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  "type": "article",
  "title": "अमेरिकी ट्रेजरी के लिक्विडिटी बायबैक से डॉलर पस्त, यूरो 1.1800 के स्तर की ओर अग्रसर",
  "summary": "अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा अपने बॉन्ड बायबैक को दोगुना कर 4 बिलियन डॉलर करने के फैसले से बॉन्ड यील्ड में गिरावट आई है, जिससे EUR/USD तीन महीने के उच्च स्तर 1.1693 के करीब पहुंच गया है और 1.1800 का रास्ता खुल गया है।",
  "content": "यूरोपीय ट्रेडिंग सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर में चौतरफा कमजोरी देखने को मिली है, जिसके चलते यूरो (EUR) ने अमेरिकी डॉलर (USD) के मुकाबले मजबूती दर्ज करते हुए 1.1693 के आसपास तीन महीने के नए उच्चतम स्तर को छू लिया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा बढ़ती उधारी लागत को नियंत्रित करने के उद्देश्य से अपने बॉन्ड बायबैक अभियानों को दोगुना करने की घोषणा की गई, जिसके बाद संयुक्त राज्य अमेरिका के लंबी अवधि वाले बॉन्ड यील्ड में तेज गिरावट आई। इस फैसले का सीधा असर ग्रीनबैक पर पड़ा, जिससे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में यूरो लगातार बढ़त हासिल कर रहा है।\n\nअमेरिकी डॉलर की गिरावट केवल यूरो तक ही सीमित नहीं रही। छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर के मूल्य को मापने वाला अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) यूरोपीय सत्र में अपनी गिरावट को बढ़ाते हुए 98.70 के करीब 11 सप्ताह के नए निचले स्तर पर आ गया। बाजार प्रतिभागियों का मानना है कि बॉन्ड बाजार में अमेरिकी ट्रेजरी के अचानक हस्तक्षेप ने निवेशकों की धारणा को बदल दिया है, जिससे डॉलर पर दबाव बढ़ गया है। वहीं दूसरी ओर, यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) द्वारा आगामी सितंबर की बैठक में अपनी नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें यूरो को अतिरिक्त समर्थन प्रदान कर रही हैं।\n\nबोरोइंग COST घटाने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी ने बॉन्ड बायबैक दोगुना किया\nवित्तीय बाजारों में बुधवार को उस समय बड़ा मोड़ आया जब अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अपने तय कैलेंडर से हटकर एक महत्वपूर्ण घोषणा की। ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) के अनुसार दोपहर 12:32 बजे ट्रेजरी विभाग ने स्पष्ट किया कि वह 10-वर्ष से 20-वर्ष और 20-वर्ष से 30-वर्ष के बॉन्ड क्षेत्रों में लिक्विडिटी सहायता बायबैक ऑपरेशन्स के आकार को कम से कम दोगुना करेगा। इस नए निर्देश के तहत प्रति ऑपरेशन अधिकतम सीमा को 2 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 बिलियन डॉलर कर दिया गया है। यह व्यवस्था 9 सितंबर से प्रभावी होगी और 4 नवंबर तक लागू रहेगी।\n\nट्रेजरी के इस अप्रत्याशित कदम का मुख्य उद्देश्य लंबे समय वाले सरकारी कागजों पर चढ़ती यील्ड को नीचे लाना और वित्तीय प्रणाली में नकदी का प्रवाह बेहतर करना है। बॉन्ड यील्ड में आई इस तेज गिरावट ने डॉलर संपत्तियों के आकर्षण को कम किया है, जिसके परिणामस्वरूप फॉरेक्स मार्केट में व्यापक बिकवाली देखने को मिली है। व्यापारी और विश्लेषक अब यह आंकलन कर रहे हैं कि क्या ट्रेजरी का यह कदम आने वाले महीनों में अमेरिकी बॉन्ड मार्केट और मुद्रा विनिमय दरों के लिए एक स्थायी गेम-चेंजर साबित होगा।\n\nEUR/USD का तकनीकी ढांचा और प्रमुख मूल्य लक्ष्य\nतकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो EUR/USD जोड़ी में तेजी का रुझान स्पष्ट दिखाई दे रहा है। गिरावट की स्थिति में, प्राथमिक सपोर्ट 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) के पास 1.1547 के आसपास स्थित है। यदि कोई अल्पकालिक पुलबैक आता है, तो किसी भी गहरे सुधार से पहले इस स्तर का परीक्षण होने की संभावना है। वहीं ऊपर की तरफ, यदि यह जोड़ी 1.1700 के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर मजबूती से टिकने में सफल रहती है, तो यह मई महीने के उच्चतम स्तर 1.1800 की ओर अपनी बढ़त को आगे बढ़ा सकती है।