वॉल स्ट्रीट में भारी गिरावट, नैस्डैक में 600 अंक से ज्यादा की ऐतिहासिक सुस्ती और बॉन्ड यील्ड में तेजी अगस्त के तीसरे हफ्ते में अमेरिकी शेयर बाजारों में बड़ी कमजोरी दर्ज की गई, जहां नैस्डैक में सबसे भारी गिरावट आई जबकि कच्चे तेल के ऊंचे दाम और बढ़ती ट्रेजरी यील्ड ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। अमेरिकी शेयर बाजार के लिए पिछला हताशा भरा सप्ताह काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा, जिसमें नैस्डैक कंपोजिट इंडेक्स को सबसे बड़ा झटका लगा और इसमें 600 से अधिक अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई। 17 से 21 अगस्त के बीच चले कारोबारी सत्रों के दौरान प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों में 1% से 1.5% तक की कमजोरी देखने को मिली। पश्चिमी एशिया में भू-राजनीतिक तनाव, लगातार ऊंचे बने हुए कच्चे तेल के दाम और ट्रेजरी यील्ड में उछाल ने वॉल स्ट्रीट के तेजी के रुख को पूरी तरह से दबा दिया। हालांकि हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन सभी सूचकांकों में अच्छी लिवाली जरूर देखी गई, लेकिन इसके बावजूद वे साप्ताहिक आधार पर नुकसान से नहीं बच सके। अर्थव्यवस्था पर मैक्रोइकॉनमी के असर का आकलन करते हुए निवेशक इस समय काफी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं, जबकि दूसरी ओर अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है जो बाजार के लिए एक और चिंता का विषय बन गया है। शुक्रवार को शेयरों की चाल और सूचकांकों का प्रदर्शन सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन यानी 21 अगस्त को नैस्डैक कंपोजिट 113.29 अंक यानी 0.43% की बढ़त के साथ 26,180.46 पर बंद हुआ। वहीं एसएंडपी 500 इंडेक्स में 33.21 अंक या 0.43% की तेजी आई और यह 7,674.37 पर बंद हुआ। हालांकि डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज ने अपने साथियों से बेहतर प्रदर्शन किया और 517.80 अंक या 0.98% की मजबूती के साथ सप्ताह के अंत में 53,277.01 के स्तर पर कारोबार बंद किया। शुक्रवार के इस उछाल के पीछे मुख्य वजह यह थी कि कारोबार के आंकड़े बताते हैं कि अमेरिकी व्यावसायिक गतिविधियों में चार साल से अधिक समय में सबसे तेज गति से वृद्धि दर्ज की गई है। इसके बावजूद बाजार के जानकारों का कहना है कि महंगाई और राजकोषीय चिंताओं के कारण बॉन्ड यील्ड में हाल ही में जो उछाल आया था, उसका आकलन अभी भी किया जा रहा है। लंबी अवधि की ट्रेजरी यील्ड उन स्तरों के करीब बनी रही जो ट्रेजरी द्वारा बड़े पैमाने पर बॉन्ड बायबैक की घोषणा से पहले देखे गए थे, जबकि डॉलर में कमजोरी का सिलसिला जारी रहा। विभिन्न शेयरों का हाल और वॉलमार्ट को झटका इंडिविजुअल शेयरों की बात करें तो शुक्रवार को बड़ी तकनीकी कंपनियों यानी हाइपरस्केलर्स में खरीदारी का रुझान देखने को मिला, जिसमें अल्फाबेट 1.1% ऊपर बंद हुआ, माइक्रोसॉफ्ट में 0.4% की मामूली बढ़त दर्ज की गई और मेटा के शेयरों में 0.8% का सुधार आया। हालांकि चिप बनाने वाली कंपनियों का कारोबार मिला-जुला रहा, जिसमें एनवीडिया में 1% की गिरावट आई, माइक्रोन 0.8% लुढ़क गया और इंटेल के शेयरों में 2.2% की भारी गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा वॉलमार्ट के शेयरों में पूरे सप्ताह के दौरान 10% से अधिक की जोरदार गिरावट आई, क्योंकि कंपनी की आय उम्मीद से कम रहने