अमेरिकी महंगाई के झटके के बावजूद संभला न्यूजीलैंड डॉलर, फेडरल रिजर्व की नरमी ने दिया सहारा अमेरिका में उम्मीद से अधिक महंगाई आंकड़ों के बाद भी ब्याज दरों में तत्काल बढ़ोतरी की संभावना कमजोर रहने से न्यूजीलैंड डॉलर मजबूत हुआ है। वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर की सुस्ती के बीच न्यूजीलैंड डॉलर (NZD/USD) ने मजबूती का रुख दिखाया। अमेरिका में महंगाई से जुड़े ताजा आंकड़ों के अनुमान से ज्यादा रहने के बावजूद अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरें न बढ़ाने की संभावनाओं ने डॉलर पर दबाव बनाए रखा। इसके चलते कीवी मुद्रा के रूप में पहचानी जाने वाली यह करेंसी 0.55 प्रतिशत की तेजी दर्ज करते हुए 0.5652 के स्तर तक पहुंच गई। ताजा लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, NZD/USD की विनिमय दर 0.5655 पर पहुंच गई है, जो पिछले 0.5621 के स्तर के मुकाबले 0.59 प्रतिशत की दैनिक बढ़त को दर्शाती है। हाल के दिनों में 0.5580 से 0.5600 के दायरे में बॉटम बनाने के बाद इस जोड़ी ने 11 दिनों के उच्च स्तर 0.5674 को छूने के बाद मौजूदा दायरे में स्थिरता पाई है। महंगाई के आंकड़ों को बाजार ने क्यों किया दरकिनार सत्र के दौरान निवेशकों का ध्यान मुख्य रूप से अमेरिकी महंगाई रिपोर्ट पर टिका रहा, जिससे शुक्रवार को जारी अन्य आर्थिक आंकड़ों को बाजार ने लगभग नजरअंदाज कर दिया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आंकड़ों से पता चला कि सितंबर में औद्योगिक उत्पादन में 0.7 प्रतिशत की मासिक बढ़त हुई, जो अगस्त के 0.1 प्रतिशत विस्तार और बाजार के अनुमानों दोनों से कहीं बेहतर थी। इसके बावजूद औद्योगिक मजबूती डॉलर को सहारा देने में नाकाम रही। मुद्रास्फीति के मोर्चे पर, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) सालाना आधार पर 3.7 प्रतिशत दर्ज किया गया, जिसने 3.6 प्रतिशत के अनुमान को पीछे छोड़ दिया। वहीं दूसरी ओर, उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) सालाना आधार पर 6.3 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो विश्लेषकों के 5.3 प्रतिशत के पूर्वानुमान से पूरा एक प्रतिशत अंक अधिक था। आम तौर पर इस प्रकार के आंकड़े आक्रामक मौद्रिक सख्ती की उम्मीदों को हवा देते हैं, लेकिन इस बार बाजार में अक्टूबर दर वृद्धि की संभावनाओं में कोई बड़ा उछाल देखने को नहीं मिला। फेडरल रिजर्व की नीति और ब्याज दरों का अंतर प्राइम टर्मिनल के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर की बैठक में फेडरल रिजर्व द्वारा नीतिगत ब्याज दर बढ़ाने की संभावना केवल 16 प्रतिशत पर टिकी हुई है। हालांकि, व्यापक दृष्टिकोण को देखें तो दोनों देशों के बीच ब्याज दरों का बड़ा अंतर अब भी न्यूजीलैंड डॉलर पर दबाव बनाए रख सकता है, क्योंकि अमेरिकी ब्याज दरें वर्तमान में न्यूजीलैंड की दरों से 125 आधार अंक अधिक हैं। फेडरल रिजर्व के नीति-निर्माताओं के बयानों ने भी निवेशकों के रुख को प्रभावित किया है। कई अधिकारियों ने 2026 के लिए दो बार दरें बढ़ाने का खाका तैयार किया था, जिनमें से पहली वृद्धि एक महीने पहले हो चुकी है। इन अधिकारियों का मानना है कि इस समय नीतिगत धैर्य की आवश्यकता है, जिससे यह संकेत मिलता है कि अक्टूबर की तुलना में दिसंबर में दर वृद्धि की संभावना कहीं अधिक है। दूसरी ओर, क्लीवलैंड फेड की बेथ हैमैक जैसी आवाजों ने गहरी चिंता जताई है कि महंगाई पिछले साढ़े पांच वर्षों से फेडरल रिजर्व के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर जिद्दी बनी हुई है। न्यूजीलैंड के आगामी आंकड़े और केंद्रीय बैंक की तैयारी न्यूजीलैंड के घरेलू मोर्चे पर इस सप्ताह आर्थिक कैलेंडर शांत रहा, लेकिन आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आने वाले हैं। 