अमेरिकी ट्रेजरी के बॉन्ड बायबैक फैसले से डॉलर सूचकांक में गिरावट, स्कॉशियाबैंक ने दी डिबेसमेंट ट्रेड की चेतावनी अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा बॉन्ड बायबैक की सीमा दोगुनी करने के अचानक फैसले के बाद यूएस डॉलर में नरमी देखी जा रही है। स्कॉशियाबैंक के रणनीतिकारों के अनुसार, राजकोषीय चिंताओं के कारण डॉलर में आगे भी 1 से 1.5 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा सरकारी बॉन्ड की पुनः खरीद यानी बायबैक सीमा को अचानक दोगुना करने के फैसले के बाद वैश्विक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर पर दबाव गहरा गया है। स्कॉशियाबैंक के वरिष्ठ रणनीतिकारों शॉन ओसबोर्न और एरिक थ्योरेट के विश्लेषण के अनुसार, अमेरिकी मुद्रा मध्य जून के बाद के अपने सबसे निचले स्तर तक फिसल चुकी है। वित्तीय बाजारों में अमेरिकी राजकोषीय नीति की स्थिरता और फेडरल रिजर्व की महंगाई से निपटने की प्रतिबद्धता पर सवाल उठ रहे हैं। इस माहौल में निवेशक डॉलर डिबेसमेंट ट्रेड की ओर दोबारा रुख कर रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में यूएस डॉलर इंडेक्स में 1 से 1.5 प्रतिशत तक की और गिरावट दर्ज की जा सकती है। ट्रेजरी का आकस्मिक निर्णय और बायबैक का दायरा अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने बुधवार को ग्रीनविच मीन टाइम के अनुसार दोपहर 12:32 बजे एक अप्रत्याशित घोषणा की। विभाग ने स्पष्ट किया कि वह 10 वर्ष से 20 वर्ष और 20 वर्ष से 30 वर्ष की परिपक्वता अवधि वाले दीर्घकालिक बॉन्ड के लिए अपनी तरलता सहायता बायबैक नीलामी की सीमा को बढ़ा रहा है। पूर्व में प्रति ऑपरेशन अधिकतम 2 अरब डॉलर की सीमा को बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह नई व्यवस्था 9 सितंबर से प्रभावी होगी और 4 नवंबर तक जारी रहेगी। बाजार विश्लेषकों के लिए यह कदम इसलिए भी आश्चर्यजनक रहा क्योंकि यह घोषणा ट्रेजरी की त्रैमासिक पुनर्वित्तपोषण यानी रिफंडिंग घोषणा के महज दो सप्ताह बाद और 20-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड की नीलामी से कुछ ही घंटे पहले की गई। बॉन्ड यील्ड पर दबाव और डॉलर डिबेसमेंट का खतरा स्कॉशियाबैंक के विश्लेषकों के मुताबिक, ट्रेजरी का यह कदम दीर्घकालिक ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड को नियंत्रित करने की एक सोची-समझी कोशिश है। हाल के हफ्तों में दीर्घकालिक बॉन्ड यील्ड में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही थी, क्योंकि निवेशक अमेरिका के बढ़ते राजकोषीय घाटे और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर आशंकित थे। यदि बॉन्ड बाजार बढ़ती यील्ड का दबाव सहन करने में असमर्थ रहता है, तो उसका सीधा असर डॉलर की विनिमय दर पर पड़ता है। इसी वजह से करेंसी बाजार में डॉलर के अवमूल्यन यानी डिबेसमेंट की चर्चाएं फिर से तेज हो गई हैं। तकनीकी मोर्चे पर, DXY अपने पहली छमाही के लाभ के 50 प्रतिशत रिट्रेसमेंट स्तर को तोड़कर नीचे आ चुका है, जो निकट भविष्य में और गिरावट का संकेत देता है। फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और दर वृद्धि के संकेत अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की जुलाई बैठक के मिनट्स से पता चलता है कि कई नीति निर्माताओं