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  "type": "article",
  "title": "अमेरिकी ट्रेजरी की बॉन्ड बायबैक योजना से डॉलर पस्त, यूरो 1.1700 के पार तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचा",
  "summary": "अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा बॉन्ड बायबैक राशि को दोगुना करने के ऐलान के बाद डॉलर में तेज गिरावट आई है, जिससे EUR/USD जोड़ी 1.13% चढ़कर 1.1700 के ऊपर पहुंच गई है।",
  "content": "अंतरराष्ट्रीय विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की बिकवाली तेज होने से यूरो में जोरदार उछाल देखा जा रहा है। यूरो और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर (EUR/USD) पिछले दो दिनों के भीतर 1.13% बढ़कर 1.1700 के स्तर को पार कर गई है, जो पिछले तीन महीनों का उच्चतम स्तर है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा अपने कर्ज बायबैक संचालन को दोगुना करने के अचानक फैसले ने बाजार में डॉलर की सट्टा मांग को पूरी तरह से प्रभावित किया है। हालांकि फ़ेडरल रिजर्व की हालिया बैठक के मिनट्स में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख के संकेत दिए गए थे, लेकिन यह कदम भी डॉलर में आई गिरावट को रोकने में नाकाम रहा है।\n\nअमेरिकी ट्रेजरी का बॉन्ड बायबैक प्लान और डॉलर पर इसका प्रभाव\nअमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने निर्धारित कैलेंडर से हटकर बुधवार को 12:32 GMT पर एक महत्वपूर्ण घोषणा की। विभाग ने स्पष्ट किया कि 10 साल से 20 साल और 20 साल से 30 साल की परिपक्वता अवधि वाली प्रतिभूतियों के लिए तरलता सहायता बायबैक संचालन का आकार दोगुना किया जाएगा। इसके तहत प्रति ऑपरेशन अधिकतम सीमा को 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह व्यवस्था 9 सितंबर से लागू होकर 4 नवंबर तक प्रभावी रहेगी।\n\nएमयूएफजी के वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि ट्रेजरी का यह बायबैक कदम और हाल ही में जापान द्वारा बाजार हस्तक्षेप के बाद आई FIMA रिपोर्ट की टिप्पणियां अमेरिकी डॉलर के लिए प्रतिकूल साबित हो सकती हैं। विश्लेषकों के अनुसार, इस कदम से वैश्विक निवेशकों में अमेरिकी परिसंपत्तियों को रखने की इच्छा घट सकती है या अमेरिकी डॉलर के प्रति उनका जोखिम कम हो सकता है। यदि ट्रेजरी का बायबैक प्लान बॉन्ड यील्ड को नियंत्रित करने में सफल भी रहता है, तब भी यील्ड के निचले स्तर पर रहने के कारण अमेरिकी डॉलर नीचे की ओर दबाव का सामना करता रहेगा।\n\nफ़ेडरल रिजर्व के सख्त मौद्रिक रुख का बेअसर होना\nअमेरिकी ट्रेजरी की इस घोषणा ने अमेरिकी फ़ेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति समिति की हालिया बैठक के मिनट्स के प्रभाव को पूरी तरह से दबा दिया। फ़ेडरल रिजर्व के नीति निर्माताओं ने अपनी बैठक में स्पष्ट किया था कि यदि मुद्रास्फीति का दबाव कम नहीं होता है, तो ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आवश्यकता होगी। सामान्य परिस्थितियों में केंद्रीय बैंक का ऐसा सख्त रुख डॉलर को मजबूती प्रदान करता है, लेकिन इस बार ट्रेजरी द्वारा बाजार में तरलता बढाने के निर्णय ने केंद्रीय बैंक के मौद्रिक संकेतों को बेअसर कर दिया और डॉलर में बिकवाली का सिलसिला जारी रहा।\n\nफॉरेक्स, कमोडिटी और क्रिप्टो बाजारों पर व्यापक असर\nअमेरिकी डॉलर में आई इस कमजोरी का असर केवल यूरो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अन्य वैश्विक वित्तीय परिसंपत्तियों पर भी इसका सीधा प्रभाव देखने को मिला है।\n\n• GBP/USD दर: ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान 1.3650 के करीब कारोबार करती नजर आई, जो मई महीने के अपने उच्चतम स्तर के बेहद करीब है।\n• सोने की कीमतें: भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना मामूली गिरावट के साथ $4,500 के स्तर से नीचे बना रहा, हालांकि डॉलर के नए निचले स्तर पर पहुंचने से इसे निचले स्तरों पर समर्थन मिला।\n• बिटकॉइन में उछाल: क्रिप्टो बाजार में भी ट्रेजरी के इस फैसले का उत्साह देखा गया। बिटकॉइन की कीमत बढ़कर $72,000 के करीब पहुंच गई। बॉन्ड बायबैक से बाजार की तरलता में सुधार हुआ, जिससे शॉर्ट स्क्वीज की स्थिति बनी और पूरे क्रिप्टो क्षेत्र में तेजी का माहौल बना।\n\nवैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में यूरो का महत्व और संरचना\nयूरो यूरोपीय संघ के 20 सदस्य देशों की आधिकारिक मुद्रा है, जो सामूहिक रूप से यूरोज़ोन का निर्माण करते हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के बाद यूरो दूसरी सबसे ज्यादा कारोबार की जाने वाली मुद्रा है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक विदेशी मुद्रा के कुल लेनदेन में यूरो की हिस्सेदारी 31% रही, जिसका औसत दैनिक कारोबार $2.2 ट्रिलियन से अधिक था।\n\nविदेशी मुद्रा व्यापार में EUR/USD दुनिया की सबसे लोकप्रिय और सबसे ज्यादा ट्रेड होने वाली करेंसी जोड़ी है, जो कुल वैश्विक लेनदेन का लगभग 30% हिस्सा कवर करती है। इसके अलावा यूरो की अन्य प्रमुख जोड़ियों में EUR/JPY की हिस्सेदारी 4%, EUR/GBP की 3% और EUR/AUD की हिस्सेदारी 2% है।