# वाशिंगटन में शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप की बातचीत के बीच यूएसडी/सीएनएच में उछाल, व्यापार संघर्ष पर विराम केवल 10 जनवरी तक बढ़ा

> व्हाइट हाउस में शी जिनपिंग ने सहयोग और निष्पक्षता का संदेश दिया लेकिन टैरिफ पर चुप्पी साधे रखी, वहीं बुसान समझौते के तहत मिले व्यापार विराम को केवल 10 जनवरी तक बढ़ाए जाने से डॉलर के मुकाबले युआन पर दबाव बढ़ा है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/usd-cnh-climbs-as-xi-jinping-visits-washington-while-trade-conflict-pause-is-extended-only-through-january-10-37923 · **Language:** Hindi
**Tags:** यूएसडी सीएनएच, शी जिनपिंग, डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका चीन व्यापार युद्ध, टैरिफ ट्रूस, विदेशी मुद्रा बाजार, बैंक ऑफ जापान, सोना भाव, वित्त

अमेरिकी राजधानी वाशिंगटन में चीन के शीर्ष नेता शी जिनपिंग की यात्रा और व्हाइट हाउस में हुई उच्चस्तरीय कूटनीतिक चर्चाओं के बीच वैश्विक मुद्रा बाजार में महत्वपूर्ण हलचल देखी गई है। डॉलर के मुकाबले अपतटीय युआन यानी यूएसडी/सीएनएच (USD/CNH) में लगातार तीसरे सत्र में बढ़त दर्ज की गई और यह शुरुआती सितंबर के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इस कूटनीतिक मुलाकात के दौरान शी जिनपिंग ने दोनों महाशक्तियों के बीच ऐतिहासिक मित्रता, सकारात्मक साझेदारी और वैश्विक जिम्मेदारियों पर विस्तार से अपनी बात रखी। हालांकि, निवेशकों और कारोबारियों की निगाहें जिस सबसे संवेदनशील आर्थिक पहलू पर टिकी थीं, यानी दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी दंडात्मक टैरिफ, उस पर उनकी ओर से कोई नया ऐलान या संकेत सामने नहीं आया। इसके साथ ही दोनों देशों के व्यापारिक तनाव पर अस्थायी रोक की अवधि को लेकर भी बाजार की उम्मीदों को झटका लगा है।

## बुसान समझौते की मियाद 10 जनवरी तक बढ़ी, छह महीने की उम्मीद टूटी
व्यापार समझौते के मोर्चे पर एक बड़ा घटनाक्रम तब सामने आया जब ट्रेजरी सेक्रेटरी बेसेन्ट ने बुधवार को स्पष्ट किया कि दक्षिण कोरिया के बुसान में दोनों पक्षों के बीच तय हुआ व्यापार विराम, जो पहले 10 नवंबर को समाप्त होने वाला था, अब केवल 10 जनवरी तक ही प्रभावी रहेगा। वैश्विक वित्तीय बाजारों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के विश्लेषक इस समझौते में कम से कम छह महीने या उससे अधिक समय के बड़े विस्तार की उम्मीद कर रहे थे। इस तात्कालिक विराम का मुख्य उद्देश्य चीनी उत्पादों पर लगने वाले अमेरिकी शुल्कों में फिर से होने वाली भारी बढ़ोतरी को रोकना है। केवल दो महीने का छोटा विस्तार मिलने से उन वैश्विक निर्यातकों पर युआन में तत्काल धन बदलने का दबाव कम हो गया है जो डॉलर अपने पास रखे हुए थे, क्योंकि जनवरी तक उन्हें मुद्रा बदलने की कोई तात्कालिक हड़बड़ी नहीं है।

