वैश्विक तनाव और इंश्योरेंस शेयरों में बिकवाली से घरेलू बाजार लुढ़का, निफ्टी और सेंसेक्स में भारी गिरावट कच्चे तेल में तेजी, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और नियामक प्रस्तावों के बाद इंश्योरेंस शेयरों में आई बड़ी गिरावट से घरेलू शेयर बाजारों में तेज बिकवाली देखी गई. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक उथल-पुथल और घरेलू नियामकीय हलचलों के बीच भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली दर्ज की गई. कच्चे तेल के बढ़ते भाव, मुद्रा बाजार में कमजोरी और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में सख्ती की आशंकाओं ने मिलकर दलाल स्ट्रीट के निवेशकों का मनोबल कमजोर कर दिया. शुरुआती कारोबार से ही प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक दबाव में दिखे, जिसके बाद बिकवाली का दायरा चौतरफा फैल गया. बेंचमार्क सूचकांकों में तेज गिरावट और बाजार का दायरा घरेलू इक्विटी बाजार की शुरुआत बेहद कमजोर रही. शुरुआती दौर में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 सूचकांक 200 अंक लुढ़ककर 23,248.80 के स्तर पर कारोबार कर रहा था. वहीं बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 557.33 अंकों के नुकसान के साथ 74,270.92 पर आ गया था. सुबह के शुरुआती संकेतों में ही गिफ्ट निफ्टी 7:11 बजे 180 अंक टूटकर 23269 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था, जिसने सत्र की कमजोर शुरुआत की पटकथा लिख दी थी. कारोबार आगे बढ़ने के साथ सूचकांकों का नुकसान गहराता गया. सेंसेक्स 74,173 के स्तर को छूने के बाद बिकवाली के दबाव में 964 अंक गिरकर 73,863.89 के निचले स्तर तक पहुंच गया. दूसरी तरफ निफ्टी में 305 अंकों यानी लगभग 1% का गोता लगा और यह 23,169.65 के स्तर पर आ गया. हालांकि सत्र के एक मोड़ पर निफ्टी 224 अंक फिसलकर 23,247 के आसपास भी संघर्ष करता देखा गया. इस बिकवाली का सबसे कड़ा असर व्यापक बाजार पर पड़ा. मझोली कंपनियों के सूचकांक निफ्टी मिडकैप 100 में 1.29% की नरमी दर्ज की गई, जबकि छोटी कंपनियों का निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.69% की कमजोरी झेलता नजर आया. तेज उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता के कारण बाजार के भय को मापने वाला सूचकांक इंडिया वीआईएक्स 10.05% उछलकर 11.39 के स्तर पर पहुंच गया. आईआरडीएआई के मसौदे से इंश्योरेंस कंपनियों में कोहराम गुरुवार, 24 सितंबर को इंश्योरेंस सेक्टर से जुड़े शेयरों में अभूतपूर्व बिकवाली देखने को मिली. भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण यानी आईआरडीएआई द्वारा बीमा वितरण सुधारों से जुड़ी ड्राफ्ट रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद निवेशकों ने इन कंपनियों के शेयर ताबड़तोड़ बेचे. निफ्टी 500 सूचकांक के शीर्ष दस सर्वाधिक टूटने वाले काउंटरों में नौ शेयर पूरी तरह बीमा क्षेत्र से संबंधित थे. ऑनलाइन पॉलिसी बेचने वाली कंपनी पीबी फिनटेक के शेयर में 28% की भारी गिरावट दर्ज की गई, जो इस कंपनी के कारोबारी इतिहास में एक ही दिन के भीतर दर्ज हुआ सबसे बड़ा नुकसान बन गया. टर्टलमिंट के शेयर में 20% का लोअर सर्किट लग गया और इसमें सौदे थम गए. मैक्स फाइनेंशियल सर्विसेज के भाव में लगभग 11% का गोता लगा. इसके अतिरिक्त निजी क्षेत्र की जीवन बीमा एवं स्वास्थ्य बीमा कंपनियों में भी तेज मार पड़ी; आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ, स्टार हेल्थ और एचडीएफसी लाइफ जैसी दिग्गज कंपनियों के भाव 5 से 8% तक टूट गए. नए नियमों के प्रस्ताव से बैंकिंग और इंश्योरेंस सेक्टर दोनों पर नकारात्मक असर दिखाई दिया. नए शेयरों की शुरुआत: हीरो मोटर्स और एनएसई बाजार की इस चौतरफा सुस्ती के बीच प्राथमिक बाजार से जुड़े शेयरों में खास हलचल देखने को मिली. हीरो मोटर्स की शुरुआत शेयर बाजार में कमजोर स्तर पर हुई. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर इसका शेयर 82 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ, जो कि इसके 84 रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम मूल्य से 2.38% नीचे था. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर भी इसने 82.10 रुपये के स्तर पर 2.26% की छूट के साथ पदार्पण किया. हालांकि कमजोर शुरुआत के बाद शेयर में आक्रामक खरीदारी लौटी और निचले स्तरों से यह 17% तक उछल गया. इसी दौरान बीएसई पर एनएसई का शेयर 1800 रुपये प्रति शेयर के स्तर पर सूचीबद्ध हुआ. रुपया, सोना और कमोडिटी बाजार का मिजाज घरेलू मुद्रा में भी कमजोरी का दौर जारी रहा. गुरुवार के कारोबारी सत्र में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95.83 पर खुला, जबकि बीते बुधवार को यह 95.74 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था. कारोबार के दौरान रुपया 11 पैसे की गिरावट के साथ 95.84 के स्तर तक फिसल गया. कीमती धातुओं के बाजार में स्थिरता का रुख बना रहा. अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा आगामी दिनों में सख्त मौद्रिक रुख कायम रखने की संभावनाओं के चलते बुलियन पर दबाव साफ देखा गया. हालांकि कच्चे तेल के स्तरों में आए उतार-चढ़ाव से इसे थोड़ा सहारा मिला. हाजिर सोना 0.1% गिरकर 4,281.98 डॉलर प्रति औंस पर दर्ज किया गया. वहीं दिसंबर माह की डिलीवरी वाला अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स का अनुबंध 4,317.50 डॉलर प्रति औंस पर करीब-करीब स्थिर रहा. कच्चा तेल और अमेरिका-ईरान कूटनीति अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भू-राजनीतिक गतिविधियों का सीधा असर दिखा. गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में करीब 3% की उछाल आई, जिससे भाव एक बार फिर 106 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया. अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम को लेकर चल रही बातचीत की प्रगति पर अनिश्चितता बढ़ने से बाजार आशंकित हो गया. इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच संभावित शांति योजना पर चर्चा के बाद कुछ समय के लिए तेल की कीमतों में गिरावट आई थी. ईरान के राष्ट्रपति के बयान के बाद ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में उछाल आया, वहीं बाद में ईरान द्वारा युद्ध समाप्त करने हेतु वार्ता के विकल्प खुले होने की बात कहने से कीमतों में कुछ नरमी भी लौटी. गुरुवार को ब्रेंट क्रूड 0.9% गिरकर 102.13 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 0.7% की गिरावट के साथ 91.56 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. हालांकि बुधवार को तेल में लगभग 4% की जोरदार तेजी दर्ज की गई थी, और ब्रेंट क्रूड का 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना रहना लगातार मुद्रास्फीति की आशंकाएं भड़का रहा है. वैश्विक बाजारों की कमजोरी और बॉन्ड यील्ड में तेजी घरेलू बाजार पर विदेशी बाजारों के नकारात्मक रुख का व्यापक असर रहा. अमेरिकी शेयर बाजार में बुधवार के सत्र में गिरावट दर्ज की गई थी. एसएंडपी 500 सूचकांक लगभग 0.75% की कमजोरी के साथ 7,706.05 पर, नैस्डैक 1.13% टूटकर 26,936.04 पर और डाउ जोंस 0.68% फिसलकर 51,511.59 अंक पर बंद हुआ था. अल्फाबेट और अमेज़न जैसी बड़ी तकनीकी कंपनियों के शेयरों में सुस्ती ने अमेरिकी बाजार पर दबाव बनाया. अमेरिका में मजबूत आर्थिक आंकड़ों और उम्मीद से बेहतर व्यावसायिक गतिविधियों के सामने आने के बाद 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 2007 के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई. इससे अक्टूबर माह में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़कर लगभग 70% हो गई. यही रुख एशियाई बाजारों में भी दिखा; जापान की 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड 10 आधार अंक बढ़कर 3.075% पर पहुंच गई, जो 1996 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है, जबकि वहां 5 साल की बॉन्ड यील्ड बढ़कर 2.37% दर्ज की गई. डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में भी सुस्ती का असर दिखा. 