# अमेरिकी टेक शेयरों में घबराहट और बॉन्ड यील्ड में गिरावट से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में मजबूती

> अमेरिकी तकनीकी क्षेत्र के ऊंचे मूल्यांकन को लेकर पैदा हुई चिंताओं और ट्रेजरी यील्ड में गिरावट से अमेरिकी डॉलर दबाव में आ गया, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में तेजी दर्ज की गई।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/us-teka-sheyaron-men-ghabarahata-aura-bonda-yilda-men-giravata-se-australian-dollar-men-majabuti-49894 · **Language:** Hindi
**Tags:** ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, अमेरिकी डॉलर, विदेशी मुद्रा बाजार, कच्चा तेल, बॉन्ड यील्ड, मुद्रास्फीति, वित्त

वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में मंगलवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने बढ़त हासिल की, जिसे कमजोर होते अमेरिकी डॉलर और घटती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड से सीधा सहारा मिला। तकनीकी क्षेत्र, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े शेयरों के ऊंचे मूल्यांकन को लेकर निवेशकों के बीच उपजी बेचैनी ने अमेरिकी मुद्रा के प्रति आकर्षण घटा दिया। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार में तेज उछाल और मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण अमेरिकी मुद्रा की गिरावट पर कुछ हद तक ब्रेक भी लगता दिखा।

## मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की नरमी
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले डॉलर के मूल्य को मापता है, मंगलवार को लगभग 0.2 प्रतिशत गिरकर 101.77 के आसपास कारोबार करता देखा गया। पिछले हफ्ते यह इंडेक्स करीब 103 के स्तर तक पहुंच गया था, जो अप्रैल 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था। उस तेजी के बाद अब डॉलर में मुनाफावसूली और दबाव का माहौल बन गया है। इस कमजोरी का सीधा फायदा जोखिम भरी मुद्राओं को हुआ, जिनमें ऑस्ट्रेलियाई डॉलर भी शामिल है।

अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाली यील्ड में आई गिरावट ने भी डॉलर पर दबाव बढ़ाने का काम किया। 10 साल के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड घटकर लगभग 5.08 प्रतिशत पर आ गई, जबकि महीने की शुरुआत में यह 5.36 प्रतिशत के आसपास बनी हुई थी। बॉन्ड यील्ड में इस कमी की वजह से डॉलर आधारित संपत्तियों से मिलने वाला ब्याज लाभ घट गया, जिसका परोक्ष लाभ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मिला। हालांकि, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की यह बढ़त अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले सीमित दायरे में ही रही, क्योंकि चीन के केंद्रीय बैंक ने अपनी ब्याज दरों में कोई फेरबदल नहीं किया।

## चीन के केंद्रीय बैंक का फैसला और एशियाई कारोबार
पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने मंगलवार को अपने बेंचमार्क उधारी दरों को उम्मीद के अनुरूप स्थिर रखने का ऐलान किया। केंद्रीय बैंक ने एक साल की लोन प्राइम रेट को 3.00 प्रतिशत पर बरकरार रखा, जबकि पांच साल की दर को भी 3.50 प्रतिशत पर अपरिवर्तित छोड़ दिया। चीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, इसलिए चीनी नीतिगत दरों के स्थिर रहने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को किसी बड़े नए प्रोत्साहन की गुंजाइश नहीं मिली।

एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान बाजार का मूड सुधरने से करेंसी जोड़ी ने बढ़त दर्ज की। इसी दौरान अमेरिकी डॉलर और जापानी येन के बीच का समीकरण भी चर्चा में रहा। डॉलर और येन की जोड़ी एशियाई कारोबार में 158.50 के आसपास टिकी रही। मुद्रा कारोबारी शुक्रवार को आने वाले जापान के राष्ट्रीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के महंगाई आंकड़ों से पहले बड़े सौदे करने से बचते दिखे। इसके बावजूद, अमेरिका में अब भी अपेक्षाकृत ऊंची बनी बॉन्ड यील्ड ने येन के मुकाबले डॉलर को कुछ समर्थन जरूर दिया।

