अमेरिका-ईरान हमलों पर रोक से वैश्विक बाजारों में सुधार, फेड बैठक से पहले बदला माहौल मध्य पूर्व में सैन्य अभियानों के थमने और कूटनीतिक बातचीत के संकेतों के बाद सोमवार, 27 जुलाई को वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी है। अमेरिकी डॉलर में कमजोरी के बीच पाउंड और यूरो में मजबूती देखी गई। सोमवार, 27 जुलाई को वैश्विक वित्तीय बाजारों की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ हुई। अमेरिका द्वारा अपने सैन्य अभियानों को अस्थायी रूप से रोकने और ईरान की ओर से भी जवाबी हमलों को थामने के बाद बाजार में भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीद जगी है। इस हफ्ते फेडरल रिजर्व (Fed) और बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) की अहम नीतिगत बैठकों से पहले अमेरिकी डॉलर में चौतरफा कमजोरी देखने को मिली है, जिससे अन्य प्रमुख मुद्राओं और रिस्क एसेट्स को सहारा मिला है। मध्य पूर्व में तनाव कम होने के संकेत और अमेरिकी फैसला संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत ने इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ बातचीत के लिए कुछ समय दे रहे हैं। इसके जवाब में ईरान ने भी अपने जवाबी हमले रोक दिए हैं। इस बीच, अमेरिका के पास गोला-बारूद की कमी होने का दावा करने वाली कुछ रिपोर्टों को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। आईएनजी का विश्लेषण और हॉर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति वित्तीय संस्था आईएनजी (ING) के विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच हमलों पर यह रोक तनाव कम होने का पहला ठोस संकेत है। हालांकि, उनका कहना है कि इसके पीछे के मूल कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं और अमेरिका की ओर से इस पर कोई विस्तृत व्याख्या नहीं दी गई है। आईएनजी के अनुसार, तनाव में आई इस कमी के बावजूद हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के माध्यम से जहाजों की आवाजाही में अभी तक कोई उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज नहीं की गई है। विश्लेषकों ने स्पष्ट किया कि जब तक इस बात की स्पष्टता नहीं हो जाती कि तनाव में कमी स्थायी है और समुद्री जहाज बिना किसी हमले के डर से गुजर सकते हैं, तब तक शिपिंग गतिविधियों में सुधार की संभावना कम ही है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक का रुख और फिलिप लेन के बयान यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के मुख्य अर्थशास्त्री फिलिप लेन के शुक्रवार को दिए गए बयानों का विश्लेषण करते हुए एफएक्सएस स्पीचट्रैकर ने उन्हें 10 में से 5.4 अंक दिए हैं। यह उनके ऐतिहासिक औसत 6.4 से नीचे है, जो एक नरम और कम प्रभाव वाले रुख की ओर इशारा करता है। फिलिप लेन ने हर बैठक के हिसाब से आंकड़े-आधारित निर्णय लेने पर जोर दिया है। उनका यह रुख दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक आक्रामक रूप से ब्याज दरों को बढ़ाने की हड़बड़ी में नहीं है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय अर्थव्यवस्था में वृद्धि जारी है और अगले एक साल या उसके आसपास मुद्रास्फीति को वापस लक्ष्य पर ले आया जाएगा। इस बयान से बाजार को संयम बरतने का संकेत मिला है। मुद्रा बाजार का रुझान: रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ की समझ वित्तीय बाजारों में रिस्क-ऑन (risk-on) और रिस्क-ऑफ (risk-off) दो प्रमुख स्थितियां होती हैं। रिस्क-ऑन माहौल में निवेशक भविष्य को लेकर आशावादी होते हैं और अधिक जोखिम वाले एसेट्स में निवेश करते हैं। ऐसी स्थिति में शेयर बाजार, कमोडिटी और उच्च प्रतिफल वाली मुद्राएं चढ़ती हैं। ऑस्ट्रेलियन डॉलर (AUD), कनाडाई