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  "type": "article",
  "title": "अमेरिकी ट्रेजरी ने लॉन्ग टर्म बॉन्ड बायबैक सीमा दोगुनी की, जानिए वैश्विक बाजारों और यील्ड पर पड़ा क्या असर",
  "summary": "अमेरिकी वित्त विभाग ने लंबी अवधि वाले सरकारी प्रतिभूतियों की बायबैक क्षमता को बढ़ाकर दोगुना कर दिया है। जानिए कैसे इस अप्रत्याशित कदम ने अमेरिकी डॉलर पर दबाव बनाया और वैश्विक मुद्रा व बॉन्ड बाजारों में नई हलचल पैदा कर दी।",
  "content": "अमेरिकी वित्त विभाग ने लंबी अवधि की सरकारी प्रतिभूतियों के लिए अपनी लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक योजना के दायरे को दोगुना करने का अचानक फैसला किया है। इस अप्रत्याशित रणनीतिक कदम ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में व्यापक हलचल पैदा कर दी है। इसके प्रभाव से अमेरिकी डॉलर में भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि ब्रिटिश पाउंड और यूरो जैसी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं में जबरदस्त मजबूती देखी गई। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय सोना और डिजिटल एसेट बिटकॉइन भी बॉन्ड यील्ड में आए तेज बदलावों के बीच नए दायरे में कारोबार करते नजर आए। हालांकि, इस फैसले के पीछे की मुख्य वजह 30 साल की परिपक्वता अवधि वाले अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड में लगातार हो रहा इजाफा और विदेशी निवेशकों की घटती दिलचस्पी मानी जा रही है।\n\nबॉन्ड यील्ड का 19 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचना और ट्रेजरी का हस्तक्षेप\nअमेरिकी ऋण बाजार में जून के अंत से ही काफी तनाव का माहौल बना हुआ है। जून के आखिरी हफ्ते से लेकर अगस्त के मध्य तक 30 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड में लगभग 40 बेसिस पॉइंट्स की भारी बढ़त दर्ज की गई। अगर इस पूरे घटनाक्रम की कड़ी से कड़ी जोड़कर देखें तो मई के महीने में 30 साल के बॉन्ड की यील्ड 5.18 प्रतिशत के स्तर पर पहुंचकर वापस लौटी थी। इसके बाद 24 जून को यह नीचे गिरकर 4.86 प्रतिशत के निचले स्तर पर आ गई थी। लेकिन 17 अगस्त तक यील्ड में दोबारा जबरदस्त तेजी आई और यह 5.31 प्रतिशत के स्तर को छू गई, जो पिछले 19 सालों का सबसे उच्चतम स्तर है। मई में यील्ड को नियंत्रित करने की पहली कोशिश विफल रही थी, लेकिन अगस्त की दूसरी तेजी को रोकने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी को बड़े कदम उठाने पड़े।\n\nइसी तनावपूर्ण पृष्ठभूमि में 18 अगस्त को अमेरिकी वित्त विभाग ने 20 साल से 30 साल की मैच्योरिटी वाले सेक्टर में पहले से तय 2 अरब डॉलर की बायबैक नीलामी आयोजित की। इस नीलामी के दौरान बॉन्ड डीलरों ने सरकार को लगभग 20 अरब डॉलर के सरकारी कागज (बॉन्ड) बेचने की पेशकश की। अमेरिकी ट्रेजरी ने अपनी तय सीमा के मुताबिक 2048 में परिपक्व होने वाले बॉन्ड में से 1 अरब डॉलर और 2051 में परिपक्व होने वाले दो अलग-अलग बॉन्ड में से 1 अरब डॉलर की खरीदारी की। पूरी 2 अरब डॉलर की खरीदारी सीमा समाप्त करने के बावजूद बाजार में बॉन्ड यील्ड नीचे आने के बजाय ऊपर की ओर बढ़ती रही। लिक्विडिटी सहायता का यह उपकरण सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं था बल्कि उस दिन सीधे बाजार में 2 अरब डॉलर के पूरे आकार में लागू किया गया था, फिर भी यह यील्ड की आक्रामक तेजी को थामने में नाकाम रहा। इसी नाकामी के अगले ही दिन ट्रेजरी ने बायबैक कैप को बढ़ाकर दोगुना करने का ऐलान कर दिया।