अमेरिका-ईरान टकराव तेज होने से कच्चा तेल महंगा, ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर के पार पहुंचा अमेरिका और ईरान के बीच फिर से सैन्य झड़पें शुरू होने से मध्य पूर्व के आपूर्ति मार्गों पर खतरा मंडराया, जिससे ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया और हफ्ते भर में करीब 8% उछल गया, जबकि अमेरिका में डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं। कच्चे तेल के बाजार में इस हफ्ते जबरदस्त हलचल देखने को मिली। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से सैन्य झड़पें शुरू होने से मध्य पूर्व के तेल आपूर्ति मार्गों पर खतरे की आशंका गहरा गई, जिसके चलते निवेशकों ने ऊर्जा बाजार में सतर्कता बरतनी शुरू कर दी। यूओबी के रणनीतिकारों के मुताबिक ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के पार बंद हुआ, और यह हफ्ता हाल के महीनों में तेल के लिए सबसे मजबूत साबित हुआ। ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई: आंकड़ों में पूरी तस्वीर ब्रेंट क्रूड वायदा 76 सेंट की बढ़त के साथ 96.28 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। वहीं अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) 18 सेंट चढ़कर 91.48 डॉलर प्रति बैरल पर सेटल हुआ। पूरे हफ्ते के हिसाब से देखें तो ब्रेंट में करीब 8% और डब्ल्यूटीआई में लगभग 10% की तेजी दर्ज हुई, जो हाल के समय में दोनों बेंचमार्क के लिए सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त में शुमार है। हफ्ते की शुरुआत में ही यूओबी के रणनीतिकारों ने तेल कीमतों में संचयी रूप से 7% से ज्यादा की बढ़त की जानकारी दी थी, जब यह खबर आई कि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य झड़पें फिर शुरू हो गई हैं और यह टकराव अब अपने सातवें महीने में पहुंच चुका है। हफ्ता खत्म होते-होते दोनों बेंचमार्क ने अपनी बढ़त और बढ़ा ली, जिससे ब्रेंट लगभग 8% और डब्ल्यूटीआई करीब 10% ऊपर पहुंच गया। यूओबी के रणनीतिकारों ने कहा, "अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य झड़पें फिर शुरू होने के बाद, जो अब उनके टकराव का सातवां महीना है, तेल कीमतों में हफ्ते भर में 7% से ज्यादा की बढ़त दर्ज हुई।" मध्य पूर्व में तनाव फिर सुर्खियों में क्यों है तेल बाजार में यह नई खरीदारी सीधे तौर पर अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू हुई झड़पों की वजह से आई है। यूओबी के रणनीतिकारों ने बताया कि मध्य पूर्व के आपूर्ति मार्गों में लगातार बाधाएं आ रही हैं, और इसे किसी एक बार के झटके की बजाय ऊर्जा कीमतों के लिए एक लगातार बना रहने वाला दबाव बताया गया है। इसका मतलब है कि कारोबारी इसे कोई अस्थायी उछाल नहीं, बल्कि तब तक बना रहने वाला जोखिम मान रहे हैं जब तक यह टकराव जारी है। इस पूरे जोखिम के केंद्र में है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, वह संकरा समुद्री मार्ग जिस पर कारोबारियों और विश्लेषकों की सबसे ज्यादा नजर टिकी है। यूओबी के रणनीतिकारों ने कहा कि वित्तीय बाजार मध्य पूर्व और खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हो रहे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखेंगे, क्योंकि ऊर्जा आपूर्ति में किसी भी और बाधा के संकेत बाजार के जोखिम रुझान और तेल कीमतों, दोनों को प्रभावित कर सकते हैं। ताजा अपडेट में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी नई बाधा की पुष्टि नहीं की गई, लेकिन इसे अलग से रेखांकित किया जाना बताता है कि इस मार्ग से जुड़ी किसी भी हलचल को लेकर बाजार कितना संवेदनशील हो चुका है। डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर तेल की यह तेजी सिर्फ कच्चे तेल के बेंचमार्क तक सीमित नहीं रही। इसी दौरान अमेरिका में डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं, जो दिखाता है कि टकराव का असर सिर्फ कच्चे तेल तक नहीं बल्कि रिफाइंड ईंधन उत्पादों तक भी पहुंच रहा है। इस उछाल का पैमाना डीजल क्रैक स्प्रेड में साफ नजर आता है, यानी अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल वायदा डब्ल्यूटीआई क्रूड के मुकाबले जितना प्रीमियम कमाता है। हाल ही में यह स्प्रेड पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया, और कारोबार के दौरान एक समय यह 102.00 डॉलर से थोड़ा ऊपर के इंट्राडे रिकॉर्ड तक पहुंच गया। इतना बड़ा क्रैक स्प्रेड बताता है कि डीजल रिफाइनिंग मार्जिन काफी तेजी से बढ़ा है, यानी रिफाइनरियां कच्चे तेल की तुलना में डीजल के लिए काफी ज्यादा कीमत वसूल पा रही हैं। हाल के महीनों में तेल बाजार अपेक्षाकृत शांत नजर आ रहा था, ऐसे में डीजल में यह उछाल एक अलग और साफ चेतावनी संकेत के तौर पर सामने आया है, जो ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई की मुख्य हलचल से अलग है। सात महीने का टकराव, और समाधान का कोई संकेत नहीं यूओबी के रणनीतिकारों के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य झड़पें अब सातवें महीने में पहुंच चुकी हैं। इतने लंबे समय तक