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  "type": "article",
  "title": "अमेरिकी ट्रेजरी के बॉन्ड बायबैक ऐलान से सोने में आई तेज़ी, 4,500 डॉलर के पार पहुंचा भाव",
  "summary": "अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा लंबे समय की परिपक्वता वाले बॉन्ड की बायबैक सीमा बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर करने की घोषणा के बाद सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। सर्राफा बाजार में सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गया है।",
  "content": "अंतरराष्ट्रीय सर्राफा बाजार में शुक्रवार को शुरुआती एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान सोने की कीमतों में एक बार फिर शानदार तेज़ी दर्ज की गई। शुरुआती सत्रों में आई मामूली गिरावट के बाद उबरते हुए सोना 4,530 डॉलर प्रति औंस के स्तर के करीब पहुंच गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के तहत अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा लंबे समय की परिपक्वता वाले सरकारी बॉन्ड की बायबैक प्रक्रिया को अचानक बढ़ाने के फैसले के बाद सोने में खरीदारी का नया रुझान देखने को मिला। सरकारी बॉन्ड बाजार में किए गए इस बड़े बदलाव ने निवेशकों को दीर्घकालिक प्रतिफल और बाजार की तरलता के प्रति आश्वस्त किया है, जिससे सोने को मजबूत सहारा मिला है।\n\n वैश्विक ऊर्जा बाजार के नए घटनाक्रमों ने भी वित्तीय बाजारों में मुद्रास्फीति से जुड़ी चिंताओं को फिर से हवा दी है। कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ी के कारण यह आशंका बढ़ गई है कि महंगाई का दबाव फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों से जुड़ी अपनी नीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर सकता है। हालांकि, इन चिंताओं के बीच बाजार विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंक के नीति निर्माता ऊर्जा की अस्थायी महंगाई को नजरअंदाज करने का रुख अपना सकते हैं। यह स्थिति बिना ब्याज देने वाली कीमती धातुओं के लिए कुल मिलाकर अनुकूल माहौल तैयार करती है।\n\n \n\nअमेरिकी ट्रेजरी ने बॉन्ड बायबैक की सीमा को किया दोगुना\n\nकीमती धातुओं में आई इस ताजा तेज़ी का सबसे मुख्य कारण अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा घोषित किया गया एक बड़ा नीतिगत कदम है। ट्रेजरी विभाग ने बुधवार को 12:32 GMT पर अपने पूर्व निर्धारित कैलेंडर से हटकर एक अनपेक्षित घोषणा की। विभाग ने दीर्घकालिक सरकारी ऋण पत्रों के लिए चलाए जा रहे तरलता सहायता बायबैक कार्यक्रम का दायरा काफी बढ़ा दिया है। इस नए आदेश के अनुसार, 10 साल से 20 साल और 20 साल से 30 साल की परिपक्वता वाले बॉन्ड सेक्टर में बायबैक ऑपरेशन की अधिकतम सीमा को 2 अरब डॉलर प्रति ऑपरेशन से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है।\n\n सरकारी बॉन्ड की बायबैक सीमा बढ़ाने का यह नया ढांचा 9 सितंबर से आधिकारिक रूप से लागू होगा और 4 नवंबर तक जारी रहेगा। लंबी अवधि के बॉन्ड को बाजार से वापस खरीदने के लिए तरलता में दोगुनी बढ़ोतरी करके अमेरिकी वित्त मंत्रालय का उद्देश्य लंबी अवधि के बॉन्ड यील्ड में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकना और बॉन्ड कीमतों में स्थिरता लाना है। वित्तीय बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम आर्थिक बदलाव के इस दौर में बॉन्ड बाजार के सुचारू कामकाज को बनाए रखने की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।