अमेरिका ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को देश छोड़ने का दिया आदेश, कच्चे तेल और वैश्विक बाजारों में हलचल वार्ता रुकने के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में आए ईरानी प्रतिनिधिमंडल को तुरंत अमेरिका छोड़ने को कहा है। इस कूटनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त दर्ज की गई और मुद्रा बाजारों में डॉलर मजबूत हुआ। वाशिंगटन और तेहरान के बीच गहराते राजनयिक टकराव के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के सिलसिले में आए ईरानी प्रतिनिधिमंडल को तत्काल प्रभाव से संयुक्त राज्य अमेरिका छोड़ने का निर्देश दिया है। दोनों पक्षों के बीच बातचीत में गतिरोध पैदा होने के बाद यह सख्त कदम उठाया गया। एक अमेरिकी अधिकारी ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा का सत्र पूरा हो चुका था और ईरानी प्रतिनिधिमंडल वहां अपनी तय अवधि से अधिक समय तक रुक चुका था, जिसके चलते उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया गया। इस कूटनीतिक तल्खी ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों, ऊर्जा आपूर्ति और विदेशी मुद्रा विनिमय पर सीधा असर डाला है। भू-राजनीतिक खींचतान और वाशिंगटन से सीधी चेतावनी इस फैसले से पहले बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा था कि वाशिंगटन को जल्द ही यह तय करना होगा कि वह ईरान पर हमला करे या फिर तेहरान के साथ किसी समझौते पर पहुंचे। राष्ट्रपति ट्रंप के इस बयान से दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक टकराव का खतरा बढ़ गया है। दूसरी ओर, ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें ईरान के आसन्न आर्थिक पतन की बात कही गई थी। ईरानी संसद के अध्यक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि ईरान नहीं, बल्कि खुद वाशिंगटन अपने गंभीर कर्ज संकट की ओर बढ़ रहा है। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच जारी इस जुबानी जंग ने वैश्विक निवेशकों के बीच जोखिम की आशंकाओं को हवा दे दी है। कच्चे तेल में तेजी और डब्ल्यूटीआई क्रूड का गणित मध्य पूर्व में गहराते इस तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर तुरंत देखने को मिला। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड 0.16 प्रतिशत की बढ़त के साथ 89.60 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर कारोबार करता दिखा। डब्ल्यूटीआई अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिकने वाले कच्चे तेल का एक प्रमुख प्रकार है। ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ यह दुनिया के तीन सबसे बड़े तेल मानकों में शामिल है। डब्ल्यूटीआई को अपनी कम गुरुत्वाकर्षण क्षमता और कम सल्फर मात्रा के कारण 'लाइट' और 'स्वीट' क्रूड माना जाता है। उच्च गुणवत्ता का होने की वजह से इसे रिफाइन करना बेहद आसान होता है। इसे अमेरिका में निकाला जाता है और इसका वितरण कुशिंग हब के जरिए किया जाता है, जिसे वैश्विक स्तर पर पाइपलाइन चौराहों का केंद्र कहा जाता है। मीडिया और वित्तीय रिपोर्टों में डब्ल्यूटीआई की कीमतें बाजार की चाल तय करने का मुख्य पैमाना मानी जाती हैं। तेल की कीमतों को चलाने वाले मूलभूत कारक किसी भी अन्य वित्तीय परिसंपत्ति की तरह कच्चे तेल की कीमतों का निर्धारण आपूर्ति और मांग के समीकरणों से होता है। वैश्विक आर्थिक वृद्धि में तेजी तेल की खपत और मांग को बढ़ाती है, जबकि सुस्त वैश्विक विकास मांग में गिरावट लाता है। इसके अलावा राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध और व्यापारिक प्रतिबंध आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर कीमतों को ऊपर धकेलते हैं। कच्चे तेल के बाजार में तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक के फैसले भी कीमतों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल का कारोबार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर की कीमत में उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर तेल की सामर्थ्य को प्रभावित करता है। कमजोर अमेरिकी डॉलर तेल को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सस्ता बनाता है, जबकि मजबूत डॉलर से खरीद क्षमता पर दबाव पड़ता है। इन्वेंट्री रिपोर्ट और ओपेक का उत्पादन कोटा डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतों पर अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान यानी एपीआई और एनर्जी इंफॉर्मेशन एजेंसी यानी ईआईए की साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट का भी गहरा असर पड़ता है। तेल भंडारों