अक्टूबर एफओएमसी बैठक से पहले अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी, जानिए ब्याज दरों और सूचकांकों पर यूबीएस का आकलन अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27 और 28 अक्टूबर की नीतिगत बैठक से पहले वॉल स्ट्रीट में मजबूती देखने को मिली है, जहां ब्याज दरों में ठहराव की उम्मीदों के बीच तकनीकी शेयरों में जोरदार उछाल दर्ज किया गया। अमेरिकी शेयर बाजार ने नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ की है, क्योंकि वैश्विक निवेशकों का पूरा ध्यान 27 अक्टूबर से 28 अक्टूबर 2026 के बीच होने वाली फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की दो दिवसीय नीतिगत बैठक पर केंद्रित हो गया है। मंगलवार के शुरुआती कारोबार में अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स में बढ़त दर्ज की गई, जिससे संकेत मिलता है कि फेडरल रिजर्व इस बार नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और दरों को स्थिर रखेगा। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अक्टूबर नीति के बाद ब्याज दरों में दोबारा वृद्धि की संभावना पूरी तरह बरकरार है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म यूबीएस समेत कई बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक अगले बारह महीनों के भीतर कम से कम तीन बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। साथ ही, उनका यह भी मानना है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है कि वह लंबे समय तक उच्च ब्याज दरों के दबाव को आसानी से सहन कर सकती है। इस पूरे आर्थिक परिदृश्य के बीच निवेशकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में फेडरल रिजर्व के फैसले डाउ जोंस, नैस्डैक और एसएंडपी 500 को किस प्रकार प्रभावित करेंगे। वॉल स्ट्रीट में तेजी का दौर और प्रमुख सूचकांकों की स्थिति सप्ताह के पहले कारोबारी सत्र में वॉल स्ट्रीट के प्रमुख सूचकांक शानदार बढ़त के साथ बंद हुए। डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 146.42 अंक यानी 0.3 प्रतिशत की मजबूती दर्ज करते हुए 52,361.58 के स्तर पर बंद होने में कामयाब रहा। दूसरी ओर, तकनीकी कंपनियों के प्रभुत्व वाले नैस्डैक कंपोजिट ने अपने बाकी प्रतिस्पर्धी सूचकांकों की तुलना में काफी बेहतर प्रदर्शन किया और 214.04 अंक यानी 0.82 प्रतिशत उछलकर 26,169.38 के स्तर पर पहुंच गया। व्यापक बाजार का प्रतिनिधित्व करने वाले एसएंडपी 500 इंडेक्स में भी बढ़त का रुख देखने को मिला, जहां यह 53.09 अंक अथवा 0.70 प्रतिशत की तेजी के साथ 7,676.77 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार में रातोंरात आई इस तेजी के पीछे प्राथमिक कारण एंथ्रोपिक का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ रहा, जिसने पूरे प्रौद्योगिकी क्षेत्र में लिवाली की नई लहर पैदा कर दी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के विस्तार के लिए कंपनियों द्वारा भारी कर्ज जुटाने से जुड़ी चिंताओं के बावजूद तकनीकी शेयरों में जबर्दस्त खरीदारी देखने को मिली। टेस्ला के शेयरों में पांच प्रतिशत से अधिक का उछाल आया, जबकि चिप निर्माता कंपनी एनवीडिया के शेयर दो प्रतिशत चढ़ गए। इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न जैसी दिग्गज तकनीकी कंपनियों के शेयरों में भी ठोस खरीदारी देखी गई और वे अच्छी बढ़त हासिल करने में सफल रहीं। वायदा बाजार का रुख और कंपनियों के तिमाही नतीजे फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक शुरू होने से ठीक पहले वायदा बाजार में भी निवेशकों का रुझान तेजी की तरफ बना रहा। मंगलवार तड़के डाउ जोंस फ्यूचर्स 102 अंक यानी 0.