## यूएसडी/सीएनएच में तीन दिन की लगातार तेजी और तकनीकी विश्लेषण
विदेशी मुद्रा बाजार में यूएसडी/सीएनएच की चाल में स्पष्ट बदलाव देखा गया। सोमवार और मंगलवार को यह जोड़ी 6.6900 के निचले स्तरों के आसपास कारोबार कर रही थी, जहां चीनी युआन पिछले साढ़े तीन वर्षों के अपने सबसे मजबूत स्तर पर दर्ज हुआ था। लेकिन व्यापार विराम विस्तार की घोषणा सामने आते ही बुधवार के कारोबारी सत्र में डॉलर में जोरदार उछाल आया, जो इन तीन दिनों की सबसे बड़ी दैनिक बढ़त साबित हुई। इस तेजी के साथ ही मुद्रा जोड़ी ने 17 सितंबर से शुरू हुई अपनी पिछली पूरी गिरावट की भरपाई कर ली और 6.7200 के स्तर को छू लिया, जो शुरुआती सितंबर के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। हालांकि, तकनीकी पैमाने पर यह अब भी अपने 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (ईएमए) के नीचे बना हुआ है, जो 6.7300 के करीब स्थित है और जिसके नीचे यह जुलाई के दूसरे सप्ताह से लगातार कारोबार कर रहा है। मोमेंटम का आकलन करने वाला दैनिक स्टोकेस्टिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (स्टॉक आरएसआई) मध्य-सितंबर से अपने दायरे के मध्य से ठीक ऊपर सपाट बना हुआ है और कीमतों में आई इस तेज उछाल के साथ अब तक ऊपर की ओर नहीं घूमा है।

यदि हाजिर बाजार में यूएसडी/सीएनवाई (USD/CNY) के लाइव बाजार आंकड़ों की पड़ताल करें, तो यह फिलहाल 6.70 के स्तर पर बना हुआ है, जो पिछले बंद स्तर 6.70 की तुलना में 0.05 प्रतिशत की हल्की बढ़त दर्शाता है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 6.70 से 7.19 के बीच रहा है और मौजूदा कारोबारी वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत के 1.00 गुना के बराबर है। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय आरएसआई 34 के स्तर पर दर्ज है, जबकि एमएसीडी -0.01 और सिग्नल -0.01 पर है। मूविंग एवरेज के संदर्भ में 20-दिवसीय ईएमए 6.71, 50-दिवसीय ईएमए 6.73 और 200-दिवसीय ईएमए 6.85 पर स्थित है। 50-दिवसीय एसएमए 6.73 और 200-दिवसीय एसएमए 6.84 पर होने के कारण 50-दिवसीय ईएमए का 200-दिवसीय ईएमए से नीचे रहना डेथ क्रॉस और दीर्घकालिक मंदी की स्थिति की पुष्टि करता है। 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड 6.69 से 6.73 के बीच है जिसका मध्य स्तर 6.71 है और कीमतें वर्तमान में बैंड के दायरे के भीतर हैं। 14-दिवसीय एडीएक्स 44 के स्तर पर ट्रेंडिंग स्थिति दर्शा रहा है, जबकि स्टोकेस्टिक की फास्ट लाइन 32 और सिग्नल लाइन 17 पर है। दैनिक अस्थिरता एटीआर 0.00 पर है, जिसमें 20-दिवसीय सपोर्ट 6.70 और रेजिस्टेंस 6.73 के करीब है। प्रमुख पिवट स्तर 6.71 पर है, जिसके ऊपर आर1 6.71 और आर2 6.72 पर रेजिस्टेंस तथा नीचे एस1 6.70 और एस2 6.69 पर सपोर्ट देखा जा रहा है।

## व्हाइट हाउस में शी जिनपिंग के संबोधन के मुख्य बिंदु
समाचार एजेंसियों पर व्हाइट हाउस में दिए गए शी जिनपिंग के बयानों का विवरण 21 पंक्तियों में सामने आया, जिसमें व्यापक कूटनीतिक सहयोग और सद्भाव का आह्वान किया गया था। इस पूरे भाषण में टैरिफ शब्द का एक बार भी उल्लेख नहीं था, और एकमात्र संख्यात्मक घोषणा अमेरिकी युवाओं के लिए थी। शी जिनपिंग के वक्तव्य के मुख्य बिंदु इस प्रकार रहे