## कच्चे तेल में तेजी और अमेरिकी महंगाई का जोखिम
विदेशी मुद्रा बाजार में जहां डॉलर पर दबाव बना, वहीं दूसरी ओर कमोडिटी बाजार से आ रहे संकेतों ने उसकी ज्यादा गिरावट की संभावना को सीमित भी कर दिया। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड ऑयल मंगलवार को 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जो एक महीने से अधिक समय का इसका उच्चतम स्तर है। सऊदी अरब के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हूती हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य में मालवाहक जहाजों को निशाना बनाकर की गई घटनाओं के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं गहरा गई हैं।

ऊर्जा की बढ़ती कीमतें अमेरिका में महंगाई के दबाव को दोबारा भड़का सकती हैं। अगर ऊर्जा लागत बढ़ने से कीमतें चढ़ती हैं, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व को अपनी सख्त मौद्रिक नीति उम्मीद से ज्यादा समय तक जारी रखनी पड़ सकती है। इस बात की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि केंद्रीय बैंक साल के अंत से पहले ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी कर दे। यह परिदृश्य अमेरिकी डॉलर की कमजोरी को सीमित कर सकता है और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की आगे की बढ़त पर भी लगाम लगा सकता है।

## सोना और क्रिप्टोकरेंसी बाजार का हाल
कमजोर डॉलर और बॉन्ड यील्ड में नरमी के बीच सोने की कीमतों में कोई स्पष्ट दिशा देखने को नहीं मिली। हाजिर सोना 4,170 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के दायरे में सुस्त कारोबार करता रहा और सोमवार की गिरावट के बाद बढ़त की रफ्तार पकड़ने के लिए संघर्ष करता दिखा। आमतौर पर डॉलर के गिरने से सोने को मजबूती मिलती है, लेकिन ऊर्जा बाजार की अनिश्चितता और बॉन्ड बाजारों के संकेतों ने निवेशकों को सतर्क बनाए रखा।

क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी मंगलवार को भारी सुस्ती छाई रही। प्रमुख डिजिटल परिसंपत्ति बिटकॉइन 81,000 डॉलर से ऊपर कारोबार करती दिखी, लेकिन इसमें कोई बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया। बिटकॉइन की इस चाल का असर अन्य छोटी मुद्राओं पर भी दिखा। एथेरियम 2,400 डॉलर से नीचे कारोबार कर रहा था, जबकि रिपल 1.30 डॉलर से नीचे बना रहा। इस नए कारोबारी हफ्ते की शुरुआत में शेयर सूचकांक, कमोडिटी, विदेशी मुद्रा बाजार, टेक शेयर और क्रिप्टोकरेंसी सभी एक ही संकेत दे रहे हैं कि बाजार में जोखिम उठाने की भूख बनी हुई है, लेकिन निवेशक पूरी तरह सतर्क और चुनिंदा रुख अपनाए हुए हैं।

## तकनीकी स्तर और लाइव बाजार के संकेत
एक घंटे के चार्ट पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर की जोड़ी 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास कारोबार करती रही। इस स्तर पर तकनीकी रुझान सकारात्मक बना हुआ है, क्योंकि कीमत 100-अवधि के सिंपल मूविंग एवरेज 0.6960 और 200-अवधि के सिंपल मूविंग एवरेज 0.6966 से ऊपर टिकी हुई है। इसके अलावा 0.6988 के करीब बनी ट्रेंड लाइन भी इसे सहारा दे रही है। 14-अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स लगभग 63 के आसपास रहने से खरीदारों की मजबूती के संकेत मिलते रहे।

लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, यह जोड़ी 0.7008 पर कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद स्तर 0.6983 के मुकाबले 0.36 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 0.6422 से 0.7277 के बीच रहा है। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय आरएसआई 50 पर तटस्थ स्थिति में है, जबकि 20-दिवसीय ईएमए 0.6996, 50-दिवसीय ईएमए 0.7035 और 200-दिवसीय ईएमए 0.6974 पर स्थित है। 50-दिवसीय ईएमए के 200-दिवसीय ईएमए से ऊपर होने के कारण इसमें गोल्डन क्रॉस बना हुआ है, जो लंबी अवधि के तेजी के रुझान को पुख्ता करता है। निकट अवधि के लिए मुख्य पिवट स्तर 0.7000 पर है, जिसमें पहला प्रतिरोध 0.7026 और दूसरा प्रतिरोध 0.7045 पर देखा जा रहा है, जबकि पहला समर्थन स्तर 0.6982 और दूसरा 0.6956 पर मौजूद है।

