अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और पश्चिम एशिया संकट के बीच सोने में गिरावट, 4,350 डॉलर पर दबाव फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती आशंका और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी डॉलर मजबूत होने से सोने के भाव में गिरावट आई है। वैश्विक कमोडिटी बाजार में सप्ताह की शुरुआत पीली धातु के लिए दबाव भरी रही, जहां 4,400 डॉलर के स्तर के आसपास मुनाफावसूली हावी होने से सोने में कमजोरी देखने को मिली। पिछले बुधवार को छह सप्ताह के निचले स्तर को छूने के बाद शुरू हुआ दो दिवसीय सुधार का दौर रुक गया है। अमेरिकी डॉलर की वापसी और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की नई अटकलों ने गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों पर दबाव बढ़ा दिया है। वर्तमान में सोना 4,350 डॉलर प्रति औंस के दायरे में कारोबार करता दिखा, जबकि लाइव मार्केट डेटा के अनुसार सोना 4,392 डॉलर पर दर्ज हुआ, जो पिछले सत्र के 4,425 डॉलर के बंद स्तर से 0.74 प्रतिशत की नरमी दर्शाता है। 52 हफ्तों के दौरान सोने का दायरा 3,718 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है। पश्चिम एशिया में गहराता संघर्ष और वैश्विक अनिश्चितता भू-राजनीतिक मोर्चे पर अनिश्चितता का माहौल लगातार बना हुआ है। यमन में सक्रिय ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने शनिवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद में संवेदनशील ठिकानों को मिसाइलों और ड्रोनों के जरिए निशाना बनाया। इस हमले ने खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम को काफी बढ़ा दिया है। दूसरी तरफ, ईरान ने साफ तौर पर कहा है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने या अमेरिका के साथ नए सिरे से बातचीत की मेज पर आने के लिए तब तक तैयार नहीं है, जब तक कि वाशिंगटन उसकी सभी शर्तें पूरी नहीं कर देता। इन शर्तों में सभी मोर्चों पर युद्ध की समाप्ति, जब्त की गई ईरानी संपत्तियों को मुक्त करना और ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाना शामिल है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह ईरान युद्ध के संबंध में फैसला लेने की स्थिति में हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि निकट भविष्य में बड़ी घटनाएं घटने जा रही हैं। इस बयान के चलते बाजारों में भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम बना हुआ है, लेकिन सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने को मिलने वाला सहारा मजबूत होते डॉलर के सामने फीका पड़ता दिखाई दे रहा है। इसके साथ ही निवेशक गुरुवार को होने वाली डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की अहम शिखर बैठक से पहले सतर्क रुख अपना रहे हैं और बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं। अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती और मौद्रिक नीति का दबाव आर्थिक संकेतकों की समीक्षा करते हुए नॉर्डिया के विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अब भी काफी लचीली बनी हुई है। उनके आकलन के अनुसार मुद्रास्फीति के दबाव कम होने के बेहद कम संकेत दिखाई दे रहे हैं, जबकि श्रम बाजार भी मजबूती से टिका हुआ है। यह संयुक्त स्थिति अधिक प्रतिबंधात्मक मौद्रिक नीति के पक्ष को मजबूत करती है। नॉर्डिया ने दोहराया कि वह ब्याज दरों में दो और बढ़ोतरी के अपने पूर्वानुमान पर कायम है। हालांकि, संस्थान ने आगाह भी किया कि जोखिम ऊपर की ओर झुके हुए हैं, जिससे यह संभावना बनती है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व को मौजूदा उम्मीदों से भी अधिक कदम उठाने पड़ सकते हैं। तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो दैनिक आधार पर तकनीकी ढांचा मिला-जुला परिदृश्य पेश कर रहा है। लाइव डेटा के मुताबिक 14-दिवसीय आरएसआई 48 पर तटस्थ बना हुआ है। एमएसीडी -3.61 पर है जो 14.84 की सिग्नल लाइन से नीचे -18.46 हिस्टोग्राम के साथ मंदी का रुझान दिखाता है। 