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  "type": "article",
  "title": "अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7100 के करीब जमा, आईएमएफ ने आरबीए को दी सख्त मौद्रिक नीति की सलाह",
  "summary": "अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा प्रमुख ब्याज दरें 3.75% से बढ़ाकर 4.0% करने के बाद भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर मजबूती बनाए रखने की कोशिश में है, वहीं आईएमएफ ने ऑस्ट्रेलिया के केंद्रीय बैंक को मुद्रास्फीति जोखिमों से निपटने के लिए दरें बढ़ाने को कहा है।",
  "content": "वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार के शुरुआती एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7090 के करीब अपनी मजबूती दर्ज करता दिखा। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ओर से नीतिगत ब्याज दरों में की गई हालिया वृद्धि के बावजूद ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा ने लचीलापन दिखाया है। वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ ने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) को मुद्रास्फीति के बढ़ते जोखिमों के प्रति आगाह करते हुए जरूरत पड़ने पर सख्त मौद्रिक रुख अपनाने की स्पष्ट सलाह दी है।\n\nफेडरल रिजर्व की मौद्रिक सख्ती और अमेरिकी राजनीतिक प्रतिक्रिया\nअमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने बुधवार को व्यापक बाजार उम्मीदों के अनुरूप अपनी बेंचमार्क उधार दरों को 3.75% से बढ़ाकर 4.0% के दायरे में कर दिया। पिछले तीन वर्षों की अवधि में फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में की गई यह पहली बढ़ोतरी है। इस अहम फैसले के बाद फेड के चेयरमैन केविन वॉर्श ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि मुद्रास्फीति बहुत अधिक है और लंबे समय से उच्च स्तर पर बनी हुई है। उन्होंने इस नीतिगत निर्णय को एक गंभीर और जिम्मेदार फैसला करार दिया। केविन वॉर्श ने यह संकेत भी दिया कि कीमतों में हो रही वृद्धि की रफ्तार को धीमा करने के मकसद से आगामी बैठकों में दरों में और इजाफा किया जा सकता है। सीएमई फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मनी मार्केट ट्रेडर्स अक्टूबर महीने में फेड द्वारा एक और दर वृद्धि की लगभग 49.8% संभावना मानकर चल रहे हैं।\n\nमॉर्गन स्टेनली के मुख्य अमेरिकी अर्थशास्त्री माइकल गैपेन ने इस निर्णय पर अपनी टिप्पणी में कहा कि यह रुख आक्रामक है और यदि फेड चेयरमैन यह मानते हैं कि वर्तमान नीति अब भी उदार बनी हुई है, तो आगे केंद्रीय बैंक को और कड़े कदम उठाने होंगे। दूसरी तरफ, राजनीतिक मोर्चे पर इस फैसले की तीखी आलोचना भी देखने को मिली। डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट साझा करते हुए अमेरिकी केंद्रीय बैंक से नीतिगत दरों में भारी कटौती कर उन्हें 1% या उससे भी नीचे लाने की मांग रखी। डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा कि अमेरिका दुनिया के लगभग हर देश का बोझ उठा रहा है और यह स्थिति अब आगे जारी नहीं रह सकती।\n\nऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक का रुख और ब्याज दर वृद्धि की संभावनाएं\nऑस्ट्रेलिया के संदर्भ में, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) ने इस साल की शुरुआत में लगातार तीन बार दरों में वृद्धि करने के बाद अपनी आधिकारिक नकद दर (ओसीआर) को 4.35% के स्तर पर स्थिर रखा हुआ है। हालांकि घरेलू स्तर पर मूल्य वृद्धि के दबाव को देखते हुए आगामी बैठक को लेकर बाजार में अटकलें तेज हैं। आरबीए रेट ट्रैकर के अनुसार, वित्तीय बाजार इस बात की लगभग 76% संभावना जता रहे हैं कि ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक अपनी अगली बोर्ड बैठक में आधिकारिक नकद दर को बढ़ाकर 4.60% कर सकता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भी इस बात पर जोर दिया है कि मुद्रास्फीति के ऊपर जाने के जोखिम मौजूद हैं, इसलिए ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक को आवश्यकता पड़ने पर ब्याज दरें बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार रहना चाहिए।