# अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मज़बूत रोज़गार और विकास के बीच फेडरल रिज़र्व की ब्याज दर वृद्धि पर संशय बरकरार

> नरम मुद्रास्फीति आंकड़ों के चलते वित्तीय बाज़ारों में अक्टूबर की दर वृद्धि टलने की संभावना बढ़ी है, मगर मजबूत लेबर डेटा और आर्थिक रफ्तार से दिसंबर में फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बना हुआ है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/us-economy-me-majboot-rojgar-aur-vikas-ke-beech-federal-reserve-ki-byaj-dar-vridhi-par-sanshay-barkarar-41392 · **Language:** Hindi
**Tags:** फेडरल रिज़र्व, ब्याज दरें, अमेरिकी अर्थव्यवस्था, मुद्रास्फीति, नॉन फार्म पेरोल, ट्रेजरी यील्ड

वैश्विक वित्तीय बाज़ारों में अमेरिकी फेडरल रिज़र्व के आगामी नीतिगत फैसलों को लेकर धारणा में अचानक तीव्र मोड़ देखने को मिला है। एक सप्ताह पहले तक निवेशक अक्टूबर महीने में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी को सबसे प्रबल संभावना मानकर चल रहे थे, परंतु हालिया मुद्रास्फीति आंकड़ों में आई नरमी और केंद्रीय बैंक के नीति-निर्माताओं के सधे बयानों ने बाज़ार का रुख बदल दिया है। वर्तमान में अधिकांश कारोबारी यह मानकर चल रहे हैं कि फेडरल रिज़र्व अपनी आगामी बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। इसके बावजूद, व्यापक अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जो संकेत सामने आ रहे हैं, वे इस नीतिगत नरमी की धारणा का पूरी तरह समर्थन नहीं करते हैं। अमेरिकी श्रम बाज़ार अब भी अत्यधिक मज़बूत बना हुआ है, उपभोक्ता खुलकर खर्च कर रहे हैं और आर्थिक विकास की रफ्तार पूर्व अनुमानों की तुलना में कहीं बेहतर आंकी गई है। हालांकि महंगाई में उम्मीद से ज़्यादा गिरावट दर्ज हुई है, फिर भी यह केंद्रीय बैंक के तय लक्ष्य से काफी ऊपर बनी हुई है। इस समूचे आर्थिक परिदृश्य से यह संकेत मिलता है कि फेडरल रिज़र्व अक्टूबर में भले ही रुकने का निर्णय ले, लेकिन इससे यह कतई साबित नहीं होता कि दरों में सख्ती का मौजूदा दौर पूरी तरह समाप्त हो चुका है।

## मुद्रास्फीति आंकड़ों में नरमी और बाज़ार की बदलती उम्मीदें
बाज़ार की उम्मीदों में आए इस अप्रत्याशित बदलाव के पीछे मुख्य रूप से पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स (PCE) प्राइस इंडेक्स के आंकड़े ज़िम्मेदार हैं। अगस्त महीने में PCE प्राइस इंडेक्स में मासिक आधार पर 0.3% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि वार्षिक मुद्रास्फीति 3.4% पर स्थिर रही, जो कि बाज़ार द्वारा अनुमानित 3.7% से कम है। इसके साथ ही कोर PCE मुद्रास्फीति, जिसमें खाद्य और ऊर्जा जैसी अस्थिर श्रेणियों को शामिल नहीं किया जाता और जो फेडरल रिज़र्व का सबसे पसंदीदा पैमाना है, वार्षिक आधार पर 3% दर्ज की गई। यह आंकड़ा भी विश्लेषकों के पूर्वानुमानों की तुलना में कम रहा। पूर्व महीनों के आंकड़ों में भी नीचे की ओर संशोधन किया गया, जिसने मुद्रास्फीति की स्थिति को कुछ हद तक राहत भरा बना दिया और नीति-निर्माताओं पर तत्काल दरें बढ़ाने के दबाव को कम कर दिया।