20-दिवसीय ईएमए 4,426 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 4,393 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 4,429 डॉलर पर स्थित है, जहां 50-दिवसीय ईएमए 200-दिवसीय ईएमए के नीचे होने से डेथ क्रॉस बना हुआ है और लंबी अवधि का रुझान नीचे की ओर झुका है। बॉलिंजर बैंड 4,254 डॉलर से 4,702 डॉलर के बीच है, जिसमें मध्य रेखा 4,478 डॉलर पर है। 14-दिवसीय एडीएक्स 15 पर कमजोर दायरे का संकेत दे रहा है और स्टोकेस्टिक की फास्ट व सिग्नल लाइन 42 पर टिकी हैं। 103.47 का एटीआर दैनिक उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। तकनीकी स्तर और महत्वपूर्ण बाधाएं चार्ट पर ऊपर की ओर शुरुआती रुकावट 4,367 डॉलर पर 100-दिवसीय ईएमए के पास स्थित है। इसके ऊपर 4,406 डॉलर पर 38.2 प्रतिशत का फिबोनाची रिट्रेसमेंट स्तर अगला अवरोध बना हुआ है, जबकि 4,515 डॉलर के आसपास 23.6 प्रतिशत का रिट्रेसमेंट एक मजबूत दीवार का काम करेगा। दैनिक पिवट स्तर 4,401 डॉलर पर है, जिसके ऊपर पहला रेजिस्टेंस 4,413 डॉलर और दूसरा रेजिस्टेंस 4,434 डॉलर पर देखा जा रहा है। 20-दिवसीय रेजिस्टेंस 4,755 डॉलर के आसपास बना हुआ है। दूसरी ओर, गिरावट की स्थिति में तत्काल सहारा 4,317 डॉलर पर 50.0 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट के पास मिलता है। इसके टूटने पर 4,229 डॉलर के पास 61.8 प्रतिशत का स्तर और फिर 4,103 डॉलर के आसपास 78.6 प्रतिशत का रिट्रेसमेंट सुरक्षा कुशन मुहैया कराएगा। बिकवाली का गहरा दबाव जारी रहने पर 3,942 डॉलर का निचला दायरा एक दूरस्थ तल बन सकता है। लाइव स्तरों के अनुसार पहला सपोर्ट 4,380 डॉलर और दूसरा सपोर्ट 4,368 डॉलर पर है, जबकि 20-दिवसीय सपोर्ट 4,273 डॉलर के करीब स्थित है। वैश्विक मुद्रा बाजारों और केंद्रीय बैंकों की हलचल विदेशी मुद्रा बाजार में पिछले सात दिनों के दौरान अमेरिकी डॉलर का दबदबा देखने को मिला, जहां यह जापानी येन के मुकाबले सबसे मजबूत रहा। एशियाई सत्र में एयूडी/यूएसडी 0.7100 के स्तर से ऊपर टिका रहा, क्योंकि डॉलर ने जुलाई के अंत के उच्चतम स्तर से अपनी मामूली नरमी को थाम लिया। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना द्वारा लोन प्राइम दरों को यथावत रखने के फैसले ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर असर डाला, हालांकि रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा दर वृद्धि के अनुमान इसे सहारा दे रहे हैं। वहीं, यूएसडी/जेपीवाई एशियाई कारोबार में 157.00 से नीचे फिसलता दिखा। बैंक ऑफ जापान द्वारा 7-2 के बहुमत से अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत करने के बाद मौद्रिक नीति सामान्यीकरण की दिशा में एक और कदम उठाया गया। शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान के रेट चेक के बाद हस्तक्षेप के जोखिम और जापान में अवकाश के बीच रूस-यूक्रेन तथा पश्चिम एशिया के तनाव ने बाजार सहभागियों को सतर्क रखा। अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों का प्रदर्शन डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में सोलाना ने अपनी बढ़त को आगे बढ़ाते हुए 111.70 डॉलर से ऊपर कारोबार किया, जिसमें पिछले सप्ताह लगभग 12 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी। सोलाना के टोकनाइज्ड इक्विटी इकोसिस्टम के नए मील के पत्थर तक पहुंचने और संस्थागत मांग बढ़ने से इसमें मजबूती बनी हुई है। अमेरिका के घरेलू मोर्चे पर इस सप्ताह आर्थिक आंकड़े कम हैं, जहां मुख्य ध्यान गुरुवार को आने वाली नई गृह बिक्री रिपोर्ट पर रहेगा। जुलाई में भारी गिरावट के बाद अगस्त में नई गृह बिक्री 2.6 प्रतिशत बढ़कर 623K की रफ्तार तक आंशिक रूप से सुधरने की संभावना है। ऊंची मॉर्गेज दरें अब भी वहनीयता पर असर डाल रही हैं, हालांकि बिल्डरों की रियायतें जारी रहने से महीने के दौरान स्थितियां गंभीर रूप से बिगड़ी नहीं हैं। इसका आप पर असर फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावना तथा डॉलर के मजबूत होने से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। • भारत में: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट आने से घरेलू बाजार में खरीदारी करने वालों