# अमेरिकी मध्यावधि चुनावों और बैंक ऑफ इंग्लैंड के फैसले से पहले पाउंड स्टर्लिंग में सुस्ती

> अमेरिकी मध्यावधि चुनाव, बैंक ऑफ इंग्लैंड की ब्याज दर बैठक और प्रमुख आर्थिक आंकड़ों से पहले जीबीपी/यूएसडी में दबाव देखा जा रहा है। चार दिनों की तेजी थमने के बाद मुद्रा जोड़ी 1.3405 के स्तर के इर्द-गिर्द कारोबार कर रही है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/us-madhyavadhi-chunavon-aura-boe-ke-phaisale-se-pahale-british-pound-men-susti-55389 · **Language:** Hindi
**Tags:** जीबीपी यूएसडी, पाउंड स्टर्लिंग, बैंक ऑफ इंग्लैंड, अमेरिकी चुनाव, विदेशी मुद्रा, फेडरल रिजर्व, सोना, वित्त

वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में मंगलवार के शुरुआती एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ब्रिटिश पाउंड पर दबाव देखा गया और जीबीपी/यूएसडी जोड़ी फिसलकर 1.3405 के आसपास आ गई। इसके साथ ही पिछले चार कारोबारी सत्रों से जारी पाउंड की बढ़त का सिलसिला भी फिलहाल थम गया है। वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस सप्ताह कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रम होने जा रहे हैं, जिनके चलते निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। इन प्रमुख उत्प्रेरकों में अमेरिका के मध्यावधि चुनाव, बैंक ऑफ इंग्लैंड (बीओई) की आगामी मौद्रिक नीति बैठक और अमेरिका के सितंबर महीने के रोजगार आंकड़े शामिल हैं।

## अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के संभावित राजनीतिक और वित्तीय परिदृश्य
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों को लेकर वित्तीय बाजारों में व्यापक अनिश्चितता और सतर्कता बनी हुई है। अर्थशास्त्रियों के विश्लेषण के अनुसार, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेट्स की जीत की व्यापक संभावनाएं जताई जा रही हैं। यदि डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों पर पूर्ण नियंत्रण हासिल करने में सफल रहती है, तो निवेशक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) क्षेत्र पर सख्त नियमन और कड़ी निगरानी की उम्मीद कर रहे हैं, जिससे वित्तीय बाजारों और तकनीकी शेयरों पर दबाव देखने को मिल सकता है।

इसके विपरीत, यदि चुनाव नतीजों में डेमोक्रेट्स केवल प्रतिनिधि सभा पर कब्जा करते हैं और रिपब्लिकन पार्टी सीनेट पर अपना नियंत्रण बरकरार रखती है, तो अमेरिकी राजकोषीय परिदृश्य पर इसका मिश्रित प्रभाव पड़ने की संभावना है। वहीं, अगर रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदनों में पूर्ण जीत हासिल करती है, तो बाजार यह अनुमान लगा रहा है कि प्रशासन नए कर सुधार पेश कर सकता है या रक्षा खर्च में भारी बढ़ोतरी कर सकता है। इस तरह के राजकोषीय कदमों से अमेरिका का पहले से ही भारी बजट घाटा और अधिक बढ़ सकता है, जिससे बॉन्ड प्रतिफल और मुद्रा बाजार प्रभावित हो सकते हैं।

## बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति और दर वृद्धि की सीमाएं
ब्रिटेन के घरेलू मोर्चे पर निवेशकों की नजरें बैंक ऑफ इंग्लैंड की गुरुवार को होने वाली नवंबर मौद्रिक नीति समीक्षा पर टिकी हैं। केंद्रीय बैंक द्वारा अपनी बैंक दर को बढ़ाकर 4.0% करने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। हालांकि, वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंक का नीतिगत मार्गदर्शन और उसका अद्यतन मौद्रिक नीति रिपोर्ट (एमपीआर) बाजार की उन उम्मीदों की कड़ी परीक्षा लेगा, जिनमें अगले बारह महीनों के भीतर 100 आधार अंकों की अतिरिक्त सख्ती का अनुमान लगाया जा रहा है।

