अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में महंगाई का इम्तिहान: मजबूत विकास दर के बावजूद परिवारों पर बढ़ता दबाव और वैश्विक बाजारों में हलचल मजबूत जीडीपी और कम बेरोजगारी के बावजूद अमेरिका में रहन-सहन की ऊंची लागत मध्यावधि चुनावों पर भारी पड़ रही है। उधर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और दर फैसलों से मुद्रा तथा कमोडिटी बाजारों में दबाव देखा जा रहा है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में कागजी आंकड़ों पर नजर डालें तो आर्थिक विकास स्थिर दिखता है, रोजगार बाजार मजबूत बना हुआ है और उपभोक्ता खर्च भी थमता नजर नहीं आ रहा है। इसके बावजूद आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी में बढ़ती महंगाई ने गहरी चिंताएं खड़ी कर दी हैं। परिवारों के बजट पर रहन-सहन का भारी खर्च लगातार दबाव बना रहा है, जिससे आगामी मध्यावधि चुनाव में सियासी समीकरण बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है। निचले तबके के कामगारों की कमजोर वेतन वृद्धि और आवास के महंगे होते खर्च ने वास्तविक क्रय शक्ति को बुरी तरह घटा दिया है, जिससे चुनावी नतीजों के बाद भी नीति निर्माताओं के पास तुरंत राहत देने के सीमित साधन ही उपलब्ध होंगे। संसद पर नियंत्रण और नीतिगत सीमाओं की पेचीदगी आर्थिक संकेतकों के सतही तौर पर अनुकूल दिखने के बाद भी राजनीतिक स्तर पर रिपब्लिकन पार्टी संसद पर अपनी पकड़ गंवा सकती है। मैक्रो स्तर के समग्र आंकड़े जिस सहजता को दर्शाते हैं, जमीनी हकीकत में घरेलू खर्च उससे कहीं ज्यादा भारी पड़ रहा है। चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा जनता की सामर्थ्य यानी अफोर्डेबिलिटी रहने की संभावना है, लेकिन संसद में जीत दर्ज करने वाले किसी भी दल के लिए इस संकट से निपटना आसान नहीं होगा। भविष्य में मुद्रास्फीति किस दिशा में जाएगी, वह मुख्य रूप से दो बातों पर टिकी है: ईरान से जुड़ा ताजा संघर्ष किस तरह आगे बढ़ता है और मौद्रिक नीति का असर कितना प्रभावी साबित होता है। ईरान संकट और ऊर्जा कीमतों में उछाल से सोने पर दबाव वैश्विक कमोडिटी बाजार में भू-राजनीतिक तनावों का सीधा असर देखने को मिल रहा है। मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेजी लौटने के साथ ही सोने की रफ्तार धीमी पड़ गई। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, ईरान के कश्म द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हुई। इस उथल-पुथल के बीच पीली धातु अंतरराष्ट्रीय बाजार में 0.93 प्रतिशत टूटकर 3,909 डॉलर के आसपास कारोबार करती देखी गई। तेल के भाव चढ़ने से मुद्रास्फीति के लंबे समय तक बने रहने का डर फिर ताजा हो गया है। डॉलर सूचकांक और प्रमुख मुद्रा जोड़ियों का मिजाज अमेरिकी डॉलर सूचकांक अपने कारोबारी सत्र के निचले स्तरों से कुछ सुधरता नजर आया, हालांकि यह 102.00 के दायरे से नीचे ही बना रहा। कच्चे तेल के चढ़ते दाम और पश्चिम एशिया में जारी तनाव डॉलर को सहारा दे रहे हैं, लेकिन मध्यावधि चुनाव से जुड़ी घरेलू राजनीतिक अनिश्चितता इसके लाभ को सीमित कर रही है। दूसरी तरफ, येन के मुकाबले डॉलर एशियाई सत्र में नरम पड़कर 158.00 के पिछले स्तरों से थोड़ा पीछे खिसक गया। डॉलर में यह नरमी कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदों और मध्यावधि मतदान के इंतजार के चलते आई है। जापानी मुद्रा को संभावित सरकारी दखल के जोखिम से समर्थन मिल रहा है, जबकि बैंक ऑफ जापान द्वारा अगली दर वृद्धि के अनिश्चित समय ने इसकी बढ़त को सीमित दायरे में बांध रखा है। ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक का दर फैसला और दबाव करेंसी बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मंगलवार को लगातार दूसरे दिन कमजोर रहा। ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक द्वारा नीतिगत दरों में 25 आधार अंकों की बहुप्रतीक्षित बढ़ोतरी किए जाने के बाद भी यह एशियाई सत्र के दौरान दो सप्ताह के निचले स्तर पर लुढ़क गया। इस दर वृद्धि पर बैंक बोर्ड पूरी तरह एकमत नहीं था, क्योंकि तीन सदस्य ब्याज दर को 4.60 प्रतिशत पर ही अपरिवर्तित रखने के पक्ष में थे। इस बंटे हुए फैसले ने नीतिगत सख्ती के भविष्य के कदमों पर विराम लगने की धारणा को मजबूत किया है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर दबाव बढ़ गया। डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में मंदी का रुख