डॉलर (CAD), न्यूजीलैंड डॉलर (NZD), रूसी रूबल (RUB) और दक्षिण अफ्रीकी रैंड (ZAR) जैसी मुद्राएं रिस्क-ऑन माहौल में मजबूत होती हैं क्योंकि ये देश कच्चे माल के निर्यात पर निर्भर हैं। इसके विपरीत, रिस्क-ऑफ माहौल में निवेशक सुरक्षित ठिकाना तलाशते हैं। ऐसे समय में सरकारी बॉन्ड, सोना (Gold) और सुरक्षित मानी जाने वाली मुद्राएं जैसे अमेरिकी डॉलर (USD), जापानी येन (JPY) और स्विस फ्रैंक (CHF) मजबूत होते हैं। अमेरिकी डॉलर दुनिया की रिजर्व करेंसी होने के कारण और जापानी येन घरेलू निवेशकों की मजबूत पकड़ के कारण सुरक्षित माने जाते हैं, जबकि स्विट्जरलैंड के सख्त बैंकिंग कानून स्विस फ्रैंक को सुरक्षा प्रदान करते हैं। प्रमुख करेंसी पेयर्स, गोल्ड और क्रिप्टो मार्केट की चाल बाजार में डॉलर की कमजोरी के कारण विभिन्न करेंसी पेयर्स में निम्नलिखित हलचल देखी गई • USD/JPY: पिछले सप्ताह 164.00 के चार दशक के उच्च स्तर के करीब पहुंचने के बाद, यह करेंसी पेयर सोमवार को यूरोपीय सत्र के दौरान 163.50 के आसपास कारोबार कर रहा था। • GBP/USD: तीन सप्ताह के निचले स्तर से उबरते हुए पाउंड लगातार दूसरे दिन मजबूत हुआ और 1.3350 के स्तर के पास पहुंच गया। • EUR/USD: 5 महीने से चल रहे अमेरिका-ईरान युद्ध के कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों के बीच यूरो 1.1400 के स्तर के पास बना रहा। • गोल्ड (XAU/USD): सोने की कीमतें मामूली बढ़त के साथ $4,100 के स्तर के आसपास रहीं, लेकिन एफओएमसी (FOMC) बैठक से पहले निवेशक सतर्क दिखे। कूटनीतिक बातचीत की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई। • कार्डानो (ADA): क्रिप्टो बाजार में कार्डानो दबाव में दिखा और पिछले हफ्ते की गिरावट के बाद सोमवार को $0.165 पर कारोबार करता नजर आया। इसके डेरिवेटिव्स आंकड़े मंदी के संकेत दे रहे हैं। • ऑस्ट्रेलियन डॉलर (AUD): साल की पहली छमाही में चार साल के उच्चतम स्तर को छूने के बाद इसमें सुधार आया था, लेकिन मध्य पूर्व तनाव के कारण दूसरी छमाही में अनिश्चितता बनी हुई है। इसका आप पर असर वैश्विक निवेशकों के लिए: मध्य पूर्व में तनाव में कमी से कमोडिटी और मुद्रा बाजारों में अस्थिरता कम हो सकती है, जिससे रिस्क एसेट्स में सुधार का माहौल बना है। भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर: कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारत के आयात बिल में राहत मिल सकती है, जो घरेलू मुद्रा और मुद्रास्फीति के लिए सकारात्मक संकेत है। सवाल-जवाब 1. 27 जुलाई को वैश्विक वित्तीय बाजारों में तेजी का क्या कारण रहा? अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य हमलों पर अस्थायी रोक और कूटनीतिक बातचीत के संकेतों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा और बाजारों में सुधार देखा गया। 2. डॉलर में कमजोरी से प्रमुख मुद्राओं पर क्या असर पड़ा? अमेरिकी डॉलर कमजोर होने से पाउंड 1.3350 और यूरो 1.1400 के करीब पहुंचे, जबकि जापानी येन के मुकाबले डॉलर 163.50 पर आ गया। 3. आईएनजी विश्लेषकों ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बारे में क्या कहा? विश्लेषकों के अनुसार हमलों में रोक के बावजूद हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही में अभी कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ है। 4. सोने और कच्चे तेल की कीमतों में क्या रुझान देखने को मिला? सोने की कीमतें $4,100 के पास स्थिर रहीं, जबकि कूटनीतिक उम्मीदों के चलते कच्चे तेल के दामों में गिरावट दर्ज की गई। https://trendkia.com/market/us-iran-hamlon-par-rok-se-vaishvik-bazaaron-mein-sudhar-fed-baithak-se-pehle-badla-maahaul-10803 TrendKia — Har trend, sabse pehle.