विश्लेषकों का स्पष्ट रुख है कि पूर्वानुमान अवधि में अर्थव्यवस्था के भीतर लगातार अतिरिक्त क्षमता की मौजूदगी केंद्रीय बैंक की भावी ब्याज दर वृद्धि की संभावनाओं को कमजोर कर सकती है। यदि आर्थिक सुस्ती के कारण आगे दर वृद्धि की रफ्तार थमती है, तो पाउंड की संभावित बढ़त सीमित हो सकती है। भले ही तत्काल दर वृद्धि की घोषणा पाउंड स्टर्लिंग को शुरुआती सहारा प्रदान करे, लेकिन नीति निर्माताओं का सतर्क रुख बाजार की आक्रामक ब्याज दर अपेक्षाओं को ठंडा कर सकता है।

## अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त रुख और डॉलर का समर्थन
अटलांटिक के दूसरी ओर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अधिकारी लोगन ने नीतिगत सख्ती का एक बेहद कड़ा संदेश दिया है। उनके नीतिगत बयानों को सामान्य ऐतिहासिक औसत 7.7/10 की तुलना में 8/10 का सख्त स्कोर दिया गया है, जो केंद्रीय बैंक के स्थापित आधार स्तर से कहीं अधिक आक्रामक रुख को दर्शाता है। उनके अनुसार, फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों में कम से कम दो और चौथाई प्रतिशत की बढ़ोतरी करने की सख्त जरूरत है।

नीति निर्माताओं का यह भी तर्क है कि किसी एक बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रखने या टालने से अंतिम नीतिगत लक्ष्य में कोई बदलाव नहीं आता है। मजबूत आर्थिक विकास, ठोस उपभोक्ता खर्च और कड़े श्रम बाजार के बीच नीति को तब तक मध्यम रूप से प्रतिबंधात्मक बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई गई है जब तक कि मुद्रास्फीति स्पष्ट रूप से 2% के लक्ष्य की ओर नहीं लौट जाती। धीरे-धीरे नीतिगत समायोजन और स्पष्ट संचार से डॉलर को मजबूत सहारा मिल रहा है, जिससे परिवारों, व्यवसायों और निवेशकों को अनुकूलन का समय मिल सके।

## जीबीपी/यूएसडी का तकनीकी विश्लेषण और अहम स्तर
दैनिक तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो जीबीपी/यूएसडी में निकट अवधि का रुझान सकारात्मक बना हुआ है, क्योंकि हाजिर भाव 20-अवधि के बोलिंगर मिडिल बैंड और 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (एसएमए) दोनों से ऊपर बना हुआ है। वर्तमान मूल्य बोलिंगर बैंड के ऊपरी हिस्से में दबाव बना रहा है। वहीं 14-अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) लगभग 58 के स्तर पर है, जो दर्शाता है कि गति सकारात्मक है लेकिन ओवरबॉट स्थिति में नहीं है। जब तक जोड़ी प्रमुख मूविंग एवरेज सपोर्ट से ऊपर टिकी रहती है, खरीदारों का नियंत्रण बरकरार रहने की संभावना है।

ऊपरी स्तरों की बात करें तो तत्काल प्रतिरोध 1.3465 के पास ऊपरी बोलिंगर बैंड के करीब मौजूद है। यदि खरीदारी का दबाव कमजोर पड़ता है तो इस स्तर पर तेजी रुक सकती है या सुधारात्मक गिरावट आ सकती है। दूसरी ओर, नीचे की तरफ शुरुआती समर्थन 1.3385 के आसपास 100-दिवसीय एसएमए पर देखा जा रहा है। इसके बाद 1.3318 के पास बोलिंगर मिडिल बैंड का अहम स्तर है। यदि किसी कारणवश गिरावट और गहरी होती है, तो उसे 1.3175 के आसपास निचले बोलिंगर बैंड से पहले संभलने का मौका मिल सकता है। वर्तमान वास्तविक आंकड़ों के अनुसार, जीबीपी/यूएसडी 1.34 के स्तर पर कारोबार कर रही है, जहां इसका धुरी बिंदु (पिवट) 1.34 पर स्थिर है और आरएसआई 57 दर्ज किया गया है।

