अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसले से पहले वायदा बाजार में दिखा हल्का सुधार फेडरल रिजर्व की आगामी ब्याज दर नीति और 25 आधार अंकों की संभावित बढ़ोतरी के बीच अमेरिकी फ्यूचर्स इंडेक्स में मामूली बढ़त दर्ज की गई है। कच्चे तेल के उछाल, बॉन्ड यील्ड और तकनीकी शेयरों पर दबाव के बीच निवेशक सतर्क बने हुए हैं। अमेरिकी शेयर बाजार के प्रमुख वायदा सूचकांकों में बुधवार को हल्की बढ़त देखने को मिली है, हालांकि वैश्विक बाजार इस समय अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा घोषित किए जाने वाले ब्याज दर संबंधी महत्वपूर्ण निर्णय को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं। वित्तीय विश्लेषकों और कारोबारियों को अपेक्षा है कि केंद्रीय बैंक अपनी बैठक में नीतिगत दरों में 25 आधार अंकों यानी एक-चौथाई प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकता है। इस संभावित मौद्रिक सख्ती के बावजूद निवेशकों की ओर से निचले स्तरों पर चुनिंदा खरीदारी का रुख दिखाई दिया। बुधवार के यूरोपीय कारोबारी सत्र में डाउ जोन्स फ्यूचर्स 0.14 प्रतिशत की मजबूती के साथ 52,190 के निकट पहुंच गया। इसी तरह, एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में 0.21 प्रतिशत का इजाफा हुआ और यह करीब 7,600 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि तकनीक प्रधान नैस्डैक 100 फ्यूचर्स 0.42 प्रतिशत बढ़कर 29,080 के करीब पहुंच गया। सीएमई फेडवॉच टूल के सांख्यिकीय आंकड़ों के अनुसार, बाजार में भाग लेने वाले 92.5 प्रतिशत कारोबारी इस 25 आधार अंकों की दर वृद्धि को पहले से तय मानकर चल रहे हैं। इसके साथ ही बाजार इस बात पर भी करीबी नजर रख रहा है कि केंद्रीय बैंक आने वाले समय में अतिरिक्त दर वृद्धियों का संकेत देता है या नहीं। मंगलवार की बिकवाली के बाद मिला कुछ सहारा वायदा बाजार में दर्ज हुआ यह संभलने का प्रयास वॉल स्ट्रीट पर मंगलवार को दर्ज की गई तीखी गिरावट के बाद सामने आया है। बीते सत्र में डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.3 प्रतिशत फिसला था, जबकि एसएंडपी 500 में 0.45 प्रतिशत की कमी आई थी। वहीं व्यापक बिकवाली का नेतृत्व करते हुए नैस्डैक कंपोजिट 0.78 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ था। मंगलवार को इक्विटी बाजारों पर कच्चे तेल की कीमतों में आए तेज उछाल और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में लगातार हो रही बढ़ोतरी का भारी असर देखा गया था। कर्ज की लागत बढ़ने से सबसे ज्यादा नुकसान उन क्षेत्रों को झेलना पड़ा जो उधारी दरों को लेकर संवेदनशील हैं। विशेष रूप से तेजी से विस्तार करने वाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाइपरस्केलर टेक कंपनियों के शेयरों में दबाव गहरा गया था। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास और उससे जुड़ी सुरक्षा चिंताओं ने भी निवेशकों की घबराहट को बढ़ाया। तकनीकी क्षेत्र पर नए नियामक प्रतिबंधों की आशंकाओं के बीच एनवीडिया के सीईओ जेन्सन हुआंग ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि एआई सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त संघीय नियमों की कोई आवश्यकता नहीं है। हुआंग का तर्क है कि स्वतंत्र बाजार की प्रतिस्पर्धी ताकतें तकनीकी कंपनियों को बिना किसी आधिकारिक सरकारी हस्तक्षेप के अपने आप सुरक्षित नवाचार करने के लिए पर्याप्त रूप से प्रेरित करती हैं। डाउ जोन्स इंडेक्स की बनावट और कार्यप्रणाली डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज दुनिया के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित शेयर बाजार सूचकांकों में से एक माना जाता है। यह सूचकांक अमेरिका की 30 सबसे अधिक कारोबार वाली प्रमुख कंपनियों के शेयरों को मिलाकर बनाया गया है। बाजार पूंजीकरण के आधार पर भारित होने वाले कई आधुनिक सूचकांकों के