अमेरिकी फेडरल रिजर्व के कड़े रुख से न्यूजीलैंड डॉलर पर दबाव, मुद्रा बाजारों में हलचल फेडरल रिजर्व के सख्त ब्याज दर संकेतों और अमेरिकी डॉलर में आई तेजी के चलते न्यूजीलैंड डॉलर में गिरावट दर्ज की गई है। साथ ही अगस्त के व्यापार घाटे और वैश्विक नीतिगत बदलावों से मुद्रा बाजार का संतुलन प्रभावित हुआ है। अंतरराष्ट्रीय विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच न्यूजीलैंड डॉलर पर बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है। फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वार्श द्वारा मौद्रिक नीति को और अधिक सख्त बनाए रखने के स्पष्ट संकेतों के बाद अमेरिकी मुद्रा ने अपने शुरुआती नुकसान की भरपाई करते हुए बढ़त हासिल कर ली। इस नीतिगत बयानबाजी के चलते प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मांग में नया उछाल दर्ज किया गया, जिससे विशेष रूप से जोखिम वाली संपत्तियों और कमोडिटी से जुड़ी मुद्राओं पर असर पड़ा है। फेडरल रिजर्व का सख्त नजरिया और ब्याज दर में बढ़ोतरी की आशंका फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वार्श ने आर्थिक स्थिति की समीक्षा करते हुए रेखांकित किया कि अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति का स्तर लगातार असहज रूप से ऊंचा बना हुआ है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि गर्मियों के दौरान सामने आए आर्थिक आंकड़ों से संरचनात्मक सुधार के कोई ठोस संकेत नहीं मिले हैं, जो यह दर्शाते हैं कि केंद्रीय बैंक को अपनी मौद्रिक सख्ती में नरमी बरतने की कोई जल्दी नहीं होनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद निवेशकों और संस्थागत व्यापारियों ने अपनी ब्याज दर संबंधी अपेक्षाओं को तेजी से पुनर्गठित किया है। बाजार की स्थिति का आकलन करने वाले सीएमई फेडवॉच टूल के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में होने वाली फेडरल रिजर्व की आगामी नीतिगत बैठक में ब्याज दर में वृद्धि की संभावना अब 53.1 प्रतिशत आंकी जा रही है। यह आंकड़ा केवल एक दिन पहले के 44 प्रतिशत के अनुमान से काफी अधिक है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को उच्च स्तर पर बनाए रखता है या उन्हें और बढ़ाता है, तो दुनिया भर से निवेश पूंजी अमेरिकी डॉलर की ओर आकर्षित होगी, जिससे अन्य विकासशील और कमोडिटी-आधारित मुद्राओं के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं। न्यूजीलैंड का अगस्त व्यापार संतुलन और आर्थिक प्रदर्शन घरेलू मोर्चे पर न्यूजीलैंड के आर्थिक आंकड़े भी मिश्रित तस्वीर पेश कर रहे हैं। अगस्त माह के दौरान देश का मासिक व्यापार घाटा 1.35 अरब न्यूजीलैंड डॉलर दर्ज किया गया। हालांकि यह आंकड़ा जुलाई के संशोधित 2.12 अरब न्यूजीलैंड डॉलर के विशाल घाटे की तुलना में कुछ सुधार अवश्य दर्शाता है, लेकिन यह बाजार विश्लेषकों द्वारा लगाए गए 1.275 अरब न्यूजीलैंड डॉलर के अनुमानित घाटे के स्तर को हासिल करने में विफल रहा। निर्यात के मोर्चे पर अगस्त में सालाना आधार पर 15.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिसके दम पर कुल निर्यात बढ़कर 6.66 अरब न्यूजीलैंड डॉलर तक पहुंच गया। यह आंकड़ा जुलाई के अधोमुखी संशोधित 10.8 प्रतिशत के विस्तार से बेहतर रहा है। इसके समानांतर, देश का कुल आयात सालाना आधार पर 13.1 प्रतिशत बढ़कर 8.0 अरब न्यूजीलैंड डॉलर पर पहुंच गया। आयात वृद्धि में यह दर पूर्व महीने में दर्ज 28.4 प्रतिशत की तीव्र उछाल के मुकाबले काफी संयमित और स्थिर मानी जा रही है। कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक कारक विदेशी मुद्रा विनिमय पर टिप्पणी करते हुए आईएनजी के रणनीतिकारों ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की बैठक के बाद अमेरिकी डॉलर