फेड की बैठक से पहले अमेरिकी डॉलर में गिरावट, महंगाई के दबाव के बीच ब्याज दर में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक से पहले अमेरिकी डॉलर सूचकांक में लगातार तीसरे महीने गिरावट दर्ज की गई है। अगस्त में उम्मीद से अधिक महंगाई के आंकड़ों के बाद बाजार में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना मजबूत हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर लगातार दबाव में दिखाई दे रहा है और पिछले सप्ताह की गिरावट को आगे बढ़ाते हुए इसमें और नरमी दर्ज की गई है। महीने की शुरुआत में मनोवैज्ञानिक 100.00 के स्तर के बेहद करीब कारोबार करने के बाद, अमेरिकी डॉलर सूचकांक (DXY) नीचे गिरकर 98.50 के स्तर तक आ चुका है। इसके साथ ही डॉलर में गिरावट का यह दौर लगातार तीसरे महीने भी जारी रहा है। यहां तक कि अमेरिकी मुद्रा बाजार में छोटी अवधि के प्रतिफल चक्र में तेज हलचल भी ग्रीनबैक को कोई नया सहारा देने में नाकाम साबित हुई है। इसी बीच अमेरिका में महंगाई के बहुप्रतीक्षित आंकड़े सामने आए, जिससे साफ पता चलता है कि अगस्त के महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में तेजी बनी रही और यह आंकड़े फेडरल रिजर्व के तय लक्ष्य से काफी ऊपर बने हुए हैं। फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉश के रुख को ध्यान में रखते हुए, जहां महंगाई को काबू करना सर्वोच्च प्राथमिकता माना जाता है, वित्तीय बाजार के प्रतिभागी अब इस बात को लेकर अधिक आश्वस्त नजर आ रहे हैं कि आगामी FOMC बैठक में नीतिगत ब्याज दर में बढ़ोतरी का फैसला लिया जा सकता है। फेड की दर नीति और नीति निर्माताओं के विचार पिछले कुछ हफ्तों के दौरान फेडरल रिजर्व के नीति निर्माताओं की ओर से आए बयानों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि महंगाई अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। हालांकि, आगे की मौद्रिक नीति और दर वृद्धि के सही समय को लेकर नीति निर्माताओं के बीच अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। केंद्रीय बैंक के अधिकांश सदस्य इस विचार से सहमत हैं कि उपभोक्ता कीमतों को 2 प्रतिशत के लक्ष्य तक नीचे लाना अनिवार्य है। इसके बावजूद, कुछ सदस्य जल्द से जल्द ब्याज दरें बढ़ाने की वकालत कर रहे हैं, जबकि अन्य सदस्य थोड़ा और धैर्य रखने के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। फेड अध्यक्ष केविन वॉश ने खुले तौर पर कहा है कि मौजूदा स्तरों से महंगाई को नीचे लाना सबसे महत्वपूर्ण काम है। उनके अनुसार श्रम बाजार की स्थिति फिलहाल मजबूत और संतोषजनक बनी हुई है, इसलिए नीतिगत प्राथमिकताओं में मुद्रास्फीति पर नियंत्रण सबसे ऊपर है। बाजार विश्लेषक इस वर्ष के अंत तक कुल मिलाकर लगभग 50 आधार अंकों (bps) की सख्ती की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि आगामी बुधवार की बैठक में 25 आधार अंकों की दर वृद्धि को सबसे संभावित परिदृश्य माना जा रहा है। CFTC पोजीशनिंग आंकड़े और सट्टा गतिविधियों का रुख जिंस वायदा कारोबार आयोग (CFTC) द्वारा जारी 1 सितंबर को समाप्त सप्ताह के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर पर सट्टेबाजों का सकारात्मक रुझान कमजोर हुआ है। गैर-व्यावसायिक शुद्ध लंबी पोजीशन (net longs) घटकर 17,000 अनुबंधों से कुछ ही ऊपर रह गई हैं, जो हालिया गिरावट के रुझान को दर्शाती हैं। इसके अतिरिक्त, 4-सप्ताह का बदलाव भी नकारात्मक होकर लगभग -5,500 अनुबंधों पर आ गया है, जिससे यह पुष्टि होती है कि व्यापक पोजीशनिंग का रुख नीचे की तरफ खिसक रहा है। बाजार के अतिरिक्त आंकड़ों से पता चलता है कि ओपन इंटरेस्ट बढ़कर 50,000 अनुबंधों से थोड़ा अधिक यानी लगभग 4.3 प्रतिशत हो गया है। एक तरफ जहां शुद्ध पोजीशनिंग में गिरावट आई है, वहीं दूसरी तरफ बाजार में भागीदारी बढ़ी है। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि पुराने लंबे सौदों को खत्म करने के बजाय बाजार में मंदी के नए दांव (fresh bearish positions) लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा, सट्टा जोखिम (speculative exposure) 38.96 प्रतिशत से घटकर 34.04 प्रतिशत पर आ गया है, जिसका पर्सेंटाइल गिरकर 50.9 रह गया है। वहीं शुद्ध पोजीशन पर्सेंटाइल भी घटकर 63.9 के स्तर पर आ गया है। हालांकि ये दोनों पैमाने अभी भी तटस्थ स्तर से ऊपर बने हुए हैं, लेकिन ताजा आंकड़े बताते हैं कि अमेरिकी डॉलर को मिलने वाला ऐतिहासिक पोजीशनिंग लाभ अब धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। संक्षेप में कहें तो, डॉलर में नेट लॉन्ग पोजीशन बनी हुई हैं लेकिन वे अत्यधिक संवेदनशील हो चुकी हैं। बढ़ते ओपन इंटरेस्ट, घटते एक्सपोजर और नकारात्मक 4-सप्ताह के रुझान का यह संयोजन दर्शाता है कि मंदी का दबाव लगातार गहरा रहा है। FOMC बैठक, आर्थिक अनुमान और आने वाले मुख्य आंकड़े आगामी सप्ताह वित्तीय बाजारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है, जिसमें FOMC की बैठक पर सभी निवेशकों की नजर रहेगी। इसके साथ ही फेडरल रिजर्व द्वारा जारी किए जाने वाले आर्थिक अनुमानों के सारांश (SEP) से बाजार की आगे की दिशा तय होगी। केवल आंकड़ों के दृष्टिकोण से देखें तो खुदरा बिक्री (Retail Sales) के आंकड़े और आवास क्षेत्र (Housing data) से जुड़े आंकड़े सबसे प्रमुख रहेंगे। इसके अलावा, बैंक ऑफ जापान (BoJ) के ब्याज दर संबंधी निर्णय पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि वित्तीय बाजार पिछले दो हफ्तों से जापान में ब्याज दरें बढ़ने की संभावनाओं को लेकर अटकलें लगा रहे हैं। लंबी अवधि में डॉलर आउटलुक और महंगाई का गणित मुद्रास्फीति की कहानी का शुरुआती और आसान हिस्सा अब समाप्त हो चुका है। महामारी के बाद के चरम स्तरों से कीमतों के दबाव में उल्लेखनीय कमी आई है, लेकिन महंगाई को 3 प्रतिशत से ऊपर के स्तर से घटाकर फेड के 2 प्रतिशत के लक्ष्य तक लाना शुरुआती गिरावट की तुलना में काफी कठिन साबित हो रहा है। यह पृष्ठभूमि आने वाले समय में अमेरिकी डॉलर को आधार प्रदान करती रहेगी। जब तक अंतर्निहित महंगाई दर स्थिर और ऊंची बनी रहती है, तब तक फेड द्वारा मौद्रिक नीति में तेजी से ढील देने की संभावना कम है, जिससे अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की तुलना में डॉलर का प्रतिफल लाभ (yield advantage) बना रहेगा। वैश्विक मुद्रा बाजारों और सोने की चाल एशियाई कारोबारी सत्र में AUD/USD की जोड़ी 0.7100 के मध्य स्तर के पास स्थिर रही, जिससे पिछले दिन की तेज गिरावट थम गई। गुरुवार को आए अगस्त PPI आंकड़ों ने फेड द्वारा दरें बढ़ाने की उम्मीदों को मजबूत किया था, जिससे डॉलर में तेजी आई और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव पड़ा। