अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट गहराने के आसार, ब्याज दरों में बढ़ोतरी की 92 फीसदी संभावना से सहमे निवेशक कच्चे तेल और ईंधन की बढ़ती कीमतों से महंगाई भड़कने की आशंका के बीच फेडरल रिजर्व द्वारा दरें बढ़ाने की संभावना 92 फीसदी पार पहुंच गई है। चिप कंपनियों के शेयरों में बिकवाली और नीतिगत सख्ती के डर से अमेरिकी वायदा सूचकांकों में तेज गिरावट देखी जा रही है। वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस सप्ताह तेज उथल-पुथल देखने को मिल रही है, क्योंकि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक से पहले निवेशकों में घबराहट साफ दिखाई दे रही है। ऊर्जा की बढ़ती लागत ने मुद्रास्फीति के दबाव को दोबारा बढ़ा दिया है, जिसके चलते ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की आशंका बेहद प्रबल हो चुकी है। इसका सीधा असर अमेरिकी शेयर बाजार के वायदा कारोबार पर पड़ा है, जहां प्रमुख सूचकांक लगातार लाल निशान में फिसल रहे हैं। इस दबाव को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आई भारी बिकवाली और तकनीकी जगत के दिग्गजों द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के अनियंत्रित विकास को लेकर जताई गई चिंताओं ने और अधिक गंभीर बना दिया है। वायदा कारोबार में प्रमुख सूचकांकों का हाल मंगलवार को यूरोपीय कारोबारी घंटों के दौरान प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों के वायदा सौदों में उल्लेखनीय कमजोरी दर्ज की गई। डाउ जोन्स फ्यूचर्स 0.56 प्रतिशत गिरकर 52,150 के स्तर के करीब कारोबार करता नजर आया। इसी तरह, एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में 0.42 प्रतिशत की नरमी दर्ज की गई और यह लगभग 7,590 के आसपास फिसल गया। तकनीक प्रधान नैस्डैक 100 फ्यूचर्स भी 0.37 प्रतिशत टूटकर लगभग 29,050 के स्तर पर आ गया। वायदा बाजारों में यह बिकवाली दर्शाती है कि वॉल स्ट्रीट पर नियमित सत्र शुरू होने के बाद भी गिरावट का सिलसिला आगे बढ़ सकता है। फेडरल रिजर्व की बैठक और ब्याज दरों की बढ़ती संभावना बाजार में जारी इस घबराहट की सबसे बड़ी जड़ फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती आशंका है। ईंधन और ऊर्जा उत्पादों के दाम ऊंचे बने रहने से केंद्रीय बैंक के सामने महंगाई को काबू में रखने की चुनौती दोबारा खड़ी हो गई है। शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज के सीएमई फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मुद्रा बाजार इस सप्ताह नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की 92 प्रतिशत से अधिक संभावना मानकर चल रहे हैं। यह आंकड़ा महज एक सप्ताह पहले लगभग 59 प्रतिशत था, जिससे स्पष्ट होता है कि पिछले कुछ दिनों में निवेशकों की धारणा कितनी तेजी से सख्त मौद्रिक नीति की ओर मुड़ी है। चिप शेयरों में बिकवाली और तकनीकी क्षेत्र पर गहराया दबाव सोमवार के नियमित कारोबारी सत्र में भी वॉल स्ट्रीट पर भारी उतार-चढ़ाव देखा गया था और सभी प्रमुख अमेरिकी सूचकांक नुकसान के साथ बंद हुए थे। तकनीकी शेयरों से भरा नैस्डैक कंपोजिट 0.56 प्रतिशत टूटकर बंद हुआ, जबकि एसएंडपी 500 में 0.48 प्रतिशत और डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 0.29 प्रतिशत की गिरावट आई थी। डांस्के बैंक के रणनीतिकारों ने सत्र की समीक्षा करते हुए रेखांकित किया कि कई प्रमुख सूचकांकों ने कारोबारी दिन के भीतर लगभग 1.5 प्रतिशत के उतार-चढ़ाव दर्ज किए। यह उथल-पुथल इस बात का प्रमाण है कि बाजार किसी स्पष्ट दिशा को तलाशने में असमर्थ रहा और अस्थिरता हावी रही। तकनीकी शेयरों में गिरावट की मुख्य वजह सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में आई तेज बिकवाली रही। यह बिकवाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक के बेहद तेज रफ्तार विकास से जुड़ी सुरक्षा और नियामकीय चिंताओं के कारण शुरू हुई। उद्योग के शीर्ष अधिकारियों ने खुले तौर पर चेतावनी दी है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए क्षमता बढ़ाना जोखिम भरा हो सकता है। एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने सार्वजनिक रूप से मांग की कि लगातार शक्तिशाली होते मॉडल से जुड़े जोखिमों से निपटने के लिए एआई के विकास की गति अधिक संतुलित और नियंत्रित होनी चाहिए। इस रुख को तकनीकी जगत के अन्य बड़े दिग्गजों का भी साथ मिला है, जिनमें ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन और एक्सएआई के सीईओ एलन मस्क शामिल हैं, जिन्होंने एआई सुरक्षा को लेकर इसी तरह की चिंताएं जाहिर की हैं। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज की बनावट और कार्यप्रणाली डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज दुनिया के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित शेयर बाजार सूचकांकों में से एक है। इसमें अमेरिका की 30 सबसे ज्यादा कारोबार करने वाली दिग्गज कंपनियों को शामिल किया जाता है। बाजार पूंजीकरण के आधार पर भारित होने वाले कई आधुनिक सूचकांकों के उलट, यह सूचकांक मूल्य-भारित यानी प्राइस-वेटेड प्रणाली पर काम करता है। इसकी गणना इसके 30 घटक शेयरों के भावों को जोड़कर और फिर उसे एक विभाजक से भाग देकर की जाती है, जो वर्तमान में 0.152 है। इस सूचकांक की नींव चार्ल्स डाउ ने रखी थी, जिन्होंने वॉल स्ट्रीट जर्नल की भी स्थापना की थी। हालांकि, बाद के वर्षों में इस सूचकांक की इस बात के लिए आलोचना भी होती रही है कि यह सिर्फ 30 कंपनियों को ट्रैक करता है, जिसके कारण यह एसएंडपी 500 जैसे व्यापक सूचकांकों जितना पूरे बाजार का प्रतिनिधित्व नहीं कर पाता। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज की चाल कई व्यापक कारकों पर निर्भर करती है। इनमें सबसे प्रमुख कारक इसकी 30 घटक कंपनियों के तिमाही नतीजों में सामने आने वाला समग्र वित्तीय प्रदर्शन है। इसके अतिरिक्त, अमेरिका और दुनिया भर से आने वाले व्यापक आर्थिक आंकड़े भी निवेशकों के रुख को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। फेडरल रिजर्व द्वारा तय की जाने वाली उधारी दरें भी इस सूचकांक को गहरा असर डालती हैं, क्योंकि ब्याज दरें सीधे कर्ज की लागत को तय करती हैं और अधिकांश बड़े औद्योगिक घराने पूंजी के लिए ऋण पर निर्भर रहते हैं। यही कारण है कि मुद्रास्फीति के आंकड़े और केंद्रीय बैंक के फैसलों को दिशा देने वाले अन्य आर्थिक संकेतक डाउ जोन्स की दिशा तय करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चार्ल्स डाउ का सिद्धांत और बाजार के तीन चरण शेयर बाजार के बुनियादी रुझानों को समझने के लिए चार्ल्स डाउ ने एक सुव्यवस्थित ढांचा तैयार किया था, जिसे डाउ थ्योरी कहा जाता है। इस सिद्धांत का एक केंद्रीय नियम यह है कि डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज और डाउ जोन्स ट्रांसपोर्टेशन एवरेज, दोनों की दिशा की तुलना की जानी चाहिए। बाजार के किसी रुझान को केवल तभी मजबूत माना जाता है जब दोनों सूचकांक एक ही दिशा में आगे बढ़ रहे हों। ट्रेडिंग वॉल्यूम यानी सौदों की संख्या इस दिशा की पुष्टि करने वाले पैमाने के रूप में कार्य करती है। यह विश्लेषण पीक और ट्रफ यानी शिखरों और गर्तों के आधार पर चलता है। डाउ सिद्धांत के तहत बाजार की चाल को तीन प्रमुख चरणों में बांटा गया है। पहला चरण एक्युमुलेशन कहलाता है, जहां समझदार और संस्थागत निवेशक खरीदारी या बिकवाली शुरू करते हैं। दूसरा चरण पब्लिक पार्टिसिपेशन होता है, जहां आम जनता और खुदरा निवेशक तेजी से बाजार में कूदते हैं। तीसरा चरण डिस्ट्रीब्यूशन का होता