18 अक्टूबर को देश का व्यापार संतुलन जारी होने की उम्मीद है, जिसके बाद तिमाही और वार्षिक आधार पर तीसरी तिमाही का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) घोषित किया जाएगा। यह आंकड़े रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड (RBNZ) के आगामी नीतिगत फैसलों के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं। मनी मार्केट्स ने 2027 के अंत तक 114 आधार अंकों की मौद्रिक सख्ती की संभावनाओं को पूरी तरह मूल्य में शामिल कर लिया है। यह दर्शाता है कि प्रमुख मुद्राओं वाले देशों के केंद्रीय बैंकों के बीच न्यूजीलैंड का केंद्रीय बैंक सबसे आक्रामक रुख बनाए हुए है। रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड का प्राथमिक उद्देश्य मध्यम अवधि में मुद्रास्फीति को 1 प्रतिशत से 3 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखना है, जिसमें मुख्य ध्यान 2 प्रतिशत के मध्य-बिंदु पर रहता है। जब मुद्रास्फीति अत्यधिक होती है, तो केंद्रीय बैंक मांग को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरें बढ़ाता है, जिससे बॉन्ड प्रतिफल में सुधार होता है और कीवी मुद्रा विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बन जाती है। तकनीकी स्तर और चार्ट का रुझान चार्ट विश्लेषण के लिहाज से, दैनिक सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) की स्थिति अब भी मंदी के रुझान की ओर इशारा कर रही है। हालांकि, रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) से यह संकेत मिल रहा है कि बाजार में तेजी की गति धीरे-धीरे वापस आ रही है। यह इस बात का प्रारंभिक संकेत हो सकता है कि दीर्घकालिक गिरावट के बावजूद जोड़ी रिवर्सल के शुरुआती चरण में कदम रख रही है। लाइव तकनीकी आंकड़ों के मुताबिक, 14-दिवसीय RSI वर्तमान में 46 पर है और 14-दिवसीय ADX 55 पर ट्रेंडिंग स्थिति दर्शा रहा है। इसके अलावा, एमएसीडी (MACD) शून्य पर है जबकि सिग्नल लाइन -0.01 पर है, जो हिस्टोग्राम पर 0.00 के साथ तेजी का रुझान दिखा रही है। ऊपर की ओर, यदि NZD/USD 0.5750 के स्तर को पुनः प्राप्त कर लेता है, तो यह 50-दिवसीय और 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज के संगम की ओर बढ़ने का रास्ता साफ कर सकता है, जो 0.5775 से 0.5781 के आसपास स्थित हैं। इसके पार जाने पर 0.5800 के अहम स्तर के ऊपर स्थित 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (0.5838) की परीक्षा हो सकती है। लाइव मूविंग एवरेज के संदर्भ में, 50-दिवसीय ईएमए 0.5725 और 200-दिवसीय ईएमए 0.5799 पर है, जहां डेथ क्रॉस बना हुआ है। नीचे की दिशा में मंदी का रुख जारी रहने के लिए जोड़ी को 14 अक्टूबर के निचले स्तर 0.5564 से नीचे फिसलना होगा, जिसके बाद 0.5500 का स्तर अगला समर्थन साबित हो सकता है। फिलहाल 20-दिवसीय निचला दायरा 0.5567 और प्रतिरोध 0.5749 के करीब आंका गया है। कीवी मुद्रा को चलाने वाले व्यापक आर्थिक कारक न्यूजीलैंड डॉलर विदेशी मुद्रा कारोबारियों के बीच एक प्रमुख मुद्रा है, जिसका मूल्य