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  "type": "article",
  "title": "वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और फेड के सख्त रुख के बीच यूरो पर बढ़ा दबाव, डॉलर मजबूत",
  "summary": "मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर कड़े रुख के चलते EUR/USD में गिरावट देखी जा रही है, जबकि निवेशकों की नजरें यूरोपीय सेंट्रल बैंक के अगले कदमों पर टिकी हैं।",
  "content": "अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत के साथ यूरो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दबाव में नजर आ रहा है। पिछले कारोबारी सत्र में 1.1400 के मध्य स्तर यानी जुलाई के अंत के बाद के अपने सबसे निचले स्तर से मामूली सुधार दर्ज करने के बाद, EUR/USD की यह जोड़ी अपनी बढ़त को बरकरार रखने में नाकाम रही है। मौजूदा समय में हाजिर कीमतें 1.1475 के दायरे में कारोबार कर रही हैं। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और यूरोप के प्रति रूस के संभावित कड़े रुख की चिंताओं ने साझा यूरोपीय मुद्रा पर भारी दबाव डाला है। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर को एक सुरक्षित विकल्प के रूप में मजबूती मिलने से यूरो की चाल लगातार सुस्त बनी हुई है।\n\nमध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और अमेरिकी फेड की सख्ती\nमुद्रा विनिमय बाजार पर भू-राजनीतिक संकट का गहरा असर देखने को मिल रहा है। हालिया घटनाक्रम में यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने शनिवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद में संवेदनशील ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन के जरिए हमला करने का दावा किया है। इसके अतिरिक्त ईरान ने अमेरिका के साथ दोबारा बातचीत शुरू करने के लिए सात शर्तें तय की हैं। इन परिस्थितियों ने बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम को ऊंचा बनाए रखा है, जिससे निवेशक डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं।\n\nदूसरी ओर, अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व का सख्त मौद्रिक रुख भी ग्रीनबैक को लगातार मजबूती प्रदान कर रहा है। फेडरल रिजर्व ने पिछले बुधवार को अपनी सितंबर बैठक के अंत में तीन वर्षों से अधिक समय में पहली बार उधारी लागत में बढ़ोतरी की थी। इसके साथ ही नीति निर्माताओं के ब्याज दर अनुमानों से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि अधिकारी इस वर्ष एक और दर वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं। इसके विपरीत यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी ने चेतावनी जारी की है कि मूल्य दबाव उसकी प्रारंभिक उम्मीदों से अधिक समय तक बने रह सकते हैं। इस बयान के बाद अक्टूबर में ईसीबी द्वारा नीतिगत सख्ती किए जाने की संभावनाएं बढ़ी हैं, जिसने यूरो को निचले स्तरों पर कुछ हद तक सहारा देने का काम किया है।\n\nEUR/USD तकनीकी विश्लेषण और प्रमुख स्तर\nतकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो EUR/USD जोड़ी अल्पावधि में मंदी के रुझान में दिख रही है। यह 1.1546 पर स्थित अपने 100 दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज और 1.1486 के 61.8% रिट्रेसमेंट स्तर के नीचे बनी हुई है। यदि गिरावट का रुख जारी रहता है, तो नीचे की ओर तत्काल सहारा 1.1426 पर 78.6% फिबोनाची रिट्रेसमेंट पर स्थित है। इस स्तर के टूटने पर 1.1350 का क्षेत्र एक मजबूत आधार के रूप में कार्य कर सकता है।\n\nवहीं दूसरी तरफ, यदि खरीदार वापसी करना चाहते हैं, तो उन्हें सबसे पहले 1.1486 पर मौजूद 61.8% रिट्रेसमेंट को फिर से हासिल करना होगा ताकि मौजूदा बिकवाली दबाव हल्का हो सके। इसके बाद का प्रतिरोध 1.1529 के आसपास 50.0% रिट्रेसमेंट और फिर 1.1546 पर 100 दिवसीय एसएमए के पास दिखाई देता है। यदि कीमतें इन स्तरों को पार कर टिकने में सफल होती हैं, तो 1.1571 और 1.1623 की ओर एक टिकाऊ सुधार की उम्मीद की जा सकती है।\n\nलाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, EUR/USD फिलहाल 1.15 पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद 1.15 के मुकाबले 0.03% की मामूली बढ़त दर्शाता है। 14 दिवसीय आरएसआई 35 के स्तर पर है और एमएसीडी मंदी के संकेत दे रहा है। 