अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल में नरमी से वॉल स्ट्रीट फ्यूचर्स में तेजी, ब्याज दर बढ़ने की आशंका के बीच डाउ जोंस चढ़ा अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट और कच्चे तेल के दाम फिसलने से डाउ जोंस, एसएंडपी 500 और नैस्डैक फ्यूचर्स में बढ़त दर्ज की गई है, हालांकि फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दरें बढ़ाने की बढ़ती संभावनाओं से निवेशक सतर्क हैं। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में शुक्रवार को अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड अपने कई वर्षों के उच्चतम स्तर से फिसल गई, जिससे इक्विटी बाजारों पर बना भारी दबाव काफी हद तक कम हुआ और प्रमुख सूचकांकों के वायदा कारोबार में बढ़त देखने को मिली। इसी के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ताओं की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जिसने निवेशकों के बीच बने जोखिम से बचने के माहौल को कुछ राहत दी। हालांकि, हालिया मजबूत आर्थिक आंकड़ों के कारण अक्टूबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना तेजी से बढ़ी है, जिससे कारोबारी पूरी तरह आक्रामक रुख अपनाने से बच रहे हैं। प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों के वायदा कारोबार में मजबूती यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज फ्यूचर्स 0.14 प्रतिशत की मजबूती के साथ 51,790 के आसपास कारोबार करता दिखा। दूसरी ओर एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में 0.33 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 7,780 के स्तर के आसपास पहुंच गया। इसी तरह तकनीकी कंपनियों की प्रधानता वाले नैस्डैक 100 फ्यूचर्स ने भी 0.34 प्रतिशत की बढ़त बनाई और 30,870 के करीब कारोबार किया। इक्विटी सूचकांकों में आई इस तेजी के पीछे सुरक्षित निवेश वाली अमेरिकी सरकारी प्रतिभूतियों की यील्ड में आई नरमी को मुख्य वजह माना जा रहा है। फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और ब्याज दर की संभावनाएं सीएमई फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, आगामी अक्टूबर बैठक में मानक नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़कर लगभग 71 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा नीतिगत सख्ती को लेकर बाजार की बढ़ती चिंता को दर्शाता है, क्योंकि महज एक सप्ताह पहले यह संभावना 57.6 प्रतिशत थी और एक महीने पहले यह सिर्फ 9.7 प्रतिशत पर टिकी हुई थी। कॉरपोरेट मोर्चे पर शुक्रवार को किसी बड़ी कंपनी के तिमाही आय नतीजे घोषित नहीं होने थे, जिसके चलते बाजार सहभागियों का ध्यान पूरी तरह आने वाले व्यापक आर्थिक संकेतकों पर केंद्रित हो गया। इसमें मिशिगन विश्वविद्यालय की उपभोक्ता भावना रिपोर्ट और ड्यूरेबल गुड्स से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े शामिल हैं। डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज की बनावट और कार्यप्रणाली विश्व के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित शेयर बाजार सूचकांकों में शामिल डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज अमेरिका की 30 सबसे अधिक कारोबार वाली प्रमुख कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर रखता है। आमतौर पर पूंजीकरण के आधार पर आंके जाने वाले सूचकांकों के विपरीत, यह एक मूल्य भारित यानी प्राइस वेटेड इंडेक्स है। इसकी गणना शामिल सभी 30 घटक कंपनियों के शेयरों की कीमतों को जोड़कर एक विशेष विभाजक द्वारा भाग देकर की जाती है, जो वर्तमान में 0.152 निर्धारित है। इस ऐतिहासिक सूचकांक की नींव चार्ल्स डाउ ने रखी थी, जिन्होंने वॉल स्ट्रीट जर्नल की भी स्थापना की थी। हालांकि व्यापक प्रतिनिधित्व की कमी के चलते अक्सर इसकी आलोचना भी होती है, क्योंकि यह एसएंडपी 500 जैसे व्यापक सूचकांकों की तुलना में केवल 30 बड़े औद्योगिक समूहों तक ही सीमित रहता है। इंडेक्स की चाल तय करने वाले आर्थिक कारक डाउ जोंस की दिशा तय करने में कई अलग अलग आर्थिक तत्व निर्णायक भूमिका निभाते हैं। घटक कंपनियों की तिमाही आय रिपोर्टों में सामने आने वाला कुल कॉर्पोरेट प्रदर्शन इसका सबसे बड़ा कारक होता है। इसके अलावा अमेरिका सहित वैश्विक स्तर के व्यापक आर्थिक आंकड़े भी निवेशक धारणा को गहराई से प्रभावित करते हैं। फेडरल रिजर्व द्वारा तय की जाने वाली ब्याज दरों का स्तर भी डाउ जोंस पर गहरा असर डालता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर कॉर्पोरेट कर्ज की लागत को तय करता है, जिस पर अधिकांश अमेरिकी कंपनियां काफी हद तक निर्भर