इन आंकड़ों के जारी होते ही वायदा बाज़ारों ने त्वरित प्रतिक्रिया दी। सीएमई ग्रुप के फेडवॉच टूल के अनुसार, अक्टूबर में फेडरल रिज़र्व द्वारा दर वृद्धि की संभावना गिरकर लगभग 37% रह गई, जबकि महज़ एक सप्ताह पूर्व यह संभावना 70% से अधिक आंकी जा रही थी। सरल शब्दों में कहें तो निवेशकों ने जहां पहले अक्टूबर की वृद्धि को आधार परिदृश्य बना रखा था, वहीं अब वे दरों में ठहराव को अधिक संभावित परिणाम मान रहे हैं। न्यूयॉर्क फेडरल रिज़र्व के अध्यक्ष जॉन विलियम्स के हालिया बयान ने भी इस सोच को बल दिया, जिसमें उन्होंने रेखांकित किया कि सितंबर की दर वृद्धि के बाद नीति-निर्माताओं के पास आने वाले आर्थिक आंकड़ों का गहराई से मूल्यांकन करने के लिए पर्याप्त समय मौजूद है।

## अक्टूबर में ठहराव बनाम दिसंबर में वृद्धि का विश्लेषण
वित्तीय संस्थानों का मानना है कि दर वृद्धि को केवल आगे खिसकाने और इसे पूरी तरह समाप्त करने के बीच एक बेहद सूक्ष्म अंतर है। डॉयचे बैंक के अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि हालिया मुद्रास्फीति रिपोर्ट से केंद्रीय बैंक पर अक्टूबर में कदम उठाने की तात्कालिकता भले ही घटी हो, लेकिन वे अब भी दिसंबर में एक और दर वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं क्योंकि महंगाई अब भी बहुत ऊंचे स्तर पर है। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण बारीकी है, क्योंकि बाज़ार इस समय केंद्रीय बैंक के धैर्य को तवज्जो दे रहे हैं, न कि महंगाई पर अंतिम विजय की घोषणा कर रहे हैं।

सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़ों के अनुसार, जहां अक्टूबर में बढ़ोतरी की संभावना 37% के आसपास है, वहीं दिसंबर तक एक और दर वृद्धि की संभावना बढ़कर 58.7% पर पहुंच गई है, जो एक हफ्ते पहले करीब 39% थी। इससे स्पष्ट होता है कि निवेशक मौद्रिक सख्ती की संभावना को खारिज नहीं कर रहे हैं, बल्कि उसे कुछ समय के लिए आगे टाल रहे हैं। जेपी मॉर्गन भी दिसंबर में दर वृद्धि की संभावना देख रहा है, जबकि गोल्डमैन सैक्स ने भी नरम PCE रिपोर्ट के बाद अपने वृद्धि अनुमान को अक्टूबर से बदलकर दिसंबर कर दिया है। टीडी सिक्योरिटीज का रुख अधिक आक्रामक बना हुआ है, जो अक्टूबर में वृद्धि की संभावना बनाए रखने के साथ-साथ क्रमिक दृष्टिकोण की गुंजाइश भी स्वीकार करता है। स्वयं फेडरल रिज़र्व के भीतर अधिकांश नीति-निर्माताओं ने सितंबर में संकेत दिया था कि वर्ष के अंत से पहले कम से कम एक अतिरिक्त दर वृद्धि उचित साबित हो सकती है।