है, जहां शुरुआती संस्थागत निवेशक मुनाफा समेटकर बाजार से बाहर निकलने लगते हैं। डाउ जोन्स में निवेश और ट्रेडिंग के विभिन्न विकल्प वित्तीय बाजारों में डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज पर दांव लगाने या इसमें निवेश करने के कई अलग-अलग साधन उपलब्ध हैं। सबसे लोकप्रिय तरीकों में एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी ईटीएफ शामिल हैं, जो निवेशकों को अलग-अलग 30 कंपनियों के शेयर खरीदने के बजाय पूरे सूचकांक को एक ही शेयर की तरह ट्रेड करने की सुविधा देते हैं। इसका एक प्रमुख उदाहरण एसपीडीआर डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज ईटीएफ (डीआईए) है। इसके अलावा, डेरिवेटिव बाजार में सक्रिय ट्रेडर्स के लिए डाउ जोन्स फ्यूचर्स अनुबंध मौजूद हैं, जिनके जरिए सूचकांक के भविष्य के मूल्य पर अनुमान लगाकर दांव लगाया जा सकता है। वहीं ऑप्शंस अनुबंध निवेशकों को भविष्य में एक पूर्व-निर्धारित कीमत पर सूचकांक को खरीदने या बेचने का अधिकार देते हैं, हालांकि इसमें अनिवार्यता नहीं होती। इसके साथ ही, म्यूचुअल फंड्स भी निवेशकों को डाउ जोन्स के शेयरों के विविधतापूर्ण पोर्टफोलियो का हिस्सा खरीदकर पूरे सूचकांक में भागीदारी का अवसर प्रदान करते हैं। मुद्रा बाजारों और सोने में भी भारी हलचल फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक और तेल जनित मुद्रास्फीति जोखिमों का असर केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में भी इसका व्यापक प्रभाव देखा जा रहा है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तरों के करीब टिकी हुई है, जिससे अमेरिकी डॉलर को मजबूत सहारा मिल रहा है। इस मजबूती के दबाव में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (एयूडी/यूएसडी) मंगलवार के एशियाई सत्र में 0.7150 के नीचे दबाव में रही, जो पिछले दिन छुए गए तीन सप्ताह से अधिक के निचले स्तर के बेहद करीब है। अगस्त महीने के लिए चीन के मिले-जुले आर्थिक आंकड़ों से भी ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को कोई सहारा नहीं मिल सका। दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी (यूएसडी/जेपीवाई) मंगलवार सुबह 155.00 के स्तर की ओर बढ़ती नजर आई। हालांकि, बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य करने को लेकर बढ़ती आक्रामकता जापानी येन को कुछ आधार दे रही है, जिससे इस जोड़ी की तेजी पर एक सीमा लग सकती है। इस बीच, सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में भी दबाव बना हुआ है। एशियाई सत्र में मामूली बढ़त दर्ज करने के बाद सोना एक महीने के निचले स्तर के करीब संघर्ष कर रहा है और 4,300 डॉलर प्रति औंस के निशान से ठीक नीचे कारोबार कर रहा है, क्योंकि निवेशक आज से शुरू हो रही एफओएमसी की दो दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक के नतीजे आने तक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। इसका आप पर असर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की प्रबल संभावना से वैश्विक बाजारों में पूंजी की लागत बढ़ने और विदेशी निवेश में उतार-चढ़ाव आने का सीधा खतरा पैदा हो गया है। • भारतीय निवेशकों पर असर: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी से भारतीय शेयर बाजारों से विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की पूंजी निकासी बढ़ सकती है। इससे घरेलू इक्विटी सूचकांकों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है और निवेशकों को सतर्कता बरतने की जरूरत होगी। • रुपया और आयात लागत: मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे विदेशों से कच्चा तेल आयात करना महंगा हो जाएगा। इसका सीधा असर घरेलू स्तर पर परिवहन लागत और सामान्य महंगाई पर पड़ सकता है। • कर्ज