\n\n संस्थागत ब्रोकरेज फर्म टीडी सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने इस नीतिगत फैसले को सोने के लिए बेहद मददगार बताया है। टीडी सिक्योरिटीज के अनुसार, एक तरफ अमेरिकी ट्रेजरी का लंबी अवधि के बॉन्ड को सहारा देने का संकेत और दूसरी तरफ उच्च ऊर्जा कीमतों को नजरअंदाज करने के लिए तैयार फेडरल रिजर्व का रुख, सोने के लिए निकट भविष्य में एक मजबूत आधार तैयार कर रहा है। भले ही बॉन्ड यील्ड में हाल में कुछ बढ़त देखी गई हो, लेकिन सोने की मांग में लगातार मजबूती बनी हुई है, जो सुरक्षित निवेश के रूप में इसके महत्व को रेखांकित करती है।\n\n \n\nतकनीकी चार्ट संरचना और प्रमुख मूल्य संकेतक\n\nतकनीकी विश्लेषण के नजरिए से देखें तो स्पॉट गोल्ड (XAU/USD) का निकट भविष्य का चार्ट पैटर्न काफी मजबूत और सकारात्मक बना हुआ है। दैनिक प्राइस चार्ट पर सोने का हाजिर भाव अपने 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) और बोलिंगर बैंड की मध्य रेखा से ऊपर सफलतापूर्वक बना हुआ है। चार्ट पर बनती मोमबत्तियां लगातार बोलिंगर बैंड की ऊपरी रेखा की ओर बढ़ रही हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी खरीदारी के रुझान को दर्शाती हैं।\n\n हालांकि, ऑसिलेटर संकेतक यह भी सलाह देते हैं कि अल्पकालिक कारोबारियों को थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है। 14-अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) पिछले सत्र में 67.54 दर्ज किया गया था, जो ओवरबॉट्स (अत्यधिक खरीदारी) की स्थिति के करीब पहुंच रहा है। इसका मतलब यह है कि हालांकि मुख्य रुझान तेज़ी का है, लेकिन बोलिंगर बैंड के ऊपरी स्तर का परीक्षण करने के बाद कीमतों में कुछ समय के लिए ठहराव या मामूली समेकन देखने को मिल सकता है।\n\n लाइव ट्रेडिंग डेटा के अनुसार सोने की कीमतों में आई तेज़ी और भी स्पष्ट नजर आती है। स्पॉट गोल्ड उछलकर 4,586 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव 4,489 डॉलर की तुलना में +2.15% की दैनिक बढ़त दर्शाता है। बाजार में कारोबारी वॉल्यूम भी काफी बढ़ गया है, जो इसके 20-दिवसीय औसत वॉल्यूम से 2.30 गुना अधिक दर्ज किया गया। पिछले 52 हफ्तों के दौरान सोने ने 3,310 डॉलर के निचले स्तर से लेकर 5,586 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड उच्च स्तर के बीच कारोबार किया है।\n\n तकनीकी संकेतकों का बहुस्तरीय ढांचा सोने के मजबूत रुझान की पुष्टि करता है। 14-दिवसीय RSI अब बढ़कर 72 के स्तर पर पहुंच गया है, जो ओवरबॉट्स क्षेत्र में प्रवेश का संकेत देता है। मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डायवर्जेंस (MACD) संकेतक मजबूत बुलिश मोमेंटम दिखा रहा है, जहां MACD लाइन 96.47 पर है और सिग्नल लाइन 62.81 पर, जिससे हिस्टोग्राम 33.66 के सकारात्मक स्तर पर आ गया है। एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) की बात करें तो 20-दिवसीय EMA 4,309 डॉलर, 50-दिवसीय EMA 4,269 डॉलर और 200-दिवसीय EMA 4,310 डॉलर पर स्थित है, जबकि 50-दिवसीय SMA 4,167 डॉलर और 200-दिवसीय SMA 4,496 डॉलर पर है। यद्यपि 50-दिवसीय और 200-दिवसीय EMA के बीच डेथ क्रॉस जैसी स्थिति बनी हुई है, फिर भी हाजिर भाव दीर्घकालिक अपट्रेंड में बना हुआ है।\n\n बोलिंगर बैंड की सीमाएं निचले स्तर पर 3,909 डॉलर से लेकर ऊपरी स्तर पर 4,599 डॉलर तक फैली हैं, जिसकी मध्य रेखा 4,254 डॉलर पर स्थित है। ट्रेंड की मजबूती मापने वाला एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) 28 पर है, जो स्पष्ट ट्रेंड की उपस्थिति दर्ज करता है। स्टोकेस्टिक ऑसिलेटर में फास्ट लाइन 98 और सिग्नल लाइन 91 पर देखी जा रही है। दैनिक उतार-चढ़ाव को मापने वाला 14-दिवसीय एवरेज ट्रू रेंज (ATR) 86.02 अंक है, जो जोखिम प्रबंधन के लिए स्टॉप-लॉस का दायरा तय करने में मदद करता है। तकनीकी पिवट गणना के अनुसार मुख्य पिवट स्तर 4,584 डॉलर है। ऊपर की ओर पहला रेजिस्टेंस 4,602 डॉलर (R1) और दूसरा रेजिस्टेंस 4,619 डॉलर (R2) पर है, जबकि नीचे की ओर प्राथमिक सपोर्ट 4,568 डॉलर (S1) और 4,549 डॉलर (S2) पर स्थित है। लंबी अवधि के लिए मुख्य सपोर्ट 4,018 डॉलर के पास और मुख्य रेजिस्टेंस 4,600 डॉलर के आसपास बना हुआ है।