# अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सीमित दायरे में बंधा स्विस फ्रैंक, वैश्विक बाजारों में बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल ने बढ़ाई बेचैनी

> स्विस फ्रैंक के खिलाफ अमेरिकी डॉलर एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है, जबकि वैश्विक बाजारों में बढ़ती ट्रेजरी यील्ड, कच्चे तेल की कीमतों और एफओएमसी मिनट्स के इंतजार ने जोखिम धारणा पर दबाव बनाया है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/usd-ke-mukabale-simita-dayare-men-bndha-swiss-franc-vaishvika-bajaron-men-bonda-yilda-aura-kachche-tela-ne-barhai-bechaini-44661 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमेरिकी डॉलर, स्विस फ्रैंक, विदेशी मुद्रा, बॉन्ड यील्ड, कच्चा तेल, बिटकॉइन, सोना, वित्त

मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर और स्विस फ्रैंक की जोड़ी एक सीमित दायरे में घटबढ़ दिखा रही है, जहाँ दोनों मुद्राओं के बीच कोई स्पष्ट एकतरफा रुख नहीं बन पा रहा है। पिछले सत्र में जब अमेरिकी डॉलर 0.8310 के स्तर पर था, तब इसके 0.8290 से 0.8335 के बीच रहने का अनुमान लगाया गया था। हालांकि वास्तविक कारोबार इससे भी अधिक सिमटे हुए दायरे में 0.8296 से 0.8326 के बीच हुआ, जिससे किसी नए दिशात्मक रुझान का संकेत नहीं मिला। मौजूदा कारोबारी सत्र के दौरान डॉलर के 0.8305 से 0.8340 के बीच बने रहने की संभावना जताई जा रही है। व्यापक समयसीमा पर नजर डालें तो पिछले शुक्रवार 02 अक्टूबर को भी जब हाजिर भाव 0.8310 पर था, तब इस जोड़ी के 0.8245 से 0.8365 के बीच 1 से 3 हफ्तों तक सीमित दायरे में बने रहने का आकलन सामने रखा गया था, जो दृष्टिकोण अब भी अपरिवर्तित बना हुआ है।

 

## डॉलर-स्विस फ्रैंक के तकनीकी आंकड़े और स्तर

ताजा बाजार आंकड़ों के मुताबिक यूएसडी/सीएचएफ 0.8336 पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद भाव 0.8311 के मुकाबले 0.30 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। इस मुद्रा जोड़ी का 52 हफ्तों का दायरा 0.7629 से 0.8382 के बीच रहा है और इसका ट्रेडिंग वॉल्यूम 20 दिनों के औसत के बराबर 1.00 गुना दर्ज किया गया है। तकनीकी संकेतकों में 14 दिनों का आरएसआई 66 पर स्थित है, जबकि एमएसीडी 0.01 और सिग्नल लाइन 0.01 पर रहते हुए 0.00 के हिस्टोग्राम के साथ तेजी का रुझान दिखा रहे हैं। गतिशीलता मापने वाला एडीएक्स 29 पर पहुंचकर एक सक्रिय ट्रेंड की पुष्टि कर रहा है, वहीं स्टोकेस्टिक में फास्ट लाइन 77 और सिग्नल लाइन 64 पर बनी हुई है।

मूविंग एवरेज की स्थिति देखें तो 20 दिनों का ईएमए 0.8255, 50 दिनों का ईएमए 0.8175 और 200 दिनों का ईएमए 0.8026 पर मौजूद है। वहीं 50 दिनों का एसएमए 0.8148 और 200 दिनों का एसएमए 0.7963 दर्ज किया गया है। ईएमए 50 के ईएमए 200 से ऊपर निकलने के साथ चार्ट पर गोल्डन क्रॉस बना हुआ है, जो दीर्घकालिक बढ़त का संकेत देता है। 20 दिनों के बोलिंगर बैंड का निचला स्तर 0.8108, मध्य स्तर 0.8249 और ऊपरी स्तर 0.8391 है, जिसके भीतर ही मौजूदा भाव स्थित है। दैनिक उतार-चढ़ाव को दर्शाने वाला एटीआर 0.01 पर है। तकनीकी स्तरों के लिहाज से पिवट बिंदु 0.8327 पर है, जिसमें पहला रेजिस्टेंस 0.8348 और दूसरा रेजिस्टेंस 0.8360 है, जबकि पहला सपोर्ट 0.8315 और दूसरा सपोर्ट 0.8294 पर नजर आ रहा है। इसके अलावा 20 दिनों का सपोर्ट 0.8082 और 20 दिनों का रेजिस्टेंस 0.8382 पर बना हुआ है।

