कच्चे तेल में उबाल और बॉन्ड यील्ड के दबाव से अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट, डाउ जोंस 1011 अंक टूटा सितंबर 7 से 11 के कारोबारी हफ्ते के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और बढ़ती मुद्रास्फीति की चिंताओं के कारण अमेरिकी शेयर बाजारों में भारी बिकवाली दर्ज की गई, जिसमें डाउ जोंस में 1000 से अधिक अंकों की गिरावट आई। अमेरिकी शेयर बाजार के लिए सितंबर 7 से 11 का कारोबारी हफ्ता काफी उथल-पुथल भरा रहा। कच्चे तेल के दामों में अप्रत्याशित उछाल और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी के कारण पूरे हफ्ते वॉल स्ट्रीट पर चौतरफा बिकवाली का माहौल बना रहा। हालांकि हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को प्रमुख सूचकांकों में निचले स्तरों से रिकवरी देखने को मिली, लेकिन यह रिकवरी पूरे हफ्ते के नुकसान की भरपाई करने के लिए नाकाफी साबित हुई। अगस्त महीने के लिए जारी हुए पीपीआई और सीपीआई मुद्रास्फीति आंकड़ों के चलते अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा आगामी बैठक में ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका गहरा गई है, जिसने निवेशकों के भरोसे को बुरी तरह प्रभावित किया। शुक्रवार की रिकवरी के बावजूद साप्ताहिक आधार पर बड़ा नुकसान हफ्ते के अंतिम कारोबारी सत्र यानी 11 सितंबर को अमेरिकी बाजारों ने चार दिनों से जारी गिरावट के सिलसिले पर ब्रेक लगाया। शुक्रवार को डाउ जोंस इंडेक्स 509.19 अंक यानी 0.98 प्रतिशत की तेजी के साथ 52,573.29 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं टेक शेयरों वाले नैस्डैक 100 सूचकांक में 264.93 अंक यानी 0.91 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 29,368.44 के स्तर पर बंद हुआ। व्यापक नैस्डैक कंपोजिट इंडेक्स भी 251.31 अंक या 0.96 प्रतिशत बढ़कर 26,333.04 के स्तर पर पहुंचने में कामयाब रहा। इसके अलावा एसएंडपी 500 इंडेक्स 65.28 अंक यानी 0.86 प्रतिशत की मजबूती लेकर 7,656.98 के स्तर पर बंद हुआ। शुक्रवार को आई इस तेजी की मुख्य वजह कच्चे तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड में चार दिनों की बढ़त के बाद आई मामूली गिरावट रही। हालांकि, अगर पूरे हफ्ते के प्रदर्शन पर नजर डालें तो डाउ जोंस सबसे बड़ा नुकसान उठाने वाला सूचकांक रहा। डाउ जोंस में इस हफ्ते 1,011.60 अंक यानी 1.9 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। नैस्डैक 100 सूचकांक साप्ताहिक आधार पर 171.13 अंक टूटा, जबकि नैस्डैक कंपोजिट में पूरे हफ्ते के दौरान 254.86 अंक या 0.96 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसी तरह एसएंडपी 500 सूचकांक भी हफ्ते के दौरान 93.21 अंक या 1.20 प्रतिशत फिसलकर बंद हुआ। ऊर्जा संकट और जियोपॉलिटिकल तनाव ने बढ़ाई महंगाई की चिंता बाजार में इस गिरावट का सबसे प्रमुख कारण ऊर्जा बाजार में आया उछाल रहा। फारस की खाड़ी में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य स्ट्राइक के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई। इस तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें हफ्ते के दौरान प्रति बैरल 110 डॉलर के बेहद करीब पहुंच गईं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण महंगाई दर के और बिगड़ने की आशंका बन गई है। ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में हेडलाइन मुद्रास्फीति 3.4 प्रतिशत पर बनी रही, जिससे यह धारणा मजबूत हुई कि फेडरल रिजर्व आगामी बुधवार को ब्याज दरों में वृद्धि कर सकता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में अमेरिकी सीपीआई मुद्रास्फीति सालाना आधार पर 3.4 प्रतिशत रही, जो बाजार के अनुमानों के अनुकूल थी। मासिक आधार पर हेडलाइन सीपीआई में 0.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, गैसोलीन की कीमतें सालाना आधार पर 27.4 प्रतिशत बढ़ गईं, जो जुलाई में 24.6 प्रतिशत थीं। वहीं फ्यूल ऑयल की कीमतों में भी तेज उछाल देखा गया और यह अगस्त में बढ़कर 52 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि पिछले महीने यह 39.1 प्रतिशत पर थी। कोर इन्फ्लेशन मासिक आधार पर 0.3 प्रतिशत बढ़ा, लेकिन सालाना आधार पर मामूली घटकर 2.4 प्रतिशत पर आ गया। विशेषज्ञों की राय और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति पर नजर चार्ल्स श्वाब में डिजिटल करंसीज रिसर्च एंड स्ट्रैटेजी के डायरेक्टर जिम फेराइओली ने बाजार के इस घटनाक्रम पर बात करते हुए कहा कि निवेशक लगातार आर्थिक आंकड़ों का विश्लेषण कर रहे हैं ताकि मुद्रास्फीति के रुझानों को समझा जा सके। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का सीधा असर बॉन्ड यील्ड पर पड़ा है, जिससे बॉन्ड मार्केट में अस्थिरता बढ़ी है। इसके अलावा, वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के कॉरपोरेट नतीजों का दौर लगभग समाप्त हो चुका है, इसलिए अब निवेशकों का पूरा ध्यान आगे की आर्थिक वृद्धि, मुद्रास्फीति और फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की आगामी बैठक पर केंद्रित हो गया है। एचएसटी वेल्थ के संस्थापक और सीईओ हरिसेलवन राधाकृष्णन ने कहा कि तात्कालिक रूप से बाजार का पूरा ध्यान अमेरिकी मुद्रास्फीति और फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसलों पर रहेगा। सितंबर 11 के इन्फ्लेशन आंकड़ों से साफ है कि मासिक स्तर पर कीमतें बढ़ी हैं। अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपनी आगामी नीति में सख्त रुख अपनाता है, तो वैश्विक बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी डॉलर पर दबाव और बढ़ सकता है। सेक्टर रोटेशन और व्यक्तिगत शेयरों का प्रदर्शन हफ्ते के दौरान अमेरिकी शेयर बाजार में सेक्टर रोटेशन का स्पष्ट प्रभाव देखा गया। कच्चे तेल में मजबूती के चलते एनर्जी सेक्टर के शेयरों ने शानदार प्रदर्शन किया और वे लीडरबोर्ड में शीर्ष पर पहुंच गए। इसके विपरीत, पहले बढ़त बनाने वाले फाइनेंशियल और हेल्थकेयर सेक्टर के शेयरों में कमजोरी दर्ज की गई। पारंपरिक रूप से सुरक्षित माने जाने वाले कंज्यूमर स्टेप्लस और यूटिलिटीज सेक्टर भी दबाव में रहे और एसएंडपी 500 के मुकाबले निचले स्तरों पर कारोबार करते दिखे। आईटी, कम्युनिकेशन सर्विसेज और डिस्क्रेशरी जैसे चक्रीय (साइक्लिकल) क्षेत्रों में कीमतें कंसोलिडेट होती नजर आईं। शुक्रवार के सत्र में दिग्गज टेक कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखी गई। अल्फाबेट के शेयर 1.5 प्रतिशत बढ़कर बंद हुए, जबकि अमेज़न में 2 प्रतिशत की तेजी आई। बैंकिंग दिग्गज जेपी मॉर्गन का शेयर 1 प्रतिशत मजबूत हुआ। चिपमेकर कंपनियों में एएमडी 2.5 प्रतिशत और इंटेल 3 