अमेरिकी नौकरियों के कमजोर आंकड़ों से डॉलर इंडेक्स फिसला, जानिए वैश्विक बाजारों पर क्या हुआ असर सितंबर महीने में अमेरिका में उम्मीद से बेहद कम 29 हजार नए रोजगार जुड़े, जिसके बाद डॉलर इंडेक्स 102.00 से नीचे फिसलकर 101.70 के निचले स्तर तक आ गया। अमेरिकी रोजगार बाजार से सामने आए ताजा आंकड़ों ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में हलचल तेज कर दी है। सितंबर महीने में अमेरिकी नियोक्ताओं ने केवल 29,000 नई नौकरियां जोड़ीं, जो कि बाजार के 90,000 के अनुमान के मुकाबले लगभग एक तिहाई ही है। रोजगार सृजन की इस सुस्त रफ्तार के सामने आते ही अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) में तेज गिरावट देखने को मिली। यह सूचकांक 102.00 के महत्वपूर्ण स्तर को तोड़ते हुए सत्र के निचले स्तर 101.70 के नीचे तक लुढ़क गया। पेरोल रिपोर्ट और डॉलर इंडेक्स की चाल सितंबर के पेरोल आंकड़े जारी होने से ठीक पहले डॉलर इंडेक्स चढ़कर दिन के उच्च स्तर 102.10 के ठीक ऊपर पहुंच चुका था। जैसे ही कमजोर रोजगार आंकड़े सार्वजनिक हुए, इंडेक्स 102.00 से सीधा गिरकर 101.80 के दायरे में आ गया, जहां से दिन की तेजी शुरू हुई थी। इसके बाद बाजार में आई हल्की रिकवरी 102.00 के स्तर से पहले ही थम गई, जिसे डॉलर इंडेक्स ने गुरुवार को पार किया था। बिकवाली के दूसरे दौर में इंडेक्स दिन के सबसे निचले स्तर 101.70 से नीचे फिसल गया और बाद में संभलकर दिन के दायरे के मध्य 101.90 के करीब आ गया। रोजगार रिपोर्ट में केवल सितंबर का आंकड़ा ही कमजोर नहीं रहा, बल्कि पिछले महीनों के आंकड़ों में भी भारी कटौती की गई। जुलाई और अगस्त के रोजगार आंकड़ों में संयुक्त रूप से 60,000 नौकरियों का नकारात्मक संशोधन किया गया। इसके साथ ही अमेरिका में बेरोजगारी दर बढ़कर 4.2 प्रतिशत पर पहुंच गई। वहीं सालाना आधार पर प्रति घंटा औसत कमाई 3.0 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जबकि बाजार 3.2 प्रतिशत की बढ़त का अनुमान लगा रहा था। वैश्विक आरक्षित मुद्रा के रूप में अमेरिकी डॉलर की भूमिका अमेरिकी डॉलर (USD) संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा होने के साथ साथ दुनिया के कई अन्य देशों में स्थानीय नोटों के साथ वास्तविक चलन वाली मुद्रा है। वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर का दबदबा निर्विवाद है, जहां कुल विदेशी मुद्रा कारोबार में इसकी हिस्सेदारी 88 प्रतिशत से अधिक है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक मुद्रा बाजार में रोजाना औसतन 6.6 ट्रिलियन डॉलर के वित्तीय सौदे होते हैं। द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद अमेरिकी डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड से दुनिया की प्रमुख आरक्षित मुद्रा का स्थान छीन लिया था। अपने लंबे इतिहास के दौरान डॉलर सोने के भंडार पर आधारित था, लेकिन वर्ष 1971 के ब्रेटन वुड्स समझौते के साथ गोल्ड स्टैंडर्ड समाप्त कर दिया गया और डॉलर एक फिएट मुद्रा में बदल गया। फेडरल रिजर्व की नीतियां और डॉलर पर प्रभाव अमेरिकी डॉलर के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण कारक वहां की मौद्रिक नीति है, जिसे केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व तय करता है। फेडरल रिजर्व के पास दो मुख्य जिम्मेदारियां हैं, जिनमें कीमतों में स्थिरता यानी मुद्रास्फीति पर नियंत्रण और देश में अधिकतम रोजगार को बढ़ावा देना शामिल है। इन दोनों लक्ष्यों को हासिल करने के लिए फेड का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों में बदलाव करना है। जब अर्थव्यवस्था में कीमतें बहुत तेजी से बढ़ने लगती हैं और महंगाई दर फेड के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तब केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है। ब्याज दरों में यह वृद्धि डॉलर के मूल्य को मजबूती प्रदान करती है। इसके विपरीत, जब महंगाई दर 2 प्रतिशत से नीचे गिरती है या बेरोजगारी दर बहुत अधिक बढ़ जाती है, तब फेड ब्याज दरों में कटौती का रास्ता चुन सकता