\n\nयूओबी का तकनीकी परिप्रेक्ष्य और मुद्रा जोड़ी का चार्ट विश्लेषण\nयूओबी ग्रुप के रणनीतिकारों ने मध्यम अवधि के नजरिए से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी पर अपना सतर्क दृष्टिकोण बरकरार रखा है। यूओबी के विश्लेषकों ने अपने एक से तीन सप्ताह के परिदृश्य को दोहराते हुए उल्लेख किया कि यद्यपि आगे और कमजोरी की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन अल्पकालिक स्थितियां ओवरसोल्ड दायरे में पहुंच चुकी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस जोड़ी को 0.7050 के स्तर की ओर बढ़ने से पहले 0.7100 के नीचे दैनिक आधार पर बंद होना आवश्यक होगा। यूओबी का यह भी कहना है कि जब तक ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7175 के मजबूत प्रतिरोध स्तर से नीचे बना रहता है, तब तक 0.7100 के नीचे बंद होने की संभावना बरकरार रहेगी।\n\nदैनिक तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी में निकट अवधि का रुझान मंदड़ियों के पक्ष में दिखाई देता है क्योंकि कीमत 20 दिवसीय बोलिंजर बैंड्स की मध्य रेखा के नीचे बनी हुई है। इसके साथ ही 100 दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (एसएमए) मौजूदा बाजार भाव के ठीक नीचे शुरुआती समर्थन प्रदान कर रहा है। मोमेंटम संकेतकों में नरमी आई है और 14 दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) 40 के निचले स्तर की तरफ फिसला है, जो बाजार में बिकवाली के बजाय तेजी के दबाव के कमजोर पड़ने का संकेत देता है।\n\nऊपर की ओर, तत्काल प्रतिरोध 0.7095 के निचले बोलिंजर बैंड पर देखा जा रहा है, जिसके बाद लगभग 0.7166 पर बोलिंजर एसएमए केंद्र और 0.7240 के निकट ऊपरी बैंड स्थित है, जो मौजूदा कीमतों के ऊपर एक व्यापक अवरोध उत्पन्न करते हैं। नीचे की तरफ, 0.7080 के स्तर पर स्थित 100 दिवसीय एसएमए पहला महत्वपूर्ण समर्थन स्तर बना हुआ है। यदि कीमत इस सीमा को तोड़कर नीचे टिकती है, तो आगे निचले दैनिक स्तरों का रास्ता खुल सकता है और मंदी का रुझान और अधिक पुख्ता हो सकता है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, इस समय जोड़ी 0.7121 पर कारोबार कर रही है जो पिछले बंद 0.7115 से 0.08% अधिक है। इसका 52 सप्ताह का दायरा 0.6422 से 0.7277 के बीच रहा है। लाइव 14 दिवसीय आरएसआई 48 पर है और 20 दिवसीय बोलिंजर बैंड 0.7092 से 0.7239 के बीच बने हुए हैं, जिसमें मध्य रेखा 0.7165 पर है।\n\nऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था, लौह अयस्क और चीन का व्यापारिक प्रभाव\nविदेशी मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मूल्य निर्धारण में कई बुनियादी कारक प्रमुख भूमिका निभाते हैं। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण कारक रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा तय की जाने वाली ब्याज दरों का स्तर है। ऑस्ट्रेलिया का केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों के बीच आपसी ऋण की दरों को निर्धारित करता है, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था में उधारी लागत प्रभावित होती है। आरबीए का प्राथमिक उद्देश्य ब्याज दरों को आवश्यकतानुसार समायोजित करके मुद्रास्फीति को 2% से 3% के दायरे में स्थिर बनाए रखना है। अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की तुलना में अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरें ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को मजबूती प्रदान करती हैं, जबकि कम दरें इसे कमजोर बनाती हैं। इसके अतिरिक्त, आरबीए क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग जैसे उपायों का उपयोग करके ऋण स्थितियों को प्रभावित कर सकता है, जिनमें से पहला मुद्रा के लिए नकारात्मक और दूसरा सकारात्मक प्रभाव डालता है।\n\nइसके अलावा ऑस्ट्रेलिया प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर देश है, इसलिए उसके सबसे बड़े निर्यात उत्पाद लौह अयस्क (आयरन ओर) की वैश्विक कीमतें मुद्रा के लिए एक बड़ा प्रेरक कारक हैं। 2021 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, लौह अयस्क का वार्षिक निर्यात लगभग 118 अरब डॉलर रहा था, जिसका प्रमुख गंतव्य चीन था। सामान्य तौर पर जब वैश्विक बाजार में लौह अयस्क की कीमतें चढ़ती हैं, तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की कुल मांग में वृद्धि होती है और मुद्रा मजबूत होती है। इसके विपरीत कीमतों में गिरावट से मुद्रा पर नकारात्मक असर पड़ता है। लौह अयस्क की ऊंची कीमतें ऑस्ट्रेलिया के व्यापार संतुलन को भी सकारात्मक बनाए रखने में सहायता करती हैं।