## पाउंड स्टर्लिंग का वैश्विक महत्व और मूल्य निर्धारक कारक
पाउंड स्टर्लिंग (जीबीपी) विश्व की सबसे पुरानी आधिकारिक मुद्रा है, जिसका इतिहास वर्ष 886 से जुड़ा है, और यह यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक मुद्रा है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, यह वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में चौथी सबसे अधिक कारोबार वाली मुद्रा है, जिसकी कुल विदेशी मुद्रा लेनदेन में 12% हिस्सेदारी है और रोजाना औसतन 630 अरब डॉलर का कारोबार होता है। पाउंड का जारीकर्ता बैंक ऑफ इंग्लैंड है।

मुद्रा बाजार में इसके सबसे प्रमुख व्यापारिक जोड़े जीबीपी/यूएसडी (जिसे ट्रेडर समुदाय में 'केबल' कहा जाता है, कुल एफएक्स बाजार का 11%), जीबीपी/जेपीवाई (जिसे ट्रेडर्स 'ड्रैगन' के नाम से जानते हैं, 3%), और ईयूआर/जीबीपी (2%) हैं। पाउंड स्टर्लिंग के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा तय की जाने वाली मौद्रिक नीति है। केंद्रीय बैंक अपने फैसलों को मुख्य रूप से मूल्य स्थिरता, यानी लगभग 2% की स्थिर मुद्रास्फीति दर के लक्ष्य के आधार पर तय करता है। जब महंगाई बहुत अधिक बढ़ जाती है, तो बीओई ब्याज दरें बढ़ाकर ऋण को महंगा करता है, जिससे वैश्विक निवेशक उच्च रिटर्न के लिए ब्रिटेन की ओर आकर्षित होते हैं और पाउंड को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत, जब महंगाई अत्यधिक गिर जाती है, तो आर्थिक विकास को गति देने के लिए ब्याज दरों में कटौती की जाती है।

सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), विनिर्माण और सेवा पीएमआई आंकड़े, रोजगार स्थिति और व्यापार संतुलन जैसे व्यापक आर्थिक आंकड़े भी पाउंड के रुख को तय करते हैं। व्यापार संतुलन किसी देश के निर्यात से होने वाली आय और आयात पर होने वाले खर्च के बीच के अंतर को मापता है। जब किसी देश के निर्यात की मांग अधिक होती है, तो विदेशी खरीदारों की मुद्रा मांग से स्थानीय मुद्रा मजबूत होती है, जिससे पाउंड स्टर्लिंग को सीधा लाभ पहुंचता है।

## अन्य मुद्राओं, सोने और प्रमुख कंपनियों का बाजार रुख
विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजार के अन्य हिस्सों में भी व्यापक हलचल दर्ज की गई है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (एयूडी/यूएसडी) पिछले दिन के नुकसान से उबरते हुए मंगलवार के एशियाई सत्र में 0.7000 के आसपास स्थिर रहा। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) मंगलवार को अपनी मौद्रिक नीति की घोषणा करने वाला है, जिसमें आधिकारिक नकद दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 4.6% से 4.85% करने की व्यापक उम्मीद है। यदि यह वृद्धि होती है, तो यह 2026 की पांचवीं दर वृद्धि होगी और नकद दर 18 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच जाएगी।