घरेलू आर्थिक स्वास्थ्य और केंद्रीय बैंक की नीतियों के अलावा वैश्विक परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है। चीनी अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन कीवी डॉलर पर सीधा प्रभाव डालता है, क्योंकि चीन न्यूजीलैंड का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। चीन में मंदी की कोई भी खबर न्यूजीलैंड से होने वाले निर्यात को प्रभावित करती है, जिसका नुकसान सीधे तौर पर मुद्रा को उठाना पड़ता है। इसके साथ ही डेयरी कीमतें भी एक बड़ा कारक हैं, क्योंकि डेयरी उत्पाद न्यूजीलैंड का सबसे बड़ा निर्यात खंड हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंची डेयरी कीमतें देश की निर्यात आय को बढ़ाती हैं, जिससे अर्थव्यवस्था और मुद्रा दोनों को सहारा मिलता है। इसके अतिरिक्त, न्यूजीलैंड डॉलर को जोखिम-संवेदनशील मुद्रा माना जाता है। वैश्विक वित्तीय बाजारों में जब जोखिम उठाने की क्षमता (रिस्क-ऑन) मजबूत होती है और विकास को लेकर आशावाद रहता है, तब कमोडिटी से जुड़ी मुद्राओं में तेजी आती है। इसके विपरीत, भू-राजनीतिक तनाव या आर्थिक अनिश्चितता के दौर में निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों से निकलकर डॉलर जैसी सुरक्षित संपत्तियों का रुख करते हैं, जिससे कीवी मुद्रा कमजोर पड़ती है। व्यापक बाजार में डॉलर की कमजोरी का अन्य संपत्तियों पर असर फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष वॉर्श की टिप्पणियों के बाद डॉलर पर बने दबाव का प्रभाव अन्य वित्तीय बाजारों में भी देखा गया। वॉर्श ने भविष्य में ब्याज दरों के रास्ते पर कोई ठोस संकेत दिए बिना केवल मूल्य स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जिससे डॉलर की बिकवाली को बल मिला। इसके चलते एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) ने 0.6950 की ओर बढ़त बनाई, जबकि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन (USD/JPY) 158.00 के स्तर से नीचे फिसल गया। कमोडिटी बाजार में, सोने की कीमतें शुक्रवार को प्रति ट्रॉय औंस 4,200 डॉलर के प्रमुख स्तर के नीचे उतार-चढ़ाव करती नजर आईं। सोने में यह अस्थिरता डॉलर में आई हल्की नरमी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मामूली सुधार के बीच दर्ज की गई। वहीं दूसरी ओर, क्रिप्टो बाजार पूरे अक्टूबर महीने में दबाव में रहा है। बिटकॉइन (BTC) इस सप्ताह 80,000 डॉलर से नीचे लुढ़कने के बाद शुक्रवार को उबरकर 82,000 डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा, क्योंकि मैक्रोइकॉनॉमिक विपरीत परिस्थितियों और कमजोर मांग का असर पूरे डिजिटल एसेट बाजार पर हावी रहा। इसका आप पर असर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर न बढ़ाने के संकेतों और मुद्रा बाजार की हलचलों से वैश्विक अर्थव्यवस्था और निवेशकों पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। • भारतीय बाजार पर असर: अमेरिकी डॉलर में नरमी रहने से भारतीय रुपये को स्थिरता मिल सकती है और आयातित कच्चे तेल की लागत नियंत्रण में रह सकती है। इससे घरेलू महंगाई का दबाव कुछ कम होगा और शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली थम सकती है। • वैश्विक निवेशकों के लिए: कमोडिटी से जुड़ी मुद्राओं में हल्की तेजी से जोखिम वाली संपत्तियों में पूंजी प्रवाह लौट सकता है। जो निवेशक करेंसी ट्रेडिंग से जुड़े हैं, उन्हें ब्याज दरों के 