 

## एशियाई सत्र में अन्य प्रमुख मुद्राओं की चाल

बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र में अन्य प्रमुख मुद्रा जोड़ियों पर भी अमेरिकी डॉलर के मजबूत रुख का सीधा असर देखने को मिला। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की जोड़ी अपनी पिछली रिकवरी को आगे बढ़ाने में विफल रही और नकारात्मक रुख के साथ 0.7000 के नीचे कारोबार करती दिखी। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की तरफ से नीतिगत सख्ती की उम्मीदों के बावजूद, भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई तेजी ने डॉलर में निचले स्तरों पर खरीदारी को बढ़ावा दिया, जिससे एयूडी/यूएसडी दबाव में आ गया। बाजार प्रतिभागियों की नजरें अब फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी एफओएमसी मिनट्स पर टिकी हैं।

दूसरी तरफ यूएसडी/जेपीवाई एशियाई सत्र में 158.50 के करीब डेढ़ हफ्ते के उच्चतम स्तर के पास मंडराता रहा। इस जोड़ी में तेजी की उम्मीद लगाए खरीदार एफओएमसी मिनट्स से पहले 200 दिनों के एसएमए की बाधा पार होने का इंतजार कर रहे हैं। बैंक ऑफ जापान की नरम टिप्पणियों के बीच अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की नई बढ़त ने डॉलर की मांग को फिर से सक्रिय किया है, जिससे इस जोड़ी को समर्थन मिला है।

 

## कमोडिटी, क्रिप्टो और यूरोपीय बाजारों में गिरावट का दबाव

वित्तीय बाजारों में सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली संपत्तियों और जोखिम वाले विकल्पों दोनों में बिकवाली देखी गई। अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़त जारी रहने के कारण सोने की कीमत में लगभग 1.20 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि निवेशक साल के अंत से पहले ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावना तलाशने के लिए एफओएमसी मिनट्स का इंतजार कर रहे हैं। उधर ऊर्जा बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत अब 102 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल चुकी है। तेल की महंगाई और भू-राजनीतिक चिंताओं के चलते यूरोपीय शेयर सूचकांकों में बिकवाली और गहरी हो गई है।

डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में बिटकॉइन को 87,200 डॉलर के आसपास आपूर्ति का सामना करना पड़ा, जिसके बाद इसमें करेक्शन देखा गया। प्रमुख ऑल्टकॉइन्स भी गिरावट के इसी दौर में शामिल रहे, जहाँ इथेरियम फिसलकर अपने अगले अहम सपोर्ट 2,600 डॉलर की ओर बढ़ रहा है और रिपल का निचला रुख 1.45 डॉलर के डिमांड क्षेत्र के करीब तक बढ़ गया है।

 

## यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने नीतिगत उलझन

महंगाई के मोर्चे पर यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने जटिल स्थिति पैदा हो गई है। सामान्य परिस्थितियों में जब मुद्रास्फीति तय लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से चल रही हो, तो केंद्रीय बैंक के पास ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने का सीधा रास्ता होता है। लेकिन वर्तमान आर्थिक माहौल सामान्य नहीं है। इस समय बॉन्ड बाजार पहले से ही वित्तीय स्थितियों को कड़ा करने का एक हिस्सा खुद ही पूरा कर रहा है, जिसकी वजह से यूरोपीय सेंट्रल बैंक एक कठिन दुविधा में फंस गया है जहाँ दरों में और बढ़ोतरी आर्थिक वृद्धि को बाधित कर सकती है।

## इसका आप पर असर
वैश्विक बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल में उछाल से आम निवेशकों और उपभोक्ताओं पर महंगाई तथा बाजार के उतार-चढ़ाव का सीधा असर पड़ने वाला है।

