वैश्विक बांड बाजारों में मंदी का दबाव: ब्याज दरों में बढ़ोतरी और ऊर्जा कीमतों के उछाल से यील्ड वक्र चपटा हुआ ऊर्जा कीमतों में भारी तेजी और केंद्रीय बैंकों की सख्त मौद्रिक नीति के संकेतों के कारण वैश्विक बांड बाजारों में बिकवाली तेज हो गई है। यूरोपीय और अमेरिकी बांड यील्ड में ऐतिहासिक उछाल के साथ अल्पकालिक दरें तेजी से ऊपर चढ़ी हैं। वैश्विक बांड बाजारों में बुधवार शाम से एक अभूतपूर्व दबाव देखा जा रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की 6 अरब डॉलर की बायबैक नीलामी के बाद से ही निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। अमेरिकी 10-वर्षीय यील्ड पर 4.8 प्रतिशत का तकनीकी प्रतिरोध स्तर टूट गया, जिसने बांड बाजार में भारी बिकवाली का रास्ता साफ कर दिया। इस स्थिति को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की बढ़ती कीमतों ने और अधिक विकट बना दिया है। इसके अलावा, यूरोपीय और अमेरिकी केंद्रीय बैंकों की तरफ से ब्याज दरों में और बढ़ोतरी के संकेतों ने वैश्विक वित्तीय बाजारों को गहरे दबाव में डाल दिया है। ऊर्जा कीमतों में भारी उछाल से बढ़ा मुद्रास्फीति का डर लाल सागर में हूती विद्रोहियों के खतरों और सऊदी अरब द्वारा 1990 के बाद से सबसे निचले उत्पादन स्तर की रिपोर्ट के बाद ऊर्जा बाजारों में आग लग गई। ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर दिन के कारोबार के दौरान लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल के शिखर पर पहुंच गईं। इसी समय, यूरोपीय गैस की कीमतों में भी रिकॉर्ड तेजी देखी गई और डच टीटीएफ गैस का भाव 83 यूरो प्रति मेगावाट-घंटा तक पहुंच गया, जो कई वर्षों का नया उच्चतम स्तर है। इन बढ़ती ऊर्जा लागतों ने वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति के दबाव को दोबारा जगा दिया है, जिससे केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरें ऊंची रखने का दबाव बढ़ गया है। यूरोपीय केंद्रीय बैंक का सख्त रुख और दर वृद्धि के संकेत यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ECB) की मौद्रिक नीति बैठक ने बांड बाजारों में बिकवाली के इस माहौल को और हवा दी। ईसीबी की अध्यक्ष क्रिस्टीन लगार्ड ने स्पष्ट किया कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण मुद्रास्फीति का दबाव बना रहेगा और यह लंबे समय तक लक्ष्य से ऊपर रह सकता है। केंद्रीय बैंक ने अपने मुद्रास्फीति के अनुमानों में संशोधन किया है। वर्ष 2026, 2027 और 2028 के लिए मुख्य मुद्रास्फीति का अनुमान बढ़ाकर क्रमशः 3 प्रतिशत, 2.5 प्रतिशत और 2.1 प्रतिशत कर दिया गया है। इसी तरह, कोर सीपीआई के औसतन 2.5 प्रतिशत, 2.6 प्रतिशत और 2.3 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई गई है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ईसीबी अधिकारियों की अगली बैठक में ब्याज दरों में एक और वृद्धि की पूरी संभावना है। ईसीबी के इस रुख के बाद यूरो क्षेत्र में 2-वर्षीय यील्ड में 17 बेसिस प्वाइंट का बड़ा उछाल देखा गया। यूरोपीय संघ का 2-वर्षीय स्वैप रेट बढ़कर 3.44 प्रतिशत के पार चला गया, जो नवंबर 2023 के बाद का उच्चतम स्तर है। वहीं, 10-वर्षीय स्वैप रेट 3.52 प्रतिशत पर बंद हुआ, जो 2011 के बाद से सबसे ऊपरी स्तर है। मनी मार्केट अब अक्टूबर और दिसंबर दोनों महीनों में 25-25 बेसिस प्वाइंट की दर वृद्धि की पूरी संभावना जता रहा है, जबकि 2027 के दौरान दो और बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में रिकॉर्ड बढ़ोतरी और सीपीआई आंकड़े अमेरिकी बांड बाजार में भी बिकवाली का यही रुझान बना रहा। अमेरिकी 2-वर्षीय यील्ड 15.5 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 4.56 प्रतिशत पर पहुंच गई, जिसने 2025 के 4.42 प्रतिशत के उच्चतम स्तर को तोड़ दिया। 30-वर्षीय यील्ड में भी 7.7 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, अमेरिकी 10-वर्षीय यील्ड 12 बेसis प्वाइंट बढ़कर 4.96 प्रतिशत पर बंद हुई, जो 2023 में दर्ज किए गए 5.02 प्रतिशत के बहु-वर्षीय शिखर के बेहद करीब है। मनी मार्केट में अगले हफ्ते होने वाली बैठक में दर वृद्धि की 70 प्रतिशत संभावना जताई जा रही है। निवेशक अब अगस्त के अमेरिकी सीपीआई आंकड़ों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। बाजार का अनुमान है कि हेडलाइन सीपीआई मासिक आधार पर 0.4 प्रतिशत और वार्षिक आधार पर 3.4 प्रतिशत रहेगी। कोर सीपीआई के 0.2 प्रतिशत मासिक और 2.4 प्रतिशत वार्षिक रहने की उम्मीद है। यदि मुद्रास्फीति में किसी भी तरह की मजबूती दिखती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी का रास्ता साफ हो जाएगा। इस दबाव के बीच यूरोपीय और अमेरिकी शेयर बाजारों के प्रमुख सूचकांक लगभग 0.50 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। विदेशी मुद्रा बाजार में EUR/USD की जोड़ी 1.1633 से गिरकर 1.1612 पर आ गई। बैंक