का मानना था कि यदि मुद्रास्फीति में अपेक्षित कमी नहीं आती है, तो सख्त मौद्रिक नीति की आवश्यकता होगी। हालांकि, हालिया आर्थिक आंकड़ों ने एक अलग तस्वीर पेश की है। महंगाई के दबाव में कुछ नरमी और श्रम बाजार में आए ढीलेपन को देखते हुए सितंबर की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका कम हुई है। फिलहाल वायदा बाजार के आंकड़ों में सितंबर में दर वृद्धि की संभावना 30 प्रतिशत से थोड़ी अधिक आंकी गई है, जबकि वास्तविक आर्थिक परिस्थितियां इस जोखिम को और कम दर्शाती हैं। विदेशी मुद्रा बाजार, कमोडिटी और क्रिप्टोकरेंसी का रुझान डॉलर में जारी कमजोरी के बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली है। GBP/USD बढ़त बनाए रखने की कोशिश में गुरुवार को 1.3630 के स्तर के आसपास कारोबार करता दिखा। वहीं EUR/USD 1.1700 के ऊपरी स्तर से थोड़ा फिसलकर 1.1670 के आसपास दर्ज किया गया। कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में कुछ सुधार देखा गया और यह 4,500 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के नीचे आ गया। इसके विपरीत, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में तेजी का माहौल रहा, जहां बिटकॉइन यानी BTC 70,000 डॉलर के पार निकल गया। एथेरियम यानी ETH 2,200 डॉलर से ऊपर टिका रहा और रिपल यानी XRP भी 1.15 डॉलर के पार मजबूत हुआ। इस बीच, 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड स्थिरता दर्शाते हुए 4.672 प्रतिशत पर पहुंच गई। इसका आप पर असर भारत में: अमेरिकी डॉलर में आ रही कमजोरी और बॉन्ड बायबैक से भारतीय रुपये को राहत मिल सकती है, जिससे आयात लागत और कच्चे तेल की कीमतों का प्रभाव संतुलित हो सकता है। ग्लोबल निवेशकों के लिए: डॉलर इंडेक्स में गिरावट और क्रिप्टोकरेंसी तथा सोने में तेजी से अंतरराष्ट्रीय पोर्टफोलियो में एसेट एलोकेशन की रणनीतियों पर सीधा असर पड़ेगा। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी ट्रेजरी ने बॉन्ड बायबैक के बारे में क्या फैसला लिया है? अमेरिकी ट्रेजरी ने 10 से 30 वर्ष की अवधि वाले दीर्घकालिक बॉन्ड की बायबैक सीमा को 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर प्रति ऑपरेशन करने की घोषणा की है। 2. स्कॉशियाबैंक के रणनीतिकारों ने डॉलर के बारे में क्या कहा है? स्कॉशियाबैंक के विश्लेषकों शॉन ओसबोर्न और एरिक थ्योरेट का कहना है कि डॉलर में डिबेसमेंट ट्रेड लौट रहा है और यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) निकट अवधि में 1 से 1.5 प्रतिशत तक और गिर सकता है। 3. बिटकॉइन और क्रिप्टो बाजार पर इस खबर का क्या असर पड़ा? क्रिप्टोकरेंसी बाजार में मजबूती दर्ज की गई, जिसमें बिटकॉइन (BTC) 70,000 डॉलर के पार, एथेरियम (ETH) 2,200 डॉलर से ऊपर और एक्सआरपी (XRP) 1.15 डॉलर से ऊपर पहुंच गया। 4. फेडरल रिजर्व की सितंबर बैठक में ब्याज दर बढ़ने की कितनी संभावना है? बाजार वर्तमान में सितंबर में ब्याज दर वृद्धि की 30 प्रतिशत से थोड़ी अधिक संभावना मान रहा है, हालांकि हालिया कमजोर आर्थिक आंकड़ों से वास्तविक जोखिम इससे कम नजर आता है। https://trendkia.com/market/us-treasury-ki-ghoshana-ke-bada-scotiabank-ne-jatai-dollar-debasement-ki-ashnka-19325 TrendKia — Har trend, sabse pehle.