पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव से उछले कच्चे तेल के दाम, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया फिर फिसला अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य हमलों से क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे भारतीय रुपया दबाब में आ गया है। बाजार में भारतीय रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप की संभावना बढ़ गई है। पश्चिम एशिया में भूराजनीतिक गतिरोध गहराने और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने के कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये पर दबाव फिर से बढ़ गया है। मध्य पूर्व क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की बढ़ती आशंकाओं के बीच मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें आर्थिक चुनौतियां खड़ी कर रही हैं, जिससे रुपये की विनिमय दर प्रभावित हुई है। इस बीच, निवेशकों की निगाहें अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आने वाले आंकड़ों पर टिकी हैं, जो आगामी ब्याज दरों के रुख को लेकर नई दिशा तय करेंगे। पश्चिम एशिया में सैन्य झड़पों से हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही घटी अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ हफ्तों के दौरान बढ़े जवाबी सैन्य हमलों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को चिंता में डाल दिया है। इस भूराजनीतिक खींचतान के चलते हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले टैंकरों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 7 सितंबर को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से केवल 7 कमोडिटी जहाज गुजरे, जबकि इससे पिछले दिन यानी 6 सितंबर को यह संख्या 8 थी। मध्य पूर्व में युद्ध शुरू होने से पहले इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से औसतन 130 से 140 जहाज रोजाना गुजरते थे। जहाजों की इस आवाजाही में आई बड़ी कमी से आपूर्ति श्रृंखला लंबे समय तक प्रभावित रहने का डर पैदा हो गया है। वायदा बाजार में क्रूड उछला और लाइव मार्केट के संकेतक ऊर्जा बाजार में जारी उठापटक का असर भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर स्पष्ट दिखाई दिया। 21 सितंबर को समाप्त होने वाला एमसीएक्स क्रूड ऑयल कॉन्ट्रैक्ट शुरुआती कारोबारी सत्र के दौरान 2 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 8,920 रुपये के आसपास कारोबार करता नजर आया। अंतर्राष्ट्रीय मोर्चे पर भी कच्चे तेल के भाव मजबूत बने हुए हैं। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार डब्लूटीआई क्रूड ऑयल वायदा 0.95 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 93.91 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव 93.03 डॉलर से अधिक है। पिछले 52 हफ्तों के दौरान कच्चे तेल का दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहा है। तकनीकी संकेतकों की बात करें तो 14-दिवसीय आरएसआई 69 के स्तर पर है, जो मजबूत खरीदारी को दर्शाता है। वहीं मैकडी 2.80 पर है जो सिग्नल लाइन 1.94 के ऊपर बना हुआ है, जिससे बुलिश ट्रेंड की पुष्टि होती है। 20-दिवसीय ईएमए 87.29 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 84.84 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 77.26 डॉलर पर स्थित है। वर्तमान में पिवट प्वाइंट 94.15 डॉलर पर है, जबकि पहला प्रतिरोध R1 94.54 डॉलर और दूसरा प्रतिरोध R2 95.17 डॉलर पर देखा जा रहा है। नीचे की तरफ पहला समर्थन S1 93.52 डॉलर और दूसरा समर्थन S2 93.13 डॉलर पर मौजूद है। यूएसडी और आईएनआर का तकनीकी विश्लेषण एवं प्रमुख चार्ट स्तर डेली प्राइस चार्ट पर यूएसडी और आईएनआर की जोड़ी 95.07 के स्तर पर कारोबार करती दिखी। इस करेंसी पेयर ने निचले स्तरों से रिकवरी दर्ज करते हुए 95.1338 पर स्थित 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज के करीब पहुंचने का प्रयास किया है, जिससे निचले स्तरों पर डॉलर की मांग का पता चलता है। 