अमेरिकी मध्यावधि चुनाव और कच्चे तेल में गिरावट के बीच सोने-चांदी में उतार-चढ़ाव, फेड दरों पर टिकी नजरें अमेरिकी मध्यावधि चुनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के बीच सोने और चांदी के भाव में अस्थिरता दर्ज की जा रही है। बाजार दिसंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की 75 फीसदी संभावना देख रहा है। अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में बहुमूल्य धातुओं के दामों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान जारी रहने और ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट के बीच निवेशक अपनी रणनीतियों को नए सिरे से साध रहे हैं। हाजिर बाजार में सोना मामूली बढ़त के साथ करीब 3,944 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, हालांकि इससे पहले के सत्र में यह 3,965 डॉलर प्रति औंस के स्तर को छूने के बाद फिसल गया था। दूसरी तरफ, चांदी की कीमतों में शुरुआती गिरावट के बाद थोड़ी रिकवरी देखने को मिली और यह मंगलवार को करीब 50 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती नजर आई। सोमवार को 3.6 प्रतिशत की जोरदार छलांग लगाने के बाद चांदी अभी भी नकारात्मक दायरे में टिकी हुई है। कच्चे तेल में गिरावट से वैश्विक महंगाई का दबाव घटा कीमती धातुओं के रुझान पर कच्चे तेल के दामों में आए बड़े सुधार का सीधा असर पड़ा है। वैश्विक बाजार में अमेरिकी डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल 1 प्रतिशत टूटकर लगभग 95.5 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया, जबकि ब्रेंट क्रूड भी मामूली गिरावट के साथ लगभग 103 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। तेल कीमतों में यह नरमी कई प्रमुख भू-राजनीतिक घोषणाओं के बाद दर्ज की गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस साल के अंत तक इजरायल को दिए जाने वाले अपने 4 अरब डॉलर के सहायता कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म कर देगा। इस घोषणा के बाद तेल बाजार ने अपनी पिछली शुरुआती बढ़त गंवा दी। इसके साथ ही ऊर्जा आपूर्ति को लेकर उपजी चिंताओं को दूर करते हुए अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने स्थिति स्पष्ट की। क्रिस राइट ने बताया कि ईरान के केशम द्वीप पर रात भर किए गए हमलों से क्षेत्र की तेल आपूर्ति में किसी तरह की रुकावट नहीं आई है। ऊर्जा आपूर्ति सामान्य बने रहने और कच्चे तेल के भाव गिरने से दुनिया भर में मुद्रास्फीति का दबाव कम हो सकता है। यदि ईंधन सस्ता होता है तो केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरों को और अधिक बढ़ाने की बाध्यता भी घट सकती है, जिससे वित्तीय बाजारों को थोड़ी राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है। फेडरल रिजर्व की दिसंबर बैठक पर सट्टा बाजार की निगाहें ब्याज दरों के मोर्चे पर बाजार के प्रतिभागी बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। सीएमई के फेडवॉच टूल के आंकड़ों पर नजर डालें तो बाजार दिसंबर नीति समीक्षा में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की करीब 75 प्रतिशत संभावना जता रहा है। आगामी बैठक में मौद्रिक सख्ती जारी रहने के आसार से डॉलर और बॉन्ड यील्ड में मजबूती बनी रह सकती है, जिसका सीधा असर बिना ब्याज देने वाली धातुओं जैसे सोने और चांदी पर दबाव के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक मोर्चे पर अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के नतीजे नीतिगत दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। वर्तमान चुनावी परिदृश्य में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स पर डेमोक्रेट्स के दोबारा नियंत्रण हासिल करने की संभावना मजबूत मानी जा रही है, जबकि सीनेट के अंतिम नतीजों को लेकर स्थिति अब भी पूरी तरह अनिश्चित बनी हुई है। संसद के दोनों सदनों में सत्ता के संतुलन से आर्थिक प्राथमिकताओं और सरकारी खर्च के फैसलों पर गहरा प्रभाव पड़ना तय है। गोल्ड काउंसिल ने घटाया निवेश वृद्धि का अनुमान सोने के मांग-आपूर्ति समीकरणों को लेकर विश्व स्वर्ण परिषद की ताजा रिपोर्ट ने भी निवेशकों का ध्यान खींचा है। विश्व स्वर्ण परिषद ने चालू वर्ष के लिए सोने में होने वाली निवेश वृद्धि के अपने पूर्व अनुमान को आधा कर दिया है। परिषद ने इस वृद्धि अनुमान को 400 मीट्रिक टन से घटाकर 200 मीट्रिक टन कर दिया है। संस्थागत और खुदरा निवेशकों की मांग का यह अनुमान भले ही घटाया गया हो, लेकिन दूसरी तरफ परिषद ने दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा की जाने वाली सोने की आधिकारिक खरीदारी के अपने अनुमान को बढ़ा दिया है। केंद्रीय बैंकों की लगातार मजबूत खरीदारी लंबी अवधि में सोने की कीमतों के लिए एक ठोस सुरक्षा