## श्रम बाज़ार की अप्रत्याशित मजबूती और उपभोक्ता मांग
फेडरल रिज़र्व के लंबे समय तक नरम रुख अपनाने की राह में सबसे बड़ी बाधा यह है कि वास्तविक अर्थव्यवस्था मंदी के कोई संकेत नहीं दे रही है। ऑटोमैटिक डेटा प्रोसेसिंग (ADP) के अनुसार, अमेरिकी निजी नियोक्ताओं ने सितंबर में 90,000 नई नौकरियां जोड़ीं, जो कि अनुमानित 70,000 नौकरियों से अधिक थीं और अगस्त के संशोधित 36,000 के आंकड़े से काफी तेज़ उछाल दर्शाती हैं। श्रम बाज़ार की यह मजबूती नीति-निर्माताओं को मुद्रास्फीति के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखने की पूरी आज़ादी देती है।

मिनियापोलिस फेडरल रिज़र्व के अध्यक्ष नील काशकारी ने इस बात पर ज़ोर देते हुए कहा है कि श्रम बाज़ार में कमजोरी का कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहा है। उनका कहना है कि अर्थव्यवस्था जितनी देर तक मजबूत बनी रहेगी, उतना ही यह सवाल उठेगा कि मौजूदा मौद्रिक नीति वास्तव में कितनी प्रतिबंधात्मक साबित हो रही है। काशकारी चालू वर्ष में एक और दर वृद्धि की उम्मीद बनाए हुए हैं। आईएनजी के रणनीतिकार क्रिस टर्नर ने भी सक्रिय अर्थव्यवस्था की ओर इशारा करते हुए कहा कि मज़बूत उपभोक्ता खर्च और पेरोल में दोबारा तेज़ी के संकेत मौद्रिक नीति को और अधिक प्रतिबंधात्मक दायरे में ले जाने के पक्ष को मजबूत करते हैं।

रोज़गार के अतिरिक्त अन्य आंकड़े भी मांग की मजबूती को पुष्ट करते हैं। अगस्त में अमेरिकी पर्सनल स्पेंडिंग में 0.9% की मासिक बढ़ोतरी हुई, जबकि रियल स्पेंडिंग 0.6% बढ़ी। इसके अलावा दूसरी तिमाही की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर को संशोधित कर वार्षिक आधार पर 2.2% कर दिया गया, जो पिछले 1.5% के अनुमान से उल्लेखनीय रूप से बेहतर है। इन मजबूत आंकड़ों के चलते यह तर्क बेहद कमजोर पड़ जाता है कि किसी मंदी की कगार पर खड़ी अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त दर वृद्धि का जोखिम उठाया जा रहा है।

## आर्थिक संकेतकों का मिलाजुला स्वरूप और फेडरल रिज़र्व का दृष्टिकोण
टीडी सिक्योरिटीज के अर्थशास्त्री ऑस्कर मुनोज़ और एली निर के अनुसार, मौजूदा आंकड़े मुद्रास्फीति में नरमी और आर्थिक विकास में मजबूती का मिलाजुला मिश्रण प्रस्तुत करते हैं। उनके अनुसार वास्तविक कहानी यह है कि तीव्र आर्थिक गतिविधियों के बीच लगातार महंगाई बनी हुई है। सोसिएते जेनेराल के रणनीतिकार जान ग्रोएन ने भी ध्यान दिलाया कि अगस्त की रिपोर्ट में कोर गुड्स की कीमतों में नरमी से राहत मिली, लेकिन कोर सर्विसेज और सुपर-कोर मुद्रास्फीति में नया दबाव देखा गया है। इसके अलावा उपभोग, वेतन और जीडीपी के संशोधित आंकड़े यह सिद्ध करते हैं कि वर्ष के उत्तरार्ध में अर्थव्यवस्था पूर्व अनुमानों से कहीं अधिक गति के साथ दाखिल हुई है।