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स भी कुछ दिनों तक 40.00 से नीचे रहने के बाद तेजी से सुधरकर 40.00 से 60.00 के जोन में वापस आ गया है। तकनीकी दृष्टिकोण से 95.13 के आसपास स्थित 20-दिवसीय ईएमए पहला मुख्य प्रतिरोध है। यदि दैनिक कारोबार इस स्तर के ऊपर बंद होने में सफल रहता है, तो बिकवाली का दबाव कम होगा और 95.50 के स्तर की ओर टिकाऊ रिकवरी का रास्ता खुल सकता है। दूसरी ओर जून महीने का निचला स्तर 94.15 रुपये के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन बना हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक का गुप्त हस्तक्षेप और फॉरेक्स बाजार की चाल भारतीय मुद्रा में आई हालिया तेज गिरावट के कारण विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रिजर्व बैंक के गुप्त हस्तक्षेप की अटकलें तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि केंद्रीय बैंक ने स्पॉट मार्केट और नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड बाजारों के जरिए रुपये की गिरावट को रोकने की कोशिश की है। विदेशी मुद्रा व्यापारियों के अनुसार मंगलवार के सत्र के दौरान केंद्रीय बैंक की मौजूदगी बाजार में देखी गई, लेकिन यह हस्तक्षेप रुपये को कमजोर होने से पूरी तरह रोकने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुआ। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयातित तेल पर निर्भर रहता है, इसलिए जब भी कच्चे तेल के वैश्विक दाम चढ़ते हैं, तब भारतीय रुपये जैसी मुद्राओं का प्रदर्शन अन्य मुद्राओं की तुलना में कमजोर हो जाता है। रुपये को प्रभावित करने वाले मैक्रोइकोनॉमिक कारक और नीतियां भारतीय रुपये का मूल्य कई आंतरिक और बाह्य आर्थिक कारकों से तय होता है। इनमें कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी डॉलर की वैश्विक मजबूती और विदेशी निवेश का प्रवाह सबसे प्रमुख हैं। भारतीय रिजर्व बैंक रुपये की विनिमय दर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए सीधे बाजार में हस्तक्षेप करता है। इसके अलावा केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीति के तहत ब्याज दरों को समायोजित करके मुद्रास्फीति को अपने 4 प्रतिशत के लक्ष्य के आसपास बनाए रखने का प्रयास करता है। आमतौर पर ऊंची ब्याज दरें रुपये को सहारा देती हैं, क्योंकि इससे कैरी ट्रेड का आकर्षण बढ़ता है। अंतर्राष्ट्रीय निवेशक कम ब्याज दर वाले देशों से कर्ज लेकर उच्च ब्याज दर वाले देशों में पूंजी लगाते हैं और ब्याज दरों के अंतर का लाभ उठाते हैं। मुद्रास्फीति, जीडीपी विकास दर, व्यापार संतुलन और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश तथा एफआईआई का प्रवाह भी रुपये को मजबूती या कमजोरी प्रदान करते हैं। जब भारत की आर्थिक वृद्धि दर ऊंची होती है या व्यापार घाटा कम होता है, तब रुपये की मांग बढ़ती है। वैश्विक मुद्रा बाजार, सोना और डीजल क्रैक स्प्रेड का हाल अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अन्य परिसंपत्तियों पर भी हलचल देखी जा रही है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7200 के स्तर से ऊपर समेकित होता नजर आया। चीन के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और उत्पादक मूल्य सूचकांक के मजबूत आंकड़ों तथा ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावनाओं से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन मिला। उधर जापानी येन में मजबूती और बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत सामान्यीकरण की उम्मीदों के कारण यूएसडी और जेपीवाई की जोड़ी में गिरावट दर्ज की गई। कीमती धातुओं में सोना अपने एक सप्ताह के निचले स्तर 4,350 डॉलर के करीब से संभलकर वापस उछला है। दूसरी ओर तेल रिफाइनिंग बाजार में डीजल क्रैक स्प्रेड ने नया रिकॉर्ड बनाया है। यूएस डीजल क्रैक स्प्रेड इतिहास में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया और इसने 102.00 डॉलर प्रति बैरल का सर्वकालिक उच्च स्तर छू लिया। इसका आप पर असर पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत में ईंधन की कीमतों से लेकर रोजमर्रा के बजट तक को प्रभावित कर सकती हैं। • भारत में: कच्चे तेल के दाम बढ़ने से देश का आयात बिल बढ़ेगा और घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इससे माल ढुलाई महंगी होने के कारण आम उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें बढ़ेंगी और मुद्रास्फीति पर दबाव बनेगा। • भारत में: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के कमजोर होने से विदेश यात्रा, विदेशों में पढ़ाई और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी आयातित वस्तुएं महंगी हो जाएंगी। कंपनियों की लागत बढ़ने से शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। • पेट्रोल और डीजल उपभोक्ता: अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल 93.91 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा। यदि कीमतें ऐसे ही ऊंची बनी रहीं तो आने वाले दिनों में ईंधन की खुदरा कीमतों में संशोधन हो सकता है। • विदेशी निवेशक और व्यापारी: रुपये में गिरावट से विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार से पूंजी निकाल सकते हैं। व्यापारियों को आयात-निर्यात के ठेकों की हेजिंग पर अधिक ध्यान देना होगा। ऐसा क्यों हुआ पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष और आपूर्ति में आई रुकावटों ने कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है, जिससे भारतीय रुपये की विनिमय दर पर दबाव बना है। • सैन्य तनाव और हमलों में बढ़ोतरी: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ हफ्तों से चल रहे जवाबी हमलों ने मध्य पूर्व से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं को जन्म दिया है। • हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की घटती संख्या: 7 सितंबर को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से केवल 7 कमोडिटी जहाज गुजरे, जो युद्ध पूर्व 130 से 140 जहाजों के दैनिक औसत से बेहद कम है। इस जलमार्ग में बाधा से वैश्विक तेल आपूर्ति संकट गहराया है। • भारत की उच्च तेल निर्भरता: भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। तेल महंगा होने पर डॉलर की मांग बढ़ती है, जिससे रुपया कमजोर होता है। • केंद्रीय बैंक का सीमित असर: भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा स्पॉट और फॉरवर्ड मार्केट में किए गए हस्तक्षेप के बावजूद डॉलर की भारी मांग के कारण रुपये को बड़ी रिकवरी नहीं मिल सकी। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया क्यों गिर रहा है? अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव से वैश्विक कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं। भारत बड़ी मात्रा में तेल आयात करता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ी है और रुपया कमजोर हुआ है। 2. हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की संख्या पर क्या असर पड़ा है? 7 सितंबर को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से केवल 7 कमोडिटी जहाज गुजरे, जबकि युद्ध शुरू होने से पहले यहाँ से रोजाना औसतन 130 से 140 जहाज गुजरते थे। 3. यूएसडी और आईएनआर के लिए प्रमुख तकनीकी स्तर कौन से हैं? यूएसडी/आईएनआर 95.07 पर कारोबार कर रहा है। इसके लिए 95.13 पर 20-दिवसीय ईएमए पहला प्रतिरोध है और 95.50 अगला लक्ष्य है। नीचे की तरफ 94.15 का स्तर मजबूत सहारा (सपोर्ट) प्रदान कर रहा है। 4. क्या भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये को संभालने के लिए हस्तक्षेप किया है? व्यापारियों के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक ने स्पॉट और नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड (एनडीएफ) बाजारों के जरिए बाजार में मौजूदगी दर्ज कराई है, लेकिन गिरावट रोकने के लिए यह पर्याप्त नहीं रही। 5. लाइव मार्केट में कच्चे तेल की कीमत और मुख्य संकेतक क्या हैं? डब्लूटीआई क्रूड ऑयल 93.91 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। इसका 14-दिवसीय आरएसआई 69 पर है और मैकडी 2.80 पर बना हुआ है, जो बुलिश ट्रेंड को दर्शाते हैं। https://trendkia.com/market/us-iran-tit-for-tat-strikes-boost-crude-oil-as-indian-rupee-falls-further-and-rbi-intervention-odds-rise-30088 TrendKia — Har trend, sabse pehle.