की गति को कुछ हद तक संतुलित किया है। ऊर्जा बाजारों को हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों से भी दिशा मिल रही है। विश्लेषकों के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और खाड़ी देशों के नेताओं के बीच होने वाली बैठक पर बाजार की पैनी नजरें टिकी हुई हैं। आईएनजी के अनुसार, इस महत्वपूर्ण वार्ता से क्षेत्र के लिए भविष्य की योजनाओं पर अधिक स्पष्टता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। साथ ही मीडिया में चल रही चर्चाएं संकेत देती हैं कि डोनाल्ड ट्रंप इस बात पर किसी बड़े फैसले के करीब पहुंच रहे हैं कि सैन्य अभियानों को और आगे बढ़ाया जाए या संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए जाएं। यह अनिश्चितता क्षेत्रीय जोखिम धारणा को गहराई से प्रभावित कर सकती है, जिसका सीधा असर अल्पावधि में अमेरिकी डॉलर की चाल और विदेशी मुद्रा प्रवाह पर पड़ना तय है। रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड की आगामी नीतिगत योजनाएं अमेरिकी डॉलर के कड़े रुख के विपरीत न्यूजीलैंड डॉलर को घरेलू केंद्रीय बैंक से कुछ समर्थन मिलने की उम्मीद भी बनी हुई है। बाजार भागीदार वर्तमान में 60 प्रतिशत संभावना मान रहे हैं कि रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड अपनी आगामी अक्टूबर नीति समीक्षा बैठक में आधिकारिक नकद दर को बढ़ाकर 3.0 प्रतिशत कर सकता है। यदि ऐसा कदम उठाया जाता है, तो यह न्यूजीलैंड की मुद्रा को भारी गिरावट से बचाने में अहम ढाल का काम कर सकता है। रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड मध्यम अवधि के भीतर मुद्रास्फीति की दर को 1 प्रतिशत से 3 प्रतिशत के दायरे में रखने के अधिदेश पर काम करता है, जिसमें मुख्य ध्यान 2 प्रतिशत के मध्य-बिंदु को साधने पर रहता है। जब मुद्रास्फीति अनियंत्रित होने लगती है, तो केंद्रीय बैंक आर्थिक गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि करता है। दरों में यह बढ़ोतरी स्थानीय बॉन्ड यील्ड को बढ़ाती है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए न्यूजीलैंड में पूंजी लगाना अधिक आकर्षक हो जाता है और मुद्रा को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत, ब्याज दरों में कटौती से न्यूजीलैंड डॉलर पर नकारात्मक असर पड़ता है। दोनों केंद्रीय बैंकों के बीच ब्याज दरों का यह अंतर ही मुद्रा जोड़े की दिशा निर्धारित करने में सबसे अहम माना जाता है। न्यूजीलैंड डॉलर की बुनियादी प्रकृति और वैश्विक निर्भरता मुद्रा व्यापारियों के बीच कीवी नाम से पहचाना जाने वाला न्यूजीलैंड डॉलर दुनिया की प्रमुख व्यापारिक मुद्राओं में शामिल है। इसका मूल्य मुख्य रूप से न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य और केंद्रीय बैंक की नीतियों पर निर्भर करता है। हालांकि, इस मुद्रा की अपनी कुछ विशिष्टताएं हैं जो इसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय उथल-पुथल के प्रति संवेदनशील बनाती हैं। न्यूजीलैंड के आर्थिक भाग्य में चीन की स्थिति बेहद निर्णायक भूमिका निभाती है, क्योंकि चीन उसका सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। यदि चीनी अर्थव्यवस्था में मंदी या प्रतिकूल परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं, तो इसका सीधा असर न्यूजीलैंड से होने वाले निर्यातों पर पड़ता है, जिससे अंततः कीवी मुद्रा कमजोर होती है। इसके अलावा, डेयरी उत्पाद न्यूजीलैंड का प्रमुख निर्यात घटक हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में डेयरी की मजबूत कीमतें निर्यात राजस्व को बढ़ावा देती हैं, जिससे अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलता है और न्यूजीलैंड डॉलर को ताकत मिलती है। व्यापक वित्तीय बाजारों में जब निवेशक