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) की ओर से सख्त रुख की उम्मीदों ने गिरावट को सीमित किया है। USD/JPY की जोड़ी एशियाई सत्र के दौरान 154.00 के स्तर के पास निचले दायरे में कारोबार करती दिखी। जापान में उम्मीद से अधिक PPI आंकड़ों ने बैंक ऑफ जापान द्वारा दरें बढ़ाने की संभावना बढ़ा दी, जिससे जापानी येन को समर्थन मिला। हालांकि, अमेरिकी डॉलर के मजबूत रहने से यह गिरावट सीमित रही। दूसरी ओर, सोने की कीमतों में सुधार देखा गया और यह $4,440 प्रति औंस के स्तर की ओर बढ़ती हुई बढ़त के साथ कारोबार कर रही है। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर में जारी उतार-चढ़ाव और फेड की आने वाली मौद्रिक नीति का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों के साथ-साथ आम निवेशकों और उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा। • भारत में: डॉलर की मजबूती या कमजोरी का सीधा असर भारतीय रुपये (INR) की विनिमय दर पर पड़ता है, जिससे भारत का आयात बिल और विदेशी यात्रा महंगी या सस्ती हो सकती है। • वैश्विक बाजारों में: अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी से उभरते बाजारों से पूंजी निकासी का जोखिम बढ़ता है, जिससे शेयर बाजारों में अस्थिरता आ सकती है। • निवेशकों के लिए: सोने और अन्य जिंसों की कीमतों में डॉलर के रुख के अनुसार बदलाव देखने को मिल सकता है, जिससे पोर्टफोलियो रिटर्न प्रभावित होगा। • मुद्रा कारोबारियों के लिए: AUD/USD और USD/JPY जैसी मुख्य विदेशी मुद्रा जोड़ियों में उच्च अस्थिरता (volatility) बनी रहने की संभावना है। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी डॉलर सूचकांक में गिरावट और सट्टा पोजिशनिंग में बदलाव के पीछे कई महत्वपूर्ण आर्थिक कारक और नीतिगत अनिश्चितताएं काम कर रही हैं। • महंगाई का दबाव: अमेरिका में अगस्त की महंगाई दर 3 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है, जो फेड के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी अधिक है। • फेड की नीतिगत अनिश्चितता: नीति निर्माताओं के बीच ब्याज दरें जल्द बढ़ाने या इंतजार करने को लेकर मतभेद हैं, हालांकि अध्यक्ष केविन वॉश महंगाई नियंत्रण को प्राथमिकता दे रहे हैं। • सट्टा पोजिशनिंग में बदलाव: CFTC आंकड़ों के अनुसार व्यापारियों की नेट लॉन्ग पोजीशन घटी हैं और मंदी के नए दांव लगाए जा रहे हैं। • वैश्विक केंद्रीय बैंक: बैंक ऑफ जापान और आरबीए की ओर से सख्त मौद्रिक नीति के संकेतों से डॉलर पर सापेक्ष दबाव बना हुआ है। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी डॉलर सूचकांक (DXY) किस स्तर पर आ गया है? महीने की शुरुआत में 100.00 के करीब रहने के बाद DXY गिरकर 98.50 के स्तर तक आ गया है। 2. फेड की आगामी बैठक से बाजार को क्या उम्मीदें हैं? बाजार को बुधवार की बैठक में 25 आधार अंकों की दर वृद्धि और वर्ष के अंत तक कुल 50 आधार अंकों की सख्ती की उम्मीद है। 3. फेड अध्यक्ष केविन वॉश का मुख्य ध्यान किस पर है? फेड अध्यक्ष केविन वॉश का मुख्य ध्यान महंगाई को 2 प्रतिशत के लक्ष्य तक नीचे लाने पर है। 4. CFTC आंकड़ों के अनुसार डॉलर में सट्टा पोजीशन की क्या स्थिति है? CFTC के आंकड़ों के अनुसार गैर-व्यावसायिक शुद्ध लंबी पोजीशन घटकर लगभग 17,000 अनुबंधों पर आ गई हैं। https://trendkia.com/market/us-dollar-slides-ahead-of-key-fed-decision-as-hot-inflation-keeps-rate-increase-option-open-31251 TrendKia — Har trend, sabse pehle.