# अमेरिका में सरकारी बॉन्ड यील्ड में रिकॉर्ड उछाल, क्रूड ऑयल और बढ़ते कर्ज का बाजार पर असर

> अमेरिका के 30 वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड वैश्विक वित्तीय संकट के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं। बढ़ते सरकारी कर्ज और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी इसका मुख्य कारण है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/us-treasury-yields-hit-fresh-multi-year-highs-amid-surging-oil-prices-and-government-debt-30994 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, ट्रेजरी यील्ड, फेडरल रिजर्व, कच्चा तेल, अमेरिकी अर्थव्यवस्था, महंगाई

अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बॉन्ड बाजार को लेकर हलचल तेज हो गई है। अमेरिका के 30 वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में भारी तेजी देखने को मिली है, जो वैश्विक वित्तीय संकट के बाद से अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। इस उछाल के पीछे सरकार पर बढ़ते भारी कर्ज और अमेरिकी ट्रेजरी की बॉन्ड खरीद योजनाओं को लेकर निवेशकों की निराशा को मुख्य वजह माना जा रहा है। इसके साथ ही, 100 डॉलर के करीब पहुंच रही कच्चे तेल की कीमतें भी ट्रेजरी बॉन्ड पर दबाव को और बढ़ा रही हैं।

## बॉन्ड यील्ड का मौजूदा स्तर और आंकड़े
अमेरिकी 30 वर्षीय ट्रेजरी नोट का यील्ड 5.3 प्रतिशत के ऊपर कारोबार कर रहा है, जो साल 2007 के उस उच्च स्तर के करीब है जब लीमैन ब्रदर्स ढह गया था। इसके अलावा, बेंचमार्क अमेरिकी 10-वर्षीय यील्ड गुरुवार को शुरुआती कारोबार में 4.865 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंच गया। इस बॉन्ड में दो सप्ताह से भी कम समय में 25 आधार अंकों की तेजी दर्ज की गई है, जबकि जून के अंत से अब तक इसमें कुल आधा प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है। वहीं, दो-वर्षीय यील्ड पिछले दो सालों के दायरे के ऊपरी हिस्से को तोड़ते हुए 4.5 प्रतिशत से ठीक नीचे के स्तर पर पहुंच गया है।

## अर्थव्यवस्था और विकास को लेकर अलग राय
बाजार में इस बात पर बहस छिड़ी हुई है कि आखिर इन यील्ड्स को इस स्तर तक कौन सी चीजें धकेल रही हैं। हालांकि, सभी विश्लेषक एक राय नहीं रखते हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नियुक्त किए गए पूर्व मुख्य अमेरिकी आर्थिक सलाहकार स्टीफन मिरान ने एक हालिया लेख में स्पष्ट किया कि यह तेजी केंद्रीय बैंक या राजकोषीय विश्वसनीयता को लेकर चिंताओं के कारण नहीं है। उनके अनुसार, यह उछाल निवेशकों की उन उम्मीदों का परिणाम है जो वे दीर्घकालिक आर्थिक विकास को लेकर रखते हैं।

## बॉन्ड खरीद और एमयूएफजी का आकलन
दूसरी ओर, एमयूएफजी के विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि अमेरिकी ट्रेजरी प्रति तिमाही नौ बॉन्ड खरीद के अपने कार्यक्रम को बनाए रखती है और प्रत्येक ऑपरेशन में 6 अरब डॉलर तक की खरीदारी करती है, तो इससे प्रतिवर्ष कुल 200 अरब डॉलर से अधिक की संभावित खरीदारी का आंकड़ा सामने आ सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह पूरी तरह अनिश्चित है कि बड़ी खरीदारी का यह सिलसिला कितने समय तक जारी रहेगा और भविष्य में इन ऑपरेशनों के आकार को और भी बढ़ाया जा सकता है।

## कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव
इन तमाम वित्तीय गतिविधियों के बीच, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें मुद्रास्फीति के जरिए अमेरिकी सरकार के कर्ज की लागत को तेजी से बढ़ा रही हैं, जो इस यील्ड रैली में बड़ा योगदान दे रहा है। ब्रेंट क्रूड उस 100 डॉलर के डरावने आंकड़े से महज कुछ सेंट नीचे पहुंच गया है। ऐसा तब हुआ जब अमेरिका और ईरान ने तेल टैंकरों पर एक-दूसरे पर हमले किए, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होने वाला परिवहन और अधिक जटिल हो गया। युद्ध छिड़ने से पहले यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता था।

## फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और कार्यप्रणाली
संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में मौद्रिक नीति का संचालन फेडरल रिजर्व द्वारा किया जाता है। फेड के सामने दो प्रमुख लक्ष्य होते हैं, जिसमें मूल्य स्थिरता हासिल करना और पूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना शामिल है। इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए इसका मुख्य हथियार ब्याज दरों में समायोजन करना है। जब कीमतें बहुत तेजी से बढ़ती हैं और महंगाई फेड के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो वह ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर देता है, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था में उधार लेने की लागत बढ़ जाती है। इसके परिणामस्वरूप अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है क्योंकि यह अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए पैसा लगाने का एक आकर्षक ठिकाना बना देता है।