125 आधार अंकों के अंतर को ध्यान में रखकर ही नई स्थिति बनानी चाहिए। • आयात-निर्यात कारोबार: अंतरराष्ट्रीय व्यापार करने वाली कंपनियों के लिए डॉलर की विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव हेजिंग रणनीतियों को प्रभावित करेगा। निर्यातकों को अपने विदेशी मुद्रा अनुबंधों की समय सीमा को लेकर सतर्कता बरतनी होगी। • ऋण और उधारी लागत: अमेरिकी दरों में तत्काल वृद्धि न होने से वैश्विक बाजारों में पूंजी जुटाने की लागत फिलहाल स्थिर बनी रहेगी। हालांकि, दिसंबर में संभावित दर वृद्धि से पहले अंतरराष्ट्रीय कर्ज लेने वाली कंपनियों को वित्तीय योजनाएं संभालनी होंगी। ऐसा क्यों हुआ यह स्थिति तब उत्पन्न हुई जब अमेरिका में महंगाई के आंकड़े काफी अधिक रहने के बावजूद केंद्रीय बैंक के नीति-निर्माताओं ने आक्रामक कदम उठाने से परहेज किया। • फेडरल रिजर्व की नीतिगत सतर्कता: अधिकारियों ने इस समय आक्रामक सख्ती के बजाय धैर्य बरतने पर जोर दिया है, क्योंकि वे पहले ही एक महीने पहले दरें बढ़ा चुके थे। इसके कारण बाजार में अक्टूबर में दर वृद्धि की संभावना घटकर मात्र 16 प्रतिशत रह गई। • जिद्दी महंगाई का दबाव: उपभोक्ता मुद्रास्फीति 3.7 प्रतिशत और उत्पादक मुद्रास्फीति 6.3 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो दोनों ही अनुमानों से अधिक थीं। इसके बावजूद केंद्रीय बैंक तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय दिसंबर की बैठक का इंतजार करने के पक्ष में दिखा। • मुद्रा विनिमय में तकनीकी सुधार: कीवी मुद्रा 0.5580 से 0.5600 के निचले स्तर पर पहुंच चुकी थी, जहां से तकनीकी संकेतकों ने ओवरसोल्ड स्थिति से रिकवरी के संकेत दिए। डॉलर की सुस्ती ने इस तकनीकी उछाल को गति प्रदान की। • न्यूजीलैंड की आक्रामक मौद्रिक उम्मीदें: मनी मार्केट्स 2027 के अंत तक न्यूजीलैंड में 114 आधार अंकों की सख्ती का अनुमान लगा रहे हैं। प्रमुख केंद्रीय बैंकों के मुकाबले यह सबसे आक्रामक रुख है, जिससे न्यूजीलैंड डॉलर को आधार मिला। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी महंगाई के आंकड़े अनुमान से ज्यादा रहने के बाद भी डॉलर क्यों गिरा? फेडरल रिजर्व के अधिकारियों द्वारा नीतिगत धैर्य बरतने के संकेत दिए जाने से अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना केवल 16 प्रतिशत रह गई, जिससे डॉलर कमजोर हुआ। 2. NZD/USD जोड़ी में हाल ही में क्या हलचल देखी गई? यह जोड़ी 0.55 प्रतिशत बढ़कर 0.5652 के स्तर पर पहुंच गई और हाल के दिनों में 0.5674 के 11-दिवसीय उच्च स्तर को छुआ। 3. अमेरिका और न्यूजीलैंड की ब्याज दरों में कितना अंतर है? वर्तमान में अमेरिकी ब्याज दरें न्यूजीलैंड की ब्याज दरों की तुलना में 125 आधार अंक अधिक हैं। 4. न्यूजीलैंड डॉलर के लिए आने वाले दिनों में कौन से आंकड़े महत्वपूर्ण हैं? 18 अक्टूबर को देश का व्यापार संतुलन और उसके बाद तीसरी तिमाही के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़े घोषित किए जाएंगे। 5. कीवी मुद्रा पर चीनी अर्थव्यवस्था का क्या असर पड़ता है? चीन न्यूजीलैंड का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, इसलिए चीन में आर्थिक कमजोरी सीधे न्यूजीलैंड के निर्यात और उसकी मुद्रा को प्रभावित करती है। https://trendkia.com/market/us-inflation-ke-bavajuda-snbhala-nzd-federal-reserve-ki-narami-ne-diya-sahara-48460 TrendKia — Har trend, sabse pehle.