डॉलर के मजबूत रुख और भू-राजनीतिक तनाव के बीच यूरो में सीमित हलचल यूरोपीय मुद्रा 1.1200 के करीब स्थिर बनी हुई है, जहां मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख से ग्रीनबैक को मजबूती मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में यूरोपीय साझा मुद्रा भारी दबाव के दौर से गुजर रही है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यूरो 1.1200 के स्तर के आसपास एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। शुरुआती यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान इसमें कोई बड़ा उतार-चढ़ाव दर्ज नहीं किया गया और यह लगभग सपाट बना रहा। पिछले करीब एक महीने से जारी गिरावट के बाद यह मुद्रा मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर के करीब बनी हुई है, जिससे तकनीकी और बुनियादी दोनों मोर्चों पर आगे भी कमजोरी की आशंका जताई जा रही है। बाजार के जानकारों का ध्यान यूरोजोन में संप्रभु कर्ज संकट की नई चिंताओं पर केंद्रित है। इस अनिश्चितता ने यूरो में किसी भी बड़े सुधार की गुंजाइश को सीमित कर दिया है। इसके विपरीत, सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियों की मांग बढ़ने के कारण अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत बना हुआ है, जिससे यूरो में बढ़त के प्रयास लगातार असफल हो रहे हैं। फेडरल रिजर्व की नीतियां और ब्याज दरों का समीकरण अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के आगामी कदमों को लेकर निवेशकों का आकलन लगातार बदल रहा है। बाजार सहभागियों ने अक्टूबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को काफी हद तक कम कर दिया है। हालांकि, दिसंबर की मौद्रिक नीति बैठक में दरों में 25-बेसिस-पॉइंट (bps) के इजाफे की संभावना अभी भी पूरी तरह से खारिज नहीं हुई है। ब्याज दरों में इस संभावित बढ़ोतरी और फेड के सख्त रुख ने अमेरिकी डॉलर इंडेक्स को लगातार समर्थन दिया हुआ है। लाइव तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो EUR/USD जोड़ी वर्तमान में 1.12 के स्तर पर कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद स्तर 1.12 से 0.17% नीचे है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 1.12 से 1.20 के बीच रहा है। तकनीकी पैमाने पर 14-पीरियड का RSI 22 पर आ चुका है, जो इस बात का संकेत है कि जोड़ी ओवरसोल्ड जोन में प्रवेश कर चुकी है। वहीं, MACD -0.01 पर है और इसका सिग्नल भी -0.01 पर बना हुआ है, जो मंदी के रुझान को दर्शाता है। मूविंग एवरेज के मोर्चे पर 20-डे EMA 1.13, 50-डे EMA 1.14 और 200-डे EMA 1.16 पर स्थित हैं। 50-डे EMA का 200-डे EMA से नीचे जाना एक डेथ क्रॉस को दर्शाता है, जो लंबे समय के डाउनट्रेंड की पुष्टि करता है। बॉलिंजर बैंड 1.11 से 1.16 के दायरे में है, जबकि ADX 50 पर पहुंचकर एक मजबूत ट्रेंड की ओर इशारा कर रहा है। मध्य पूर्व में गहराता सैन्य संकट और सुरक्षित निवेश वैश्विक वित्तीय बाजारों में जोखिम का मुख्य कारण मध्य पूर्व का भू-राजनीतिक संकट बन चुका है। अमेरिका और ईरान के बीच गतिरोध लगातार बढ़ रहा है, जिसने वैश्विक स्तर पर जोखिम प्रीमियम को काफी बढ़ा दिया है। ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के प्रस्ताव पर वॉशिंगटन की प्रतिक्रिया को नाकाफी करार दिया है। इस कूटनीतिक गतिरोध ने तनाव को और हवा दी है। इसके अलावा, यमन में ईरान समर्थित हूती समूह ने सऊदी अरब के खिलाफ अपना सैन्य अभियान तेज कर दिया है। सप्ताहांत में रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन के संयुक्त हमलों से निशाना बनाया गया। इन घातक हमलों के बाद सऊदी अरब ने जवाबी कार्रवाई की प्रतिज्ञा ली है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हूती