अमेरिकी मध्यावधि चुनाव: बंटी हुई संसद से डॉलर, ट्रेजरी यील्ड और शेयर बाजार की चाल पर क्या असर पड़ेगा अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को होने वाले मध्यावधि चुनाव के बीच बंटी हुई संसद बनने के आसार हैं, जिसका सीधा असर डॉलर, ट्रेजरी यील्ड और वॉल स्ट्रीट पर देखने को मिल सकता है। संयुक्त राज्य अमेरिका में मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को होने जा रहे मध्यावधि चुनाव पर दुनिया भर के वित्तीय बाजारों की नजरें टिकी हुई हैं। अमेरिकी संघीय कानून के मुताबिक नवंबर के पहले सोमवार के बाद आने वाले मंगलवार को वोट डाले जाते हैं, हालांकि कई राज्यों में डाक मतपत्रों और अर्ली वोटिंग के जरिए मतदान की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। यह चुनावी मुकाबला सिर्फ सत्ता संतुलन का फैसला नहीं करेगा, बल्कि अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों, ट्रेजरी यील्ड और वैश्विक शेयर बाजारों की दिशा तय करने में भी अहम भूमिका निभाने जा रहा है। ऐतिहासिक रूप से राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के ठीक बीच में होने वाले ये चुनाव सत्ताधारी दल के प्रदर्शन पर एक जनमत संग्रह माने जाते हैं, जहां मतदाता संसद के दोनों सदनों की कमान तय करते हैं। संसद के दोनों सदनों में सत्ता समीकरण और चुनावी दांव इस मध्यावधि चुनाव में अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों पर मतदान हो रहा है। इसके साथ ही 100 सदस्यीय सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटों का नवीनीकरण भी इस चुनाव के जरिए होना है। इसके अलावा फ्लोरिडा और ओहायो में खाली हुई सीटों को भरने के लिए विशेष चुनाव आयोजित किए जा रहे हैं। ये सीटें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पद संभालने के बाद रिक्त हुई थीं। अब तक अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों पर रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण रहा है, लेकिन सत्ता संतुलन पलटने के लिए विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी को निचले सदन में केवल तीन अतिरिक्त सीटें और सीनेट में चार अतिरिक्त सीटें जीतने की जरूरत है। संसद के समीकरण तय करते हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मौजूदा कार्यकाल के बाकी बचे दो वर्षों में विधायी एजेंडा किस पार्टी के हाथ में रहेगा। जिस दल के पास बहुमत होता है, वही विभिन्न समितियों के अध्यक्ष चुनता है, विधायी प्राथमिकताओं को तय करता है और सीनेट के जरिए न्यायाधीशों व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति पर मुहर लगाता है। यह चुनाव राष्ट्रपति पद के लिए नहीं है, क्योंकि अगला राष्ट्रपति चुनाव नवंबर 2028 में निर्धारित है। अमेरिकी इतिहास का सामान्य पैटर्न रहा है कि मध्यावधि चुनावों में मौजूदा राष्ट्रपति की पार्टी को आमतौर पर निचले सदन में सीटें गंवानी पड़ती हैं। 36 राज्यों में गवर्नर पद के लिए मुकाबला और राष्ट्रपति की रेटिंग इस चुनावी कवायद का दायरा केवल वॉशिंगटन की संसद तक सीमित नहीं है। अमेरिका के 50 राज्यों में से 36 राज्यों में मतदाता नए गवर्नर का चुनाव भी कर रहे हैं। इनमें से अधिकांश राज्यों में गवर्नर का कार्यकाल चार वर्षों का होता है, जबकि कुछ राज्यों में यह दो साल की अवधि के लिए रहता है। इसके साथ ही राज्यों के अन्य स्थानीय और प्रशासनिक पदों के लिए भी मतदान कराया जा रहा है, जिससे जमीनी राजनीति में व्यापक बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। यह पूरा चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासनिक कामकाज पर जनता के सीधे फैसले के रूप में देखा जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप इस चुनावी मुकाबले में बेहद कमजोर जनसमर्थन के साथ उतर रहे हैं। उनका अप्रूवल रेटिंग रिकॉर्ड स्तर पर गिर चुका है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से किसी भी मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए दर्ज नहीं किया गया। अधिकांश सर्वेक्षण डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत की ओर इशारा कर रहे हैं, जिसका सीधा मतलब है कि आने वाले दिनों में ट्रंप प्रशासन को अपनी नीतियों पर कई मोर्चों से कड़े प्रतिरोध और जांच का सामना करना पड़ सकता है। नीतियों पर टकराव: टैरिफ, तेल युद्ध और महंगाई का दबाव यदि सर्वेक्षणों के अनुसार डेमोक्रेटिक पार्टी निचले सदन या पूरी संसद पर कब्जा जमाती है, तो राष्ट्रपति के अधिकारों को सीमित करने के प्रयास तेज होंगे। व्यापारिक टैरिफ और तेल युद्ध को लेकर ट्रंप प्रशासन के कड़े कदमों की समीक्षा सूची में सबसे ऊपर रहने की संभावना है। इसके अलावा राष्ट्रपति के आचरण, सरकारी भ्रष्टाचार और उनकी निजी संपत्ति भी विपक्षी दलों की तीखी जांच के दायरे में आ सकती है। रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी जमीन खिसकने के पीछे राष्ट्रपति की संरक्षणवादी नीतियां, बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की भारी लागत को प्रमुख कारण माना जा रहा है। आम मतदाताओं की सबसे बड़ी चिंताएं ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतों, स्वास्थ्य सेवाओं के खर्च और नौकरियों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के असर से जुड़ी हुई हैं। इन आर्थिक चिंताओं ने सत्ताधारी दल के खिलाफ माहौल तैयार किया है, जिसका असर चुनाव नतीजों में दिखने की संभावना है। बंटी हुई संसद, ग्रिडलॉक और वित्तीय बाजारों की स्थिरता राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रिपब्लिकन पार्टी के पास सीनेट पर अपना कब्जा बरकरार रखने की संभावना अब भी बची हुई है। हालांकि अगर पूरी संसद पर डेमोक्रेटिक पार्टी का कब्जा भी हो जाता है, तो वित्तीय बाजारों के लिए यह स्थिति ज्यादा स्थिरता लाने वाली मानी जाती है। जब व्हाइट हाउस एक पार्टी के हाथ में हो और संसद पर दूसरी पार्टी का नियंत्रण हो, तो ऐसी स्थिति को ग्रिडलॉक यानी राजनीतिक गतिरोध कहा जाता है। इस व्यवस्था में कोई भी दल किसी भी विषय पर मनमाने ढंग से आक्रामक नीतियां पारित नहीं कर पाता है। डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत युद्ध पर होने वाले भारी अमेरिकी खर्च पर अंकुश लगा सकती है और राष्ट्रपति द्वारा हर तरफ मनमाने ढंग से टैरिफ थोपने की क्षमता को सीमित कर सकती है। नीतियों में इस तरह की रोक-टोक अंततः कारोबारी धारणा और बाजार के मूड को बेहतर बनाने में मदद करती है। वित्तीय बाजार अत्यधिक उथल-पुथल वाली नीतियों के मुकाबले नीतिगत स्थिरता को ज्यादा तरजीह देते हैं, जिससे निवेशकों की घबराहट कम होती है। अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड पर अल्पकालिक असर मुद्रा बाजार के जानकारों के अनुसार इस चुनाव से अमेरिकी डॉलर में किसी दीर्घकालिक ट्रेंड के बजाय केवल सीमित और अल्पकालिक प्रतिक्रिया की उम्मीद की जा रही है। बंटी हुई संसद के परिदृश्य को बाजार पहले ही काफी हद तक अपनी कीमतों में शामिल कर चुका है। डॉलर की तुलना में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड चुनावी नतीजों पर ज्यादा तेज प्रतिक्रिया दे सकती है। यदि चुनावी नतीजों से राजकोषीय प्रोत्साहन या नए सरकारी खर्चों की उम्मीदें बढ़ती हैं, तो ट्रेजरी यील्ड और अमेरिकी डॉलर दोनों में उछाल आता है। इसके विपरीत, यदि ग्रिडलॉक की वजह से नए सरकारी खर्चों पर लगाम लगती है, तो यील्ड और डॉलर दोनों में नरमी आ सकती है। हालांकि जब फंडिंग या कर्ज सीमा यानी डेट सीलिंग को लेकर राजनीतिक गतिरोध गहराता है, तो सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर डॉलर को थोड़े समय के लिए सहारा भी मिलता है। छह से बारह महीने के व्यापक नजरिए से देखें तो चुनावी नतीजों की तुलना में आर्थिक वृद्धि और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति डॉलर की चाल तय करने में कहीं अधिक महत्वपूर्ण साबित होती है। मध्यावधि चुनाव के बाद शेयर बाजार का ऐतिहासिक रिकॉर्ड अमेरिकी शेयर बाजार का इतिहास बताता है कि मध्यावधि चुनावों से पहले बाजार में कमजोरी रहती है, लेकिन चुनाव संपन्न होते ही मजबूत तेजी देखने को मिलती है। जेपी मॉर्गन