\n\n \n\nकेंद्रीय बैंकों का रिजर्व और सोने की ऐतिहासिक भूमिका\n\nमानव इतिहास में सोने की भूमिका हमेशा से महत्वपूर्ण रही है। यह न केवल धन के संरक्षण का एक मजबूत जरिया रहा है, बल्कि व्यापार में विनिमय के माध्यम के रूप में भी स्वीकार किया जाता रहा है। आधुनिक वित्तीय दौर में आभूषणों और औद्योगिक उपयोग से अलग सोने को एक प्रमुख सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन एसेट) माना जाता है। जब भी वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता, मंदी की आहट या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो निवेशक और वित्तीय संस्थाएं अपनी पूंजी की सुरक्षा के लिए सोने का रुख करती हैं।\n\n कागजी मुद्रा या सरकारी बॉन्ड के विपरीत, भौतिक सोने में कोई काउंटरपार्टी जोखिम नहीं होता। यह किसी विशिष्ट सरकार या जारीकर्ता संस्था की साख पर निर्भर नहीं करता। यही वजह है कि जब राष्ट्रीय मुद्राओं का मूल्य घटता है या मुद्रास्फीति बढ़ती है, तो सोना क्रय शक्ति की रक्षा करने वाले एक प्रभावी उपकरण के रूप में काम करता है।\n\n दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े संस्थागत धारक हैं। संकट के समय अपनी राष्ट्रीय मुद्रा को मजबूती देने और विदेशी मुद्रा भंडार को विविधता प्रदान करने के लिए केंद्रीय बैंक सोना खरीदते हैं। विशाल स्वर्ण भंडार किसी भी देश की वित्तीय साख और देनदारी चुकाने की क्षमता में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वास पैदा करता है। विश्व स्वर्ण परिषद के आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय बैंकों ने वर्ष 2022 में अपने रिजर्व में रिकॉर्ड 1,136 टन सोना जोड़ा, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 70 अरब डॉलर थी। यह आंकड़ा आधिकारिक रिकॉर्ड की शुरुआत के बाद से किसी भी एक वर्ष में केंद्रीय बैंकों द्वारा की गई सोने की सबसे बड़ी खरीदारी थी। इस खरीदारी में भारत, चीन और तुर्की जैसे उभरते देशों के केंद्रीय बैंक सबसे आगे रहे हैं।\n\n \n\nविदेशी मुद्रा बाजार और अन्य परिसंपत्तियों से संबंध\n\nसोने की कीमतों का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के साथ सीधा विपरीत संबंध देखा जाता है। डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड दोनों ही वैश्विक रिजर्व और सुरक्षित निवेश की दौड़ में सोने के मुख्य प्रतिस्पर्धी हैं। जब अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है, तो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सोना सस्ता हो जाता है, जिससे इसकी मांग और कीमतें बढ़ जाती हैं। इसी तरह, सोने का शेयर बाजार जैसी जोखिम भरी परिसंपत्तियों के साथ भी विपरीत रिश्ता है। शेयर बाजार में तेज़ी के समय सोने की मांग घटती है, जबकि शेयर बाजार में बिकवाली होने पर निवेशक अपना पैसा निकालकर सोने में लगाते हैं।\n\n XAU/USD के भाव में बदलाव कई वैश्विक कारकों पर निर्भर करता है। भू-राजनीतिक अस्थिरता या भीषण मंदी का डर सोने को अचानक ऊंचाई पर ले जा सकता है। चूंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता, इसलिए जब ब्याज दरें घटती हैं तो सोना अधिक आकर्षक हो जाता है, जबकि उच्च ब्याज दरें सोने की तेज़ी को सीमित करती हैं। फिर भी, अधिकांश बदलाव इस बात पर निर्भर करते हैं कि अमेरिकी डॉलर का व्यवहार कैसा रहता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में ही तय होती है।