विपरीत, डाउ जोन्स मूल्य-भारित आधार पर काम करता है। इसकी गणना शामिल कंपनियों के शेयर मूल्यों को जोड़कर एक विशेष विभाजक से भाग देकर की जाती है, जो वर्तमान में 0.152 है। इस सूचकांक की नींव चार्ल्स डाउ ने रखी थी, जिन्होंने वॉल स्ट्रीट जर्नल की भी स्थापना की थी। बाद के वर्षों में इस सूचकांक की इस बात के लिए आलोचना भी होती रही है कि यह एसएंडपी 500 जैसे व्यापक सूचकांकों की तुलना में बाजार का संपूर्ण प्रतिनिधित्व नहीं करता, क्योंकि इसमें केवल 30 बड़े समूह ही शामिल हैं। डाउ जोन्स के उतार-चढ़ाव को कई प्रमुख घटक नियंत्रित करते हैं। इसमें सबसे बड़ा कारक घटक कंपनियों के तिमाही वित्तीय नतीजे होते हैं, जिनसे उनकी कुल कमाई की तस्वीर साफ होती है। इसके अतिरिक्त, अमेरिका और दुनिया भर से आने वाले व्यापक आर्थिक आंकड़े भी बाजार की धारणा पर गहरा प्रभाव डालते हैं। फेडरल रिजर्व द्वारा तय की जाने वाली ब्याज दरों का स्तर भी डाउ जोन्स को सीधे तौर पर प्रभावित करता है, क्योंकि यह कंपनियों के कर्ज जुटाने की लागत तय करता है और अमेरिकी कॉरपोरेट जगत बड़े पैमाने पर ऋण वित्तपोषण पर निर्भर रहता है। यही वजह है कि मुद्रास्फीति के आंकड़े और केंद्रीय बैंक की नीतियों को प्रभावित करने वाले अन्य आर्थिक संकेत इसके प्राथमिक चालक होते हैं। चार्ल्स डाउ का सिद्धांत और बाजार के चरण शेयर बाजार की प्राथमिक दिशा और उसकी दीर्घकालिक प्रवृत्ति की पहचान के लिए चार्ल्स डाउ ने एक ऐतिहासिक पद्धति विकसित की थी, जिसे डाउ थ्योरी कहा जाता है। इस सिद्धांत का एक अनिवार्य नियम यह है कि डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज और डाउ जोन्स ट्रांसपोर्टेशन एवरेज दोनों की दिशा का एक साथ मिलान किया जाए। किसी भी वास्तविक और मजबूत ट्रेंड की पुष्टि केवल तभी मानी जाती है जब ये दोनों सूचकांक एक ही दिशा में अग्रसर हों। इसके साथ ही बाजार में होने वाला कारोबारी वॉल्यूम भी उस दिशा की पुष्टि करने वाला मानक बनता है। यह सिद्धांत ऊंचे शिखरों और निचले स्तरों के तकनीकी विश्लेषण पर आधारित है। डाउ थ्योरी के अनुसार बाजार के रुझान तीन चरणों से गुजरते हैं: पहला संचय का चरण जब समझदार निवेशक धीरे-धीरे लिवाली या बिकवाली शुरू करते हैं; दूसरा सार्वजनिक भागीदारी का चरण जब आम जनता बाजार में प्रवेश करती है; और तीसरा वितरण का चरण जब शुरुआती समझदार निवेशक मुनाफा समेटकर बाजार से बाहर निकलने लगते हैं। इंडेक्स में सीधे ट्रेड करने के लिए बाजार सहभागियों के पास कई व्यावहारिक रास्ते उपलब्ध हैं। एक लोकप्रिय तरीका एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स का उपयोग करना है, जिससे निवेशक सभी 30 कंपनियों के शेयर अलग-अलग खरीदे बिना पूरे इंडेक्स को एक सिंगल सिक्योरिटी के रूप में ट्रेड कर सकते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण स्पाइडर डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज ईटीएफ (DIA) है। इसके अलावा, फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स कारोबारियों को सूचकांक के भविष्य के मूल्य पर दांव लगाने की अनुमति देते हैं, जबकि ऑप्शंस निवेशकों को एक निश्चित समय सीमा में पूर्व निर्धारित मूल्य पर सूचकांक खरीदने या बेचने का अधिकार प्रदान करते हैं, बाध्यता नहीं। म्युचुअल फंड्स भी निवेशकों को डाउ जोन्स के शेयरों वाले विविधीकृत पोर्टफोलियो में निवेश का मौका देते हैं। मुद्रा बाजार और कीमती धातुओं में भी हलचल अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बने सस्पेंस का सीधा प्रभाव वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार और कमोडिटी बाजार पर भी दिखाई दिया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) में लगातार तीसरे कारोबारी दिन नकारात्मक रुख बना रहा और यह बुधवार के एशियाई सत्र में 0.7100 के स्तर का बचाव करते हुए अपने मासिक निचले स्तर के करीब कारोबार कर रहा था। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की 92.5 प्रतिशत संभावना और कच्चे तेल से प्रेरित मुद्रास्फीति के डर ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर धकेल दिया है, जिससे डॉलर को मजबूती मिली। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में गहराते तनाव ने सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ा दी और जोखिम-संवेदनशील ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव बढ़ा दिया। दूसरी ओर, डॉलर की ताकत के चलते डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) एशियाई सत्र के दौरान एक सप्ताह के नए उच्चतम स्तर 155.00 के पार पहुंच गया। अमेरिकी-ईरानी तनाव और ट्रेजरी यील्ड की मजबूती ने अमेरिकी मुद्रा की वैश्विक रिजर्व करेंसी की स्थिति को सहारा दिया। हालांकि, फेडरल रिजर्व के फैसले और गुरुवार से शुरू होने वाली बैंक ऑफ जापान की नीतिगत बैठक से पहले खरीदारी कुछ थमती दिखी और यह जोड़ी 155.50 के नीचे ही सीमित रही। जापान की ऐतिहासिक रूप से अत्यधिक कम ब्याज दरों ने एक दशक से अधिक समय तक दुनिया भर में खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित किया था, जिससे येन वैश्विक स्तर पर फंडिंग का सबसे सस्ता स्रोत बना रहा। अब बैंक ऑफ जापान द्वारा नीति को और सख्त किए जाने की संभावनाओं के साथ यह स्थिति एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। कीमती धातुओं के मोर्चे पर, सोने की कीमतों में मामूली इंट्राडे बढ़त के बाद ठहराव देखा गया। यूरोपीय कारोबारी समय के दौरान सोना 4,350 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे ही संघर्ष करता रहा। दो सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद अमेरिकी डॉलर की रफ्तार में आए हल्के विराम ने सोने को कुछ समर्थन तो दिया, लेकिन फेडरल रिजर्व के नीतिगत जोखिम को देखते हुए ट्रेडर आक्रामक सौदे करने से बचते रहे और किनारे बैठकर फैसले का इंतजार करना बेहतर समझा। हालिया आंकड़ों में मजबूत अमेरिकी अगस्त रोजगार रिपोर्ट और अगस्त सीपीआई मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने केंद्रीय बैंक के नीतिगत रुख को लेकर बाजार की संवेदनशीलता को काफी बढ़ा दिया है। इसका आप पर असर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी ब्याज दर फैसले और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से वैश्विक वित्तीय बाजारों में उधारी लागत और शेयर मूल्यों पर सीधा असर पड़ सकता है। • वैश्विक निवेशकों पर असर: फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की संभावित बढ़ोतरी से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में डॉलर मजबूत होगा और विदेशी संस्थागत निवेश पर असर पड़ेगा। इससे विकासशील बाजारों और घरेलू इक्विटी में निवेश करने वाले फंड्स पर अतिरिक्त सतर्कता देखी जा सकती है। • तकनीकी शेयरों के खरीदार: बॉन्ड यील्ड और उधारी लागत बढ़ने से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उच्च मूल्यांकन वाले टेक शेयरों के मुनाफे पर दबाव बना रह सकता है। आम निवेशकों को हाई-बेटा टेक शेयरों में नई पूंजी लगाते समय सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। • कमोडिटी और तेल का प्रभाव: कच्चे तेल के बढ़ते दाम मुद्रास्फीति को लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनाए रख सकते हैं, जिससे केंद्रीय बैंकों को दर कटौती टालनी पड़ सकती है। इसके परिणामस्वरूप ईंधन की कीमतें बढ़ने और परिवहन लागत में इजाफा होने का जोखिम बना रहेगा। • सोने और मुद्रा के कारोबारी: सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मजबूत स्थिति सोने की कीमतों की बढ़त को 4,350 डॉलर के नीचे सीमित रख रही है। विदेशी मुद्रा में ट्रेड करने वाले या विदेश यात्रा की योजना बनाने वाले लोगों को मजबूत डॉलर के चलते अधिक खर्च वहन करना पड़ सकता है। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी शेयर बाजार में वायदा स्तर पर हल्का उछाल आने के बावजूद दबाव बना हुआ है क्योंकि निवेशक केंद्रीय बैंक की नीतिगत सख्ती और ईंधन जनित महंगाई के दोहरे संकट से जूझ रहे हैं। हालिया आर्थिक आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय तनावों ने नीति निर्माताओं को कड़े कदम उठाने के लिए बाध्य किया है। • फेडरल रिजर्व की संभावित दर वृद्धि: सीएमई फेडवॉच टूल के मुताबिक करीब 92.5 प्रतिशत संभावना है कि केंद्रीय बैंक 25 आधार अंकों की ब्याज दर बढ़ोतरी करेगा। हाल ही में सामने आए मजबूत अगस्त रोजगार आंकड़े और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के डेटा ने ब्याज दरों में निरंतर सख्ती का माहौल तैयार किया है। • कच्चे तेल और ट्रेजरी यील्ड में उछाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने दोबारा मुद्रास्फीति भड़कने की चिंता पैदा कर दी है। इसके कारण अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जिससे तकनीकी और क्रेडिट-संवेदनशील कंपनियों के शेयरों में मंगलवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। • भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश की मांग: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान गतिरोध के कारण निवेशकों ने सुरक्षित परिसंपत्ति के रूप में अमेरिकी डॉलर का रुख किया है। इससे वैश्विक मुद्रा बाजार में जोखिम भरी संपत्तियों से पैसा निकला है और डॉलर इंडेक्स को अतिरिक्त मजबूती मिली है। सवाल-जवाब 1. फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले वायदा सूचकांकों में कितना बदलाव देखा गया? यूरोपीय कारोबारी सत्र में डाउ जोन्स फ्यूचर्स 0.14 प्रतिशत बढ़कर 52,190, एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 0.21 प्रतिशत बढ़कर 7,600 और नैस्डैक 100 फ्यूचर्स 0.42 प्रतिशत बढ़कर 29,080 के करीब कारोबार कर रहे थे। 2. फेड द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की क्या संभावना है? सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार, बाजार में 25 आधार अंकों की इस तिमाही दर वृद्धि की लगभग 92.5 प्रतिशत संभावना आंकी जा रही है। 3. मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट क्यों आई थी? कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल के चलते कर्ज की लागत बढ़ गई, जिससे विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी कंपनियों के शेयरों पर भारी दबाव बना। 4. एनवीडिया के सीईओ जेन्सन हुआंग ने एआई नियमों पर क्या विचार रखे? जेन्सन हुआंग ने अतिरिक्त संघीय एआई नियमों का विरोध करते हुए कहा कि बाजार की प्रतिस्पर्धा कंपनियों को सरकारी दखल के बिना सुरक्षित नवाचार करने के लिए पर्याप्त रूप से प्रेरित करती है। 5. डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज की गणना किस आधार पर की जाती है? डाउ जोन्स एक मूल्य-भारित सूचकांक है, जिसमें 30 कंपनियों के शेयर मूल्यों को जोड़कर 0.152 के विभाजक से भाग देकर इसकी गणना की जाती है। 6. विदेशी मुद्रा बाजार में जापानी येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की क्या स्थिति रही? डॉलर के मजबूत होने से डॉलर बनाम येन 155.00 के ऊपर एक सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जबकि ऑस्ट्रेलियाई डॉलर गिरकर 0.7100 के करीब मासिक निचले स्तर पर कारोबार कर रहा था। 7. सोने की कीमतों पर फेडरल रिजर्व के फैसले का क्या प्रभाव देखा गया? मजबूत डॉलर और आगामी दर फैसले की अनिश्चितता के कारण यूरोपीय सत्र में सोना 4,350 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे ही सीमित बना रहा। https://trendkia.com/market/us-federal-reserve-ke-byaja-dara-phaisale-se-pahale-vayada-bajara-men-dikha-halka-sudhara-33832 TrendKia — Har trend, sabse pehle.