में बदलाव मांग और आपूर्ति के वास्तविक उतार-चढ़ाव को दर्शाते हैं। यदि रिपोर्ट में भंडार में गिरावट दर्ज की जाती है, तो यह मांग में वृद्धि का संकेत देती है जिससे कीमतें चढ़ती हैं। इसके विपरीत इन्वेंट्री में बढ़ोतरी अतिरिक्त आपूर्ति की ओर इशारा करती है, जिससे कीमतों में नरमी आती है। एपीआई अपनी रिपोर्ट प्रत्येक मंगलवार को जारी करता है, जबकि ईआईए का आधिकारिक आंकड़ा अगले दिन बुधवार को आता है। इन दोनों रिपोर्टों के परिणाम आमतौर पर एक जैसे होते हैं और 75 प्रतिशत मामलों में उनके अंतर का दायरा 1 प्रतिशत के भीतर रहता है। सरकारी एजेंसी होने के कारण ईआईए के आंकड़ों को बाजार अधिक प्रामाणिक मानता है। इसके साथ ही 12 तेल निर्यातक देशों का समूह ओपेक वर्ष में दो बार होने वाली बैठकों में अपने सदस्य देशों के उत्पादन कोटे का निर्धारण करता है। जब ओपेक उत्पादन में कटौती का फैसला करता है, तो बाजार में आपूर्ति सीमित हो जाती है और कीमतें बढ़ने लगती हैं। वहीं उत्पादन बढ़ाने पर कीमतें नीचे आती हैं। ओपेक प्लस में दस अतिरिक्त गैर-ओपेक सदस्य देश भी शामिल हैं, जिनमें रूस सबसे प्रमुख है। इन देशों की सामूहिक नीतियां ऊर्जा बाजार की दिशा निर्धारित करती हैं। विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की बढ़त और एशियाई सत्र की हलचल मध्य पूर्व के राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश की मांग के कारण अमेरिकी डॉलर को व्यापक मजबूती मिली है। गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र में डॉलर की मजबूती के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी यानी एयूडी/यूएसडी अपने दो महीने के निचले स्तर के करीब स्थिर रही और 0.6900 के मध्य स्तर से ठीक नीचे कारोबार करती नजर आई। हालांकि अमेरिका के पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर यानी पीसीई डेटा ने अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं को थोड़ा धीमा किया है, लेकिन तेल की वजह से पैदा हुए मुद्रास्फीति के दबाव ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को ऊंचे स्तरों पर बनाए रखा है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता और रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के सतर्क रुख ने इस मुद्रा जोड़ी पर लगातार दबाव बनाए रखा है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी यानी यूएसडी/जेपीवाई पिछले दिन छुए गए डेढ़ सप्ताह के निचले स्तर से उबरते हुए गुरुवार को अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी सिरे तक पहुंच गई। नरम पीसीई आंकड़ों के बावजूद तेल आधारित महंगाई के जोखिमों ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को कई वर्षों के उच्चतम स्तर के करीब टिका रखा है। अमेरिका और ईरान के बीच इस टकराव ने सुरक्षित ठिकाना माने जाने वाले डॉलर को सहारा दिया। हालांकि बैंक ऑफ जापान की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की अटकलों और बाजार में आधिकारिक हस्तक्षेप की आशंकाओं ने जापानी येन के नुकसान को सीमित किया है। सोने की कीमतों पर दबाव और यूरो का संघर्ष डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में तेजी का सीधा असर सोने पर भी देखा गया। गुरुवार को सोने की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई और यह पिछले सत्र के 4,220 डॉलर के स्तर से नीचे की ओर फिसलती दिखाई दी। तेल की वजह से बढ़ती महंगाई के जोखिमों ने नरम पीसीई आंकड़ों के प्रभाव को संतुलित कर दिया, जिससे बिना ब्याज वाली संपत्ति सोने की मांग कमजोर हुई। सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की लगातार खरीदारी ने भी सोने पर नकारात्मक दबाव बनाया। मुद्रा बाजार में यूरो भी गंभीर दबाव से जूझता दिखा। यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी यानी ईयूआर/यूएसडी मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर तक गिर गई। बुधवार को यह जोड़ी 1.1312 के स्तर तक लुढ़क गई, जो जनवरी के 1.2082 के उच्चतम स्तर से काफी नीचे है। हालांकि यूरोज़ोन में मुद्रास्फीति के नए झटके यूरो को कुछ अप्रत्याशित राहत दे सकते हैं। फेडरल रिजर्व की दरों का परिदृश्य और पीसीई डेटा संशोधन ब्याज दरों के मोर्चे पर वित्तीय बाजार के ट्रेडर्स ने फेडरल रिजर्व की संभावित दर वृद्धि के समय को 28 अक्टूबर से खिसकाकर 9 दिसंबर कर दिया है। मुद्रास्फीति रिपोर्ट के साथ जारी सरकारी वार्षिक संशोधन में अगस्त के व्यक्तिगत उपभोग व्यय मूल्य सूचकांक के साथ जुलाई के कोर पीसीई आंकड़ों को संशोधित किया गया। खाद्य और ऊर्जा की कीमतों को अलग रखने वाले जुलाई