इसके विपरीत, जब महंगाई 2 प्रतिशत से नीचे आ जाती है या बेरोजगारी दर बहुत अधिक हो जाती है, तो फेड उधार लेने को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती कर सकता है, जिससे ग्रीनबैक पर दबाव पड़ता है। फेडरल रिजर्व साल में आठ नीतिगत बैठकें आयोजित करता है, जहाँ फेडरल ओपन मार्केट कमेटी आर्थिक स्थितियों का आकलन करती है और मौद्रिक नीति से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेती है।

## मात्रात्मक सहजता और मात्रात्मक कड़ाई
चरम स्थितियों में, फेडरल रिजर्व क्वांटिटेटिव ईजिंग यानी मात्रात्मक सहजता नामक नीति का सहारा ले सकता है। यह वह प्रक्रिया है जिसके जरिए फेड किसी अटके हुए वित्तीय तंत्र में क्रेडिट के प्रवाह को काफी हद तक बढ़ा देता है। यह एक गैर-मानक नीतिगत उपाय है जिसका उपयोग संकट के समय या तब किया जाता है जब महंगाई बेहद कम होती है। वर्ष 2008 के महान वित्तीय संकट के दौरान यह फेड का सबसे पसंदीदा हथियार था। इसमें फेड अधिक डॉलर छापकर वित्तीय संस्थानों से उच्च ग्रेड के बॉन्ड खरीदता है, जिससे आमतौर पर अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है।

वहीं, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी मात्रात्मक कड़ाई इसका बिल्कुल उल्टा प्रोसेस है, जिसमें फेडरल रिजर्व वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और नए बॉन्ड खरीदने के लिए अपने पास मौजूद परिपक्व हो रहे बॉन्ड के मूलधन को दोबारा निवेश नहीं करता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर अमेरिकी डॉलर के मूल्य के लिए सकारात्मक मानी जाती है।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी का सीधा असर वैश्विक वित्तीय बाजारों और भारत जैसे उभरते बाजारों पर भी पड़ता है।

- **भारत में:** अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित माने जाने वाले अमेरिकी बॉन्ड में निवेश कर सकते हैं, जिससे शेयर बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।
- **रुपये पर असर:** अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से भारतीय रुपये की विनिमय दर पर दबाव आ सकता है, जिससे आयात और ईंधन खरीदना महंगा हो सकता है।
- **ऋण लागत:** वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें ऊंची रहने से भारतीय कंपनियों और सरकार के लिए विदेशी बाजारों से कर्ज लेना महंगा हो जाता है।
- **मुद्रास्फीति:** कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से देश में पेट्रोल, डीजल और परिवहन की लागत पर असर पड़ सकता है, जिससे रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं।
- **निवेशक सतर्कता:** म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार के निवेशकों को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच पोर्टफोलियो में उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में आई इस तेज उछाल के पीछे मुख्य रूप से सरकार का बढ़ता हुआ भारी कर्ज और कच्चे तेल की कीमतों में आ रही उथल-पुथल है।

- **बढ़ता सरकारी कर्ज:** अमेरिकी सरकार के बढ़ते कर्ज और ट्रेजरी की बॉन्ड पुनर्खरिद योजनाओं से जुड़ी निराशा के कारण निवेशकों ने बॉन्ड बेचे, जिससे यील्ड में उछाल आया।
- **कच्चे तेल की कीमतें:** मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और टैंकरों पर हमलों के कारण ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई का जोखिम बढ़ गया है।
- **आर्थिक वृद्धि की उम्मीदें:** कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह तेजी केवल डर का परिणाम नहीं है, बल्कि मजबूत दीर्घकालिक आर्थिक विकास की संभावनाओं को लेकर निवेशकों के नजरिए को भी दर्शाती है।
- **मौद्रिक नीति का दबाव:** फेडरल रिजर्व द्वारा मुद्रास्फीति को काबू में रखने के लिए ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रखने की संभावनाओं ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।

## सवाल-जवाब

### 1. अमेरिकी 30-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड का यील्ड किस स्तर पर पहुंच गया है?
अमेरिकी 30-वर्षीय ट्रेजरी नोट का यील्ड 5.3 प्रतिशत से ऊपर कारोबार कर रहा है, जो 2007 के बाद का सबसे उच्च स्तर है।

### 2. बॉन्ड यील्ड में इस भारी तेजी का मुख्य कारण क्या है?
बढ़ता हुआ अमेरिकी सरकारी कर्ज, ट्रेजरी की बॉन्ड खरीद योजनाओं को लेकर निराशा और 100 डॉलर के करीब पहुंचती कच्चे तेल की कीमतें इसके मुख्य कारण हैं।

### 3. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी क्यों आई है?
अमेरिका और ईरान के बीच तेल टैंकरों पर हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य में परिवहन बाधित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है।

### 4. फेडरल रिजर्व के दो मुख्य लक्ष्य क्या हैं?
फेडरल रिजर्व के दो मुख्य लक्ष्य मूल्य स्थिरता हासिल करना और पूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना हैं।

### 5. क्वांटिटेटिव ईजिंग का क्या अर्थ है?
यह एक ऐसी नीति है जिसमें फेडरल रिजर्व वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदने के लिए अतिरिक्त डॉलर छापकर वित्तीय प्रणाली में क्रेडिट का प्रवाह बढ़ाता है।

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