\n\nबिक्री की मांग और आधिकारिक दिशानिर्देशों का विरोधाभास\nदिलचस्प बात यह है कि ट्रेजरी द्वारा बायबैक कैप को दोगुना करने का समय बाजार में बिकवाली के दबाव या मांग से मेल नहीं खाता है। 18 अगस्त की बायबैक नीलामी में डीलरों की तरफ से आई लगभग 20 अरब डॉलर की पेशकश इस साल 20 से 30 साल वाले सेक्टर में आयोजित सभी 11 बायबैक नीलामियों में सबसे कम थी। अगर बायबैक सीमा को दोगुना करने का तर्क यह दिया जाता कि बेचने वालों की लाइन लंबी हो रही थी, तो आंकड़े बताते हैं कि वह लाइन वास्तव में छोटी हुई थी।\n\nइसके अलावा अमेरिकी ट्रेजरी के अपने खुद के आधिकारिक नीतिगत दस्तावेजों में एक स्पष्ट विरोधाभास देखने को मिलता है। ट्रेजरी के प्रकाशित दिशानिर्देशों में साफ तौर पर लिखा है कि बायबैक कार्यक्रम का इस्तेमाल बाजार के तीव्र तनाव (एक्यूट मार्केट स्ट्रेस) को नियंत्रित करने के लिए नहीं किया जाएगा। दिशानिर्देशों के मुताबिक लिक्विडिटी सहायता का उद्देश्य केवल ऑफ-द-रन प्रतिभूतियों को बेचने का एक नियमित और अनुमानित अवसर प्रदान करना है। इस नीतिगत बयान के आधार पर दो ही बातें संभव हैं: या तो 30 साल की अवधि वाला लंबा बॉन्ड बाजार किसी वास्तविक तनाव में नहीं है, या फिर अमेरिकी वित्त विभाग ने बिना किसी आधिकारिक घोषणा के अपनी पुरानी नीति और सिद्धांत को बदल दिया है।\n\n30 साल के बॉन्ड ऑक्शन में सुस्ती और विदेशी निवेशकों की बिकवाली\nबायबैक कैप बढ़ाने की घोषणा के बावजूद हालिया 30 साल के बॉन्ड ऑक्शन के नतीजे काफी कमजोर रहे। ऑक्शन का टेल आधा बेसिस पॉइंट रहा। इस नीलामी में बिड-टू-कवर रेशियो 2.53 दर्ज किया गया, जो 2026 के पूरे रन में सबसे कमजोर आंकड़ा है। इसकी तुलना अगर पिछले महीनों से करें तो मई में बिड-टू-कवर रेशियो 2.55, जून में 2.75 और जुलाई में 2.64 रहा था। इसके अलावा लगभग 66 प्रतिशत बोलियां सबसे उच्चतम यील्ड दर पर स्वीकार की गईं, जिसका सीधा मतलब यह है कि जहां खरीदारों की सबसे ज्यादा जरूरत थी, वहीं बाजार की दिलचस्पी सबसे कम थी।\n\nऑक्शन की यह कमजोरी असल में ट्रेजरी इंटरनेशनल कैपिटल (TIC) के हालिया डेटा का प्रत्यक्ष परिणाम है। जून के टीआईसी आंकड़ों से पता चलता है कि विदेशी निवेशकों ने अमेरिकी सरकारी कर्ज प्रतिभूतियों में अपनी हिस्सेदारी में 72.1 अरब डॉलर की भारी कटौती की है। इस बिकवाली में सबसे बड़ा योगदान जापान और चीन का रहा। अपनी घरेलू मुद्रा येन की विनिमय दर को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे जापान ने 26.4 अरब डॉलर के अमेरिकी बॉन्ड बेचे, जबकि चीन ने अपनी होल्डिंग में 25.9 अरब डॉलर की कमी की। महज दो महीनों के भीतर अमेरिकी बॉन्ड बाजार में विदेशी हिस्सेदारी में 8 प्रतिशत अंक की बड़ी गिरावट आई है। अब अमेरिकी कर्ज का सीमांत खरीदार (मार्जिनल बायर) कोई विदेशी केंद्रीय बैंक या रिजर्व मैनेजर नहीं, बल्कि अमेरिका का घरेलू निवेशक बन चुका है। घरेलू निवेशक अपनी खरीदारी का मूल्य किसी विदेशी मुद्रा भंडार प्रबंधन के जनादेश के आधार पर तय नहीं करते, बल्कि वे इस पूरे गर्मियों के मौसम में बढ़ रही वास्तविक यील्ड दरों के आधार पर तय करते हैं। विदेशी निवेशकों की जगह घरेलू खरीदारों का आना एक समान अदला-बदली नहीं है, और यही 8 प्रतिशत अंक की गिरावट बाजार में नई यील्ड दरों के रूप में दिखाई दे रही है।\n\nप्रभावी समय सीमा और बाजार की मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रिया\nअगर अमेरिकी ट्रेजरी के इस ऐलान का बारीकी से हिसाब लगाया जाए तो तत्काल प्रभाव से बहुत कम बदलाव हुआ है। नए बढ़े हुए आकार पर अभी तक एक भी डॉलर का बॉन्ड नहीं खरीदा गया है। 