\n\nचीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसके कारण चीनी अर्थव्यवस्था का स्वास्थ्य ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मूल्यांकन पर सीधा असर डालता है। जब चीनी अर्थव्यवस्था में मजबूती होती है, तो वह ऑस्ट्रेलिया से कच्चे माल, वस्तुओं और सेवाओं की अधिक खरीद करती है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा की मांग बढ़ती है। वहीं दूसरी ओर यदि चीनी विकास दर अपेक्षा से कमजोर रहती है, तो यह मुद्रा के लिए प्रतिकूल साबित होता है। अतः चीनी विकास आंकड़ों में होने वाले सकारात्मक या नकारात्मक उतार-चढ़ाव का प्रभाव सीधे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से जुड़ी जोड़ियों पर पड़ता है। साथ ही व्यापार संतुलन, जो निर्यात से होने वाली आय और आयात पर होने वाले खर्च का अंतर होता है, मुद्रा को गति देता है। जब ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष मजबूत रहता है, तो विदेशी खरीदारों की मांग से मुद्रा मजबूत होती है, जबकि नकारात्मक व्यापार संतुलन इसे नीचे खींचता है।\n\nवैश्विक जोखिम माहौल, अन्य मुद्राएं और कमोडिटी रुझान\nव्यापक वित्तीय बाजारों में निवेशकों का जोखिम संबंधी दृष्टिकोण भी ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा के रुख को प्रभावित करता है। जब निवेशक अधिक जोखिम वाली संपत्तियों में पूंजी लगाने को प्राथमिकता देते हैं जिसे रिस्क-ऑन माहौल कहा जाता है, तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को लाभ मिलता है। इसके विपरीत जब बाजार प्रतिभागी सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं यानी रिस्क-ऑफ की स्थिति बनती है, तो इसका प्रतिकूल असर पड़ता है। हालिया सत्र में एशियाई कारोबार के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पूर्व दिन के नुकसान को समेटते हुए लगभग एक महीने के निचले स्तर के करीब सीमित रहा और 0.7100 के नीचे कारोबार करता दिखा, क्योंकि अमेरिकी डॉलर की तेजी अस्थायी रूप से थमी थी। इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भी सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर को समर्थन दिया, जिससे ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक की दर वृद्धि की उम्मीदों के बावजूद ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा का उछाल सीमित रहा।\n\nअन्य वैश्विक बाजारों में भी अहम हलचल देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी गुरुवार को लगातार तीन दिनों की बढ़त के सिलसिले को तोड़ते हुए 156.00 के नीचे आ गई। बैंक ऑफ जापान द्वारा मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में सख्त कदम उठाने की उम्मीदों ने जापानी येन को सहारा दिया। उल्लेखनीय है कि एक दशक से अधिक समय तक जापान की अत्यधिक कम ब्याज दरों ने वैश्विक निवेशों में खरबों डॉलर के वित्तपोषण का काम किया, जिससे जापानी येन दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बन गया था। चूंकि बैंक ऑफ जापान इस सप्ताह नीति सख्त करने की तैयारी में है, इसलिए यह लाभ अब एक नए चरण में प्रवेश कर सकता है।\n\nकमोडिटी बाजार में सोने की कीमतें गुरुवार को एशियाई सत्र में 4,300 डॉलर के आसपास पहुंच गईं, जिससे पिछले दिन के छह सप्ताह के निचले स्तर के नुकसान की काफी हद तक भरपाई हुई। हालांकि कच्चे तेल से जुड़ी मुद्रास्फीति की चिंताएं और फेडरल रिजर्व का सख्त दृष्टिकोण अभी भी दरों में वृद्धि की संभावनाओं को हवा दे रहे हैं, जबकि अमेरिका-ईरान तनाव डॉलर को मजबूती प्रदान करते हुए गैर-उपज वाले सोने की बढ़त को सीमित रख सकते हैं। दूसरी ओर, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में इथेरियम और अन्य डिजिटल परिसंपत्तियों पर क्लैरिटी एक्ट के अमेरिकी सीनेट में पारित न हो पाने का नकारात्मक असर देखा गया। विश्लेषकों ने इस विधेयक को दूसरी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी के लिए एक बड़ा सकारात्मक कारक माना था, लेकिन इसके रुकने से बाजार की उम्मीदों को झटका लगा है।\n\nइसका आप पर असर\nअमेरिकी फेडरल रिजर्व और ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीतियों में आ रहे बदलावों का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों, मुद्रा दरों और व्यापारिक लागतों पर सीधा पड़ेगा।\n\n• भारत में: अमेरिकी डॉलर में मजबूती और फेडरल रिजर्व की उच्च ब्याज दरों के बने रहने से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप भारत में कच्चे तेल और अन्य जरूरी आयातों की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर घरेलू मुद्रास्फीति पर देखने को मिलेगा।