20 दिवसीय, 50 दिवसीय और 200 दिवसीय ईएमए 1.16 पर बने हुए हैं, जबकि 50 दिवसीय एसएमए 1.15 और 200 दिवसीय एसएमए 1.16 पर है, जो लंबी अवधि के डाउनट्रेंड तथा डेथ क्रॉस को रेखांकित करता है। बोलिंगर बैंड्स 1.15 से 1.17 के दायरे में हैं और एडीएक्स 26 पर ट्रेंडिंग स्थिति दर्शा रहा है। स्टोकैस्टिक की फास्ट लाइन 12 और सिग्नल लाइन 10 पर है, जबकि 52 हफ्तों का दायरा 1.13 से 1.20 के बीच देखा गया है।\n\nयूरोपीय अर्थव्यवस्था में यूरो और ईसीबी की भूमिका\nयूरो यूरोपीय संघ के उन 20 सदस्य देशों की आधिकारिक मुद्रा है जो यूरोज़ोन का हिस्सा हैं। यह अमेरिकी डॉलर के बाद दुनिया की दूसरी सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, सभी विदेशी मुद्रा लेनदेनों में यूरो की हिस्सेदारी 31% रही, जिसका औसत दैनिक कारोबार 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक रहा। इसके साथ ही EUR/USD दुनिया में सबसे सक्रिय रूप से ट्रेड होने वाला करेंसी पेयर है, जिसकी कुल वैश्विक लेनदेन में करीब 30% हिस्सेदारी है। इसके बाद EUR/JPY का 4%, EUR/GBP का 3% और EUR/AUD का 2% हिस्सा आता है।\n\nजर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक यूरोज़ोन का केंद्रीय बैंक है, जो ब्याज दरें तय करने और मौद्रिक नीतियों के संचालन के लिए जिम्मेदार है। ईसीबी का मुख्य उद्देश्य मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसमें मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना या आर्थिक विकास को गति देना शामिल है। इसके लिए ब्याज दरों में बदलाव इसका प्राथमिक हथियार होता है। सामान्यतः ऊंची ब्याज दरें या भविष्य में दरों के बढ़ने की उम्मीदें यूरो के मूल्य को बढ़ाती हैं। ईसीबी की गवर्निंग काउंसिल साल में आठ बार मौद्रिक नीति बैठकें आयोजित करती है, जिसमें यूरोज़ोन के राष्ट्रीय बैंकों के प्रमुख और अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड सहित छह स्थायी सदस्य निर्णय लेते हैं।\n\nआर्थिक संकेतक और व्यापार संतुलन का प्रभाव\nयूरोज़ोन में मुद्रास्फीति के आंकड़ों को कंज्यूमर प्राइसेज के हार्मोनाइज्ड इंडेक्स द्वारा मापा जाता है, जो यूरो के उतार-चढ़ाव के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण पैमाना है। जब महंगाई दर ईसीबी के 2% के तय लक्ष्य से अधिक हो जाती है, तो बैंक को कीमतें काबू में करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी करनी पड़ती है। अन्य देशों की तुलना में अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरें विदेशी निवेशकों को आकर्षित करती हैं, जिससे यूरो मजबूत होता है।\n\nइसके अलावा जीडीपी, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के पीएमआई, रोजगार के आंकड़े और उपभोक्ता धारणा सर्वेक्षण भी मुद्रा की दिशा तय करते हैं। यूरोज़ोन की चार सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं—जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन—पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का 75% हिस्सा बनाती हैं, इसलिए इन देशों के आंकड़े सर्वाधिक अहम होते हैं। एक अन्य मुख्य संकेतक व्यापार संतुलन है, जो किसी अवधि में निर्यात से होने वाली कमाई और आयात पर होने वाले खर्च के अंतर को दर्शाता है। जब किसी देश के निर्यात की मांग अधिक होती है, तो खरीदारों द्वारा उस देश की मुद्रा खरीदने के कारण उसका मूल्य बढ़ता है, जिससे अनुकूल व्यापार संतुलन मुद्रा को सहारा देता है।\n\nवैश्विक बाजारों में अन्य मुद्राओं, सोने और कमोडिटी की चाल\nवैश्विक बाजार के अन्य हिस्सों में भी व्यापक हलचल देखने को मिल रही है। एशियाई सत्र में AUD/USD 0.7100 के ऊपर स्थिर बना रहा। पीपल्स बैंक ऑफ चाइना द्वारा लोन प्राइम रेट को जस का तस रखने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव बना, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दर में एक और बढ़ोतरी की उम्मीदों ने इसे सहारा दिया। दूसरी ओर, USD/JPY 157.00 के नीचे फिसलता नजर आया, जहां बैंक ऑफ जापान द्वारा हाल ही में रेट चेक के बाद हस्तक्षेप के जोखिम और जापानी छुट्टियों के बीच येन को मजबूती मिली। बैंक ऑफ जापान ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य करते हुए 7-2 के बहुमत से अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है।\n\nकमोडिटी बाजार में सोने की हालिया रिकवरी पर ब्रेक लगा है। 