- उन्होंने एक खूबसूरत अमेरिका की यात्रा करने पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की।
- चीनी जनता की ओर से उन्होंने अमेरिका की 250वीं स्थापना वर्षगांठ के उपलक्ष्य में अपनी शुभकामनाएं और बधाई प्रेषित की।
- उन्होंने रेखांकित किया कि चीन और अमेरिका दोनों ही महान देश हैं और दोनों के लोग महान हैं।
- उन्होंने स्पष्ट किया कि वह दोनों देशों के बीच पारंपरिक मित्रता को आगे बढ़ाने और पारस्परिक सहयोग का विस्तार करने के लिए वाशिंगटन पहुंचे हैं।
- उन्होंने कहा कि चीन और अमेरिका दोनों के कंधों पर मानव प्रगति को आगे बढ़ाने की एक बड़ी ऐतिहासिक जिम्मेदारी है।
- उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के साथ मिलकर चीन-अमेरिका संबंधों के जहाज को सही दिशा में आगे बढ़ाने की तत्परता दिखाई।
- उनका मानना था कि स्पष्ट, गहन और निरंतर संवाद से दोनों पक्षों के बीच बेहतर समझ और आपसी विश्वास को बढ़ावा मिल सकता है।
- उन्होंने कूटनीति, व्यापार, अर्थव्यवस्था और कानून प्रवर्तन के क्षेत्रों में लगातार आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने की वकालत की।
- उन्होंने दोहराया कि चीन के दरवाजे वैश्विक निवेश के लिए पूरी तरह खुले हैं और वे अमेरिकी कंपनियों का चीन में निवेश करने के लिए स्वागत करते हैं।
- उन्होंने नशीले पदार्थों की तस्करी की रोकथाम और सामान्य कानून प्रवर्तन सहयोग को और अधिक मजबूत करने की इच्छा जताई।
- उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि अमेरिकी धरती पर चीनी कंपनियों के साथ निष्पक्ष और न्यायसंगत व्यवहार किया जाएगा।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि दोनों देशों में मानवता की भलाई के लिए एआई को विकसित करने और उसे प्रबंधित करने की पूरी क्षमता और साझा जिम्मेदारी है।
- उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा सकारात्मक होनी चाहिए और उसकी स्पष्ट सीमाएं तय होनी चाहिए।
- दोनों देशों की सेनाओं के बीच नियमित और निर्बाध संवाद बनाए रखने का भी आह्वान किया गया।
- अंत में, उन्होंने घोषणा की कि चीन अगले पांच वर्षों के दौरान 100,000 अमेरिकी युवाओं को चीन की यात्रा के लिए आमंत्रित करेगा।

## व्यापार युद्ध की पृष्ठभूमि, 2018 का टकराव और ट्रंप की वापसी का असर
अर्थशास्त्र के सामान्य सिद्धांतों के अनुसार, व्यापार युद्ध दो या दो से अधिक देशों के बीच अत्यधिक संरक्षणवादी नीतियों के कारण उत्पन्न होने वाला एक गंभीर आर्थिक संघर्ष होता है। इसके तहत आयात पर भारी शुल्क और नए व्यापारिक अवरोध खड़े किए जाते हैं, जिसके जवाब में प्रभावित देश भी जवाबी शुल्क लगाते हैं। इसका सीधा परिणाम आयात लागत में बढ़ोतरी और अंततः आम उपभोक्ताओं के जीवन-यापन के खर्च में भारी इजाफे के रूप में सामने आता है। अमेरिका और चीन के बीच यह कड़वा आर्थिक टकराव औपचारिक रूप से 2018 की शुरुआत में तब शुरू हुआ था, जब तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एशियाई दिग्गज पर अनुचित व्यापारिक प्रथाओं और बौद्धिक संपदा की चोरी का आरोप लगाते हुए चीनी वस्तुओं पर बड़े टैरिफ बैरियर लगा दिए थे।

चीन ने भी इसके जवाब में तुरंत आक्रामक कदम उठाए और ऑटोमोबाइल तथा सोयाबीन सहित कई प्रमुख अमेरिकी उत्पादों पर कड़े जवाबी शुल्क थोप दिए। इस तनाव को कम करने के लिए दोनों देशों ने जनवरी 2020 में ऐतिहासिक यूएस-चीन फेज वन ट्रेड डील पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते में चीन के आर्थिक और व्यापारिक ढांचे में संरचनात्मक सुधारों की शर्त रखी गई थी और इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच स्थिरता और विश्वास बहाल करना था। हालांकि, इसके तुरंत बाद दुनिया भर में फैले कोरोना वायरस महामारी के संकट ने पूरे परिदृश्य को बदल दिया और इस विवाद से ध्यान भटक गया। इसके बाद जब राष्ट्रपति जो बाइडन ने कार्यभार संभाला, तो उन्होंने ट्रंप द्वारा लगाए गए शुल्कों को न केवल बरकरार रखा, बल्कि कुछ अतिरिक्त टैक्स और पाबंदियां भी जोड़ दीं।