कवच तैयार कर रही है। इसका आप पर असर कच्चे तेल में गिरावट और बहुमूल्य धातुओं के उतार-चढ़ाव का सीधा असर आपकी बचत, निवेश और मुद्रास्फीति पर पड़ सकता है। • गहने और धातु खरीदार: सोने के 3,944 डॉलर और चांदी के 50 डॉलर प्रति औंस के आसपास टिकने से खुदरा कीमतों में स्थिरता या नरमी देखने को मिल सकती है। त्योहारी या शादी के सीजन की खरीदारी की योजना बना रहे ग्राहक बड़ी तेजी से बचकर बेहतर भाव पर खरीदारी कर सकते हैं। • ईंधन और घरेलू खर्च: डब्ल्यूटीआई क्रूड 95.5 डॉलर और ब्रेंट के 103 डॉलर प्रति बैरल पर आने से आयातित ऊर्जा लागत कम होने की उम्मीद है। यदि तेल के भाव में यह गिरावट जारी रही तो आगामी हफ्तों में घरेलू स्तर पर पेट्रोल, डीजल और लॉजिस्टिक्स की लागत घट सकती है। • निवेशक और ट्रेडर: फेड द्वारा दिसंबर में दरें बढ़ाने की 75 फीसदी संभावना को देखते हुए बॉन्ड और डॉलर को समर्थन मिल सकता है। कमोडिटी और शेयर बाजारों में कारोबार करने वाले निवेशकों को चुनाव नतीजों और दरों के फैसले तक सतर्क रहने की जरूरत है। • केंद्रीय बैंकों के भंडार: विश्व स्वर्ण परिषद द्वारा निवेश मांग अनुमान घटाकर 200 मीट्रिक टन करने के बावजूद केंद्रीय बैंकों की खरीदारी बढ़ रही है। आधिकारिक खरीद बढ़ने से सोने को लंबी अवधि में निचली कीमतों पर मजबूत सहारा मिलता रहेगा। ऐसा क्यों हुआ सोने, चांदी और तेल की कीमतों में आई यह हलचल कई भू-राजनीतिक और आर्थिक बदलावों के एक साथ सामने आने से पैदा हुई है। • भू-राजनीतिक घटनाक्रम: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इजरायल के लिए 4 अरब डॉलर का सहायता कार्यक्रम समाप्त करने की घोषणा और ईरान के केशम द्वीप पर हमलों के बावजूद तेल आपूर्ति अप्रभावित रहने से ऊर्जा कीमतों की तेजी थम गई। आपूर्ति में रुकावट न आने के स्पष्ट संकेत मिलते ही तेल बाजार में मुनाफावसूली हावी हो गई। • फेडरल रिजर्व की मौद्रिक सख्ती: सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार दिसंबर में नीतिगत दरें बढ़ने की 75 प्रतिशत संभावना बनी हुई है। दरों में संभावित वृद्धि के चलते निवेशकों ने कीमती धातुओं में ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली की, जिससे सोने की बढ़त सीमित रही। • अमेरिकी चुनाव की अनिश्चितता: मध्यावधि चुनाव में मतदान के दौरान सदन में डेमोक्रेट्स की वापसी और सीनेट में कड़े मुकाबले के अनुमान ने बाजार को सतर्क रखा है। राजनीतिक शक्ति संतुलन बदलने की आशंका से वित्तीय परिसंपत्तियों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया। • मांग के अनुमान में फेरबदल: विश्व स्वर्ण परिषद द्वारा वार्षिक निवेश वृद्धि का अनुमान घटाकर 200 मीट्रिक टन करने से निजी निवेश धारणा पर असर पड़ा। हालांकि केंद्रीय बैंकों की ओर से बढ़ी खरीदारी ने कीमतों को एक सीमा से अधिक गिरने नहीं दिया। सवाल-जवाब 1. हाजिर सोना और चांदी किस भाव पर कारोबार कर रहे हैं? हाजिर सोना 0.3 प्रतिशत बढ़कर लगभग 3,944 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है, जबकि चांदी शुरुआती नुकसान की भरपाई कर करीब 50 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई है। 2. कच्चे तेल की कीमतों में क्या बदलाव दर्ज किया गया? अमेरिकी डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल 1 प्रतिशत गिरकर लगभग 95.5 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड थोड़ा फिसलकर करीब 103 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। 3. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण क्या रहा? राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इजरायल को 4 अरब डॉलर की सहायता बंद करने की बात कहने और ईरान के केशम द्वीप पर हमलों के बाद तेल आपूर्ति बाधित न होने से कीमतें गिरीं। 4. अमेरिकी फेडरल रिजर्व को लेकर बाजार का क्या अनुमान है? सीएमई फेडवॉच टूल के मुताबिक, बाजार दिसंबर की मौद्रिक नीति बैठक में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की 75 प्रतिशत संभावना मान रहा है। 5. विश्व स्वर्ण परिषद ने अपने अनुमान में क्या संशोधन किया है? विश्व स्वर्ण परिषद ने इस वर्ष के लिए सोने की निवेश वृद्धि का अनुमान 400 मीट्रिक टन से घटाकर 200 मीट्रिक टन कर दिया है, जबकि केंद्रीय बैंकों की खरीद का अनुमान बढ़ा दिया है। 6. अमेरिकी मध्यावधि चुनाव को लेकर क्या रुझान सामने आ रहे हैं? चुनावों में डेमोक्रेट्स के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में नियंत्रण हासिल करने की संभावना जताई जा रही है, जबकि सीनेट के परिणाम अभी अनिश्चित हैं। https://trendkia.com/market/us-midterm-chunava-aura-kachche-tela-men-giravata-ke-bicha-gold-silver-men-utara-charhava-fed-daron-para-tiki-najaren-56076 TrendKia — Har trend, sabse pehle.