कम जोखिम और तेज वैश्विक वृद्धि को लेकर आश्वस्त होते हैं, तो न्यूजीलैंड डॉलर जैसी कमोडिटी मुद्राओं में जोरदार खरीदारी देखने को मिलती है। इसके विपरीत, जब बाजार में अनिश्चितता, तनाव या मंदी का डर हावी होता है, तो निवेशक उच्च-जोखिम वाली संपत्तियों से निकलकर अमेरिकी डॉलर जैसे सुरक्षित ठिकानों की ओर रुख करते हैं, जिसके चलते न्यूजीलैंड डॉलर में भारी गिरावट दर्ज की जाती है। अन्य वैश्विक मुद्राओं और परिसंपत्तियों की स्थिति वैश्विक मुद्रा परिदृश्य में अन्य जोड़ों पर भी महत्वपूर्ण हलचल देखने को मिल रही है। शुक्रवार को एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर का युग्म लगातार दूसरे दिन सकारात्मक बढ़त के साथ 0.7100 के स्तर से ऊपर कारोबार करता नजर आया। नरम अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने अमेरिकी डॉलर के खरीदारों को रक्षात्मक स्थिति में रखा। इसके साथ ही रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर बुलॉक की आक्रामक टिप्पणियों ने दर वृद्धि के दांव को बल देकर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा दिया। हालांकि, फेडरल रिजर्व के आक्रामक नजरिए और भू-राजनीतिक चिंताओं ने डॉलर की गिरावट को सीमित रखा। उधर, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन का युग्म शुक्रवार को यूरोपीय सत्र में 157.30 के दो सप्ताह के उच्च स्तर से नीचे आ गया। बैंक ऑफ जापान के गवर्नर उएदा की मौद्रिक नीति बैठक के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस की टिप्पणियों से जापानी येन को राहत मिली। केंद्रीय बैंक ने आश्चर्यजनक रूप से 7-2 के बहुमत से ब्याज दर को बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। पिछले एक दशक से अधिक समय से जापान की बेहद कम ब्याज दरों ने वैश्विक निवेशों के लिए खरबों डॉलर का वित्तपोषण किया था, जिससे जापानी येन दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बन गया था। अब बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत सख्ती की शुरुआत के साथ वह पुराना दौर एक नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली पीली धातु यानी सोने में भी लगातार दूसरे दिन खरीदारी का रुझान बना रहा, जिससे इसने यूरोपीय सत्र में सप्ताह का नया उच्चतम स्तर छू लिया। कच्चे तेल की कीमतों में आई हालिया गिरावट से बेलगाम महंगाई की तात्कालिक चिंताएं घटी हैं, जिसके चलते अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल अपने बहु-वर्षीय उच्च स्तरों से नीचे आ गए हैं। इस रुझान ने अमेरिकी डॉलर की बढ़त पर लगाम कसी है और सर्राफा बाजार को ठोस संबल प्रदान किया है। इसका आप पर असर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और मुद्रा बाजार में डॉलर के मजबूत होने से विदेशी मुद्रा विनिमय, आयात लागत और वैश्विक निवेश प्रवाह पर सीधा असर पड़ेगा। • मुद्रा विनिमय पर प्रभाव: अमेरिकी डॉलर में आने वाली मजबूती से अन्य वैश्विक मुद्राओं की क्रय शक्ति घटती है। अंतरराष्ट्रीय यात्रा, विदेश में शिक्षा और डॉलर में होने वाले भुगतानों के लिए आम लोगों को अधिक स्थानीय मुद्रा खर्च करनी होगी। • आयातित वस्तुओं की लागत: डॉलर के मुकाबले मुद्राओं के कमजोर होने से ऊर्जा और जरूरी कच्चे माल का आयात महंगा हो जाता है। इसके चलते घरेलू बाजारों में माल ढुलाई और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का जोखिम बढ़ जाता है। • कमोडिटी और सोना निवेशक: बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव और डॉलर की चाल का सीधा असर सोने और कमोडिटी की कीमतों पर पड़ता है। सुरक्षित निवेश चाहने वाले खुदरा निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय नीतिगत घोषणाओं के समय पोर्टफोलियो में सतर्कता बरतनी होगी। • वैश्विक केंद्रीय बैंक नीतियां: फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को ऊंचा रखने से अन्य देशों के केंद्रीय बैंकों पर भी ब्याज दरें ऊंची रखने का दबाव बनता है। इससे कर्जदारों के लिए होम लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में तत्काल राहत मिलने की संभावना कम हो जाती है। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा लगातार उच्च मुद्रास्फीति के कारण सख्त नीति जारी रखने के संकेत देने से विदेशी मुद्रा बाजारों में डॉलर की मांग तेजी से बढ़ी है। इसके साथ ही न्यूजीलैंड के व्यापारिक आंकड़ों और वैश्विक केंद्रीय बैंकों के भिन्न नीतिगत कदमों ने इस मुद्रा दबाव को और तीव्र कर दिया है। • अमेरिकी ब्याज दर की संभावनाएं: फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वार्श ने गर्मियों के कमजोर आंकड़ों और अनियंत्रित महंगाई को देखते हुए सख्त नीति जारी रखने की आवश्यकता बताई। इस रुख के कारण अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना 44 प्रतिशत से उछलकर 53.1 प्रतिशत पर पहुंच गई, जिससे डॉलर को सीधा समर्थन मिला। • व्यापार घाटे के आंकड़े: न्यूजीलैंड का अगस्त व्यापार घाटा 1.35 अरब न्यूजीलैंड डॉलर रहा, जो जुलाई के मुकाबले सुधरा तो जरूर लेकिन बाजार के 1.275 अरब न्यूजीलैंड डॉलर के अनुमान से अधिक रहा। इस अंतर ने न्यूजीलैंड डॉलर के तात्कालिक सुधार को सीमित कर दिया। • चीन और डेयरी बाजार की संवेदनशीलता: न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था अपने सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार चीन की आर्थिक सेहत और अंतरराष्ट्रीय डेयरी कीमतों पर अत्यधिक निर्भर है। वैश्विक मांग में अनिश्चितता के कारण निवेशक कमोडिटी-आधारित मुद्राओं में नए दांव लगाने से बच रहे हैं। • भू-राजनीतिक अनिश्चितता: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की खाड़ी देशों के साथ बैठकों और सैन्य निर्णयों को लेकर बनी अनिर्णय की स्थिति ने बाजार में सतर्कता बढ़ा दी है। ऐसी परिस्थितियों में निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों को बेचकर डॉलर जैसे सुरक्षित ठिकानों को प्राथमिकता देते हैं। सवाल-जवाब 1. न्यूजीलैंड डॉलर में हालिया गिरावट का मुख्य कारण क्या है? फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वार्श द्वारा मुद्रास्फीति पर दिए गए सख्त बयानों के बाद अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ, जिससे न्यूजीलैंड डॉलर पर दबाव बना। 2. अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दर वृद्धि की क्या संभावना आंकी जा रही है? सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार बाजार प्रतिभागी अब अक्टूबर में दर वृद्धि की 53.1 प्रतिशत संभावना मान रहे हैं, जो पहले 44 प्रतिशत थी। 3. अगस्त में न्यूजीलैंड का व्यापार घाटा कितना दर्ज किया गया? अगस्त में न्यूजीलैंड का व्यापार घाटा 1.35 अरब न्यूजीलैंड डॉलर रहा, जो जुलाई के 2.12 अरब से कम लेकिन 1.275 अरब के अनुमान से अधिक है। 4. रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंज की आगामी नीतिगत बैठक से क्या उम्मीदें हैं? निवेशक 60 प्रतिशत संभावना मान रहे हैं कि रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड अपनी अक्टूबर समीक्षा में आधिकारिक नकद दर बढ़ाकर 3.0 प्रतिशत कर सकता है। 5. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है? बैंक ऑफ जापान ने एक आश्चर्यजनक 7-2 के मतदान से अपनी नीतिगत ब्याज दर को बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। https://trendkia.com/market/us-federal-reserve-ke-kare-rukha-se-new-zealand-dollar-para-dabava-mudra-bajaron-men-halachala-33516 TrendKia — Har trend, sabse pehle.