समूह पर हमलों में शामिल होने और ईरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू करने की संभावना व्यक्त की है। इन घटनाओं से निवेशकों का भरोसा डगमगाया है और उन्होंने सुरक्षित मुद्रा के रूप में अमेरिकी डॉलर में शरण ली है। तकनीकी स्तर और चार्ट का विश्लेषण विदेशी मुद्रा विश्लेषकों का मानना है कि EUR/USD में किसी भी रिकवरी के लिए 1.1275 का स्तर पहला अहम रेजिस्टेंस बना हुआ है, जो मौजूदा कारोबारी दायरे की ऊपरी सीमा भी है। इसके ऊपर 1.1324 के आसपास स्थित 100-पीरियड SMA एक प्रमुख बाधा है। यदि खरीदार इस स्तर को पार करने में सफल होते हैं, तभी बिकवाली का दबाव कम होगा और एक टिकाऊ तेजी की जमीन तैयार हो सकेगी। दूसरी तरफ, यदि मुद्रा जोड़ी 1.1160 के क्षेत्र से नीचे फिसलती है, जो कि मौजूदा वर्ष का निचला स्तर है, तो मंदड़ियों के लिए यह गिरावट का एक नया संकेत होगा। ऐसा होने पर यूरो में और गहरी गिरावट का रास्ता खुल सकता है। चालू महीने के दौरान प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले यूरो के प्रदर्शन पर गौर करें तो जापानी येन के मुकाबले यूरो सबसे मजबूत स्थिति में रहा है। अन्य वैश्विक संपत्तियों और मुद्राओं का हाल वैश्विक मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में भी इस दौरान मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है • ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD): एशियाई सत्र में छुट्टी के कारण कम लिक्विडिटी के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7000 के नीचे बना रहा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट के बावजूद अमेरिकी डॉलर में सुधार और नवंबर में रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की कम होती संभावनाओं ने इसे सीमित रखा। • जापानी येन (USD/JPY): यह जोड़ी 158.00 के ऊपर कारोबार कर रही है। जापानी अधिकारियों द्वारा मुद्रा को सहारा देने के लिए संभावित हस्तक्षेप की अटकलों के बीच निवेशक सतर्क हैं। हालांकि, जापान और अमेरिका में सार्वजनिक अवकाश के कारण बाजार में लिक्विडिटी सीमित रही। • सोना और कच्चा तेल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना सोमवार को एक हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद फिसलकर 4,200 डॉलर के नीचे आ गया, जिससे इसकी दो दिनों की बढ़त का सिलसिला टूट गया। दूसरी तरफ, रूस-यूक्रेन ऊर्जा युद्धविराम समझौते से वैश्विक ईंधन की किल्लत कम होने और मुद्रास्फीति के जोखिम घटने की उम्मीदों के चलते कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। • क्रिप्टोकरेंसी कार्डानो (ADA): पिछले सप्ताह 2.85% के करेक्शन के बाद कार्डानो प्रमुख सपोर्ट जोन से ऊपर वापसी करने में सफल रहा। डेरिवेटिव डेटा में सुधार देखा गया और कॉइनग्लास पर लॉन्ग-टू-शॉर्ट रेश्यो सुधरकर 1.01 पर पहुंच गया। • भारतीय रुपया (INR): घरेलू बाजार में भारी मजबूती के साथ खुलने के बाद भारतीय रुपया 95.80 के करीब अपनी बढ़त बनाए रखने में कामयाब रहा। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा डॉलर की मांग को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों से रुपये को राहत मिली। इसका आप पर असर मुद्रा बाजार की यह अस्थिरता अंतरराष्ट्रीय व्यापार, विदेश यात्रा और आयात लागत को सीधे प्रभावित करती है। • वैश्विक निवेशकों के लिए: अमेरिकी डॉलर में लगातार मजबूती से उभरते बाजारों और अन्य मुद्राओं से पूंजी सुरक्षित संपत्तियों की ओर जा सकती है। इससे अल्पकालिक पोर्टफोलियो आवंटन में डॉलर आधारित संपत्तियों को प्राथमिकता मिलने की संभावना है। • आयात और यात्रा लागत: यूरो में कमजोरी से यूरोपीय देशों की यात्रा और वहां से आयात करना अपेक्षाकृत सस्ता हो