- **कच्चे तेल की कीमतें:** ब्रेंट क्रूड के 102 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से ईंधन और आयातित वस्तुओं की लागत में बढ़ोतरी होगी। आने वाले हफ्तों में घरेलू स्तर पर पेट्रोल, डीजल और लॉजिस्टिक्स के खर्च बढ़ सकते हैं।
- **सोने में निवेश:** अमेरिकी यील्ड बढ़ने से सोने में 1.20 प्रतिशत की गिरावट आई है। आभूषण खरीदारों या सुरक्षित निवेश की तलाश कर रहे निवेशकों को एफओएमसी मिनट्स आने तक नई खरीदारी में सतर्कता बरतनी होगी।
- **विदेशी मुद्रा और यात्रा:** अमेरिकी डॉलर के मजबूत बने रहने से विदेश यात्रा और विदेशी शिक्षा के खर्च बढ़ जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर आधारित लेनदेन करने वालों को मुद्रा विनिमय पर अतिरिक्त रकम चुकानी पड़ सकती है।
- **क्रिप्टोकरेंसी निवेशक:** बिटकॉइन और ऑल्टकॉइन्स में करेक्शन से खुदरा निवेशकों के पोर्टफोलियो पर दबाव बना रहेगा। इथेरियम के 2,600 डॉलर और रिपल के 1.45 डॉलर के सपोर्ट स्तरों पर नजर रखकर ही ट्रेडर्स को जोखिम प्रबंधित करना चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नए सिरे से आई तेजी और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने डॉलर की मांग बढ़ा दी है, जिससे मुद्राओं, कमोडिटी और जोखिम वाली संपत्तियों पर दबाव बना है।

- **बॉन्ड यील्ड में तेजी:** अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल ने निवेशकों को सुरक्षित और ब्याज देने वाले डॉलर की ओर आकर्षित किया है। इसके चलते सोना जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों में 1.20 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
- **भू-राजनीति और तेल संकट:** भू-राजनीतिक तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर निकल गया है। इस ऊर्जा संकट ने यूरोपीय शेयर बाजारों में बिकवाली तेज कर दी है और वैश्विक विकास की चिंताओं को गहराया है।
- **केंद्रीय बैंकों का रुख:** बाजार प्रतिभागी ब्याज दरों पर फेडरल रिजर्व के रुख को समझने के लिए एफओएमसी मिनट्स का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर, यूरोपीय सेंट्रल बैंक पहले से कड़े हो रहे बॉन्ड बाजार और दोगुनी महंगाई के बीच नीतिगत फैसले लेने में फंसा हुआ है।

## सवाल-जवाब

### 1. यूएसडी/सीएचएफ के लिए निकट अवधि में क्या कारोबारी दायरा देखा जा रहा है?
अमेरिकी डॉलर और स्विस फ्रैंक की जोड़ी के लिए वर्तमान सत्र में 0.8305 से 0.8340 का दायरा देखा जा रहा है, जबकि 1 से 3 हफ्तों के लिए यह 0.8245 से 0.8365 के दायरे में बना हुआ है।

### 2. सोने की कीमत में हालिया गिरावट की मुख्य वजह क्या है?
अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में नए सिरे से आई तेजी के कारण सोने में लगभग 1.20 प्रतिशत की गिरावट आई है।

### 3. ब्रेंट क्रूड ऑयल किस स्तर पर पहुंच गया है?
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत बढ़कर 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है।

### 4. क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन और अन्य सिक्कों की क्या स्थिति है?
बिटकॉइन 87,200 डॉलर के स्तर पर बिकवाली दबाव के बाद सुस्ती में है, जबकि इथेरियम 2,600 डॉलर और रिपल 1.45 डॉलर के सपोर्ट स्तर की ओर फिसल रहे हैं।

### 5. यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने क्या बड़ी चुनौती है?
मुद्रास्फीति लक्ष्य से लगभग दोगुनी होने पर सामान्यतः ब्याज दरें बढ़ाई जाती हैं, लेकिन बॉन्ड बाजार द्वारा पहले ही वित्तीय सख्ती किए जाने से बैंक के सामने मुश्किल दुविधा खड़ी हो गई है।

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