अब 47वें अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में वापसी ने दोनों देशों के बीच तनाव की एक नई और तीव्र लहर पैदा कर दी है। 2024 के चुनावी अभियान के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने संकल्प लिया था कि सत्ता में लौटते ही वह चीनी आयात पर 60 प्रतिशत तक का व्यापक शुल्क लगाएंगे, जिसे उन्होंने 20 जनवरी 2025 को पद संभालते ही अमल में लाने की दिशा में कदम बढ़ाए। ट्रंप की इस वापसी से यह आशंका गहरा गई है कि व्यापार युद्ध वहीं से दोबारा शुरू होगा जहां वह छूटा था। इस तरह की जवाबी नीतियां वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारी व्यवधान डाल रही हैं, जिससे कंपनियों के पूंजीगत खर्च और निवेश में कटौती हो रही है, और इसका सीधा असर कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स आधारित महंगाई में बढ़ोतरी के रूप में पूरी दुनिया को भुगतना पड़ रहा है।

## वैश्विक बाजारों की प्रतिक्रिया: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, जापानी येन और सोना
वाशिंगटन की इस राजनीतिक और कूटनीतिक गतिविधि का असर सिर्फ चीनी मुद्रा तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि अन्य प्रमुख मुद्राओं और परिसंपत्तियों पर भी इसका व्यापक प्रभाव देखा गया। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर की ओर लुढ़कता नजर आया। इस कमजोरी का कारण ऑस्ट्रेलिया का ताजा अगस्त जॉब्स डेटा भी रहा, जिसके अनुसार बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि बाजार का अनुमान 4.5 प्रतिशत का था। हालांकि, रोजगार परिवर्तन के आंकड़ों ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 39.5 हजार का आंकड़ा छुआ, लेकिन ट्रंप और शी की महत्वपूर्ण बैठक से पहले ट्रेडर्स अत्यधिक सतर्क और आशंकित बने रहे।

दूसरी ओर, डॉलर के मुकाबले जापानी मुद्रा यूएसडी/जेपीवाई (USD/JPY) अपने तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर से पीछे हटते हुए 158.00 के करीब नुकसान पर टिक गई। जापानी बॉन्ड यील्ड में आई जोरदार तेजी ने संभावित मुद्रा हस्तक्षेप के जोखिमों के बीच येन को सहारा दिया, जबकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर आक्रामक रुख बनाए रखने के दांव और ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के कारण अमेरिकी डॉलर दो महीने के उच्चतम स्तर के आसपास अपनी बढ़त बनाए रखने में सफल रहा। इसी बीच बैंक ऑफ जापान (बीओजे) ने एक बड़ा नीतिगत कदम उठाते हुए अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। यह निर्णय 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम है और यह निर्णय पूरी तरह से बाजार की हफ्तों पुरानी उम्मीदों के अनुरूप रहा।

कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों पर भी दबाव बना रहा। यूरोपीय कारोबारी सत्र के पूर्वार्द्ध के दौरान सोना लगातार दूसरे दिन नकारात्मक दायरे में रहा और 4,300 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे अथवा एक सप्ताह के निचले स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार के प्रतिभागी ट्रंप और शी के बीच किसी बड़े ऐतिहासिक समझौते की उम्मीद तो नहीं कर रहे थे, लेकिन उनकी नजरें दुर्लभ पृथ्वी खनिजों (रेयर अर्थ), तकनीकी प्रतिबंधों और मौजूदा व्यापार विराम को लंबी अवधि के लिए आगे बढ़ाए जाने से जुड़े किसी भी ठोस संकेत पर गहराई से टिकी रहीं।

## इसका आप पर असर
अमेरिका और चीन के बीच व्यापार विराम केवल 10 जनवरी तक बढ़ने से वैश्विक मुद्रा बाजार, विनिर्माण क्षेत्र और आयात-निर्यात लागत पर सीधा असर पड़ेगा।