रहती हैं। इसके चलते मुद्रास्फीति के आंकड़े और केंद्रीय बैंक के नीतिगत फैसलों को प्रभावित करने वाले अन्य सभी संकेतक इस सूचकांक के प्रमुख प्रेरक बन जाते हैं। चार्ल्स डाउ का सिद्धांत और बाजार के प्रमुख चरण शेयर बाजार की प्राथमिक दिशा या ट्रेंड की पहचान के लिए चार्ल्स डाउ द्वारा विकसित डाउ थ्योरी आज भी तकनीकी विश्लेषकों के बीच बेहद प्रासंगिक मानी जाती है। इस सिद्धांत का एक महत्वपूर्ण नियम यह है कि डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज और डाउ जोंस ट्रांसपोर्टेशन एवरेज दोनों की दिशा का मिलान किया जाए, और किसी भी ट्रेंड को तभी विश्वसनीय माना जाए जब दोनों सूचकांक एक ही दिशा में आगे बढ़ रहे हों। ट्रेडिंग वॉल्यूम को इस प्रवृत्ति की पुष्टि के लिए आवश्यक मापदंड माना जाता है। यह सिद्धांत पीक और ट्रफ यानी शिखरों और गर्तों के विश्लेषण का उपयोग करता है और बाजार की चाल को तीन चरणों में बांटता है। पहला चरण एक्यूमुलेशन का होता है जब स्मार्ट मनी या बड़े संस्थागत निवेशक खरीदारी अथवा बिकवाली शुरू करते हैं। इसके बाद पब्लिक पार्टिसिपेशन का दौर आता है जब आम जनता इस ट्रेंड में शामिल होती है। अंत में डिस्ट्रीब्यूशन का चरण आता है, जहां स्मार्ट मनी अपनी स्थिति से बाहर निकल जाती है। डाउ जोंस में ट्रेडिंग और निवेश के विकल्प बाजार सहभागियों के लिए डाउ जोंस से जुड़े निवेश के कई व्यावहारिक साधन मौजूद हैं। पहला लोकप्रिय तरीका एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी ईटीएफ का उपयोग करना है, जिससे निवेशकों को सभी 30 कंपनियों के अलग अलग शेयर खरीदे बिना केवल एक सिंगल सिक्योरिटी के जरिए पूरे सूचकांक में निवेश करने की सुविधा मिलती है। इसका प्रमुख उदाहरण एसपीडीआर डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज ईटीएफ यानी डीआईए है। इसके अलावा फ्यूचर्स अनुबंध ट्रेडर्स को सूचकांक के भविष्य के मूल्य पर सट्टा लगाने या पोजीशन बनाने का अवसर देते हैं, जबकि ऑप्शंस अनुबंध पूर्व निर्धारित मूल्य पर इंडेक्स को खरीदने या बेचने का अधिकार प्रदान करते हैं। साथ ही म्यूचुअल फंड्स निवेशकों को डाउ जोंस के शेयरों के एक विविध पोर्टफोलियो में हिस्सा देकर समग्र सूचकांक में व्यापक जोखिम लेने की अनुमति देते हैं। विदेशी मुद्रा बाजार और वैश्विक मुद्राओं का हाल मुद्रा विनिमय बाजारों में शुक्रवार को एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर यानी एयूडी/यूएसडी गिरकर अगस्त की शुरुआत के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। रातभर के कारोबार में 200 दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज के नीचे फिसलने के बाद यह जोड़ी 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के पास काफी कमजोर नजर आई। फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और कच्चे तेल की कीमतों में हाल ही में आई तेजी ने महंगाई की चिंताओं को फिर से हवा दी है, जिसने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को कई साल के रिकॉर्ड स्तर पर धकेल दिया था। इसके साथ ही भू राजनीतिक अनिश्चितताओं ने अमेरिकी डॉलर को दो महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा दिया, जिसने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदों को दबाते हुए इस मुद्रा जोड़ी पर गहरा दबाव बनाया। दूसरी ओर यूएसडी/जेपीवाई एशियाई सत्र में थोड़ा नीचे आया और 159.00 के तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंचकर इसकी तेज रफ्तार कुछ धीमी पड़ी, क्योंकि जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में हस्तक्षेप के डर से येन के मंदड़िए सतर्क हो गए। हालांकि मजबूत अमेरिकी डॉलर को फेड के सख्त नजरिए और तेल जनित महंगाई के कारण मजबूती मिलती रही। बैंक ऑफ जापान द्वारा हाल ही में 7-2 के बहुमत से अल्पकालिक ब्याज दर को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत करने का फैसला मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक कदम था, जो बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा लेकिन यह येन की बढ़त को सीमित रख सकता है। कमोडिटी परिदृश्य और अमेरिकी राजकोषीय दबाव कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतें अपने कंसोलिडेशन के दौर में बनी रहीं और मंदी के बुनियादी कारणों के बीच पिछले दिन दर्ज किए गए साप्ताहिक निचले स्तर के करीब सुस्त पड़ी रहीं। डॉलर की दो महीने की तेजी पर ब्रेक लगने से सोने को आंशिक सहारा तो मिला, लेकिन ऊंची बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व का कड़ा रुख सर्राफा की कीमतों में किसी बड़ी रिकवरी को रोक रहे हैं। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों का फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर निकलना, अमेरिकी पीएमआई आंकड़ों का कई साल के रिकॉर्ड स्तर को पार करना और नीति निर्माताओं के आक्रामक बयानों ने सरकारी ट्रेजरी यील्ड को दोनों छोर पर ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। अमेरिकी बाजार में बिकने वाली कुल ट्रेजरी सिक्योरिटीज में ट्रेजरी नोट्स की हिस्सेदारी लगभग 52 प्रतिशत है, इसलिए इन पर मिलने वाली यील्ड में उछाल सीधे तौर पर देश के राजकोषीय स्वास्थ्य और उधारी लागत के लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। इसका आप पर असर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट वैश्विक शेयर बाजारों के लिए तात्कालिक राहत लेकर आई है, जिससे निवेशकों का जोखिम उठाने का हौसला बढ़ा है। • शेयर बाजार निवेशकों पर असर: अमेरिकी फ्यूचर्स में आई मजबूती से वैश्विक और घरेलू शेयर बाजारों में शुरुआती रिकवरी देखने को मिल सकती है। हालांकि फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दरें बढ़ाने की 71 प्रतिशत संभावना को देखते हुए निवेशकों को सतर्क रहकर ही नई पोजीशन बनानी चाहिए। • कच्चे तेल और ईंधन कीमतों पर प्रभाव: होर्मुज जलडमरूमध्य पर वार्ताओं के चलते कच्चे तेल के दाम गिरने से आयात लागत घटने की उम्मीद बंधी है। यदि अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतें नरम बनी रहती हैं तो आने वाले हफ्तों में घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। • मुद्रा बाजार और विनिमय दर: मजबूत अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अन्य मुद्राओं पर दबाव देखा जा रहा है, जिससे विदेशी यात्रा और आयात महंगे बने रह सकते हैं। डॉलर के दो महीने के उच्च स्तर के करीब रहने से स्थानीय मुद्रा में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। • सोने और सुरक्षित संपत्तियों के खरीदार: बॉन्ड यील्ड में राहत मिलने के बावजूद उच्च ब्याज दरों की आशंका से सोने की कीमतों में कोई बड़ी उछाल नहीं देखी जा रही है। बुलियन निवेशक खरीदारी से पहले मुद्रास्फीति और फेडरल रिजर्व के अगले नीतिगत रुख पर नजर रख सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में multi-year highs से आई तकनीकी नरमी और ऊर्जा बाजारों में भू-राजनीतिक तनाव कम होने के कारण देखने को मिला है। • ट्रेजरी यील्ड में गिरावट: अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड अपने कई वर्षों के उच्चतम स्तर से नीचे आई, जिससे इक्विटी बाजारों पर लगा दबाव तुरंत कम हो गया। बॉन्ड यील्ड के नरम पड़ने से शेयर बाजार के मूल्यांकन को तात्कालिक सहारा मिला। • होर्मुज जलडमरूमध्य पर कूटनीतिक वार्ता: संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर हुई वार्ताओं ने तेल आपूर्ति में बड़े व्यवधान की आशंकाओं को घटा दिया। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई और ऊर्जा आधारित महंगाई का तात्कालिक डर कम हुआ। • आक्रामक ब्याज दर उम्मीदें: मजबूत व्यापक आर्थिक आंकड़ों के कारण अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना 71 प्रतिशत तक पहुंच गई। इससे पहले यह संभावना केवल 9.7 प्रतिशत थी, जिसके कारण बाजार में बढ़त के बावजूद समग्र धारणा सतर्क बनी हुई है। सवाल-जवाब 1. डाउ जोंस और अन्य अमेरिकी फ्यूचर्स में तेजी क्यों आई? अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में कई वर्षों के उच्च स्तर से गिरावट आने और कच्चे तेल के दाम घटने से फ्यूचर्स में बढ़त देखने को मिली। 2. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण क्या था? होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक वार्ताओं से तेल की कीमतों में नरमी आई। 3. फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दरें बढ़ाने की क्या संभावना है? सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना बढ़कर लगभग 71 प्रतिशत हो गई है। 4. डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज की गणना कैसे की जाती है? यह एक मूल्य भारित सूचकांक है जिसमें 30 कंपनियों के शेयर मूल्यों के योग को 0.152 के विभाजक से भाग देकर आंका जाता है। 5. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में क्या बदलाव किया? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। https://trendkia.com/market/us-treasury-yields-aura-crude-oil-men-narami-se-wall-street-futures-men-teji-fed-dara-barhane-ki-ashnka-ke-bicha-dow-jones-charha-38397 TrendKia — Har trend, sabse pehle.