4,400 डॉलर के स्तर पर प्रतिरोध का सामना करने के बाद सोने की कीमतों में छह सप्ताह के निचले स्तर से आई तेजी थम गई है। सोने का दैनिक तकनीकी ढांचा तटस्थ आरएसआई के साथ मिला-जुला परिदृश्य प्रस्तुत कर रहा है। वहीं डिजिटल परिसंपत्तियों की बात करें तो पिछले सप्ताह 5% से अधिक चढ़ने के बाद बिटकॉइन, इथेरियम और रिपल में सोमवार को भी तेजी जारी रही। बिटकॉइन 81,300 डॉलर के ऊपर कारोबार कर रहा है, इथेरियम 2,600 डॉलर के पार निकल गया है और एक्सआरपी 1.300 डॉलर के महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर के ऊपर बना हुआ है, जहां मोमेंटम संकेतक आगे भी बढ़त का संकेत दे रहे हैं।\n\nइसका आप पर असर\nमुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव सीधे तौर पर आयात लागत और विदेशी खर्च को प्रभावित करते हैं।\n\n• भारतीय आयातकों पर असर: अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती के कारण आयातित वस्तुओं के बिल बढ़ सकते हैं। इससे कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य वैश्विक जिंसों की घरेलू कीमतों पर दबाव देखने को मिल सकता है।\n• यूरोप यात्रा और पढ़ाई: यूरो के मुकाबले डॉलर मजबूत होने और यूरो में कमजोरी से भारतीय छात्रों और पर्यटकों के लिए यूरोज़ोन का खर्च अपेक्षाकृत स्थिर रह सकता है। यूरोपीय विश्वविद्यालयों में फीस भुगतान करने वाले परिवारों को विनिमय दरों पर पैनी नजर रखनी चाहिए।\n• मुद्रा कारोबारियों के लिए रणनीति: EUR/USD का 1.1486 और 1.1350 के प्रमुख स्तरों के बीच रहना सीमित दायरे में ट्रेड के अवसर प्रदान करता है। बाजार में भारी उतार-चढ़ाव को देखते हुए सख्त स्टॉप लॉस के साथ पोजीशन संभालना जरूरी है।\n• वैश्विक निवेश पोर्टफोलियो: अमेरिकी फेड द्वारा आगे दर वृद्धि के संकेतों से वैश्विक बॉन्ड यील्ड बढ़ सकती है। इसके प्रभाव से उभरते बाजारों से विदेशी फंडों की निकासी की आशंका बनी रहती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयूरो पर मौजूदा दबाव भू-राजनीतिक संकट और प्रमुख केंद्रीय बैंकों के बीच ब्याज दरों के अंतर की वजह से उत्पन्न हुआ है। मध्य पूर्व में तनाव और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक सख्ती ने निवेशकों को सुरक्षित डॉलर की ओर मोड़ा है।\n\n• मध्य पूर्व और पूर्वी यूरोप में तनाव: यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा रियाद पर किए गए मिसाइल हमलों और ईरान के कड़े रुख ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसके अलावा यूरोप के प्रति रूस के संभावित कदमों की आशंका ने यूरो की धारणा को कमजोर किया है।\n• अमेरिकी फेड का आक्रामक रुख: अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने तीन साल से अधिक समय बाद उधारी दरों में इजाफा किया है और आगे भी बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं। इस नीतिगत सख्ती ने डॉलर की यील्ड को सहारा दिया है।\n• केंद्रीय बैंकों की नीतियों में भिन्नता: हालांकि ईसीबी ने भी महंगाई को लेकर चेतावनी जारी की है, लेकिन अमेरिकी दर वृद्धि की गति के सामने यूरो की रिकवरी सीमित बनी हुई है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. EUR/USD मुद्रा जोड़ी वर्तमान में किस स्तर पर कारोबार कर रही है?\nEUR/USD हाजिर कीमतें फिलहाल 1.1475 के क्षेत्र में दबाव के साथ कारोबार कर रही हैं।\n\n2. अमेरिकी डॉलर को किन कारकों से मजबूती मिल रही है?\nमध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, सुरक्षित निवेश की मांग और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों से डॉलर को सहारा मिल रहा है।\n\n3. यूरोज़ोन में कुल कितने देश शामिल हैं और यूरो का बाजार में क्या स्थान है?\nयूरोज़ोन में 20 यूरोपीय देश शामिल हैं और यूरो दुनिया की दूसरी सबसे अधिक कारोबार वाली मुद्रा है।\n\n4. यूरोपीय सेंट्रल बैंक का मुख्य दायित्व क्या है?\nईसीबी का प्राथमिक कार्य मुद्रास्फीति को 2% के आसपास नियंत्रित रखकर यूरोज़ोन में मूल्य स्थिरता बनाए रखना है।\n\n5. EUR/USD के लिए तत्काल तकनीकी सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर क्या हैं?\nनीचे की ओर तत्काल सपोर्ट 1.1426 और 1.1350 पर है, जबकि ऊपर की ओर रेजिस्टेंस 1.1486 और 1.1546 पर बना हुआ है।\n\n6. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है?\nबैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है।",
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