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ 52,652 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसी दौरान नैस्डैक 100 फ्यूचर्स 31 अंक मजबूत होकर 29,468.25 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में भी 8.75 अंकों की मामूली तेजी दर्ज की गई और यह 7,722.75 पर ट्रेड करता दिखा। मंगलवार को निवेशकों का ध्यान कंपनियों के चालू तिमाही नतीजों पर भी केंद्रित रहेगा, जिनमें कोका-कोला, रॉबिनहुड और बोइंग जैसी बड़ी कंपनियां अपने आंकड़े पेश करेंगी। सप्ताह के उत्तरार्ध में बाजार की नजरें माइक्रोसॉफ्ट, अल्फाबेट और अमेज़न के वित्तीय परिणामों पर टिकी रहेंगी, जो टेक सेक्टर के समग्र स्वास्थ्य और आगे की आय वृद्धि की दिशा तय करेंगे। आर्थिक आंकड़े और मुद्रास्फीति की चुनौतियां नीतिगत निर्णय के अलावा बाजार प्रतिभागी कई महत्वपूर्ण वृहद आर्थिक आंकड़ों की भी प्रतीक्षा कर रहे हैं। ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के अनुसार, टिकाऊ सामानों के ऑर्डर, उपभोक्ता विश्वास सूचकांक और नए मकानों की बिक्री से जुड़े आंकड़े जारी होने वाले हैं। व्यापक रूप से उम्मीद यही की जा रही है कि फेडरल रिजर्व मौजूदा बैठक में अपनी उधारी दरों को अपरिवर्तित रखेगा, लेकिन निवेशक वर्ष के अंत से पहले किसी संभावित दर वृद्धि के सुराग तलाशने के लिए नीतिगत बयान और भविष्य के मार्गदर्शन का गहराई से विश्लेषण करेंगे। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी अपनी दो दिवसीय नीतिगत समीक्षा बैठक 27 अक्टूबर को शुरू करेगी और इसके परिणामों की घोषणा 28 अक्टूबर 2026 को की जाएगी। ब्रोकरेज फर्म यूबीएस के अनुसार, फ्यूचर्स बाजार की मौजूदा कीमतें यह दर्शाती हैं कि नीति निर्माता इस बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रखेंगे, लेकिन दिसंबर की बैठक में दरों में दोबारा बढ़ोतरी की जा सकती है। सितंबर नीति का ऐतिहासिक फैसला और फेड चेयरमैन का रुख इस बैठक की पृष्ठभूमि को समझने के लिए पिछली बैठक के घटनाक्रम को देखना महत्वपूर्ण है। सितंबर 2026 की मौद्रिक नीति बैठक में फेड चेयरमैन केविन वॉर्श ने तीन वर्षों में पहली बार फेडरल फंड्स रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की थी, जिससे नीतिगत दरें बढ़कर 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत के दायरे में आ गई थीं। इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण लगातार उच्च बनी हुई मुद्रास्फीति थी, जो ईरान संघर्ष के चलते उपजे ऊर्जा संकट के कारण नीचे नहीं आ पा रही थी। उस समय समिति के सभी 19 नीति निर्माताओं ने सर्वसम्मति से इस ब्याज दर वृद्धि के पक्ष में मतदान किया था। उस समय अपने संबोधन में केविन वॉर्श ने स्पष्ट रूप से कहा था कि जमीनी हकीकत यह है कि मुद्रास्फीति बहुत अधिक है और यह बहुत लंबे समय से इस स्तर पर बनी हुई है। उन्होंने इस बात को दोहराया था कि एफओएमसी का सबसे प्रमुख ध्यान अपने अधिदेश के तहत मूल्य स्थिरता स्थापित करने पर है। हाल ही में बैंकॉक में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ की बैठक में भी वॉर्श ने अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि वे बैठकों का पहले से कोई पूर्व-आकलन नहीं करते और उनका मानना है कि इस वर्ष की शेष बैठकों में क्या कदम उठाया जाएगा, उसके बारे में अभी से पहले से कुछ कहना उचित नहीं है। ट्रेजरी यील्ड और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़े पिछली नीतिगत बैठक के बाद से अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने नीति निर्माताओं के सामने नई चुनौतियां पेश की हैं। सितंबर 2026 में अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर 3.7 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि वार्षिक कोर मुद्रास्फीति की दर 2.6 प्रतिशत