अमेरिकी डॉलर और जापानी येन (यूएसडी/जेपीवाई) की जोड़ी में मंगलवार को नरमी देखी गई और यह पिछले सत्र के 158.00 के स्तर से नीचे आ गई। अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों ने सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग को कुछ हद तक सीमित किया है। वहीं, बैंक ऑफ जापान द्वारा अगली दर वृद्धि के समय को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे यह जोड़ी एक सीमित दायरे में बनी हुई है।

कमोडिटी बाजार में सोना मंगलवार के एशियाई सत्र के दौरान 3,950 डॉलर प्रति औंस के आसपास स्थिर कारोबार करता दिखा। पीली धातु पिछले सप्ताह छुए गए अक्टूबर 2025 के बाद के सबसे निचले स्तर से उबरने के बाद स्थिरता दर्शा रही है। जहां ईरान कूटनीति की उम्मीदें और अमेरिकी मध्यावधि चुनावों की घबराहट सोने को सहारा दे रही है, वहीं फेडरल रिजर्व द्वारा दर वृद्धि के दांव और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में हल्का उछाल गैर-उपज वाले सोने की बढ़त को रोक रहा है। शेयर बाजार में, एप्पल ने चौथी तिमाही में आईफोन की मजबूत बिक्री के दम पर वॉल स्ट्रीट के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया। कंपनी ने चौथी तिमाही में 57.58 अरब डॉलर की आईफोन बिक्री दर्ज की, जो विश्लेषकों के औसत अनुमान से 1 अरब डॉलर से अधिक रही। हालांकि, आय और मुनाफे दोनों में अनुमान से बेहतर प्रदर्शन के बावजूद, आफ्टर-आवर्स ट्रेडिंग में एप्पल का शेयर (एएपीएल) करीब 4% लुढ़क गया।

## इसका आप पर असर
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार और केंद्रीय बैंकों के इन फैसलों का सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार, यात्रा और निवेश पोर्टफोलियो पर पड़ेगा।

- **भारतीय यात्रियों और छात्रों पर:** पाउंड स्टर्लिंग में उतार-चढ़ाव ब्रिटेन में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के ट्यूशन फीस और रहने के खर्च को सीधे प्रभावित करता है। यदि पाउंड 1.34 के आसपास स्थिर रहता है, तो खर्चों में अचानक बड़ा उछाल नहीं आएगा, जिससे बजट की योजना बनाना आसान रहेगा।
- **वैश्विक वित्तीय बाजारों में:** अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के परिणाम और कड़े एआई नियमन वैश्विक इक्विटी बाजारों की दिशा तय करेंगे। तकनीकी शेयरों में संभावित उतार-चढ़ाव के कारण म्यूचुअल फंड और खुदरा निवेशकों को सतर्क रणनीति अपनानी चाहिए।
- **सोने के खरीदारों और निवेशकों के लिए:** सोने का भाव 3,950 डॉलर के करीब स्थिर रहने से घरेलू बाजार में आभूषण और सोने की कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी। भू-राजनीतिक तनाव में नरमी और बॉन्ड यील्ड में सुधार से सोने में तात्कालिक बड़ी तेजी की संभावना सीमित है।
- **मुद्रा कारोबारियों और निर्यातकों पर:** अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अन्य प्रमुख मुद्राओं में घट-बढ़ आयात-निर्यात लागत को प्रभावित करेगी। भारतीय निर्यातकों को आगामी अमेरिकी नीतिगत घोषणाओं से पहले अपने विदेशी मुद्रा हेजिंग का पुनर्मूल्यांकन करना चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
जीबीपी/यूएसडी में चार दिनों की तेजी थमने और विभिन्न वैश्विक परिसंपत्तियों में सतर्कता का माहौल कई बड़े भू-राजनीतिक और व्यापक आर्थिक कारकों के एक साथ आने से बना है।