\n\nलाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, EUR/USD वर्तमान में 1.17 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद स्तर 1.16 से 1.02% की बढ़त को दर्शाता है। 52-सप्ताह के दौरान इस जोड़ी का दायरा 1.13 से 1.20 के बीच रहा है। ट्रेडिंग वॉल्यूम भी 20-दिवसीय औसत के 1.00x के सामान्य स्तर पर बना हुआ है, जो बाजार में स्थिर भागीदारी का संकेत देता है।\n\nयूओबी ग्रुप का विश्लेषण और मोमेंटम परिदृश्य\nबैंकिंग और वित्तीय विश्लेषण समूह यूओबी ग्रुप (UOB Group) के विश्लेषकों ने भी निकट अवधि में इस मुद्रा जोड़ी को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया है। यूओबी ग्रुप के विश्लेषकों ने याद दिलाया कि उन्होंने सोमवार 17 अगस्त को (जब स्पॉट प्राइस 1.1570 पर था) यूरो पर अपना नजरिया सकारात्मक किया था, और कहा था कि प्राइस एक्शन संकेत देता है कि EUR तेजी के रुझान के साथ कारोबार करेगा। इसके बाद मंगलवार 18 अगस्त को (जब स्पॉट 1.1580 पर था) उन्होंने अपने रुख को बनाए रखते हुए कहा था कि यद्यपि तेजी का पूर्वाग्रह बना हुआ है, फिर भी गति में भारी उछाल न होने के कारण EUR को 1.1655 और उससे आगे बढ़ने से पहले 1.1615 से ऊपर ब्रेकआउट देना और टिकना होगा।\n\nबुधवार को यह शर्त पूरी हो गई जब यूरो ने 1.1615 का स्तर तोड़ा और 1.1679 तक तेजी से उछला। उस दिन यह जोड़ी 0.89% की बढ़त के साथ 1.1677 के तीन महीने के उच्चतम स्तर पर बंद हुई। यूओबी ग्रुप का आंकलन है कि मजबूत मोमेंटम को देखते हुए EUR में 1.1725 की ओर और ऊपर जाने की गुंजाइश बनी हुई है। विश्लेषकों का कहना है कि जब तक EUR 1.1600 के स्ट्रॉन्ग सपोर्ट लेवल से ऊपर बना रहता है (जिसे पहले 1.1525 पर रखा गया था), तब तक उनका सकारात्मक दृष्टिकोण कायम रहेगा।\n\nफेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति: QE, QT और करेंसी वैल्यूएशन का गणित\nअमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा होने के साथ-साथ दुनिया के कई अन्य देशों में भी अनौपचारिक रूप से व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाती है। 2022 के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार में डॉलर की हिस्सेदारी 88% से अधिक है, जहां औसतन 6.6 ट्रिलियन डॉलर का दैनिक लेनदेन होता है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड की जगह दुनिया की प्रमुख रिजर्व करेंसी का स्थान लिया था। 1971 के ब्रेटन वुड्स समझौते के समाप्त होने तक डॉलर स्वर्ण मानक (Gold Standard) से बंधा हुआ था, जिसके बाद इसे मुक्त-प्रवाह वाली मुद्रा बना दिया गया।\n\nअमेरिकी डॉलर के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक फेडरल रिजर्व (Fed) की मौद्रिक नीति है। फेड का दोहरा जनादेश है: मूल्य स्थिरता (मुद्रास्फीति को 2% के लक्ष्य पर नियंत्रित रखना) और पूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना। जब मुद्रास्फीति 2% से ऊपर जाती है, तो फेड ब्याज दरें बढ़ाता है, जिससे डॉलर मजबूत होता है। इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति 2% से नीचे आती है या बेरोजगारी बढ़ती है, तो फेड दरें घटाता है, जिससे डॉलर कमजोर होता है। असाधारण स्थितियों में फेड क्वांटिटेटिव ईज़िंग (QE) के जरिए डॉलर छापकर बॉन्ड खरीदता है, जो डॉलर को कमजोर करता है (जैसा 2008 के वित्तीय संकट में हुआ था)। इसके विपरीत, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) में फेड बॉन्ड खरीद बंद कर देता है, जो डॉलर के लिए सकारात्मक माना जाता है।\n\nक्रॉस-एसेट मार्केट पर असर: स्टर्लिंग, सोना और क्रिप्टो मार्केट की स्थिति\nअमेरिकी ट्रेजरी के कदम का असर अन्य वित्तीय संपत्तियों पर भी देखा गया। GBP/USD जोड़ी यूरोपीय सत्र में 1.3600 के स्तर के आसपास स्थिर रही, जो 11 मई के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। निवेशक अब अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और मध्य पूर्व के घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं, सोने की कीमतों में एशियाई सत्र के दौरान हल्की बिकवाली देखी गई और यह $4,500 प्रति औंस के स्तर से नीचे आ गया, हालांकि यह जून की शुरुआत के बाद के अपने उच्चतम स्तर के करीब बना हुआ है। जियोपॉलीटिकल अनिश्चितताओं और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने सोने के निचले स्तरों को सहारा दिया है।