पर दर्ज की गई। यह आंकड़े फेडरल रिजर्व के 2 प्रतिशत के निर्धारित लक्ष्य से काफी ऊपर बने हुए हैं। मुद्रास्फीति के अलावा बॉन्ड बाजार में भी भारी उथल-पुथल देखी गई है। अक्टूबर के शुरुआती दिनों में 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.36 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, जो साल 2002 के बाद का इसका उच्चतम इंट्राडे स्तर था। हालांकि बाद के दिनों में इसमें कुछ नरमी आई और यह लगभग 5 प्रतिशत के आसपास स्थिर हो गई। इन तमाम दबावों के बावजूद इस बात की प्रबल संभावना है कि केंद्रीय बैंक अक्टूबर बैठक में दरों को यथावत रखेगा। यूबीएस का अनुमान और निवेशकों के लिए रणनीतिक सलाह वैश्विक वित्तीय सेवा प्रदाता यूबीएस ने अपने शोध नोट में रेखांकित किया है कि मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और उच्च ऊर्जा लागत ने ट्रेजरी यील्ड को कई दशकों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा मौद्रिक सख्ती के लंबे चक्र को लेकर बाजार में चिंताएं पैदा हुई हैं। इसके बावजूद यूबीएस का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक दिसंबर 2026 और फिर मार्च 2027 में 25-25 आधार अंकों की दो और दर वृद्धि कर सकता है। यूबीएस का मानना है कि लचीली आर्थिक वृद्धि और कंपनियों की मजबूत कमाई अमेरिकी शेयर बाजार को इस मध्यम नीतिगत सख्ती को सहन करने में मदद करेगी। इसके अतिरिक्त, बांड बाजार में बढ़ी हुई शुरुआती प्रतिफल दरें निवेशकों के लिए पोर्टफोलियो आय बढ़ाने के नए अवसर भी खोल रही हैं। कुल मिलाकर बाजार पहले ही अगले 12 महीनों में कम से कम तीन दर वृद्धि की संभावना को अपने मूल्यांकन में समाहित कर चुका है, लेकिन यह सब अक्टूबर 2026 की नीति के बाद घटित होगा। यूबीएस ने एसएंडपी 500 सूचकांक की कंपनियों के लिए 2026 में 25 प्रतिशत और 2027 में 14 प्रतिशत की आय वृद्धि का पूर्वानुमान लगाया है। मजबूत आय का यह रुझान शेयरों को उच्च यील्ड के प्रभाव को सोखने की क्षमता देगा, क्योंकि व्यापक अमेरिकी आर्थिक वृद्धि ठोस बनी हुई है। ब्रोकरेज ने सुझाव दिया है कि निवेशकों को इक्विटी बाजार में आगे की संभावित बढ़त के लिए अपनी स्थिति बनानी चाहिए, लेकिन साथ ही भौगोलिक क्षेत्रों, विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों और रिटर्न चालकों में अपने निवेश का विविधीकरण करना चाहिए तथा किसी एक शेयर पर जरूरत से ज्यादा निर्भर रहने से बचना चाहिए। निश्चित आय यानी फिक्स्ड इनकम परिसंपत्तियों पर अपनी राय रखते हुए यूबीएस ने इस श्रेणी को आकर्षक करार दिया है। फर्म ने कहा है कि निवेशकों के पास मध्यम से लंबी अवधि वाले उच्च गुणवत्ता वाले बॉन्ड और मजबूत निवेश-ग्रेड कंपनियों द्वारा जारी मध्यम-परिपक्वता वाले क्रेडिट के माध्यम से नियमित पोर्टफोलियो आय बढ़ाने का बेहतरीन मौका है। ब्रोकरेज का मानना है कि नपे-तुले तरीके से की जाने वाली दर वृद्धि से शेयरों में जारी तेजी का सिलसिला पटरी से नहीं उतरेगा। विश्लेषकों का स्पष्ट कहना है कि निवेशकों को गुणवत्तापूर्ण बॉन्ड में चुनिंदा खरीदारी के लिए यील्ड में आई तेजी का उपयोग करना चाहिए, जबकि बहुत लंबी परिपक्वता वाले बांड और कमजोर क्रेडिट गुणवत्ता वाले पत्रों से सतर्क दूरी बनाए रखनी चाहिए। अंततः चाहे दरें बढ़ें या न बढ़ें, चालू वर्ष के मजबूत आर्थिक गतिविधियों के आंकड़ों ने यह भरोसा मजबूत किया है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों के दौर का सफलतापूर्वक सामना कर सकती है। इसका आप पर असर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसलों और बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव का सीधा असर वैश्विक बाजारों और घरेलू निवेशकों के निवेश रिटर्न पर पड़ता है। • भारतीय शेयर बाजार पर