चलने वाला टकराव बाजार के लिए किसी अचानक आई खबर से कहीं ज्यादा गंभीर संकेत होता है, क्योंकि इससे यह भरोसा कमजोर पड़ता है कि आपूर्ति जल्द सामान्य हो जाएगी। स्रोत सामग्री में यह नहीं बताया गया कि आगे यह टकराव किस दिशा में बढ़ेगा या आपूर्ति मार्ग कब तक सामान्य होंगे, लेकिन इतना साफ है कि बाजार इसे लेकर लगातार सतर्क बना हुआ है। ऊर्जा और जोखिम बाजारों के लिए इसके क्या मायने हो सकते हैं जब कच्चे तेल और डीजल दोनों में इस तरह लगातार बढ़त बनी रहती है, तो इसका असर सिर्फ ट्रेडिंग स्क्रीन तक सीमित नहीं रहता। ऊर्जा से जुड़ी कीमतों में उछाल आमतौर पर व्यापक जोखिम धारणा, ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े शेयरों और आम उपभोक्ता कीमतों तक असर डालता है। ऐसे में जब तक अमेरिका-ईरान टकराव और मध्य पूर्व के आपूर्ति मार्गों को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है, ऊर्जा बाजार में यह उतार-चढ़ाव जारी रहने की आशंका है। आगे बाजार की नजर किन बातों पर रहेगी यूओबी के रणनीतिकारों ने कहा कि आगे चलकर वित्तीय बाजार मध्य पूर्व और खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए रखेंगे, क्योंकि ऊर्जा आपूर्ति में किसी भी और बाधा के संकेत जोखिम धारणा और तेल कीमतों, दोनों को प्रभावित कर सकते हैं। अमेरिका-ईरान टकराव अब अपने सातवें महीने में पहुंच चुका है, ऐसे में कारोबारी इसे सुलझा हुआ मामला मानने की बजाय एक लगातार बना रहने वाला जोखिम मानकर चल रहे हैं, और आने वाले दिनों में इस क्षेत्र से आने वाली हर ताजा खबर पर बाजार की प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। इसका आप पर असर कच्चे तेल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़त सिर्फ ट्रेडिंग स्क्रीन तक सीमित नहीं रहती, इसका असर ईंधन खरीदने वाले, सामान ढोने वाले और ऊर्जा से जुड़े निवेश करने वाले हर किसी पर पड़ सकता है। • पेट्रोल-डीजल की कीमतें: ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई की ऊंची सेटलमेंट कीमतें आमतौर पर कुछ दिनों से हफ्तों में खुदरा पेट्रोल-डीजल कीमतों में झलकने लगती हैं। अगर यह तेजी बनी रहती है तो वाहन चालकों और ट्रांसपोर्टरों का ईंधन खर्च बढ़ सकता है। • ढुलाई और लॉजिस्टिक्स लागत: अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार गया है, यानी क्रूड के मुकाबले डीजल खुद महंगा हो रहा है। सड़क और समुद्री माल ढुलाई करने वाली कंपनियां यह बढ़ी लागत ग्राहकों पर डाल सकती हैं। • आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाएं: भारत जैसे देश, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करके पूरा करते हैं, ब्रेंट की कीमतों में उतार-चढ़ाव से सीधे प्रभावित होते हैं। लंबे समय तक तेजी बनी रहने पर आयात बिल बढ़ सकता है और रुपये व महंगाई पर दबाव आ सकता है। • निवेशक: अगर ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई की साप्ताहिक बढ़त बनी रहती है तो ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों, तेल वायदा और संबंधित ईटीएफ में तेजी जारी रह सकती है, जबकि एयरलाइन और परिवहन जैसे ईंधन-संवेदनशील क्षेत्रों पर मार्जिन का दबाव बढ़ सकता है। • यात्रा खर्च: अगर एयरलाइंस और परिवहन कंपनियां आने वाले हफ्तों में ईंधन सरचार्ज बढ़ाती हैं तो हवाई और सड़क यात्रा महंगी हो सकती है। सवाल-जवाब 1. ब्रेंट क्रूड किस कीमत पर बंद हुआ? ब्रेंट क्रूड वायदा 76 सेंट चढ़कर 96.28 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। 2. डब्ल्यूटीआई क्रूड की सेटलमेंट कीमत कितनी रही? वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड 18 सेंट चढ़कर 91.48 डॉलर प्रति बैरल पर सेटल हुआ। 3. हफ्ते भर में तेल कीमतों में कितनी तेजी आई? ब्रेंट में हफ्ते भर में करीब 8% और डब्ल्यूटीआई में लगभग 10% की बढ़त दर्ज हुई, इससे पहले संचयी रूप से 7% से ज्यादा की बढ़त पहले ही दर्ज की जा चुकी थी। 4. तेल कीमतें क्यों बढ़ रही हैं? अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू हुई सैन्य झड़पों, जो अब उनके टकराव का सातवां महीना है, ने मध्य पूर्व के आपूर्ति मार्गों को बाधित किया है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चिंता बढ़ा दी है। 5. डीजल की कीमतों का क्या हाल है? अमेरिका में डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं, और डब्ल्यूटीआई के मुकाबले डीजल क्रैक स्प्रेड पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार गया, जो इंट्राडे में 102.00 डॉलर से थोड़ा ऊपर तक पहुंच गया। 6. आगे बाजार किन बातों पर नजर रखेगा? वित्तीय बाजार मध्य पूर्व और खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हो रहे घटनाक्रम पर करीबी नजर रखेंगे, क्योंकि ऊर्जा आपूर्ति में किसी भी और बाधा के संकेत जोखिम धारणा और तेल कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। https://trendkia.com/market/us-iran-takarava-teja-hone-se-kachcha-tela-mahnga-brent-kruda-96-dolara-ke-para-pahuncha-28907 TrendKia — Har trend, sabse pehle.