\n\nदूसरी ओर, क्रिप्टो बाजार में भी अमेरिकी ट्रेजरी बायबैक के बाद रिकवरी देखी गई। प्रमुख ऑल्टकॉइन्स जैसे रिपल (XRP), सोलाना (SOL) और कार्डानो (ADA) में मजबूती दर्ज की गई। रिपल पिछले दिन 10% की तेजी के बाद $1.0951 के आसपास कारोबार कर रहा है। XRP और SOL के लिए तकनीकी परिदृश्य और तेजी का संकेत देता है, जबकि ADA में हालिया बढ़त को बनाए रखने की चुनौती दिख रही है।\n\nलाइव मार्केट इंडिकेटर्स और टेक्निकल ऑसिलेटर्स का गहन विश्लेषण\nEUR/USD के लाइव तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 73 पर है, जो दर्शाता है कि यह जोड़ी फिलहाल ओवरबॉट (Overbought) क्षेत्र में प्रवेश कर चुकी है। MACD इंडिकेटर 0.00 पर सिग्नल लाइन 0.00 के साथ बुलिश हिस्टोग्राम प्रदर्शित कर रहा है। मूविंग एवरेज के संदर्भ में, 20-दिवसीय EMA 1.15, 50-दिवसीय EMA 1.15 और 200-दिवसीय EMA 1.16 पर स्थित हैं, जबकि 50-दिवसीय SMA 1.15 और 200-दिवसीय SMA 1.16 पर हैं। कीमत दीर्घकालिक अपट्रेंड में बनी हुई है।\n\nबॉलिंगर बैंड (20, 2) 1.14 से 1.17 के दायरे को दर्शाते हैं, जहां मध्य बैंड 1.15 पर है और वर्तमान मूल्य अपर बैंड के पास कारोबार कर रहा है। ADX (14) 32 पर है, जो एक मजबूत ट्रेंडिंग मूवमेंट की पुष्टि करता है। स्टोकेस्टिक ऑसिलेटर की फास्ट लाइन 99 और सिग्नल लाइन 79 पर है। जोखिम प्रबंधन के लिए 14-दिवसीय ATR 0.01 पर है, जो दैनिक वोलेटिलिटी बफर के रूप में कार्य करता है। प्रमुख पिवट स्तर 1.17 पर केंद्रित हैं, जहां R1 और R2 1.17 पर तथा सपोर्ट S1 और S2 भी 1.17 के आसपास मजबूती दिखा रहे हैं।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की कमजोरी से भारतीय रुपये (INR) को कुछ राहत मिल सकती है, जिससे भारत के कच्चे तेल और आयात बिलों पर दबाव कम हो सकता है।\n\nअंतरराष्ट्रीय निवेशकों और यात्रियों के लिए: यूरोप यात्रा करने वाले भारतीय यात्रियों और छात्रों के लिए यूरो मजबूत होने से खर्च थोड़ा बढ़ सकता है, जबकि वैश्विक फॉरेक्स ट्रेडर्स को EUR/USD में 1.1800 के स्तर पर नजर रखनी चाहिए।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. EUR/USD में हालिया तेजी का मुख्य कारण क्या है?\nअमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा अपने बॉन्ड बायबैक को दोगुना कर 4 बिलियन डॉलर करने की घोषणा के बाद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर में गिरावट आई, जिससे यूरो 1.1693 के तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया।\n\n2. अमेरिकी ट्रेजरी की बॉन्ड बायबैक योजना क्या है?\nट्रेजरी विभाग ने 9 सितंबर से 4 नवंबर के बीच 10 से 30 वर्ष की अवधि वाले बॉन्ड बायबैक की सीमा 2 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 बिलियन डॉलर प्रति ऑपरेशन करने का निर्णय लिया है ताकि उधारी लागत घटाई जा सके।\n\n3. EUR/USD के लिए कौन से प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर हैं?\nप्रारंभिक सपोर्ट 20-दिवसीय EMA 1.1547 और 1.1600 पर है। ऊपर की तरफ 1.1700 के पार टिकने पर अगला प्रमुख लक्ष्य मई का उच्चतम स्तर 1.1800 है।\n\n4. यूओबी ग्रुप का यूरो को लेकर क्या अनुमान है?\nयूओबी ग्रुप के विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत मोमेंटम के कारण यूरो में 1.1725 की ओर और बढ़त की संभावना है, बशर्ते यह 1.1600 के सपोर्ट से ऊपर बना रहे।\n\n5. क्या ईसीबी ब्याज दरें बढ़ाने वाला है?\nजी हां, बाजार को उम्मीद है कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) अपनी आगामी सितंबर की बैठक में नीतिगत दरों में बढ़ोतरी कर सकता है, जिससे यूरो को समर्थन मिल रहा है।\n\n6. इस खबर का अन्य संपत्तियों जैसे सोना और क्रिप्टो पर क्या प्रभाव पड़ा?\nडॉलर में गिरावट से क्रिप्टो बाजार में तेजी आई जहां रिपल (XRP) 10% उछलकर $1.0951 पर पहुंचा, जबकि सोना $4,500 के स्तर के करीब स्थिर रहा।",
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  "publishedAt": "2026-08-20",
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