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करने में सफल रहे। डेल के शेयरों में जबरदस्त उछाल देखा गया और यह लगभग 12 प्रतिशत उछलकर अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। दूसरी ओर, ओरेकल के शेयर मजबूत तिमाही नतीजे पेश करने के बावजूद 2 प्रतिशत टूटकर बंद हुए। इसका आप पर असर अमेरिकी बाजारों में आई यह गिरावट वैश्विक वित्तीय बाजारों और आम निवेशकों के पोर्टफोलियो को सीधे प्रभावित कर सकती है। • भारत में: कच्चे तेल की कीमतें $110 के करीब पहुंचने से भारत का आयात बिल बढ़ेगा, जिससे भारतीय रुपया कमजोर हो सकता है और घरेलू शेयर बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली बढ़ सकती है। • वैश्विक निवेशकों के लिए: अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका से वैश्विक इक्विटी बाजारों में अस्थिरता बनी रहेगी, जिससे लोन महंगे हो सकते हैं। • टेक शेयर धारकों के लिए: नैस्डैक में गिरावट के बावजूद डेल और इंटेल जैसे शेयरों में खरीदारी से पता चलता है कि मजबूत मौलिक वाली टेक कंपनियों में अवसर बने हुए हैं। • उपभोक्ताओं के लिए: पेट्रोल और ईंधन के दामों में उछाल से वैश्विक स्तर पर परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत बढ़ सकती है। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी शेयर बाजार में इस हफ्ते भारी बिकवाली कई परस्पर जुड़े आर्थिक और भू-राजनीतिक कारणों से हुई। • कच्चे तेल का उछाल: फारस की खाड़ी में अमेरिका और ईरान के बीच हुए सैन्य हमलों के कारण आपूर्ति बाधित होने की आशंका से कच्चा तेल $110 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। • ट्रेजरी यील्ड में तेजी: बॉन्ड यील्ड में multi-year उच्च स्तर तक आई तेजी ने शेयर बाजार के वैल्युएशन पर दबाव बनाया और निवेशकों को सुरक्षित संपत्तियों की ओर आकर्षित किया। • मुद्रास्फीति का दबाव: अगस्त में गैसोलीन (+27.4%) और फ्यूल ऑयल (+52%) की कीमतों में भारी उछाल ने हेडलाइन सीपीआई को 3.4% पर बनाए रखा। • फेड की सख्ती का डर: महंगाई के आंकड़ों के बाद बाजार में यह आशंका बढ़ गई कि फेडरल रिजर्व आगामी एफओएमसी बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। सवाल-जवाब 1. सितंबर 7 से 11 के हफ्ते में डाउ जोंस कितना टूटा? साप्ताहिक आधार पर डाउ जोंस इंडेक्स 1,011.60 अंक या 1.9 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। 2. शुक्रवार 11 सितंबर को डाउ जोंस और नैस्डैक का बंद स्तर क्या रहा? शुक्रवार को डाउ जोंस 509.19 अंक बढ़कर 52,573.29 पर और नैस्डैक 100 सूचकांक 264.93 अंक बढ़कर 29,368.44 के स्तर पर बंद हुआ। 3. कच्चे तेल की कीमतें इस हफ्ते किस स्तर तक पहुंचीं? अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के चलते कच्चा तेल प्रति बैरल लगभग 110 डॉलर के स्तर तक पहुंच गया। 4. अगस्त 2026 में अमेरिका की सीपीआई मुद्रास्फीति दर कितनी रही? अगस्त 2026 में अमेरिका की हेडलाइन सीपीआई मुद्रास्फीति सालाना आधार पर 3.4 प्रतिशत पर स्थिर रही। 5. शुक्रवार को किस टेक शेयर ने ऑल-टाइम हाई बनाया? डेल (Dell) के शेयर में लगभग 12 प्रतिशत का उछाल आया और यह अपने सर्वकालिक उच्च स्तर (all-time high) पर बंद हुआ। https://trendkia.com/market/us-stock-market-weekly-wrap-dow-jones-crash-1012-pts-nasdaq-s-and-p-500-fall-31499 TrendKia — Har trend, sabse pehle.