वैश्विक बॉन्ड बिकवाली और कच्चे तेल में उछाल से अमेरिकी डॉलर मजबूत, मुद्रा और कमोडिटी बाजारों पर गहराया दबाव ऊर्जा संकट और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के बीच बॉन्ड यील्ड में तेजी ने अमेरिकी डॉलर को मजबूती दी है, जिससे सोना, क्रिप्टो और प्रमुख वैश्विक मुद्राएं दबाव में आ गई हैं। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में वैश्विक बॉन्ड बिकवाली का असर व्यापक रूप से विदेशी मुद्रा और कमोडिटी लेन-देन पर दिखाई दे रहा है। निवेशकों की जोखिम उठाने की क्षमता घटने से अमेरिकी डॉलर को नए सिरे से मजबूती मिली है, जिससे हालिया बढ़त के बाद डॉलर में मजबूती का दौर जारी है। भले ही अल्पकालिक बुनियादी आंकड़ों के हिसाब से डॉलर का मौजूदा स्तर काफी खिंचा हुआ नजर आ रहा हो, लेकिन वैश्विक घटनाक्रम अमेरिकी मुद्रा को लगातार सहारा दे रहे हैं। इसी बीच खाड़ी क्षेत्र में किसी ठोस समाधान पर सहमति बनाने में संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के नाकाम रहने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती बनी हुई है, जिसने मुद्रास्फीति की चिंताओं को फिर से हवा दे दी है। कच्चे तेल में तेजी और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक सख्ती ऊर्जा बाजार में जारी उठापटक के कारण डॉलर की इस तेजी के जल्द थमने के संकेत बेहद सीमित हैं। विश्लेषकों का अनुमान है कि महीने के अंत से पहले ब्रेंट कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच सकता है। ऊर्जा कीमतों में उछाल अमेरिकी डॉलर को लगातार नया आधार प्रदान कर रहा है, खासकर ऐसे समय में जब फेडरल रिजर्व की सख्त टिप्पणियों ने वित्तीय बाजारों को आगे और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं को जोड़ने पर मजबूर कर दिया है। इस बदलाव का स्पष्ट प्रमाण दो वर्षीय एसओएफआर (SOFR) में देखने को मिला है, जिसमें पिछले 48 घंटों के दौरान लगभग 20 आधार अंकों (bp) का तेज उछाल दर्ज किया गया है। कमोडिटी बाजार के ताजा लाइव आंकड़ों पर नजर डालें तो क्रूड ऑयल (CL=F) वर्तमान में 92.61 डॉलर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद स्तर 94.61 डॉलर से 2.11 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर के बीच रहा है, जबकि वॉल्यूम 20 दिनों के औसत का 0.37 गुना दर्ज हुआ है। तकनीकी संकेतकों में 14 दिवसीय आरएसआई (RSI) 49 पर है, एमएसीडी (MACD) 2.38 पर सिग्नल लाइन 3.56 के मुकाबले मंदी का हिस्टोग्राम (-1.18) दिखा रहा है। वहीं मूविंग एवरेज में ईएमए20 94.42 डॉलर, ईएमए50 89.98 डॉलर और ईएमए200 80.12 डॉलर है, जहां ईएमए50 का ईएमए200 से ऊपर होना गोल्डन क्रॉस के साथ दीर्घकालिक तेजी का संकेत दे रहा है। 20 दिवसीय बॉलिंजर बैंड 83.72 डॉलर से 106.92 डॉलर के बीच हैं और कीमत बैंड के भीतर बनी हुई है। एडीएक्स 27 पर ट्रेंडिंग बाजार दर्शाता है, जबकि स्टोकेस्टिक की फास्ट लाइन 22 और सिग्नल लाइन 24 पर है। 4.52 डॉलर के एटीआर (ATR) के साथ 20 दिनों का सपोर्ट 82.25 डॉलर और रेजिस्टेंस 106.75 डॉलर के आसपास बना हुआ है। दैनिक धुरी स्तर 93.13 डॉलर पर है, जहां पहला रेजिस्टेंस 94.23 डॉलर, दूसरा रेजिस्टेंस 95.84 डॉलर और सपोर्ट स्तर क्रमशः 91.52 डॉलर व 90.42 डॉलर दर्ज किए गए हैं। विदेशी मुद्रा बाजार में प्रमुख जोड़ों की चाल शुक्रवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में तेज गिरावट आई और एयूडी/यूएसडी (AUD/USD) अगस्त की शुरुआत के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया। रातभर के कारोबार में 200-दिवसीय एसएमए (SMA) के नीचे टूटने के बाद यह जोड़ी 0.7000 के स्तर के पास काफी कमजोर नजर आ रही है। फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख के बीच तेल की कीमतों में लगातार दो दिनों की तेजी ने महंगाई की आशंकाओं को भड़काया है और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंचा दिया है। इसके अलावा भू-राजनीतिक जोखिमों ने अमेरिकी डॉलर को दो महीने के शिखर पर पहुंचा दिया, जिसने रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा ब्याज दर बढ़ाने के दांव को पूरी तरह बेअसर कर दिया। दूसरी ओर, यूएसडी/जेपीवाई (USD/JPY) एशियाई सत्र के दौरान हल्का कमजोर हुआ और 159.00 के तीन सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद इसकी तेजी थम गई। जापानी मुद्रा में बिकवाली करने वाले ट्रेडर सरकारी हस्तक्षेप की आशंकाओं के चलते सतर्क हो गए हैं। हालांकि फेडरल रिजर्व के सख्त दृष्टिकोण और तेल से प्रेरित महंगाई के कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बहु-वर्षीय शिखर पर पहुंचने से डॉलर का तेजी का रुख बरकरार है। इसके अतिरिक्त, बैंक ऑफ जापान (BoJ) ने पिछले सप्ताह 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया था, जो मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में उठाया गया कदम था और बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा, लेकिन इसके नरम रुख ने येन की बढ़त को सीमित रखा है। सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार पर बिकवाली का असर कीमती धातुओं के बाजार में शुक्रवार को सोने की कीमतों में मामूली सुधार देखा गया। 4,230 डॉलर के सपोर्ट क्षेत्र से उछलने के बाद सोना 4,300 डॉलर के स्तर से ठीक नीचे कारोबार करता नजर आया। इसके बावजूद कीमती धातुओं का व्यापक मंदी का रुख बना हुआ है, क्योंकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की उम्मीदें तथा 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का 5% के स्तर से ऊपर बने रहना सोने पर भारी दबाव बनाए हुए है। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी शुक्रवार को ठहराव का माहौल रहा। बिटकॉइन ने अपने नुकसान की कुछ भरपाई करते हुए 84,000 डॉलर के ऊपर कारोबार किया। इथेरियम में भी बीटीसी (BTC) की तर्ज पर ही गिरावट दर्ज की गई। हालांकि रिपल (XRP) ने बाजार के इस सामान्य रुख से अलग प्रदर्शन करते हुए एक अलग तस्वीर पेश की। वाशिंगटन वार्ता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीति के मोर्चे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 24 सितंबर को वॉशिंगटन में द्विपक्षीय मुलाकात की। यह बैठक बीजिंग में हुई उनकी पिछली बातचीत के चार महीने से कुछ अधिक समय बाद आयोजित की गई। दोनों नेताओं ने अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध विराम को दो महीने के लिए आगे बढ़ाते हुए 10 जनवरी 2027 तक जारी रखने का फैसला किया और संकेत दिया कि दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक बातचीत आगे भी जारी रहेगी। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल में तेजी से वैश्विक महंगाई बढ़ने और स्थानीय स्तर पर आयात लागत में बढ़ोतरी का सीधा जोखिम पैदा हो गया है। • भारत में: कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और मजबूत डॉलर के कारण पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की लागत में वृद्धि हो सकती है। इसके चलते आयातित सामान महंगे हो सकते हैं जिससे उपभोक्ताओं के मासिक घरेलू बजट पर सीधा दबाव पड़ेगा। • वैश्विक निवेशकों के लिए: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का 5% के पार बने रहना सोने और क्रिप्टोकरेंसी जैसी जोखिम भरी संपत्तियों के आकर्षण को कम कर रहा है। निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में सुरक्षित फिक्स्ड इनकम