है, जिससे ग्रीनबैक यानी अमेरिकी डॉलर पर दबाव बनता है और उसकी विनिमय दर कमजोर होती है। क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग का तंत्र अत्यधिक गंभीर और असाधारण आर्थिक परिस्थितियों में फेडरल रिजर्व अतिरिक्त डॉलर छाप सकता है और क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) लागू कर सकता है। क्वांटिटेटिव ईजिंग वह प्रक्रिया है जिसके जरिए फेड किसी संकटग्रस्त वित्तीय प्रणाली में नकदी और कर्ज के प्रवाह को बड़े पैमाने पर बढ़ाता है। यह एक गैर-मानक नीतिगत उपाय है, जिसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब बैंकों द्वारा एक-दूसरे को कर्ज देना बंद कर देने से ऋण प्रवाह पूरी तरह सूख जाता है। वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के समय पैदा हुए क्रेडिट संकट से निपटने के लिए फेड ने इसी हथियार का इस्तेमाल किया था। इसमें फेड नए डॉलर छापकर मुख्य रूप से वित्तीय संस्थानों से अमेरिकी सरकारी बॉन्ड खरीदता है, जिससे आमतौर पर अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है। इसके ठीक उलट क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) की प्रक्रिया होती है। इसमें फेडरल रिजर्व वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और अपने पास मौजूद मैच्योर हो रहे बॉन्डों से मिलने वाले मूलधन को नई खरीद में फिर से निवेश नहीं करता है। वित्तीय प्रणाली से नकदी सोखने वाली यह प्रक्रिया आमतौर पर अमेरिकी डॉलर के लिए सकारात्मक मानी जाती है। करेंसी और कमोडिटी बाजार में हलचल डॉलर में आई इस नरमी का असर दुनिया भर के करेंसी और कमोडिटी बाजारों पर साफ नजर आया। शुक्रवार को एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) उछलकर 0.6950 की ओर बढ़ा। अमेरिकी गैर-कृषि पेरोल रिपोर्ट से पहले मुनाफावसूली के कारण डॉलर अपने 17 महीने के उच्च स्तर से पीछे हटा। दूसरी ओर, बढ़ती वैश्विक बॉन्ड यील्ड और महंगाई जोखिमों के बीच नवंबर में ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदें दोबारा जीवित होने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन मिला। वहीं अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) एशियाई सत्र में 158.00 के करीब नई गति हासिल करने के लिए जूझता दिखा और अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी स्तर से नीचे आया। तोक्यो सीपीआई के उम्मीद से अधिक गर्म रहने और डॉलर में व्यापक कमजोरी के बीच ट्रेडर्स ने अपनी पोजिशन को दोबारा व्यवस्थित किया। सोने के बाजार में पेरोल रिपोर्ट के बाद आई तेजी 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के पार टिक नहीं पाई और सप्ताह के अंत में भाव फिसलकर 4,180 डॉलर के दायरे में आ गया। निवेशकों द्वारा रोजगार आंकड़ों के विश्लेषण और डॉलर पर बने नए बिकवाली दबाव के बीच कीमती धातु में यह अनिर्णायक रुख बना रहा। यूरो बनाम अमेरिकी डॉलर (EUR/USD) बुधवार को गिरकर 1.1312 पर पहुंच गया था, जो मई 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है और जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। यह गिरावट डॉलर की मजबूती, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और यूरोप पर ऊर्जा की ऊंची कीमतों के असर की वजह से बनी हुई है। क्रिप्टो बाजार की रिकवरी और आगे की दिशा कमजोर रोजगार आंकड़ों के बीच शुक्रवार को क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों में व्यापक सुधार दर्ज किया गया। बिटकॉइन 86,000 डॉलर के पार निकलकर बाजार की अगुवाई कर रहा है। इथेरियम ने भी अपने तेजी के रुख की पुष्टि करते हुए 2,700 डॉलर के स्तर को पार कर लिया, हालांकि 2,800 डॉलर का दायरा फिलहाल बढ़त को सीमित कर रहा है। इसी दौरान रिपल 1.54 डॉलर के करीब कारोबार करता नजर आया। आने वाले समय में वैश्विक बाजारों की नजर ऊर्जा संकट और बॉन्ड यील्ड में तेजी पर टिकी रहेगी। अक्टूबर में फेड द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावनाओं में आई कमी के बाद बाजार फेड मिनट्स पर करीबी नजर बनाए रखेगा। इसके