फेडरल रिज़र्व गवर्नर लीसा कुक ने भी हाल ही में दोहराया कि महंगाई बहुत लंबे समय से काफी ऊंची बनी हुई है और वे इसे 2% के लक्ष्य तक वापस लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। नीति-निर्माताओं के सामने सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह नहीं है कि क्या मुद्रास्फीति में सुधार हुआ है, बल्कि प्रश्न यह है कि क्या यह सुधार इतना पर्याप्त है कि घरेलू मांग और मजबूत रोज़गार के बीच पूरी सख्त मौद्रिक नीति को समाप्त घोषित कर दिया जाए। कोर PCE का 3% स्तर फेडरल रिज़र्व के 2% के लक्ष्य से पूरा एक प्रतिशत बिंदु ऊपर है, जबकि हेडलाइन PCE 3.4% पर बनी हुई है।

## ट्रेजरी यील्ड में उछाल और वित्तीय स्थितियां
मौजूदा आर्थिक परिदृश्य में एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वित्तीय परिस्थितियों को कड़ा करने का काम अब केवल फेडरल रिज़र्व के नीतिगत फैसलों तक सीमित नहीं रह गया है। अक्टूबर में दर वृद्धि की संभावना घटने के बावजूद दीर्घकालिक अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में ज़बरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड लगभग दो दशकों के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है, जबकि 30-वर्षीय यील्ड भी कई दशकों के नए रिकॉर्ड स्तर को छू रही है।

यह स्थिति एक असामान्य विचलन उत्पन्न करती है, जहां अल्पकालिक मौद्रिक नीतिगत अपेक्षाएं ठहराव की ओर बढ़ रही हैं, परंतु दीर्घावधि उधार लागत लगातार बढ़ रही है। इस दीर्घकालिक यील्ड दबाव के पीछे राजकोषीय चिंताएं, लगातार बने मुद्रास्फीति जोखिम, ऊर्जा की ऊंची कीमतें और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बुनियादी ढांचे से जुड़े भारी पूंजीगत व्यय प्रमुख कारक हैं। यदि सरकारी बॉन्ड की बढ़ती यील्ड के बावजूद अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी रहती है, तो यह केंद्रीय बैंक के लिए यह सोचने का कारण बनेगा कि मौजूदा वित्तीय परिस्थितियां वास्तव में कितनी सख्त हैं।

## नॉन-फार्म पेरोल्स का महत्व और मौद्रिक नीति की रूपरेखा
फॉरेक्स ट्रेडर्स और वैश्विक बाज़ारों के लिए अमेरिका की मासिक रोज़गार रिपोर्ट अत्यंत महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतक मानी जाती है। प्रत्येक रिपोर्टिंग माह के बाद पहले शुक्रवार को जारी होने वाले नॉन-फार्म पेरोल्स के आंकड़े केंद्रीय बैंक की नीतियों पर सीधा असर डालते हैं, क्योंकि मूल्य स्थिरता के साथ-साथ पूर्ण रोज़गार फेडरल रिज़र्व के दोहरे अधिदेश का अभिन्न हिस्सा है। सामान्यतः आम सहमति से बेहतर आने वाले आंकड़े अमेरिकी डॉलर के लिए मजबूती का कारण बनते हैं।

यदि आने वाले पेरोल आंकड़ों में स्थिर या घटती बेरोज़गारी और वेतन में मजबूती के साथ रोज़गार में भारी वृद्धि दर्ज की जाती है, तो यह धारणा पूरी तरह खारिज हो जाएगी कि मौद्रिक सख्ती से मांग में कमी आ रही है। ऐसी स्थिति फेडरल रिज़र्व को तुरंत अक्टूबर में दर बढ़ाने के लिए बाध्य न भी करे, लेकिन यह दिसंबर की दर वृद्धि की संभावना को अत्यंत प्रबल बना देगी। इसके विपरीत, यदि पेरोल के आंकड़े कमजोर आते हैं और बेरोज़गारी दर में वृद्धि तथा वेतन वृद्धि में मंदी दिखाई देती है, तो यह नरमी की धारणा को मजबूत करेगा और फेडरल रिज़र्व को अपने सख्ती के चक्र पर नए सिरे से विचार करने का ठोस आधार देगा।