\n\nयूरोपीय केंद्रीय बैंक की भूमिका और नीतिगत निर्णय\nजर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर में स्थित यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ECB) यूरोज़ोन का केंद्रीय बैंक है। ईसीबी का मुख्य दायित्व यूरो क्षेत्र में कीमतों की स्थिरता बनाए रखना है, जिसके तहत वह मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और आर्थिक विकास को गति देने के लिए मौद्रिक नीति निर्धारित करता है।\n\nईसीबी का प्राथमिक उपकरण ब्याज दरों में बदलाव करना है। जब ईसीबी ब्याज दरें बढ़ाता है या दरें बढ़ने की उम्मीद होती है, तो विदेशी निवेशक उच्च रिटर्न की तलाश में यूरोज़ोन में पूंजी निवेश करते हैं, जिससे यूरो की विनिमय दर मजबूत होती है। इसके विपरीत, कम ब्याज दरें यूरो को कमजोर करती हैं। ईसीबी की गवर्निंग काउंसिल साल में आठ बार मौद्रिक नीति समीक्षा बैठकें करती है। इन बैठकों में यूरोज़ोन के राष्ट्रीय केंद्रीय बैंकों के प्रमुख और ईसीबी अध्यक्ष क्रिस्टीन लगार्ड सहित छह स्थायी कार्यकारी सदस्य निर्णय लेते हैं।\n\nयूरो की विनिमय दर को प्रभावित करने वाले प्रमुख आर्थिक आंकड़े\nयूरो की विनिमय दर को कई प्रमुख आर्थिक संकेतक तय करते हैं, जिनमें उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़े शामिल हैं\n\n• एचआईसीपी मुद्रास्फीति डेटा: उपभोक्ता मूल्यों का सामंजस्यपूर्ण सूचकांक (HICP) यूरो के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक पैमाना है। यदि मुद्रास्फीति ईसीबी के 2% के लक्ष्य से अधिक बढ़ती है, तो बैंक को ब्याज दरें बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे यूरो को मजबूती मिलती है।\n• आर्थिक वृद्धि संकेतक: यूरोज़ोन के सकल घरेलू उत्पाद (GDP), विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के पीएमआई (PMI), रोजगार के आंकड़े और उपभोक्ता भावना सर्वेक्षण अर्थव्यवस्था की सेहत दर्शाते हैं। एक मजबूत अर्थव्यवस्था विदेशी निवेश को आकर्षित करती है और ईसीबी को दरें बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है।\n• चार बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का योगदान: यूरो क्षेत्र की चार सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं—जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन—का प्रदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये चार देश यूरोज़ोन की कुल अर्थव्यवस्था का 75% हिस्सा बनाते हैं।\n• व्यापार संतुलन (Trade Balance): व्यापार संतुलन से तात्पर्य किसी देश के निर्यात से प्राप्त आय और आयात पर हुए खर्च के अंतर से है। जब यूरोपीय देशों के उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ती है, तो विदेशी खरीदारों को यूरो खरीदना पड़ता है, जिससे व्यापार अधिशेष (Positive Trade Balance) की स्थिति में यूरो की कीमत में बढ़ोतरी होती है।\n\nइसका आप पर असर\nवैश्विक निवेशकों और व्यापारियों के लिए: डॉलर की कमजोरी और यूरो में उछाल से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों और सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों के व्यापारिक रुझानों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।\n\nक्रिप्टो और कमोडिटी निवेशकों के लिए: अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा बाजार में तरलता बढ़ाए जाने से बिटकॉइन और डिजिटल संपत्तियों में तेजी के नए अवसर बन सकते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. EUR/USD दर में हालिया उछाल का मुख्य कारण क्या है?\nअमेरिकी ट्रेजरी द्वारा 10 से 30 साल की अवधि वाले बॉन्ड बायबैक संचालन को $2 अरब से बढ़ाकर कम से कम $4 अरब करने के फैसले के कारण डॉलर में गिरावट आई, जिससे EUR/USD दर 1.1700 के पार पहुंच गई।\n\n2. अमेरिकी ट्रेजरी की बॉन्ड बायबैक योजना कब लागू होगी?\nयह विस्तारित बॉन्ड बायबैक योजना 9 सितंबर से शुरू होकर 4 नवंबर तक प्रभावी रहेगी।\n\n3. क्या फ़ेडरल रिजर्व के रुख से डॉलर को समर्थन मिला?\nफ़ेडरल रिजर्व के मिनट्स में सख्त ब्याज दर नीति के संकेत थे, लेकिन ट्रेजरी द्वारा तरलता बढ़ाने के फैसले के कारण डॉलर की बिकवाली नहीं रुकी।\n\n4. डॉलर में गिरावट का अन्य संपत्तियों पर क्या असर पड़ा?\nGBP/USD बढ़कर 1.3650 के करीब पहुंचा, सोना $4,500 के नीचे स्थिर रहा और बिटकॉइन बढ़कर $72,000 के पास पहुंच गया।\n\n5. यूरोज़ोन में मौद्रिक नीति कौन निर्धारित करता है?\nजर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ECB) यूरोज़ोन की 20 सदस्य अर्थव्यवस्थाओं के लिए ब्याज दरें और मौद्रिक नीति तय करता है।",
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  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-08-20",
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    "फॉरेक्स बाजार",
    "यूरो डॉलर दर",
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