अलावा आईएसएम सर्विसेज पीएमआई और ट्रेजरी नीलामियों के नतीजों का भी इंतजार रहेगा। साथ ही कनाडा के रोजगार आंकड़े, जापानी वेतन आंकड़े और यूरोपीय सेंट्रल बैंक की बैठक के मिनट्स भी वैश्विक आर्थिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित होंगे। इसका आप पर असर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों में भारी गिरावट से डॉलर की मजबूती कमजोर हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा और कमोडिटी बाजारों की कीमतें सीधे तौर पर प्रभावित होंगी। • मुद्रा विनिमय: कमजोर डॉलर के कारण अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं और उभरते बाजारों की मुद्राओं पर बना दबाव कुछ कम हो सकता है। यदि डॉलर में यह गिरावट जारी रहती है तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आयात बिल में मामूली राहत मिल सकती है। • सोना और कीमती धातुएं: डॉलर में नरमी आने से सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों में निवेश की मांग फिर से मजबूत हो सकती है। जो निवेशक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना खरीदते हैं, उन्हें 4,180 से 4,200 डॉलर के स्तरों पर नजर बनाए रखनी होगी। • क्रिप्टोकरेंसी निवेशक: पारंपरिक वित्तीय बाजारों में डॉलर के कमजोर पड़ने से डिजिटल संपत्तियों में पूंजी का प्रवाह तेज हो सकता है। बिटकॉइन के 86,000 डॉलर के पार टिकने से क्रिप्टो बाजार में सकारात्मक धारणा और बढ़ सकती है। • ब्याज दरों का दृष्टिकोण: अमेरिकी रोजगार के कमजोर आंकड़ों से केंद्रीय बैंक द्वारा भविष्य में ब्याज दरें घटाने की संभावना बढ़ जाती है। यदि फेडरल रिजर्व दरों में कटौती की राह पर बढ़ता है, तो दुनिया भर के शेयर बाजारों को सस्ती पूंजी का सहारा मिल सकता है। ऐसा क्यों हुआ सितंबर में अमेरिकी रोजगार के आंकड़े उम्मीद से काफी कमजोर रहने और पिछले महीनों के संशोधन से नौकरियों की रफ्तार घटने के कारण डॉलर इंडेक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई। • रोजगार में भारी सुस्ती: अमेरिकी नियोक्ताओं ने सितंबर में केवल 29,000 नई नौकरियां जोड़ीं, जो 90,000 के अनुमान से काफी कम थीं। इस बड़े अंतर ने निवेशकों को अमेरिकी आर्थिक वृद्धि की रफ्तार पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया। • पिछले महीनों का नकारात्मक संशोधन: जुलाई और अगस्त के रोजगार आंकड़ों में 60,000 नौकरियों की कटौती की गई। इस लगातार गिरावट ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि श्रम बाजार में कमजोरी केवल एक महीने तक सीमित नहीं है। • बेरोजगारी और मजदूरी के आंकड़े: बेरोजगारी दर बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो गई और वेतन वृद्धि घटकर 3.0 प्रतिशत पर आ गई, जो 3.2 प्रतिशत के अनुमान से कम थी। इससे फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को उच्च स्तर पर बनाए रखने की गुंजाइश कम हुई। सवाल-जवाब 1. सितंबर में अमेरिका में कितनी नौकरियां जुड़ीं? सितंबर महीने में अमेरिकी नियोक्ताओं ने 29,000 नौकरियां जोड़ीं, जबकि अनुमान 90,000 नौकरियों का था। 2. पेरोल आंकड़े आने के बाद डॉलर इंडेक्स कहां तक गिरा? डॉलर इंडेक्स 102.00 के स्तर से फिसलकर सत्र के निचले स्तर 101.70 के नीचे तक लुढ़क गया। 3. अमेरिका में बेरोजगारी दर कितनी दर्ज की गई? ताजा आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में बेरोजगारी दर बढ़कर 4.2 प्रतिशत पर पहुंच गई है। 4. जुलाई और अगस्त के रोजगार आंकड़ों में क्या संशोधन हुआ? जुलाई और अगस्त के रोजगार आंकड़ों में संयुक्त रूप से 60,000 नौकरियों की कमी का नकारात्मक संशोधन किया गया। 5. रोजगार रिपोर्ट के बाद सोने और बिटकॉइन की क्या स्थिति रही? सोने का भाव 4,200 डॉलर के पार टिकने में विफल होकर 4,180 डॉलर के करीब आ गया, जबकि बिटकॉइन 86,000 डॉलर के पार निकल गया। https://trendkia.com/market/us-naukariyon-ke-kamajora-ankaron-se-dollar-index-phisala-janie-vaishvika-bajaron-para-kya-hua-asara-42023 TrendKia — Har trend, sabse pehle.