फेडरल रिज़र्व अपनी मौद्रिक नीति को मुख्य रूप से ब्याज दरों के समायोजन के ज़रिये संचालित करता है। संकट के असाधारण दौर में केंद्रीय बैंक क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) का सहारा लेता है, जिसमें डॉलर जारी कर वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदे जाते हैं, जिससे आमतौर पर डॉलर कमजोर होता है। इसके उलट क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) के तहत केंद्रीय बैंक बाज़ार से बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व बॉन्ड की मूल राशि का पुनर्निवेश नहीं करता, जिससे मुद्रा को मजबूती मिलती है।

## वैश्विक परिसंपत्तियों और मुद्राओं पर असर
अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिज़र्व की अपेक्षाओं का असर अन्य परिसंपत्ति वर्गों पर भी साफ देखा जा रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.6900 के मध्य स्तर पर दो महीने के निचले स्तर के करीब सीमित दायरे में कारोबार करता दिखा, क्योंकि अमेरिकी डॉलर में व्यापक मजबूती रही और ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष अगस्त में घटकर 49.5 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD 495M) रह गया। वहीं यूएसडी/जेपीवाई (USD/JPY) 158.00 के ऊपर अपनी साप्ताहिक सीमा के ऊपरी स्तर पर बना रहा, जहां तेल की कीमतों से उपजी महंगाई और यूएस-ईरान तनाव के चलते सेफ-हेवन अमेरिकी डॉलर को समर्थन मिला।

कमोडिटी बाज़ार में सोने के भाव में सीमित हलचल देखी गई। यूएस ट्रेजरी यील्ड में उछाल और मजबूत डॉलर के कारण पीली धातु की बढ़त सीमित रही और एक्सएयू/यूएसडी (XAU/USD) 0.26% की दैनिक बढ़त के साथ 4,167 डॉलर के आसपास कारोबार करता नज़र आया। वहीं क्रिप्टो बाज़ार में बिटकॉइन 82,500 डॉलर के समर्थन और 85,000 डॉलर के प्रतिरोध के बीच झूलता रहा, जबकि एथेरियम 2,700 डॉलर के नीचे दबाव में रहा और 2,600 डॉलर के स्तर पर समर्थन तलाशता दिखा। रिपल भी 1.50 डॉलर के अहम स्तर से नीचे फिसल गया। समग्र रूप से यह स्पष्ट है कि वित्तीय बाज़ार भले ही ब्याज दरों में फौरी विराम की तैयारी कर रहे हों, परंतु वास्तविक अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने अभी दर वृद्धि की संभावना को पूरी तरह विदा नहीं किया है।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी ब्याज दरों और आर्थिक आंकड़ों का सीधा प्रभाव वैश्विक वित्तीय बाज़ारों, मुद्रा विनिमय और निवेश पोर्टफोलियो पर पड़ता है।

- **भारतीय शेयर बाज़ार:** अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेज़ी और फेडरल रिज़र्व द्वारा आगे दर वृद्धि की आशंका से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा भारतीय बाज़ारों से पूंजी निकासी बढ़ सकती है। इससे घरेलू इक्विटी सूचकांकों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है और निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।
- **रुपया बनाम डॉलर विनिमय दर:** मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे आयात महंगा हो सकता है। विशेष रूप से कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स के आयात बिल बढ़ने से देश के व्यापार घाटे पर असर पड़ सकता है।
- **सोने और कमोडिटी के भाव:** अमेरिकी डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में तेज़ी के चलते सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों की कीमतों में सीमित तेजी की उम्मीद है। कमोडिटी निवेशकों को सोने की कीमतों में स्थिरता या मामूली दबाव के लिए तैयार रहना चाहिए।
- **क्रिप्टोकरेंसी निवेशक:** उच्च ब्याज दरों और तंग तरलता के माहौल में बिटकॉइन और एथेरियम जैसी डिजिटल परिसंपत्तियों पर बिकवाली का दबाव बना रह सकता है। ट्रेडर्स को मौजूदा समर्थन और प्रतिरोध स्तरों को ध्यान में रखकर ही नई स्थिति बनानी चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
वित्तीय बाज़ारों में ब्याज दर वृद्धि की तात्कालिक उम्मीदें घटने के बावजूद आगे सख्ती का अंदेशा कई बुनियादी आर्थिक कारकों के टकराव के कारण उत्पन्न हुआ है।