ऑफ इंग्लैंड और उभरते बाजारों की मौद्रिक नीतियां यूके बांड बाजार में भी यील्ड में जोरदार उछाल देखा गया, जहाँ 2-वर्षीय यील्ड 17.4 बेसis प्वाइंट बढ़ी। ब्रिटिश मनी मार्केट अब नवंबर से अगले साल जून के बीच बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) द्वारा 4 बार ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना मान रहा है। दूसरी ओर, तुर्की के केंद्रीय बैंक (TCMB) ने अपनी प्रमुख नीतिगत दर को 37 प्रतिशत पर स्थिर रखा है। हालांकि तुर्की में मांग में सुस्ती दर्ज की गई है, लेकिन ऊर्जा की ऊंची कीमतों और भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण मुद्रास्फीति पर दबाव बना हुआ है, जिससे EUR/TRY 56.50 के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। पोलैंड के नेशनल बैंक (NBP) के गवर्नर ग्लापिंस्की ने भी अपने आक्रामक रुख को थोड़ा नरम किया है। अगस्त में मुद्रास्फीति के तय सीमा के ऊपरी छोर तक पहुंचने के बाद, उन्होंने पोलिश ब्याज दरों को मध्य-2027 तक स्थिर रखने का संकेत दिया है। एशियाई व्यापारिक सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) 0.7100 के मध्य स्तर पर स्थिर रहा, जबकि जापान में गर्म पीपीआई आंकड़ों के बाद USD/JPY 154.00 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। इसका आप पर असर वैश्विक बांड यील्ड और तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर आम नागरिकों के लोन, महंगाई और निवेश पर पड़ता है। • भारत में: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के $110 प्रति बैरल तक पहुंचने से घरेलू ईंधन की कीमतें और परिवहन लागत बढ़ सकती है। इससे आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई दर ऊपर जा सकती है और भारतीय रिज़र्व बैंक को अपनी ब्याज दरों में कटौती टालनी पड़ सकती है। • वैश्विक स्तर पर: अमेरिका और यूरोप में बांड यील्ड बढ़ने से वैश्विक शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ेगी। जो लोग अंतरराष्ट्रीय फंड्स या विदेशी शेयरों में निवेश करते हैं, उनके पोर्टफोलियो पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। • ऋण और होम लोन: केंद्रीय बैंकों द्वारा दरें बढ़ाने के संकेतों से होम लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई में जल्द राहत मिलने की उम्मीद कम हो गई है। • विदेशी मुद्रा बाजार: अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे विदेश में पढ़ाई और यात्रा महंगी हो सकती है। ऐसा क्यों हुआ वैश्विक बांड बाजारों में यह तेज बिकवाली और यील्ड में उछाल तीन मुख्य कारणों के एक साथ आने की वजह से हुआ है। • अमेरिकी ट्रेजरी नीलामी और तकनीकी स्तर टूटना: अमेरिकी ट्रेजरी की 6 अरब डॉलर की बायबैक नीलामी के बाद 10-वर्षीय यील्ड का 4.8 प्रतिशत का महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस टूट गया, जिससे बिकवाली का सिलसिसा शुरू हुआ। • ऊर्जा संकट और भू-राजनीति: लाल सागर में हूती खतरों और सऊदी अरब के उत्पादन में कटौती की वजह से ब्रेंट क्रूड $110 तक पहुंच गया और यूरोपीय प्राकृतिक गैस में रिकॉर्ड तेजी आई। • सख्त केंद्रीय बैंक नीतियां: ईसीबी द्वारा मुद्रास्फीति के अनुमान बढ़ाना और लगार्ड द्वारा अगली बैठक में दर बढ़ोतरी के संकेत देने से दरों में राहत की उम्मीदें खत्म हो गईं। सवाल-जवाब 1. बांड यील्ड बढ़ने का शेयर बाजार पर क्या असर पड़ता है? बांड यील्ड बढ़ने से सुरक्षित निश्चित आय वाले साधनों पर बेहतर रिटर्न मिलता है, जिससे निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर बांड्स में लगाते हैं। इसके चलते शेयर बाजारों में बिकवाली देखने को मिलती है। 2. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का मुख्य कारण क्या है? लाल सागर में हूती विद्रोहियों के हमलों के खतरे और सऊदी अरब में उत्पादन के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचने की खबरों के कारण ब्रेंट क्रूड $110 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। 3. यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ECB) ने क्या फैसला लिया है? ईसीबी ने अपनी मौद्रिक नीति में सख्ती का रुख अपनाते हुए मुद्रास्फीति के अनुमानों को बढ़ाया है और संकेत दिया है कि अगली बैठक में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की जा सकती है। 4. अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड का वर्तमान स्तर क्या है? अमेरिकी 10-वर्षीय यील्ड 12 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 4.96 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो 2023 के 5.02 प्रतिशत के उच्चतम स्तर के करीब है। https://trendkia.com/market/vaishvika-banda-bajaron-men-mndi-ka-dabava-byaja-daron-men-barhotari-aura-urja-kimaton-ke-uchhala-se-yilda-vakra-chapata-hua-31142 TrendKia — Har trend, sabse pehle.