- **प्रमुख राजनीतिक और नीतिगत घटनाओं का जमावड़ा:** इस सप्ताह अमेरिकी मध्यावधि चुनाव, बैंक ऑफ इंग्लैंड की ब्याज दर घोषणा और अमेरिकी नौकरियों के आंकड़े एक साथ आ रहे हैं। इस अत्यधिक जोखिम भरे घटनाक्रम से पहले बड़े संस्थागत निवेशकों ने आक्रामक दांव लगाने के बजाय मुनाफावसूली और प्रतीक्षा की रणनीति चुनी है।
- **अमेरिकी चुनाव नतीजों को लेकर अनिश्चितता:** प्रतिनिधि सभा और सीनेट में विभिन्न राजनीतिक दलों के संभावित नियंत्रण से वित्तीय नियमों और बजट घाटे पर अलग-अलग असर पड़ने की संभावना है। दोनों सदनों में अलग-अलग दलों के बहुमत या एकतरफा जीत के नतीजों को लेकर बाजार पहले से सुरक्षात्मक रुख अपना रहा है।
- **केंद्रीय बैंकों के नीतिगत रुख में विरोधाभास:** फेडरल रिजर्व के अधिकारियों द्वारा आगे भी ब्याज दरें बढ़ाने के सख्त संकेत दिए गए हैं, जबकि बैंक ऑफ इंग्लैंड में अतिरिक्त आर्थिक सुस्ती के चलते भविष्य की दर वृद्धियों पर ब्रेक लगने की आशंका जताई जा रही है। इस नीतिगत अंतर ने डॉलर को मजबूती दी और पाउंड की बढ़त को सीमित कर दिया।
- **भू-राजनीतिक घटनाक्रमों में संभावित बदलाव:** अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर और सोने में तेज हलचल को अस्थायी रूप से थाम दिया है। इस भू-राजनीतिक नरमी ने विभिन्न परिसंपत्तियों को सीमित तकनीकी दायरे में बांध दिया है।

## सवाल-जवाब

### 1. जीबीपी/यूएसडी जोड़ी में हालिया गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव, बैंक ऑफ इंग्लैंड के ब्याज दर फैसले और अमेरिकी नौकरियों के आंकड़ों से पहले निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया है, जिससे पाउंड पर दबाव बना है।

### 2. बैंक ऑफ इंग्लैंड की आगामी बैठक से बाजार को क्या उम्मीदें हैं?
बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा अपनी बैंक दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 4.0% करने की प्रबल संभावना है, हालांकि भविष्य की दर वृद्धि पर सतर्क मार्गदर्शन मिलने का अनुमान है।

### 3. अमेरिकी चुनाव के नतीजों का वित्तीय बाजारों पर क्या असर हो सकता है?
यदि डेमोक्रेट्स दोनों सदनों पर नियंत्रण करते हैं तो एआई पर सख्त नियमन से बाजार पर दबाव पड़ सकता है, जबकि रिपब्लिकन जीत से कर सुधार और रक्षा खर्च बढ़ने से बजट घाटा बढ़ सकता है।

### 4. फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों पर क्या बयान आया है?
फेड अधिकारी लोगन ने संकेत दिया है कि मुद्रास्फीति को 2% तक लाने के लिए केंद्रीय बैंक को अभी कम से कम दो और चौथाई प्रतिशत दर वृद्धि की आवश्यकता है।

### 5. रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया से ब्याज दरों पर क्या कदम उठाने की संभावना है?
आरबीए द्वारा अपनी आधिकारिक नकद दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 4.6% से 4.85% करने की संभावना है, जो 18 वर्षों का उच्चतम स्तर होगा।

### 6. एप्पल के हालिया वित्तीय नतीजों का शेयर पर क्या असर हुआ?
एप्पल ने चौथी तिमाही में 57.58 अरब डॉलर की मजबूत आईफोन बिक्री के साथ अनुमानों को पीछे छोड़ा, लेकिन इसके बावजूद आफ्टर-आवर्स कारोबार में शेयर करीब 4% गिर गया।

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