार कितना कर दिया गया था? पहले बड़े बॉन्ड बायबैक ऑपरेशन का अधिकतम आकार बढ़ाकर 6 अरब डॉलर कर दिया गया था। 3. बॉन्ड बायबैक की घोषणा के बाद अमेरिकी यील्ड पर क्या असर पड़ा? शुरुआती दौर में अमेरिकी दीर्घकालिक पैदावार में उछाल आया, जिसमें 30 साल की यील्ड लगभग 5 आधार अंक बढ़ी और बाद में 2-3 आधार अंक ऊपर स्थिर हुई। 4. वार्षिक रूप से संभावित बॉन्ड बायबैक का अनुमानित आंकड़ा कितना हो सकता है? यदि ट्रेजरी प्रति तिमाही 9 बायबैक आयोजित करती है और प्रत्येक में 6 अरब डॉलर तक खरीदती है, तो सालाना खरीदारी 200 अरब डॉलर से अधिक हो सकती है। 5. यूरोपीय सेंट्रल बैंक की ब्याज दरों को लेकर क्या उम्मीदें हैं? यूरोपीय सेंट्रल बैंक से मुख्य रिफाइनिंग ऑपरेशंस और डिपॉजिट फैसिलिटी पर ब्याज दरों को 25 आधार अंक बढ़ाकर क्रमशः 2.65% और 2.50% करने की उम्मीद है। https://trendkia.com/market/us-dollar-pressure-treasury-ke-bond-buybacks-aura-mahngai-ke-barhate-jokhimon-se-badali-bajara-ki-chala-30896 TrendKia — Har trend, sabse pehle.