और डॉलर आधारित संपत्तियों के बीच संतुलन बनाना होगा। • मुद्रा विनिमय और विदेशी यात्रा: डॉलर इंडेक्स में मजबूती के चलते अंतरराष्ट्रीय यात्रा, विदेशी शिक्षा और विदेशों में लेनदेन करना पहले के मुकाबले महंगा हो जाएगा। ऐसे में यात्रियों और छात्रों को मुद्रा विनिमय दरों की निगरानी करते हुए पहले से हेजिंग करने की सलाह दी जाती है। • कमोडिटी खरीदारों के लिए: सोने की कीमतों में 4,230 डॉलर पर मिले अल्पकालिक सपोर्ट के बावजूद व्यापक ट्रेंड कमजोर बना हुआ है। खुदरा आभूषण खरीदारों और निवेशकों को नए निवेश से पहले फेड की ब्याज दर नीतियों पर नजर रखनी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ खाड़ी क्षेत्र में कूटनीतिक गतिरोध और केंद्रीय बैंकों की लगातार सख्त ब्याज दर नीति ने वैश्विक बॉन्ड यील्ड और डॉलर को मजबूत किया है। इस दोहरे दबाव ने वित्तीय बाजारों में जोखिम वाली संपत्तियों पर भारी बिकवाली का माहौल तैयार कर दिया है। • ऊर्जा संकट और कूटनीतिक विफलता: संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन खाड़ी क्षेत्र में तनाव दूर करने में असमर्थ रहा, जिससे कच्चे तेल की आपूर्ति पर जोखिम गहरा गया। ईंधन की बढ़ती कीमतों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महंगाई की नई लहर की आशंकाओं को जन्म दिया है। • फेडरल रिजर्व का आक्रामक रुख: अमेरिकी फेड के नीति निर्माताओं द्वारा सख्त मौद्रिक नीति जारी रखने के संकेतों ने ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदों को जीवित रखा है। इस माहौल में 2-वर्षीय एसओएफआर दर 48 घंटे में 20 आधार अंक उछल गई है। • ट्रेजरी यील्ड में रिकॉर्ड उछाल: बॉन्ड बाजार में व्यापक बिकवाली के कारण अमेरिकी दीर्घकालिक यील्ड 5% के पार पहुंच गई है। यह उछाल वैश्विक पूंजी को अन्य मुद्राओं और उभरते बाजारों से खींचकर सुरक्षित डॉलर परिसंपत्तियों में स्थानांतरित कर रहा है। • व्यापार अनिश्चितता और मुद्रा नीतियां: बैंक ऑफ जापान द्वारा दरें 1.25% करने के बावजूद नरम नीतिगत संकेतों ने येन को कमजोर रखा है। वहीं अमेरिका-चीन व्यापार संघर्ष विराम को जनवरी 2027 तक बढ़ाए जाने से अल्पकालिक राहत तो मिली है, लेकिन दीर्घकालिक वैश्विक अनिश्चितता अभी समाप्त नहीं हुई है। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी डॉलर में इस समय तेजी क्यों देखने को मिल रही है? फेडरल रिजर्व के सख्त रुख, बढ़ती बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल में उछाल से उत्पन्न महंगाई की चिंताओं के कारण डॉलर मजबूत बना हुआ है। 2. कच्चे तेल की कीमतों को लेकर क्या अनुमान लगाया गया है? खाड़ी क्षेत्र में कूटनीतिक समाधान न निकलने के बाद महीने के अंत तक ब्रेंट कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है। 3. बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों को लेकर क्या फैसला लिया है? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। 4. अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध विराम पर क्या सहमति बनी? राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग ने वाशिंगटन बैठक में व्यापार युद्ध विराम को दो महीने बढ़ाकर 10 जनवरी 2027 तक जारी रखने का फैसला किया। 5. सोने की कीमतों पर किन कारणों से दबाव बना हुआ है? फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका और 5% से ऊपर बनी अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड सोने की कीमतों को सीमित कर रही है। https://trendkia.com/market/vaishvika-bond-bikavali-aura-kachche-tela-men-uchhala-se-us-dollar-majabuta-mudra-aura-kamoditi-bajaron-para-gaharaya-dabava-38589 TrendKia — Har trend, sabse pehle.