प्रभाव: यदि अमेरिकी फेडरल रिजर्व भविष्य में ब्याज दरों में बढ़ोतरी जारी रखता है, तो विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय इक्विटी बाजारों से पूंजी निकाल सकते हैं। इसके चलते घरेलू बेंचमार्क सूचकांकों जैसे निफ्टी और सेंसेक्स में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। • मुद्रा विनिमय और डॉलर की चाल: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी अमेरिकी डॉलर को मजबूत बनाती है, जिससे भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। रुपये में किसी भी कमजोरी से आयात महंगा हो सकता है, जिसका असर अंततः घरेलू मुद्रास्फीति पर पड़ सकता है। • वैश्विक तकनीकी फंड्स के निवेशक: नैस्डैक और अमेरिकी तकनीकी कंपनियों में निवेश करने वाले भारतीय म्यूचुअल फंड निवेशकों को आगामी कॉरपोरेट आय रिपोर्टों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। तकनीकी क्षेत्र में ब्याज दरों की संवेदनशीलता के कारण पोर्टफोलियो के रिटर्न में बदलाव आ सकता है। • ऋण बाजार और बांड निवेशक: अमेरिकी बांड यील्ड 5 प्रतिशत के आसपास बने रहने से वैश्विक निश्चित आय प्रतिभूतियां आकर्षक बनी हुई हैं। निवेशकों को लंबी अवधि के जोखिम भरे बांडों के बजाय उच्च गुणवत्ता वाले फिक्स्ड इनकम विकल्पों को प्राथमिकता देनी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति में सख्ती और आगामी बैठकों में संभावित दर वृद्धि के पीछे भू-राजनीतिक तनाव और लगातार बनी हुई मुद्रास्फीति मुख्य वजहें हैं। • ईरान संघर्ष और ऊर्जा संकट: मध्य पूर्व में ईरान संघर्ष के चलते ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है और कच्चे तेल तथा ईंधन की कीमतों में उछाल आया है। इस ऊर्जा संकट ने उत्पादन लागत को बढ़ाकर मुद्रास्फीति के दबाव को दोबारा सक्रिय कर दिया है। • लक्ष्य से काफी ऊपर मुद्रास्फीति: सितंबर 2026 में अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक बढ़कर 3.7 प्रतिशत और कोर मुद्रास्फीति 2.6 प्रतिशत हो गई है। यह दरें फेड के 2 प्रतिशत के आधिकारिक लक्ष्य से बहुत अधिक हैं, जिसके कारण केंद्रीय बैंक को ब्याज दरें ऊंची रखनी पड़ रही हैं। • मजबूत आर्थिक वृद्धि और श्रम बाजार: टिकाऊ उपभोक्ता मांग और कॉर्पोरेट आय में लचीलेपन ने यह साबित किया है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था मंदी में जाए बिना उच्च ब्याज दरों का बोझ उठाने में सक्षम है। इस मजबूती ने नीति निर्माताओं को मूल्य स्थिरता को प्राथमिकता देने की छूट दी है। सवाल-जवाब 1. अक्टूबर 2026 की बैठक में फेडरल रिजर्व से क्या उम्मीद है? फेडरल ओपन मार्केट कमेटी द्वारा 27-28 अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरों को 3.75% से 4% के मौजूदा दायरे पर स्थिर रखने की व्यापक उम्मीद है। 2. फेडरल रिजर्व ने दरों में पिछली बढ़ोतरी कब की थी? सितंबर 2026 की बैठक में फेड चेयरमैन केविन वॉर्श के नेतृत्व में दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि की गई थी, जो तीन वर्षों में पहली बढ़ोतरी थी। 3. यूबीएस के अनुसार आगे ब्याज दरों में क्या बदलाव हो सकते हैं? यूबीएस का अनुमान है कि फेडरल रिजर्व दिसंबर 2026 और मार्च 2027 में 25-25 आधार अंकों की दर वृद्धि कर सकता है। 4. अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का उच्चतम स्तर क्या रहा है? 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड अक्टूबर की शुरुआत में 5.36 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, जो 2002 के बाद का उच्चतम इंट्राडे स्तर है। https://trendkia.com/market/us-stock-market-eyes-fomc-meet-from-oct-27-28-rate-hike-expectations-djia-s-p-500-nasdaq-52142 TrendKia — Har trend, sabse pehle.