और ईएमआई: यदि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाता है, तो दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों पर भी उधारी दरों को ऊंचा बनाए रखने का दबाव रहेगा। इसके चलते पर्सनल लोन, होम लोन या बिजनेस लोन पर ब्याज दरों में कटौती की संभावना फिलहाल टल सकती है। • सोने के खरीदार: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के 4,300 डॉलर के नीचे बने रहने से आभूषण खरीदारों को कीमतों में तेज उछाल से फौरी राहत मिल सकती है। हालांकि मजबूत डॉलर के कारण घरेलू बाजार में सोने की गिरावट सीमित रह सकती है। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट और निवेशकों की घबराहट मुख्य रूप से महंगे ईंधन के कारण भड़की महंगाई और एआई सुरक्षा चिंताओं के कारण उपजी है। इन दोनों कारकों ने केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं को अचानक बहुत मजबूत कर दिया है। • ऊर्जा लागत और मुद्रास्फीति: कच्चे तेल और ईंधन की ऊंची कीमतों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति के दबाव को दोबारा बढ़ा दिया है। इससे फेडरल रिजर्व के सामने मौद्रिक नीति को और सख्त करने की मजबूरी पैदा हो गई है, जिसके चलते ब्याज दर वृद्धि की संभावना 59 प्रतिशत से उछलकर 92 प्रतिशत के पार चली गई। • सेमीकंडक्टर शेयरों में बिकवाली: कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बहुत तेजी से हो रहे विकास को लेकर सुरक्षा और नियामकीय जोखिमों पर बहस तेज हो गई है। तकनीकी उद्योग के शीर्ष अधिकारियों द्वारा सतर्कता बरतने की मांग के बाद चिप कंपनियों के शेयरों में व्यापक बिकवाली शुरू हो गई। • बॉन्ड यील्ड में उछाल: अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है, जिससे शेयर बाजार के मुकाबले सरकारी बॉन्ड में निवेश अधिक आकर्षक हो गया है। निवेशक जोखिम भरे एसेट्स से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। सवाल-जवाब 1. डाउ जोन्स फ्यूचर्स और अन्य अमेरिकी सूचकांकों में कितनी गिरावट दर्ज की गई? मंगलवार को यूरोपीय सत्र में डाउ जोन्स फ्यूचर्स 0.56 प्रतिशत टूटकर लगभग 52,150 पर रहा, जबकि एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 0.42 प्रतिशत और नैस्डैक 100 फ्यूचर्स 0.37 प्रतिशत गिरकर कारोबार कर रहे थे। 2. फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना अचानक क्यों बढ़ गई है? ऊर्जा और ईंधन की ऊंची लागत से महंगाई बढ़ने की आशंकाएं तेज हो गई हैं, जिसके चलते सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार दर वृद्धि की संभावना 59 प्रतिशत से बढ़कर 92 प्रतिशत से अधिक हो गई है। 3. किन तकनीकी दिग्गजों ने एआई के विकास की गति धीमी करने की वकालत की है? एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने एआई विकास की गति को नियंत्रित करने की मांग की, जिसका समर्थन ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन और एक्सएआई के सीईओ एलन मस्क ने भी किया है। 4. डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज की गणना किस प्रकार की जाती है? यह एक मूल्य-भारित सूचकांक है, जिसकी गणना 30 घटक कंपनियों के शेयरों के भावों को जोड़कर वर्तमान विभाजक 0.152 से भाग देकर की जाती है। 5. मुद्रा बाजार और सोने पर इस स्थिति का क्या असर देखा जा रहा है? अमेरिकी डॉलर मजबूत बना हुआ है जिससे एयूडी/यूएसडी 0.7150 के नीचे दबाव में है और यूएसडी/जेपीवाई 155.00 की ओर बढ़ रहा है, जबकि सोना 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे एक महीने के निचले स्तर पर टिका है। https://trendkia.com/market/us-stock-futures-men-giravata-byaja-daron-men-barhotari-ki-92-phisadi-snbhavana-se-sahame-niveshaka-33949 TrendKia — Har trend, sabse pehle.