क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी मंगलवार को भारी दबाव नजर आया। प्रमुख डिजिटल टोकन बिटकॉइन फिसलकर 76,566 डॉलर पर आ गया, जहां यह पिछले छह हफ्तों के निचले स्तर का परीक्षण कर रहा था। इसी तरह इथेरियम भी सीमित समर्थन स्तर के बीच भारी दबाव में जूझता रहा। वहीं रिपल मामूली बढ़त के साथ 1.25 डॉलर के ठीक ऊपर टिका रहा। समग्र वित्तीय परिदृश्य में भू-राजनीतिक टकराव, केंद्रीय बैंकों के कदम और अमेरिकी चुनाव की अनिश्चितता एक साथ मिलकर परिसंपत्ति वर्गों को गहरे उतार-चढ़ाव में धकेल रहे हैं। इसका आप पर असर बढ़ती महंगाई और अंतरराष्ट्रीय तनाव से आम नागरिकों के घरेलू बजट और वित्तीय निवेश पर सीधा असर पड़ सकता है। • कच्चे तेल और ईंधन पर: अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण तेल के दामों में उछाल आने से ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं। यदि यह स्थिति जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में माल ढुलाई और दैनिक यात्रा महंगी हो सकती है। • सोने के निवेशकों के लिए: सोने के भाव टूटकर 3,909 डॉलर के करीब आने से नए खरीदारों को भाव में थोड़ी नरमी दिखी है। हालांकि भू-राजनीतिक अनिश्चितता को देखते हुए निवेशकों को सतर्कता के साथ धीरे-धीरे खरीदारी करनी चाहिए। • क्रिप्टोकरेंसी के खरीदारों पर: बिटकॉइन फिसलकर छह हफ्ते के निचले स्तर 76,566 डॉलर पर आ गया है। कमजोर रुख को देखते हुए खुदरा निवेशकों को किसी भी बड़े निवेश से पहले बाजार के संभलने का इंतजार करना चाहिए। • विदेशी मुद्रा और ब्याज दरों पर: ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक द्वारा दर 4.60 प्रतिशत से 25 आधार अंक बढ़ाने के बाद भी दर चक्र थमने के संकेत हैं। विदेश यात्रा या विदेशी शिक्षा के लिए मुद्रा बदलने वाले लोगों को विनिमय दरों की निगरानी करनी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी अर्थव्यवस्था में आर्थिक आंकड़ों और नागरिकों के वास्तविक खर्च के बीच बढ़ते अंतर तथा पश्चिम एशिया में सैन्य टकराव ने इन वैश्विक बदलावों को जन्म दिया है। • जीवन-यापन लागत का दबाव: मजबूत आर्थिक वृद्धि और कम बेरोजगारी के बावजूद आवास खर्च और कमजोर वेतन बढ़ोतरी ने घरेलू क्रय शक्ति को घटा दिया है। इस असंतोष के चलते मध्यावधि चुनावों में मतदाताओं का रुख सख्त हुआ है। • सैन्य कार्रवाई और तेल का उछाल: ईरान के कश्म द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर आशंकाएं फिर भड़क उठीं। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने सोने के आकर्षण को कमजोर किया और डॉलर को सहारा दिया। • केंद्रीय बैंकों की विभाजित राय: ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक में दर को 4.60 प्रतिशत पर रखने के पक्ष में तीन सदस्यों के खड़े होने से आगे सख्ती की उम्मीदें कमजोर हुईं। इस नीतिगत विभाजन ने मुद्रा पर दबाव बना दिया। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मजबूत विकास के बावजूद मध्यावधि चुनाव में क्या मुख्य संकट है? मजबूत विकास और कम बेरोजगारी के बावजूद रहन-सहन की ऊंची लागत और आवास दबाव के कारण परिवारों की क्रय शक्ति घट रही है, जिससे चुनाव में असंतोष बढ़ रहा है। 2. कच्चे तेल में तेजी आने पर सोने की कीमत पर क्या असर पड़ा? कच्चे तेल में उछाल के बाद सोने की रफ्तार थमी और यह 0.93 प्रतिशत गिरकर लगभग 3,909 डॉलर पर कारोबार करने लगा। 3. ईरान के किस क्षेत्र पर हमले की बात सामने आई है? वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार ईरान के कश्म द्वीप पर अमेरिकी हमले की बात कही गई है। 4. ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों को लेकर क्या कदम उठाया? केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की, हालांकि तीन सदस्य दर को 4.60 प्रतिशत पर रखने के पक्ष में थे। 5. डिजिटल करेंसी बाजार में बिटकॉइन और अन्य टोकन किस स्तर पर कारोबार कर रहे हैं? बिटकॉइन 76,566 डॉलर पर छह हफ्ते के निचले स्तर पर आ गया, जबकि इथेरियम दबाव में रहा और रिपल 1.25 डॉलर के थोड़ा ऊपर टिका रहा। 6. अमेरिकी डॉलर सूचकांक का दायरा क्या रहा? डॉलर सूचकांक अपने निचले स्तर से सुधरने के बावजूद 102.00 के स्तर से नीचे ही बना रहा। https://trendkia.com/market/us-madhyavadhi-chunava-men-mahngai-ka-imtihana-majabuta-vikasa-dara-ke-bavajuda-parivaron-para-barhata-dabava-aura-vaishvika-bajar-55866 TrendKia — Har trend, sabse pehle.