को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के उतार-चढ़ाव पर नजर रखना जरूरी होगा क्योंकि यह घरेलू आयात लागत को प्रभावित करता है। • वैश्विक निवेशकों के लिए: बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स की चाल सोने की आगे की दिशा तय करेगी। निवेशकों को 4,400 डॉलर के रेजिस्टेंस और 4,317 डॉलर के सपोर्ट स्तरों को ध्यान में रखकर ही नई पोजीशन बनानी चाहिए। • उपभोक्ताओं के लिए: आने वाले त्योहारी और वैवाहिक सीजन में आभूषण खरीदने की योजना बना रहे लोग कीमतों में गिरावट का फायदा उठा सकते हैं। बाजार में किसी भी बड़े करेक्शन पर चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करना समझदारी भरा कदम हो सकता है। • ट्रेडर्स के लिए: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-चीन वार्ता के कारण बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। 103 डॉलर से अधिक के दैनिक एटीआर को देखते हुए उचित स्टॉप लॉस का इस्तेमाल अनिवार्य है। ऐसा क्यों हुआ सोने की कीमतों में गिरावट मुख्य रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति में सख्ती की नई आशंकाओं और अमेरिकी डॉलर की तेजी की वजह से आई है। हालांकि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है, लेकिन डॉलर की मजबूती ने सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग को सीमित कर दिया है। • फेडरल रिजर्व की सख्ती: नॉर्डिया के विश्लेषकों का मानना है कि लचीली अमेरिकी अर्थव्यवस्था और लगातार बनी हुई महंगाई दरों में दो और बढ़ोतरी की जरूरत पैदा कर सकती है। ऊंची ब्याज दरें गैर-ब्याज देने वाली संपत्ति जैसे सोने की आकर्षण क्षमता को सीधे कम करती हैं। • डॉलर की मजबूती: मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले मजबूत स्थिति में बना हुआ है। डॉलर के महंगे होने से विदेशी मुद्रा रखने वाले खरीदारों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे मांग घटती है। • तकनीकी स्तरों पर बिकवाली: पिछले सप्ताह 4,400 डॉलर के स्तर के पास तकनीकी प्रतिरोध झेलने के बाद व्यापारियों ने मुनाफावसूली शुरू की। इसके चलते छह सप्ताह के निचले स्तर से शुरू हुआ सुधार का दौर 4,350 डॉलर के आसपास थम गया। • भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अनिश्चितता: सऊदी अरब पर हूती हमलों और ईरान की कड़ी शर्तों के बावजूद निवेशक गुरुवार को होने वाली ट्रंप-शी बैठक से पहले सतर्क हैं। बड़ी घटनाओं से पहले बाजार में नई खरीदारी करने से बचा जा रहा है। सवाल-जवाब 1. सोने की कीमतों में हालिया गिरावट का मुख्य कारण क्या है? अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती के कारण फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती आशंका और मजबूत होता अमेरिकी डॉलर सोने पर दबाव बना रहे हैं। 2. सोने के लिए तात्कालिक तकनीकी सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर कौन से हैं? सोने के लिए पहला महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस 4,367 डॉलर और 4,406 डॉलर पर है, जबकि नीचे की ओर तत्काल सपोर्ट 4,317 डॉलर और 4,229 डॉलर पर स्थित है। 3. पश्चिम एशिया के तनाव का सोने पर क्या असर पड़ा है? यमन के हूती हमलों और ईरान की कड़ी शर्तों ने भू-राजनीतिक जोखिम तो बढ़ाया है, लेकिन मजबूत डॉलर के चलते सोने को इसका पूरा सुरक्षित निवेश लाभ नहीं मिल पा रहा है। 4. नॉर्डिया के विश्लेषकों का फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर क्या पूर्वानुमान है? नॉर्डिया का अनुमान है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व दो और बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है, क्योंकि मुद्रास्फीति और श्रम बाजार अभी भी मजबूत बने हुए हैं। 5. गुरुवार को बाजार के लिए कौन सा बड़ा वैश्विक घटनाक्रम होने वाला है? गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक होने वाली है। https://trendkia.com/market/us-federal-reserve-ke-sakhta-rukha-aura-middle-east-snkata-ke-bicha-gold-men-giravata-4-350-dolara-para-dabava-35564 TrendKia — Har trend, sabse pehle.