- **मुद्रास्फीति में नरमी का असर:** अगस्त में कोर PCE मुद्रास्फीति के घटकर 3% पर आने से केंद्रीय बैंक पर तत्काल दर बढ़ाने का दबाव कम हुआ है। हालांकि यह आंकड़ा फेड के 2% के अनिवार्य लक्ष्य से काफी ऊपर बना हुआ है, जिससे नीति-निर्माता सतर्क हैं।
- **श्रम बाज़ार की निरंतर मजबूती:** सितंबर में 90,000 निजी नौकरियों का सृजन और उपभोक्ता खर्च में 0.9% की वृद्धि दर्शाती है कि अर्थव्यवस्था मंदी से काफी दूर है। यह आर्थिक मजबूती केंद्रीय बैंक को मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने के लिए दरें बढ़ाने की पूरी छूट देती है।
- **ट्रेजरी यील्ड में अभूतपूर्व उछाल:** 10-वर्षीय और 30-वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का दो दशक के उच्च स्तर पर पहुंचना वित्तीय स्थितियों को कड़ा कर रहा है। इसके बावजूद यदि आर्थिक विकास दर 2.2% बनी रहती है, तो यह संकेत देता है कि वर्तमान नीतियां मांग को ठंडा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
- **केंद्रीय बैंक का दोमुंहा रुख:** फेडरल रिज़र्व के अधिकारी सितंबर के फैसले के असर को देखने के लिए अक्टूबर में रुकने का विकल्प चुन सकते हैं, लेकिन वे दिसंबर में अंतिम दर वृद्धि की गुंजाइश खुली रख रहे हैं। नीति-निर्माताओं का स्पष्ट मानना है कि लक्ष्य प्राप्ति से पहले ढिलाई बरतना जोखिम भरा हो सकता है।

## सवाल-जवाब

### 1. क्या फेडरल रिज़र्व अक्टूबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी करेगा?
सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार, अक्टूबर में दर वृद्धि की संभावना गिरकर करीब 37% रह गई है, जिससे अक्टूबर में दरों के स्थिर रहने की संभावना अधिक दिखती है।

### 2. अगस्त महीने में अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़े क्या रहे?
अगस्त में PCE प्राइस इंडेक्स मासिक आधार पर 0.3% और वार्षिक आधार पर 3.4% रहा, जबकि कोर PCE मुद्रास्फीति 3% दर्ज की गई।

### 3. सितंबर में अमेरिकी निजी क्षेत्र में कितनी नौकरियां जुड़ीं?
ADP रिपोर्ट के अनुसार, निजी नियोक्ताओं ने सितंबर में 90,000 नई नौकरियां जोड़ीं, जो 70,000 के अनुमान से अधिक थीं।

### 4. दिसंबर में फेडरल रिज़र्व द्वारा दर वृद्धि की कितनी संभावना है?
सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार, दिसंबर तक कम से कम एक और दर वृद्धि की संभावना बढ़कर 58.7% पर पहुंच गई है।

### 5. अमेरिकी अर्थव्यवस्था की दूसरी तिमाही की विकास दर क्या रही?
दूसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर को संशोधित कर वार्षिक आधार पर 2.2% कर दिया गया है।

### 6. अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में हाल में क्या रुझान देखा गया है?
10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड लगभग दो दशकों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है और 30-वर्षीय यील्ड भी कई दशकों के रिकॉर्ड स्तर पर है।

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