\n• वैश्विक निवेशकों के लिए: केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनाए रखने की संभावनाओं से शेयर और बॉन्ड बाजारों में अस्थिरता जारी रह सकती है। जो निवेशक विदेशी मुद्रा या कमोडिटी परिसंपत्तियों में निवेश करते हैं, उन्हें अपने पोर्टफोलियो में विनिमय दर के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखकर हेजिंग रणनीतियों का इस्तेमाल करना चाहिए।\n• आयात-निर्यात कारोबारियों के लिए: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर में उतार-चढ़ाव के कारण अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में अनुबंधों की लागत प्रभावित होगी। धातुओं और ऊर्जा के व्यापार में जुड़े आयातकों को मुद्रा जोखिम से बचने के लिए फॉरवर्ड अनुबंधों पर विचार करना चाहिए।\n• विदेशी यात्रियों और छात्रों के लिए: विदेशों में पढ़ाई करने वाले छात्रों और यात्रा करने वालों के लिए डॉलर के मजबूत होने से रहने और शिक्षा का खर्च बढ़ सकता है। मुद्रा में अस्थिरता को देखते हुए विदेशी मुद्रा कार्ड और अग्रिम बुकिंग का प्रबंधन पहले से करना बेहतर रहेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nफेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी और ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक की ओर से संभावित मौद्रिक सख्ती दोनों देशों में लगातार बनी हुई महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों के कारण हुई है।\n\n• अमेरिकी मुद्रास्फीति का दबाव: फेडरल रिजर्व ने लंबे समय से उच्च स्तर पर बनी हुई मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए तीन साल में पहली बार दरों को बढ़ाकर 3.75% से 4.0% किया। केंद्रीय बैंक के अधिकारियों का मानना है कि मूल्य स्थिरता वापस लाने के लिए मौद्रिक सख्ती को बरकरार रखना आवश्यक था।\n• ऑस्ट्रेलिया में मूल्य वृद्धि जोखिम: ऑस्ट्रेलिया में मुद्रास्फीति के लक्ष्य से ऊपर रहने के चलते अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने आरबीए को दरों में बढ़ोतरी के लिए तत्पर रहने की सलाह दी। बाजार पहले से ही 76% संभावना जता रहा है कि आरबीए अपनी नकद दर को बढ़ाकर 4.60% कर सकता है।\n• कमोडिटी और व्यापारिक स्थितियां: लौह अयस्क जैसी बुनियादी वस्तुओं की वैश्विक मांग और चीन के साथ व्यापारिक गतिविधियों ने ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की है। इस व्यापारिक मजबूती के कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन मिला और वह अमेरिकी दर वृद्धि के बावजूद 0.7100 के करीब टिका रहा।\n• भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने अमेरिकी डॉलर को सुरक्षित परिसंपत्ति के तौर पर मांग प्रदान की। इसके चलते ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की तेजी को एक सीमित दायरे में रहना पड़ा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है?\nफेडरल रिजर्व ने अपनी बेंचमार्क ब्याज दर को 3.75% से 4.0% के दायरे में बढ़ा दिया है, जो पिछले तीन वर्षों में उसकी पहली दर वृद्धि है।\n\n2. आईएमएफ ने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया को क्या सलाह दी है?\nआईएमएफ ने मुद्रास्फीति के बढ़ते जोखिमों को देखते हुए आरबीए को आवश्यकता पड़ने पर ब्याज दरें बढ़ाने के लिए तैयार रहने की सलाह दी है।\n\n3. बाजार आरबीए द्वारा दर वृद्धि की कितनी संभावना मान रहा है?\nआरबीए रेट ट्रैकर के अनुसार, वित्तीय बाजार लगभग 76% संभावना जता रहे हैं कि आरबीए अगली बैठक में आधिकारिक नकद दर को बढ़ाकर 4.60% कर देगा।\n\n4. डोनाल्ड ट्रंप ने फेडरल रिजर्व के फैसले पर क्या प्रतिक्रिया दी?\nडोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए अमेरिकी केंद्रीय बैंक से ब्याज दरों को घटाकर 1% या उससे भी नीचे लाने की मांग की।\n\n5. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए लौह अयस्क क्यों महत्वपूर्ण है?\nलौह अयस्क ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद है जिसका वार्षिक मूल्य 118 अरब डॉलर रहा है, इसलिए इसकी कीमतों में वृद्धि से ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा की मांग बढ़ती है।\n\n6. तकनीकी विश्लेषण के अनुसार एयूडी/यूएसडी के प्रमुख स्तर क्या हैं?\nयूओबी के अनुसार 0.7175 मजबूत प्रतिरोध है जबकि 0.7080 का 100 दिवसीय एसएमए पहला समर्थन स्तर है, जिसके टूटने पर 0.7050 का रास्ता खुल सकता है।",
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  "publishedAt": "2026-09-19",
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