के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 1950 से लेकर 2022 तक के सभी 19 मध्यावधि चुनावी चक्रों में एसएंडपी 500 इंडेक्स ने अगले 12 महीनों में सकारात्मक रिटर्न दिया है। इस 19 में से 19 बार के ऐतिहासिक रिकॉर्ड में चुनाव के एक साल बाद इंडेक्स का औसत रिटर्न 15.1% यानी लगभग 15% दर्ज किया गया है। विश्लेषक इस ऐतिहासिक उछाल का कारण यह बताते हैं कि चुनाव परिणाम सामने आने के बाद नीतिगत अनिश्चितता का बादल छंट जाता है। हालांकि अतीत का शानदार प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं होता, और कुछ बाजार रणनीतिकारों का मानना है कि 2026 में शेयरों का ऊंचा मूल्यांकन इस ऐतिहासिक सिलसिले की कड़ी परीक्षा ले सकता है। इसके बावजूद, ऐतिहासिक रूप से जब भी किसी रिपब्लिकन राष्ट्रपति के कार्यकाल में बंटी हुई संसद बनी है, उसके बाद के वर्षों में एसएंडपी 500 ने मजबूत प्रदर्शन किया है। इस दौरान फंडिंग की समयसीमा, डेट सीलिंग पर तकरार और संसदीय जांच जैसे कारक बाजार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव ला सकते हैं। वैश्विक मुद्रा, कमोडिटी और व्यापक अर्थव्यवस्था की स्थिति चुनावी सरगर्मियों के बीच वैश्विक वित्तीय बाजारों में अन्य संपत्तियां भी महत्वपूर्ण स्तरों पर कारोबार कर रही हैं। सोमवार को एशियाई सत्र में आई गिरावट से उबरते हुए AUD/USD जोड़ी में सुधार दर्ज किया गया, क्योंकि ईरान के साथ राजनयिक बातचीत की उम्मीदों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। इससे सुरक्षित निवेश वाले डॉलर पर दबाव बना और जोखिम उठाने वाली ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को सहारा मिला, हालांकि यह पिछले गुरुवार को बने एक महीने के उच्चतम स्तर से नीचे ही बनी रही क्योंकि ट्रेडर्स ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक के आगामी नीतिगत फैसले का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर, USD/JPY जोड़ी ने नए हफ्ते की शुरुआत बढ़त के साथ की और बैंक ऑफ जापान की बैठक के बाद 157.00 से नीचे के स्तर से सुधरकर एशियाई सत्र में 158.00 के आसपास पहुंच गई। जापानी वित्त मंत्री सात्सुकी कातायामा की ओर से मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप की ताजा चेतावनी के बावजूद यह तेजी जारी रही। कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों ने अमेरिकी कारोबारी घंटों में अपनी रिकवरी को आगे बढ़ाया, जिसे अमेरिका-ईरान वार्ता की सकारात्मक खबरों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट से सहारा मिला। सोना शुक्रवार को 3,870 डॉलर के नए वार्षिक निचले स्तर को छूने और अक्टूबर महीने में 6.87% की भारी गिरावट दर्ज करने के बाद सुधरा है, हालांकि बुनियादी परिस्थितियों को देखते हुए टिकाऊ सुधार पर अब भी संदेह बना हुआ है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था की बात करें तो यह 3.4% की वार्षिक दर से आगे बढ़ी है, लेकिन इसके बावजूद ट्रेजरी यील्ड में गिरावट आई और नैस्डैक ने मार्च 2025 के बाद का अपना सबसे खराब मासिक प्रदर्शन अक्टूबर में दर्ज किया। वित्तीय बाजार अब केवल विकास को सहारा देने वाले पूंजीगत व्यय को पुरस्कृत नहीं कर रहा है, बल्कि निवेशक अब यह परख रहे हैं कि कंपनियों का यह खर्च पूंजी की लागत से अधिक नकदी प्रवाह और रिटर्न पैदा करने में सक्षम है या नहीं। इसका आप पर असर अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में संभावित बंटी हुई संसद वैश्विक व्यापार, मुद्रा दरों और निवेश प्रवाह पर सीधा असर डालेगी। • भारतीय शेयर बाजार पर: अमेरिकी संसद में नीतिगत गतिरोध से अनियंत्रित नए टैरिफ का खतरा कम होगा जिससे भारतीय निर्यातकों और आईटी कंपनियों को राहत मिल सकती है। वैश्विक अनिश्चितता घटने से विदेशी संस्थागत निवेशकों का पूंजी प्रवाह भारतीय बाजारों में स्थिर रहने की संभावना है। • मुद्रा और डॉलर की दर: अमेरिकी डॉलर में सीमित उतार-चढ़ाव रहने से भारतीय रुपये को तेज गिरावट के दबाव से सुरक्षा मिलेगी। कच्चा तेल और आयातित वस्तुओं की बिलिंग स्थिर रहने से आयातकों और अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वालों को राहत मिलेगी। • वैश्विक कमोडिटी और सोना: ब्याज दरों और ट्रेजरी यील्ड में संभावित नरमी से सोने की कीमतों को सहारा मिल सकता है। भारतीय आभूषण खरीदारों और निवेशकों को कीमतों में स्थिरता या मामूली बढ़त देखने को मिल सकती है। • वैश्विक आर्थिक नीतियां: अमेरिकी सरकार के युद्ध खर्च और एकतरफा व्यापार प्रतिबंधों पर संसदीय रोक लगने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला सुगम होगी। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार करने वाले कारोबारियों के लिए नीतिगत जोखिम काफी कम हो जाएंगे। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी के सामने खड़ी चुनौती और बाजार में संभावित ग्रिडलॉक की पृष्ठभूमि कई प्रमुख राजनीतिक और आर्थिक कारणों से तैयार हुई है। • कमजोर जनसमर्थन और महंगाई का दबाव: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किसी भी मौजूदा राष्ट्रपति के मुकाबले सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। दैनिक जीवन यापन की ऊंची लागत, खाद्य और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों तथा संरक्षणवादी व्यापार नीतियों ने मतदाताओं में व्यापक असंतोष पैदा किया है। • संसद के दोनों सदनों में बारीक बहुमत: मौजूदा समय में कांग्रेस रिपब्लिकन नियंत्रण में है, लेकिन प्रतिनिधि सभा में केवल तीन और सीनेट में चार अतिरिक्त सीटें जीतकर डेमोक्रेट्स बहुमत हासिल कर सकते हैं। यह बहुत मामूली अंतर चुनावी गणित को किसी भी तरफ मोड़ने के लिए पर्याप्त है। • ऐतिहासिक चुनावी परिपाटी: अमेरिकी इतिहास में 1950 से अब तक हुए चुनावों में यह देखा गया है कि मध्यावधि में मतदाता आमतौर पर मौजूदा राष्ट्रपति की पार्टी के खिलाफ वोट करते हैं। इस ऐतिहासिक परंपरा और सत्ता विरोधी लहर के कारण संसद के बंटे होने की संभावना सबसे अधिक मानी जा रही है। • बाजारों की अग्रिम तैयारी: वित्तीय विश्लेषक बंटी हुई संसद को आधारभूत परिदृश्य मानकर चल रहे हैं और इसके प्रभाव पहले ही संपत्तियों की कीमतों में समाहित हो चुके हैं। इस स्थिति में किसी भी दल द्वारा आक्रामक या अप्रत्याशित वित्तीय बदलाव करने की क्षमता सीमित हो जाती है। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी मध्यावधि चुनाव किस तारीख को आयोजित हो रहे हैं? अमेरिकी मध्यावधि चुनाव का मतदान दिवस मंगलवार, 3 नवंबर 2026 निर्धारित है। 2. इस चुनाव में अमेरिकी संसद की कितनी सीटों पर मतदान हो रहा है? इस चुनाव में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटों पर चुनाव हो रहा है। 3. डेमोक्रेटिक पार्टी को संसद में बहुमत पाने के लिए कितनी सीटों की आवश्यकता है? डेमोक्रेटिक पार्टी को नियंत्रण हासिल करने के लिए प्रतिनिधि सभा में तीन सीटें और सीनेट में चार सीटें जीतने की आवश्यकता है। 4. फ्लोरिडा और ओहायो में विशेष चुनाव क्यों कराए जा रहे हैं? विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पद संभालने से खाली हुई सीटों को भरने के लिए ये विशेष चुनाव हो रहे हैं। 5. क्या इस मध्यावधि चुनाव में अमेरिकी राष्ट्रपति का भी चुनाव हो रहा है? नहीं, राष्ट्रपति का चुनाव हर चार साल में होता है और अगला राष्ट्रपति चुनाव नवंबर 2028 में आयोजित किया जाएगा। 6. मध्यावधि चुनावों के बाद एसएंडपी 500 का ऐतिहासिक रिटर्न कैसा रहा है? वर्ष 1950 से 2022 तक के सभी 19 मध्यावधि चुनाव चक्रों में एसएंडपी 500 ने 12 महीने बाद औसतन 15.1% का सकारात्मक रिटर्न दिया है। 7. अमेरिकी अर्थव्यवस्था की हालिया विकास दर क्या रही है? अमेरिकी अर्थव्यवस्था हाल ही में 3.4% की वार्षिक दर से आगे बढ़ी है। 8. कच्चे तेल में गिरावट के बीच सोने का हालिया निचला स्तर क्या रहा? सोने ने शुक्रवार को 3,870 डॉलर प्रति औंस का नया वार्षिक निचला स्तर छुआ था और अक्टूबर में इसमें 6.87% की गिरावट दर्ज की गई थी। https://trendkia.com/market/us-midterm-elections-face-split-congress-as-dollar-and-yields-weigh-trump-fiscal-standoff-55274 TrendKia — Har trend, sabse pehle.