## इसका आप पर असर
वैश्विक मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में चल रही इस हलचल का सीधा असर आयात लागत, यात्रा खर्च और निवेश पोर्टफोलियो पर पड़ता है।

- **मुद्रा विनिमय और विदेशी यात्रा:** डॉलर में आई मामूली कमजोरी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयातकों को आंशिक राहत मिल सकती है। विदेश यात्रा या शिक्षा की योजना बना रहे लोगों के लिए डॉलर की दरों पर नजर रखना जरूरी है।
- **पेट्रोल और डीजल की कीमतें:** कच्चे तेल के 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। अगर तेल महंगा बना रहा तो आने वाले समय में माल ढुलाई और घरेलू खुदरा महंगाई बढ़ सकती है।
- **विदेशी मुद्रा और शेयर निवेशक:** टेक शेयरों में मूल्यांकन को लेकर बेचैनी से इक्विटी बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। निवेशकों को जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देते हुए बॉन्ड यील्ड और कमोडिटी रुझानों के अनुसार रणनीति बनानी चाहिए।
- **ब्याज दरों का रुख:** कच्चे तेल में तेजी के कारण अमेरिका में महंगाई दोबारा भड़कने से ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला टल सकता है। इसका मतलब है कि वैश्विक स्तर पर कर्ज की लागत लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
अमेरिकी तकनीकी शेयरों के ऊंचे मूल्यांकन को लेकर पैदा हुई चिंता और सरकारी बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने डॉलर को कमजोर किया, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को बढ़त मिली। हालांकि कच्चे तेल में आए उछाल ने डॉलर की गिरावट को एक सीमा में बांधे रखा।

- **तकनीकी शेयरों और बॉन्ड यील्ड में गिरावट:** आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र के मूल्यांकन को लेकर उपजे संशय के बीच अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड 5.36 प्रतिशत से घटकर 5.08 प्रतिशत पर आ गई। इस यील्ड गिरावट ने डॉलर संपत्तियों के ब्याज लाभ को कम कर दिया।
- **भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति:** सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों पर हूती विद्रोहियों के हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हुए हमलों से कच्चा तेल 100 डॉलर के पास पहुंच गया। तेल की कमी के डर से वैश्विक महंगाई का खतरा फिर से बढ़ गया है।
- **फेडरल रिजर्व की नीतिगत आशंकाएं:** ऊर्जा के बढ़ते दाम अमेरिका में महंगाई को फिर से भड़का सकते हैं, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व को ब्याज दरें ऊंची रखनी पड़ सकती हैं। इस संभावना ने अमेरिकी डॉलर को पूरी तरह कमजोर होने से बचा लिया।

## सवाल-जवाब

### 1. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में मंगलवार को तेजी क्यों देखने को मिली?
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में कमी और एआई सेक्टर के ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर पैदा हुई चिंताओं से डॉलर कमजोर हुआ, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती मिली।

### 2. चीन के केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों पर क्या फैसला लिया?
पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने अपनी एक साल की लोन प्राइम रेट को 3.00 प्रतिशत और पांच साल की दर को 3.50 प्रतिशत पर बिना बदलाव के बरकरार रखा।

### 3. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल क्यों आया?
सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों पर हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बनाए जाने से आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई, जिससे तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया।

### 4. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स का स्तर क्या रहा?
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स लगभग 0.2 प्रतिशत गिरकर 101.77 के आसपास आ गया, जो पिछले हफ्ते 103 के करीब पहुंचा था।

### 5. सोना और बिटकॉइन किस स्तर पर कारोबार कर रहे थे?
सोना 4,170 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के दायरे में सुस्त कारोबार कर रहा था, जबकि बिटकॉइन 81,000 डॉलर के स्तर से ऊपर टिका रहा।

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