के कारण उसके आउटलुक पर असर पड़ा और अमेरिकी उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति को लेकर चिंताएं गहरा गईं। शुक्रवार की रिकवरी के बावजूद अमेरिकी सूचकांकों का कुल साप्ताहिक रुख मंदी की गिरफ्त में ही रहा। साप्ताहिक आधार पर विभिन्न इंडेक्स का नुकसान 17 से 21 अगस्त के बीच के पूरे कारोबारी हफ्ते में डॉव जोन्स 386.10 अंक यानी 0.72% लुढ़क गया, जबकि एसएंडपी 500 इंडेक्स में 116.31 अंक यानी 1.49% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि तकनीकी शेयरों की बहुलता वाले नैस्डैक को सबसे गंभीर चोट सहन करनी पड़ी और यह सूचकांक 604.20 अंक यानी 2.3% टूट गया। मॉर्निंगस्टार यूएस टोटल मार्केट इंडेक्स में भी 1.48% की गिरावट आई। मॉर्निंगस्टार की रिपोर्ट के अनुसार सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में इंडस्ट्रियल सेक्टर शामिल रहा जो 4.23% नीचे आया, और यूटिलिटीज सेक्टर में 3.65% की गिरावट दर्ज की गई। इसी तरह लार्ज-कैप शेयरों में 1.48%, मिड-कैप शेयरों में 1.82% और स्मॉल-कैप शेयरों में 1.46% की कमजोरी आई। इसके अलावा ग्रोथ शेयरों में 2.03%, ब्लेंड शेयरों में 1.48% और वैल्यू शेयरों में 0.76% की गिरावट देखी गई। मॉर्निंगस्टार द्वारा कवर की गई 882 अमेरिकी सूचीबद्ध कंपनियों में से 380 यानी 43% कंपनियों के शेयर हरे निशान में बंद हुए, किसी भी कंपनी के शेयर में बदलाव नहीं हुआ और 501 यानी 57% कंपनियों के शेयर लाल निशान में बंद हुए। ट्रेजरी यील्ड में तेजी और बॉन्ड बायबैक का असर बाजार में आई इस गिरावट की एक मुख्य वजह ट्रेजरी यील्ड में हुई तेज रिकवरी है। बेंचमार्क 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड शुक्रवार को 4.74% तक पहुंचने के बाद अब 20 महीने के उच्चतम स्तर के करीब परीक्षण कर रही है। ट्रेजरी विभाग द्वारा अपनी बॉन्ड बायबैक योजना के आकार को अगले तिमाही में पिछले 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर दोगुना यानी 4 अरब डॉलर करने की योजना बनाने के बावजूद ये यील्ड अपनी साप्ताहिक गिरावट से उबरकर फिर ऊपर आ गईं। इसके अलावा 30-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड भी उछलकर 2007 के बाद के अपने सबसे ऊंचे स्तर 5.2% पर पहुंच गई, जो भविष्य में लंबी अवधि की मुद्रास्फीति के दबाव को लेकर गहरी चिंताएं पैदा कर रही है। फेडरल रिजर्व की नीतियां और मुद्रास्फीति के आंकड़े 30-वर्षीय बॉन्ड की अवधि में आई इस तेजी के पीछे एक बड़ा कारण प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान फेडरल रिजर्व के अधिकारियों द्वारा दिए गए बयान रहे। मुद्रास्फीति के खिलाफ फेड की प्रतिक्रिया के रूप में दरों में कटौती का स्पष्ट संकेत देने से हिचकिचाने के कारण लंबी अवधि की यील्ड में जबरदस्त उछाल देखा गया, भले ही कम अवधि की परिपक्वता वाले बॉन्ड की यील्ड में कुछ नरमी आई हो। इसके अलावा दूसरी तिमाही में अमेरिकी बुनियादी महंगाई के आंकड़ों में भी तेजी दर्ज की गई, क्योंकि विभिन्न उद्योगों में टैरिफ और ऊर्जा की बढ़ती लागत ने खर्चों को काफी बढ़ा दिया। इस बीच अमेरिकी डॉलर इंडेक्स उतार-चढ़ाव भरे सप्ताह के बावजूद 1% की साप्ताहिक बढ़त बनाए रखते हुए 98.8 के आसपास टिका रहा। कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक बाजार का परिदृश्य इन सब के बीच कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी रहीं और इस हफ्ते इनमें 5% से अधिक का उछाल आया। अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल फ्यूचर्स में लगातार दूसरे सप्ताह 5% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई और शुक्रवार को यह 94 डॉलर प्रति बैरल के मार्क को पार कर गया, हालांकि बाद में इसमें थोड़ा सुधार आया और यह 87 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बंद हुआ। ब्रेंट क्रूड भी इस हफ्ते 97 डॉलर प्रति बैरल तक की ऊंचाई पर पहुंचने के बाद अंततः 94 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बंद हुआ। दोनों प्रमुख क्रूड बेंचमार्क ने लगातार दूसरे हफ्ते बढ़त दर्ज की है। वैश्विक मोर्चे पर बात करते हुए रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजित मिश्रा ने कहा कि भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल के ऊंचे दाम बाजार की चाल को तय करने वाले सबसे बड़े कारक बने हुए हैं। पश्चिमी एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में किसी भी तरह की संभावित बाधा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, जिससे क्रूड के दाम ऊंचे स्तर पर टिके हुए हैं। उन्होंने आगे बताया कि वैश्विक बॉन्ड यील्ड में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने मौद्रिक नीति में ढील देने की उम्मीदों को भी कम कर दिया है, जिसके चलते निवेशक जोखिम भरे परिसंपत्तियों के प्रति अत्यधिक सतर्क रवैया अपना रहे हैं। यही वजह है कि निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत रुख पर पैनी नजर बनाए हुए हैं, खासकर जैक्सन होल संगोष्ठी से पहले जहां से वैश्विक मौद्रिक नीति को लेकर आगे की दिशा मिलने की पूरी उम्मीद है। इसका आप पर असर भारत में: अमेरिकी बाजारों में आई इस बड़ी गिरावट और बॉन्ड यील्ड में तेजी का असर भारतीय शेयर बाजारों पर भी विदेशी निवेशकों के जरिए देखने को मिल सकता है। निवेशकों और उपभोक्ताओं के लिए: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के ऊंचे दामों और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता से आयातित सामान महंगे हो सकते हैं और वैश्विक बाजारों में जोखिम बढ़ सकता है। सवाल-जवाब 1. इस हफ्ते अमेरिकी शेयर बाजार में किस सूचकांक को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ? इस हफ्ते तकनीकी शेयरों वाला नैस्डैक कंपोजिट इंडेक्स सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ और इसमें 604.20 अंकों यानी 2.3% की भारी गिरावट दर्ज की गई। 2. 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड किस स्तर पर पहुंच गई? 10-वर्षीय बेंचमार्क अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड शुक्रवार को 4.74% तक पहुंचने के बाद 20 महीने के उच्चतम स्तर के करीब कारोबार कर रही है। 3. कच्चे तेल की कीमतों में इस हफ्ते कितना उछाल आया? इस हफ्ते कच्चे तेल की कीमतों में 5% से अधिक की तेजी दर्ज की गई, जिसमें अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 87 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर और ब्रेंट क्रूड 94 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बंद हुआ। https://trendkia.com/market/us-stock-market-weekly-wrap-nasdaq-plungets-over-600-points-while-dow-jones-and-s-p-500-slip-amid-rising-yields-20275 TrendKia — Har trend, sabse pehle.