- **भारत में:** कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला और डॉलर की मजबूती से आयातित इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक पार्ट्स महंगे हो सकते हैं। भारतीय व्यापारियों को विदेशी मुद्रा में होने वाले उतार-चढ़ाव से बचने के लिए करेंसी हेजिंग रणनीतियों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
- **वैश्विक बाजार में:** चीनी युआन के कमजोर होने और टैरिफ की अनिश्चितता से वैश्विक शेयर और कमोडिटी बाजारों में अस्थिरता बढ़ेगी। निवेशकों को उभरते बाजारों की मुद्राओं और जोखिम वाली संपत्तियों में नया निवेश करते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी।
- **आयातकों और निर्यातकों के लिए:** जनवरी 2026 तक टैरिफ न बढ़ने से अल्पावधि के शिपमेंट सुरक्षित रहेंगे। हालांकि 10 जनवरी के बाद नए टैरिफ लगने के जोखिम को देखते हुए कंपनियों को अपने ऑर्डर्स समय से पहले निपटाने होंगे।
- **सोने और धातु के खरीदारों के लिए:** डॉलर की मजबूती और कूटनीतिक बैठकों के चलते सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। यदि दोनों देशों के बीच तनाव दोबारा बढ़ता है, तो सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने में फिर से तेज उछाल देखने को मिल सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
अमेरिका और चीन के बीच यह कूटनीतिक और आर्थिक खींचतान लंबे समय से चले आ रहे व्यापार असंतुलन और सुरक्षा चिंताओं के कारण उत्पन्न हुई है। चुनावी वादों के तहत टैरिफ बढ़ाने और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने की नीतियों ने दोनों देशों के बीच तनाव को लगातार बनाए रखा है।

- **प्रत्यक्ष कारण:** डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीनी उत्पादों पर 60 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की घोषणा और बुसान समझौते की समाप्ति तिथि नजदीक आने से तनाव बढ़ा। दोनों देशों ने पूर्ण समझौते के बजाय बातचीत जारी रखने के लिए केवल 10 जनवरी तक का संक्षिप्त विस्तार स्वीकार किया।
- **ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:** वर्ष 2018 में बौद्धिक संपदा की चोरी और व्यापार घाटे के आरोपों के बाद शुरू हुए व्यापार युद्ध ने दोनों अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित किया था। हालांकि 2020 में फेज वन डील हुई थी, लेकिन कोरोना महामारी और बाद के प्रशासनिक फैसलों ने शुल्कों को जस का तस बनाए रखा।
- **आगामी कदम:** 10 जनवरी 2026 से पहले दोनों पक्षों को टैरिफ की दर, तकनीकी प्रतिबंधों और दुर्लभ खनिजों के व्यापार पर सहमति बनानी होगी। यदि कोई औपचारिक दीर्घकालिक समझौता नहीं होता है, तो नए साल में भारी शुल्क दोबारा लागू हो सकते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. व्हाइट हाउस में शी जिनपिंग के संबोधन की सबसे मुख्य बात क्या थी?
शी जिनपिंग ने दोनों देशों के बीच मित्रता, सहयोग और एआई प्रबंधन पर जोर दिया, लेकिन टैरिफ का कोई जिक्र नहीं किया।

### 2. अमेरिका-चीन व्यापार विराम की नई समयसीमा क्या है?
ट्रेजरी सेक्रेटरी बेसेन्ट के अनुसार, बुसान में तय हुआ व्यापार विराम अब 10 नवंबर के बजाय 10 जनवरी तक बढ़ा दिया गया है।

### 3. इस घोषणा के बाद यूएसडी/सीएनएच मुद्रा जोड़ी में क्या बदलाव आया?
यूएसडी/सीएनएच में लगातार तीसरे सत्र में तेजी आई और यह 6.7200 पर पहुंचकर शुरुआती सितंबर के बाद के उच्चतम स्तर पर आ गया।

### 4. शी जिनपिंग ने अमेरिकी युवाओं के लिए क्या घोषणा की?
उन्होंने घोषणा की कि चीन अगले पांच वर्षों में 100,000 अमेरिकी युवाओं को चीन की यात्रा पर आने के लिए आमंत्रित करेगा।

### 5. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में क्या फैसला लिया है?
बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है।

### 6. सोने की कीमतों पर इस बैठक का क्या प्रभाव देखा गया?
यूरोपीय सत्र में सोना लगातार दूसरे दिन कमजोर रहा और 4,300 डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गया।

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