10 साल से 20 साल के सेक्टर में अगला बायबैक ऑपरेशन 10 सितंबर को होना है, जबकि 20 साल से 30 साल के सेक्टर में अगला ऑपरेशन 24 सितंबर को निर्धारित है। इसका मतलब यह है कि दोगुनी की गई यह सीमा अगले तीन हफ्तों तक किसी भी बॉन्ड को छुएगी तक नहीं। इसके बावजूद 30 साल के बॉन्ड की यील्ड 17 अगस्त के 5.31 प्रतिशत के उच्चतम स्तर से लगभग 9 बेसिस पॉइंट्स गिरकर 5.20 प्रतिशत के आसपास आ गई।\n\nवित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि बॉन्ड बाजार ने वास्तविक पैसे के प्रवाह के लिए नहीं, बल्कि सरकार के बयान और वाक्य के लिए मूल्य चुकाया है। प्रति ऑपरेशन 2 अरब डॉलर अतिरिक्त खरीदारी (जो एक तिमाही में कुल चार बार यानी 8 अरब डॉलर बैठती है) केवल अगस्त रिफंडिंग में जारी किए गए 25 अरब डॉलर के 30 वर्षीय बॉन्ड के नए मुख्य निर्गम की तुलना में नगण्य है। सिर्फ एक सस्ते बयान से बाजार का इतना बड़ा रुख बदल जाना यह दर्शाता है कि बाजार केवल सरकार से कोई आश्वासन सुनना चाहता था, जो कि एक टिकाऊ मांग के मुकाबले बेहद कमजोर नींव है।\n\nयह ध्यान देना भी जरूरी है कि बाजार को मिला यह रिलीफ कहां जाकर रुक गया। 5.20 प्रतिशत के आसपास 30 साल का बॉन्ड ठीक उसी जगह खड़ा है जहां मई में तेजी रुकी थी और जहां वह एक हफ्ते पहले कारोबार कर रहा था। यानी अमेरिकी वित्त विभाग ने बिना तय समय के अचानक बड़ा ऐलान करके अपना एक कार्ड खेल दिया, लेकिन उससे केवल एक हफ्ते का समय खरीदा जा सका।\n\nफेड निर्णय, विदेशी भागीदारी और 4 नवंबर का लक्ष्य\nबॉन्ड बाजार की असली परीक्षा 16 सितंबर को होने वाले अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर निर्णय और उसके आसपास होने वाली बॉन्ड नीलामियों में होगी। विश्लेषकों का कहना है कि ऑक्शन के कवर रेशियो से ज्यादा अप्रत्यक्ष बोलीदाताओं (इनडायरेक्ट बिडर्स, जिनमें विदेशी केंद्रीय बैंक और अंतरराष्ट्रीय संस्थान शामिल हैं) की हिस्सेदारी पर नजर रखनी चाहिए। कवर रेशियो केवल यह मापता है कि ऑक्शन में कितना कागज पेश किया गया, जबकि इनडायरेक्ट अलॉटमेंट यह बताता है कि ऑक्शन के बाद असल में इसे कौन अपने पास रखने को तैयार था। जून के बाद से इनडायरेक्ट अलॉटमेंट के आंकड़े लगातार गिर रहे हैं।\n\nनिवेश स्थिति की बात करें तो केवल इस घोषणा के आधार पर लंबी अवधि के बॉन्ड में आई तेजी का विरोध करना जोखिम भरा हो सकता है। बॉन्ड बाजार में किसी भी टिकाऊ बदलाव के लिए विदेशी खरीदारों की वापसी बेहद जरूरी है। लेकिन जून के टीआईसी डेटा, अगस्त की 30 वर्षीय बॉन्ड बिक्री या हालिया 20 वर्षीय बॉन्ड ऑक्शन में से किसी से भी यह संकेत नहीं मिलता है कि विदेशी खरीदार वापस आ गए हैं। यदि 30 साल के बॉन्ड की यील्ड दोबारा 17 अगस्त के 5.31 प्रतिशत के स्तर के ऊपर बंद होती है, तो यह साबित हो जाएगा कि बायबैक कैप बढ़ाने से केवल थोड़ा वक्त खरीदा गया था। इसके बाद सवाल सीधे इस बात पर आकर टिक जाएगा कि अमेरिकी वित्त विभाग केवल बाजार की लिक्विडिटी का प्रबंधन कर रहा है या यील्ड कर्व को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है, और क्या वह 4 नवंबर से पहले इस अंतर को आधिकारिक रूप से स्वीकार करने का इरादा रखता है।