मध्यवर्ती चुनावों के बाद ईरान संघर्ष तुरंत समाप्त होने की उम्मीद, डोनाल्ड ट्रंप ने दिए कड़े संकेत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि ईरान में चल रहा युद्ध देश के मध्यवर्ती चुनावों के तुरंत बाद समाप्त हो जाएगा। उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक बेहतरीन बातचीत होने की भी जानकारी दी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए घोषणा की कि ईरान के साथ चल रहा संघर्ष अमेरिकी मध्यवर्ती चुनावों के तुरंत बाद खत्म हो जाएगा। डल्लास में रिपब्लिकन नेशनल कन्वेंशन के लिए रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने यह दावा किया कि ईरानी पक्ष आगामी चुनावों को प्रभावित करने के लिए बेहद उत्सुक नजर आ रहा है। रूस के साथ द्विपक्षीय बैठक की संभावना अपनी इस यात्रा और हालिया मुलाकातों के दौरान ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अपनी हालिया बातचीत को बेहद सकारात्मक बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुतिन के साथ उनकी बेहतरीन चर्चा हुई है और दोनों नेताओं के बीच भविष्य में एक द्विपक्षीय बैठक होने की पूरी संभावना है। ईरान और परमाणु समझौते पर दृष्टिकोण ईरान के मामले पर अपनी बात रखते हुए ट्रंप ने जोर देकर कहा कि इस मोर्चे पर आगे चलकर बातचीत और समझौते की गुंजाइश बनी हुई है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वह केवल एक साधारण परमाणु समझौते से कहीं अधिक बड़े स्तर पर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही पेट्रोल और गैसोलीन की कीमतों को लेकर उन्होंने स्वीकार किया कि स्थिति को सामान्य होने में थोड़ा अधिक समय लग सकता है। विदेशी मुद्रा बाजार और प्रमुख मुद्राओं की चाल वैश्विक वित्तीय बाजारों में मुद्रा जोड़े की स्थिति पर नजर डालें तो अमेरिकी डॉलर ने मुख्य मुद्राओं के मुकाबले अपनी स्थिति मजबूत की है, और वह न्यूजीलैंड डॉलर के खिलाफ सबसे मजबूत मुद्रा के रूप में उभरा है। बाजार के विश्लेषक करेंसी हीट मैप के जरिए विभिन्न मुद्राओं के आपसी उतार-चढ़ाव पर नजर बनाए रखते हैं। रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ बाजार की धारणा वित्तीय जगत में रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ वे दो प्रमुख अवधारणाएं हैं जो यह तय करती हैं कि निवेशक किसी निश्चित अवधि में कितना जोखिम उठाने को तैयार हैं। रिस्क-ऑन बाजार वह स्थिति है जहां निवेशक भविष्य को लेकर अत्यधिक आशान्वित रहते हैं और जोखिम भरी संपत्तियों में पूंजी लगाने से नहीं कतराते हैं। इसके विपरीत, रिस्क-ऑफ माहौल में अनिश्चितता के बादल मंडराने लगते हैं और निवेशक अपनी पूंजी सुरक्षित विकल्पों में लगाना पसंद करते हैं, भले ही उससे मिलने वाला रिटर्न अपेक्षाकृत कम क्यों न हो। विभिन्न परिसंपत्तियों पर बाजार की चाल का असर सामान्य तौर पर जब बाजार रिस्क-ऑन की स्थिति में होता है, तो शेयर बाजार में तेजी आती है और सोने को छोड़कर अधिकांश कमोडिटी की कीमतों में उछाल देखने को मिलता है। भारी मात्रा में कमोडिटी का निर्यात करने वाले देशों की मुद्राएं मजबूत होती हैं क्योंकि कच्चे माल की मांग में बढ़ोतरी दर्ज की जाती है, और इसके साथ ही क्रिप्टोकरेंसी में भी तेजी आती है। दूसरी ओर, जब बाजार रिस्क-ऑफ मोड में जाता है, तब सरकारी बॉन्ड की कीमतें बढ़ जाती हैं, सोने की चमक तेज हो जाती है और जापानी येन, स्विस फ्रैंक तथा अमेरिकी डॉलर जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली मुद्राएं मजबूत होती हैं। कमोडिटी आधारित और सुरक्षित मुद्राओं का प्रदर्शन ऑस्ट्रेलियन डॉलर, कनाडाई डॉलर, न्यूजीलैंड डॉलर के अलावा रूसी रूबल और दक्षिण अफ्रीकी रैंड जैसी मुद्राएं अमूमन रिस्क-ऑन बाजारों में ऊपर की ओर चढ़ती हैं क्योंकि इन अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि काफी हद तक कमोडिटी निर्यात पर निर्भर करती है। इसके विपरीत, संकट के समय जापानी येन में इसलिए तेजी आती है क्योंकि वहां के घरेलू निवेशक अपने सरकारी बॉन्ड को सुरक्षित मानते हैं। स्विस फ्रैंक को वहां के कड़े बैंकिंग कानूनों के कारण पूंजी सुरक्षा का एक मजबूत गढ़ माना जाता है। प्रमुख करंसी जोड़ियों और सोने का मौजूदा रुझान एशियाई बाजारों के खुलने से पहले AUD/USD जोड़ी मामूली गिरावट के बीच 0.7200 के निचले स्तरों के आसपास कारोबार कर रही है, क्योंकि निवेशक भू-राजनीतिक गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए हैं। अमेरिकी सत्र के दौरान USD/JPY जोड़ी ने मंदी के दबाव को पीछे छोड़ते हुए 153.50 के स्तर को पार कर लिया है, जिसे ट्रेजरी बायबैक की घोषणा से बल मिला है। हालांकि मजबूत जापानी आंकड़ों ने केंद्रीय बैंक द्वारा मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की उम्मीदों को और पुख्ता कर दिया है। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर पर बिकवाली के दबाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच सोने की कीमतों में भी रिकवरी आई है और इसने 4,400 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के महत्वपूर्ण आंकड़े को फिर से पार कर लिया है। इसका आप पर असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वित्तीय बाजारों के इस घटनाक्रम का दुनिया भर के निवेशकों और आम नागरिकों की जेब पर गहरा असर पड़ सकता है। • भारत में: कच्चे तेल और वैश्विक बाजार में भू-राजनीतिक तनाव के घटने-बढ़ने से घरेलू स्तर पर पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। मध्यपूर्व में संघर्ष विराम की उम्मीद से ऊर्जा आयात की लागत स्थिर हो सकती है। • वैश्विक निवेशकों के लिए: सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी डॉलर की चाल निवेशकों के पोर्टफोलियो को प्रभावित करती है। डॉलर और येन की विनिमय दरों में बदलाव से आयात-निर्यात आधारित कारोबारियों को अपनी रणनीतियां बदलनी पड़ सकती हैं। • मुद्रा बाजार पर असर: प्रमुख मुद्राओं के उतार-चढ़ाव से विदेशी मुद्रा कारोबारियों और अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले लोगों के खर्च में सीधा अंतर आता है। • ऊर्जा की कीमतें: गैसोलीन की कीमतों में सुधार में थोड़ा समय लगने के बयान का अर्थ है कि उपभोक्ताओं को ईंधन खर्च के मामले में अभी कुछ और हफ्तों तक राहत का इंतजार करना पड़ सकता है। • आर्थिक अनिश्चितता: भू-राजनीतिक बयानों के बीच वैश्विक शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है, जिससे निवेशकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। ऐसा क्यों हुआ अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वित्तीय बाजारों में चल रहे इन घटनाक्रमों के पीछे कई भू-राजनीतिक और आर्थिक कारक जिम्मेदार हैं। • चुनावी समीकरण: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान संघर्ष के अंत को मध्यवर्ती चुनावों से जोड़ना घरेलू राजनीतिक प्राथमिकताओं और मतदाताओं के रुख को प्रभावित करने की रणनीति का हिस्सा है। • भू-राजनीतिक कूटनीति: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ कूटनीतिक संवाद और संभावित बैठकों का उद्देश्य वैश्विक संघर्षों को सुलझाने और अंतरराष्ट्रीय दबाव को संतुलित करना है। • आर्थिक जोखिम धारणा: वित्तीय बाजारों में रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ का यह चक्र वैश्विक अनिश्चितताओं, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और कमोडिटी की मांग व आपूर्ति के संतुलन से संचालित होता है। • मुद्राओं का उतार-चढ़ाव: अमेरिकी ट्रेजरी बायबैक की घोषणा और मजबूत आर्थिक आंकड़ों ने विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर और येन जैसी प्रमुख मुद्राओं की मांग और आपूर्ति के समीकरण को बदल दिया है। सवाल-जवाब 1. डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध के समाप्त होने को लेकर क्या बयान दिया है? डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान में युद्ध अमेरिकी मध्यवर्ती चुनावों के तुरंत बाद समाप्त हो जाएगा। 2. ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति के साथ किस बैठक की संभावना जताई है? ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना जताई है। 3. गैसोलीन की कीमतों को लेकर ट्रंप का क्या कहना है? ट्रंप ने कहा है कि गैसोलीन की कीमतों को सामान्य होने में थोड़ा अधिक समय लगेगा। 4. विदेशी मुद्रा बाजार में कौन सी मुद्रा सबसे मजबूत रही? अमेरिकी डॉलर प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मजबूत रहा और न्यूजीलैंड डॉलर के खिलाफ सबसे अधिक मजबूत दर्ज किया गया। 5. सोने की कीमतों में हालिया रुझान क्या रहा है? सोने की कीमतों में रिकवरी आई है और इसने 4,400 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के आंकड़े को पार कर लिया है। 6. रिस्क-ऑन बाजार किसे कहा जाता है? रिस्क-ऑन बाजार वह स्थिति है जहां निवेशक भविष्य को लेकर आशावादी होते हैं और जोखिम भरी संपत्तियों में निवेश करना पसंद करते हैं। https://trendkia.com/market/us-president-trump-pins-iran-endgame-on-midterms-open-to-talks-30568 TrendKia — Har trend, sabse pehle.