सकता है। हालांकि, डॉलर के मजबूत रहने से वैश्विक स्तर पर डॉलर आधारित लेनदेन महंगे बने रहेंगे। • भारत में प्रभाव: भारतीय रुपया 95.80 के स्तर के पास स्थिर रहने की कोशिश कर रहा है क्योंकि केंद्रीय बैंक मांग को नियंत्रित कर रहा है। डॉलर की मजबूती के बावजूद कच्चे तेल में गिरावट से देश के चालू खाता घाटे और ईंधन आयात बिल पर दबाव कुछ कम हो सकता है। • वस्तुओं और कमोडिटी पर असर: सोने की कीमतों में $4,200 से नीचे आई गिरावट यह दर्शाती है कि डॉलर की मजबूती बिना यील्ड वाली धातुओं की मांग पर अंकुश लगाती है। निवेशक सोने में नई खरीदारी करने से पहले फेडरल रिजर्व के अगले संकेतों की प्रतीक्षा कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ मुद्रा बाजार में यह स्थिति यूरोजोन के आंतरिक आर्थिक दबावों, अमेरिकी मौद्रिक नीति और अचानक भड़के भू-राजनीतिक संघर्षों के कारण उत्पन्न हुई है। • यूरोजोन ऋण संकट की आशंका: यूरोपीय देशों में संप्रभु कर्ज को लेकर दोबारा उपजी चिंताओं ने यूरोपीय मुद्रा में संस्थागत निवेशकों की धारणा को कमजोर कर दिया है। इससे यूरो में किसी भी तकनीकी उछाल पर बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है। • अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख: अक्टूबर में दर वृद्धि की संभावना घटने के बावजूद दिसंबर में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की उम्मीदें कायम हैं। अमेरिकी दरों के ऊंचे रहने की संभावना वैश्विक स्तर पर डॉलर की मांग को बनाए रखती है। • मध्य पूर्व में सैन्य तनाव: यमन के हूती समूह द्वारा रियाद के किंग खालिद हवाई अड्डे पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों तथा अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते गतिरोध ने सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग को अचानक बढ़ा दिया है। सवाल-जवाब 1. EUR/USD वर्तमान में किस स्तर पर कारोबार कर रहा है? EUR/USD शुरुआती यूरोपीय सत्र में 1.1200 के स्तर के पास कारोबार कर रहा है, जो मई 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है। 2. यूरो की बढ़त को कौन से प्रमुख कारक रोक रहे हैं? यूरोजोन में संप्रभु कर्ज संकट की आशंकाएं, मध्य पूर्व का भू-राजनीतिक तनाव और फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के कारण मजबूत होता अमेरिकी डॉलर यूरो पर दबाव बनाए हुए हैं। 3. EUR/USD के लिए अहम तकनीकी रेजिस्टेंस और सपोर्ट स्तर क्या हैं? ऊपर की तरफ 1.1275 और 1.1324 (100-पीरियड SMA) मुख्य रेजिस्टेंस हैं, जबकि नीचे की ओर 1.1160 का स्तर अहम सपोर्ट है। 4. फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार की क्या उम्मीदें हैं? बाजार में अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने की उम्मीदें कम हुई हैं, लेकिन दिसंबर में 25-बेसिस-पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। 5. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की क्या वजह रही? रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा युद्धविराम समझौते से ईंधन की कमी दूर होने और मुद्रास्फीति का जोखिम कम होने की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई। 6. सऊदी अरब और अमेरिका से जुड़ा ताजा सैन्य घटनाक्रम क्या है? हूती समूह ने रियाद के किंग खालिद हवाई अड्डे को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया, जिसके बाद सऊदी अरब ने जवाबी कार्रवाई का संकल्प लिया और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमलों में शामिल होने की संभावना जताई। https://trendkia.com/market/usd-ke-majabuta-rukha-aura-bhu-rajanitika-tanava-ke-bicha-euro-men-simita-halachala-46854 TrendKia — Har trend, sabse pehle.