\n\nवैश्विक मुद्रा बाजार, सोना और क्रिप्टो पर व्यापक प्रभाव\nअमेरिकी ट्रेजरी के इस फैसले का असर केवल बॉन्ड बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा असर वैश्विक मुद्रा बाजार पर पड़ा है। अमेरिकी डॉलर पर बने भारी मंदी के दबाव के कारण ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) अपनी दैनिक तेजी को बढ़ाते हुए 1.3600 के स्तर से ऊपर निकल गया, जो मई के मध्य के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। पाउंड को ब्रिटेन के हालिया महंगाई आंकड़ों से भी समर्थन मिला, जहां जुलाई में वार्षिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) बढ़कर 2.9 प्रतिशत पर पहुंच गया (जो अनुमान के मुताबिक था), जबकि कोर मुद्रास्फीति 2.5 प्रतिशत के अनुमान के मुकाबले बढ़कर 2.6 प्रतिशत पर पहुंच गई।\n\nइसी तरह यूरो (EUR/USD) ने भी तेजी पकड़ी और बुधवार को 1.1650 के स्तर के ऊपर कारोबार करते हुए जून की शुरुआत के बाद के अपने उच्चतम स्तर को छू लिया। निवेशक इसके बाद आने वाले एफओएमसी (FOMC) की बैठकों के मिनट्स पर नजर बनाए हुए थे ताकि ब्याज दरों के भावी दृष्टिकोण का पता चल सके। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना (XAU/USD) अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और ट्रेजरी यील्ड में आई गिरावट के चलते पिछले दिन के सारे नुकसान की भरपाई करते हुए मजबूती के साथ उभरा।\n\nक्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन (BTC) की तेजी बुधवार को सीमित नजर आई। बिटकॉइन का ऊपरी स्तर $65,000 के करीब सीमित रहा, जबकि निचले स्तर पर इसे $64,000 के ऊपर मजबूत सहारा मिला। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और मैक्रोइकॉनॉमिक बदलावों के बीच निवेशकों की सतर्कता के कारण बिटकॉइन की शुरुआती बढ़त थम गई।\n\nइसका आप पर असर\nभारत और वैश्विक पाठकों के लिए:\n\n• वैश्विक बाजारों में प्रभाव: अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा बायबैक सीमा बढ़ाने से अमेरिकी डॉलर कमजोर हुआ है, जिससे रुपया और अन्य उभरते बाजारों की मुद्राओं को अल्पकालिक राहत मिल सकती है।\n• निवेशकों के लिए सबक: अमेरिकी 30 वर्षीय बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव सोने और बिटकॉइन जैसे सुरक्षित व वैकल्पिक संपत्तियों की कीमतों को प्रभावित कर रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अमेरिकी ट्रेजरी ने बॉन्ड बायबैक सीमा को क्यों दोगुना किया?\nअमेरिकी वित्त विभाग ने 20 से 30 साल की अवधि वाले लंबे बॉन्ड की यील्ड को नियंत्रित करने और बाजार में लिक्विडिटी सहायता बढ़ाने के लिए बायबैक सीमा को 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर 4 अरब डॉलर कर दिया।\n\n2. 18 अगस्त के बायबैक ऑपरेशन में कितनी खरीदारी हुई?\nडीलेरों ने लगभग 20 अरब डॉलर की पेशकश की थी, जिसमें से ट्रेजरी ने पूरे 2 अरब डॉलर की खरीदारी की (1 अरब डॉलर 2048 मैच्योरिटी और 1 अरब डॉलर दो 2051 मैच्योरिटी वाले बॉन्ड)।\n\n3. विदेशी निवेशकों ने जून में कितने अमेरिकी बॉन्ड बेचे?\nजून में विदेशी होल्डिंग में 72.1 अरब डॉलर की गिरावट आई, जिसमें अपनी मुद्रा बचाने के लिए जापान ने 26.4 अरब डॉलर और चीन ने 25.9 अरब डॉलर की बिकवाली की।\n\n4. ट्रेजरी फैसले का डॉलर और अन्य मुद्राओं पर क्या असर पड़ा?\nइस निर्णय से अमेरिकी डॉलर में गिरावट आई, जिससे ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) 1.3600 से ऊपर और यूरो (EUR/USD) 1.1650 से ऊपर पहुंच गया।",
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  "publishedAt": "2026-08-19",
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