के मुख्य कोर आंकड़े को 3.3 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत कर दिया गया। इस बदलाव ने ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों को नया मोड़ दिया है, लेकिन ऊर्जा बाजार की अनिश्चितताएं नीति निर्माताओं और निवेशकों दोनों के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी कर रही हैं। इसका आप पर असर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते कूटनीतिक तनाव तथा कच्चे तेल में तेजी का सीधा असर वैश्विक मुद्रास्फीति, घरेलू ईंधन कीमतों और निवेश रिटर्न पर पड़ेगा। • ईंधन की लागत: कच्चे तेल की कीमतें 89.60 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने से पेट्रोल और डीजल की खरीद लागत बढ़ सकती है। यदि यह तेजी बरकरार रहती है तो परिवहन भाड़ा बढ़ने से रोजमर्रा के उपभोग की वस्तुओं पर महंगाई का दबाव देखा जा सकता है। • विदेशी मुद्रा और यात्रा: अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से अन्य विदेशी मुद्राओं के मुकाबले विनिमय दर महंगी हो सकती है। जो नागरिक विदेश यात्रा या पढ़ाई की योजना बना रहे हैं, उन्हें डॉलर खरीदने के लिए अतिरिक्त बजट रखना पड़ सकता है। • सोने में निवेश: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊंची रहने के कारण सोना 4,220 डॉलर के उच्च स्तर से नीचे फिसल रहा है। बुलियन में अल्पकालिक कारोबार करने वाले निवेशकों को कीमतों में और सुधार या स्थिरता का इंतजार करना चाहिए। • शेयर बाजार में सतर्कता: भू-राजनीतिक अस्थिरता और ऊर्जा लागत में उछाल से वैश्विक इक्विटी बाजारों में बिकवाली का जोखिम बढ़ जाता है। रिटेल निवेशकों को अत्यधिक उधारी वाले सौदों से बचते हुए अपने पोर्टफोलियो में विविधीकरण बनाए रखना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत विफल होने और संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के समापन के बाद राजनयिक समय सीमा समाप्त होने के कारण हुआ है। इसके साथ ही दोनों देशों के नेताओं की तीखी बयानबाजी ने स्थिति को और भड़का दिया है। • वार्ता में गतिरोध: संयुक्त राष्ट्र सत्र के दौरान चल रही बातचीत में सहमति न बन पाने के कारण अमेरिकी विदेश मंत्री ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को देश छोड़ने का आदेश दिया। वार्ता टूटने से दोनों देशों के बीच औपचारिक कूटनीतिक संवाद अचानक रुक गया। • संयुक्त राष्ट्र यात्रा अवधि की समाप्ति: अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार संयुक्त राष्ट्र महासभा का सम्मेलन खत्म हो चुका था और प्रतिनिधिमंडल अपनी तय अवधि से अधिक रुक चुका था। औपचारिक राजनयिक कार्यों के पूरा होने के बाद उनके ठहरने की अनुमति समाप्त मानी गई। • शीर्ष नेताओं की तल्ख टिप्पणियां: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर हमले या समझौते के अल्टीमेटम और ईरानी संसद अध्यक्ष द्वारा अमेरिकी कर्ज संकट पर दिए गए बयानों ने तनाव को चरम पर पहुंचा दिया। इन बयानों से बाजार में सैन्य टकराव और कड़े प्रतिबंधों की आशंकाएं बढ़ गईं। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी विदेश मंत्री ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को क्या आदेश दिया? विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बातचीत विफल होने के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा में आए ईरानी प्रतिनिधिमंडल को तत्काल अमेरिका छोड़ने का निर्देश दिया। 2. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर क्या बयान दिया था? राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन को जल्द ही यह तय करना होगा कि वह ईरान पर हमला करे या उसके साथ कोई समझौता करे। 3. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने क्या प्रतिक्रिया दी? उन्होंने ईरान के आर्थिक पतन के दावों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका खुद अपने गंभीर कर्ज संकट की ओर बढ़ रहा है। 4. इस भू-राजनीतिक तनाव के बीच डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमत क्या रही? डब्ल्यूटीआई क्रूड 0.16 प्रतिशत की बढ़त के साथ 89.60 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। 5. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर ट्रेडर्स का क्या अनुमान है? ट्रेडर्स ने अगली संभावित दर वृद्धि के समय को 28 अक्टूबर से आगे बढ़ाकर 9 दिसंबर कर दिया है। https://trendkia.com/market/us-ne-iranian-pratinidhimndala-ko-desha-chhorane-ka-diya-adesha-kachche-tela-aura-vaishvika-bajaron-men-halachala-40864 TrendKia — Har trend, sabse pehle.