\n\n अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार की बात करें तो गुरुवार के सत्र में प्रमुख करेंसी पेयर्स में मिला-जुला कारोबार देखा गया। GBP/USD ने मामूली बढ़त के साथ 1.3630-1.3620 के दायरे में कारोबार किया। ब्रिटिश पाउंड की यह बढ़त अमेरिकी डॉलर में आई हल्की रिकवरी के बावजूद दर्ज की गई, क्योंकि निवेशक ब्रिटेन के आगामी आर्थिक आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं।\n\n दूसरी ओर, EUR/USD अपनी शुरुआती बढ़त गंवाकर 1.1700 के स्तर से नीचे आ गया। अमेरिकी सत्र के दौरान डॉलर की देर रात हुई रिकवरी ने यूरो को नीचे खींच लिया। मुद्रा बाजार के सहभागी अब शुक्रवार को जारी होने वाले अमेरिका और यूरोप के S&P ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज PMI आंकड़ों पर नजर बनाए हुए हैं।\n\n डिजिटल एसेट मार्केट में, एथेरियम (ETH) ने गुरुवार को अपनी तेज़ी का सिलसिला जारी रखा। हालिया लेवरेज फ्लश के बाद डेरिवेटिव्स मार्केट में निवेशकों की पूंजी वापस लौटने लगी है। आंकड़ों के मुताबिक, एथेरियम ओपन इंटरेस्ट पिछले कुछ घंटों में 2,70,000 ETH बढ़कर 1.32 करोड़ ETH पर पहुंच गया, जो क्रिप्टोकरेंसी बाजार में निवेशकों के लौटते भरोसे को दर्शाता है।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें बढ़ने से घरेलू सर्राफा बाजारों में भी सोने और आभूषणों के दाम महंगे हो सकते हैं, जिससे त्योहारी व शादी-विवाह के सीजन में खरीदारी करने वाले ग्राहकों की जेब पर असर पड़ेगा।\n\nनिवेशकों के लिए: वैश्विक अनिश्चितता और बॉन्ड मार्केट में बदलाव के बीच सोने में सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) की मांग मजबूत बनी रहने से लंबी अवधि के निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिल सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सोने की कीमतों में हालिया उछाल की मुख्य वजह क्या है?\nअमेरिकी ट्रेजरी द्वारा लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड की बायबैक सीमा को दोगुना करके कम से कम 4 अरब डॉलर प्रति ऑपरेशन करने के फैसले से सोने की कीमतों में तेज़ी आई है।\n\n2. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का ताजा भाव क्या चल रहा है?\nसोने की कीमतें 4,500 डॉलर प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर एशियाई कारोबारी सत्र में 4,530 डॉलर के आसपास पहुंचीं और हालिया लाइव ट्रेडिंग में यह 4,586 डॉलर प्रति औंस तक दर्ज की गईं।\n\n3. केंद्रीय बैंक सोने की खरीदारी क्यों बढ़ा रहे हैं?\nकेंद्रीय बैंक आर्थिक अनिश्चितता के समय अपनी मुद्राओं को मजबूती देने और विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए सोना खरीदते हैं। वर्ष 2022 में केंद्रीय बैंकों ने रिकॉर्ड 1,136 टन सोना खरीदा था।\n\n4. अमेरिकी डॉलर और सोने की कीमत में क्या संबंध होता है?\nसोने और अमेरिकी डॉलर के बीच विपरीत संबंध (इनवर्स कोरिलेशन) होता है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें आमतौर पर बढ़ती हैं।\n\n5. सोने के लिए कौन से तकनीकी स्तर महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं?\nतकनीकी विश्लेषण के अनुसार सोने के लिए तात्कालिक सपोर्ट स्तर 4,568 डॉलर और 4,549 डॉलर पर हैं, जबकि रेजिस्टेंस स्तर 4,602 डॉलर और 4,619 डॉलर पर देखे जा रहे हैं।",
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  "publishedAt": "2026-08-21",
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