24 सितंबर की शुरुआती ट्रेडिंग के दौरान बिटकॉइन 3.80% गिरकर लगभग $83,880 के स्तर पर आ गया, यद्यपि बीते एक सप्ताह के दौरान इसमें 10.16% की कुल बढ़त दर्ज की जा चुकी थी. इसका आप पर असर शेयर बाजार में आई इस तेज गिरावट और कच्चे तेल के 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से आम नागरिकों की जेब और निवेश पोर्टफोलियो पर सीधा असर पड़ने वाला है. • निवेशकों के लिए: म्युचुअल फंड और इक्विटी पोर्टफोलियो की वैल्यूएशन में तत्काल गिरावट देखने को मिलेगी. इंश्योरेंस और बैंकिंग शेयरों पर अधिक निर्भर निवेशकों को अल्पकालिक नुकसान के लिए तैयार रहना चाहिए. • पेट्रोल-डीजल और ईंधन पर: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के 106 डॉलर तक जाने से आयात लागत में भारी इजाफा होगा. यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो भविष्य में घरेलू बाजार में ईंधन की खुदरा कीमतें बढ़ सकती हैं. • लोन और ईएमआई: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 2007 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की 70% संभावना से वैश्विक उधारी महंगी होगी. इससे भारत में भी ब्याज दरों में कटौती की संभावना टल सकती है और मौजूदा लोन पर ईएमआई अधिक समय तक ऊंची रह सकती है. • मुद्रा और आयात: डॉलर के मुकाबले रुपये के 95.84 के स्तर तक गिरने से इलेक्ट्रॉनिक्स और आयातित सामान महंगे हो जाएंगे. विदेश में पढ़ाई या यात्रा करने वालों के खर्च में तुरंत बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी. • बीमा पॉलिसियां: आईआरडीएआई के डिस्ट्रीब्यूशन सुधारों से बीमा कंपनियों के कमीशन ढांचे में फेरबदल संभव है. पॉलिसीधारकों को आगे चलकर नए नियमों के तहत अधिक पारदर्शी वितरण विकल्प मिल सकते हैं. ऐसा क्यों हुआ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में मची इस उथल-पुथल के पीछे वैश्विक बॉन्ड यील्ड में अभूतपूर्व उछाल, कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतें और नियामकीय हस्तक्षेप मुख्य वजह रहे हैं. • अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल: अमेरिका में उम्मीद से बेहतर कारोबारी आंकड़ों के बाद 10 साल की ट्रेजरी यील्ड 2007 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई. इसने अक्टूबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना को 70% तक बढ़ाकर वैश्विक पूंजी को जोखिम वाली इक्विटी से बाहर खींच लिया. • ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक तनाव: अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम वार्ता को लेकर अनिश्चितता बनी रहने से ब्रेंट क्रूड 106 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक चला गया. कच्चे तेल के 100 डॉलर से ऊपर बने रहने से दुनिया भर में महंगाई लौटने का डर गहरा गया है. • आईआरडीएआई का ड्राफ्ट प्रस्ताव: भारत में बीमा नियामक द्वारा डिस्ट्रीब्यूशन सुधारों पर मसौदा रिपोर्ट जारी करने के बाद इंश्योरेंस शेयरों में हड़कंप मच गया. इससे कंपनियों की आय और कमीशन मार्जिन घटने की आशंका से भारी बिकवाली शुरू हुई. • विदेशी बाजारों में बिकवाली का दबाव: वॉल स्ट्रीट पर नैस्डैक और एसएंडपी 500 में तेज गिरावट दर्ज हुई, जिसका असर एशियाई बाजारों और अंततः भारतीय बाजार पर भी पड़ा. इसके साथ ही जापान में 10 साल की बॉन्ड यील्ड 1996 के बाद के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से एशिया भर में जोखिम लेने की धारणा कमजोर हुई. सवाल-जवाब 1. सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी गिरावट दर्ज की गई? सेंसेक्स 964 अंक गिरकर 73,863.89 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 305 अंक टूटकर 23,169.65 पर कारोबार कर रहा था. 2. इंश्योरेंस कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट क्यों आई? आईआरडीएआई द्वारा बीमा वितरण सुधारों पर जारी की गई ड्राफ्ट रिपोर्ट के बाद इंश्योरेंस शेयरों में बिकवाली बढ़ी, जिससे पीबी फिनटेक 28% तक टूटा. 3. हीरो मोटर्स के शेयर की बाजार में लिस्टिंग कैसी रही? हीरो मोटर्स का शेयर एनएसई पर ₹82 और बीएसई पर ₹82.10 पर डिस्काउंट के साथ लिस्ट हुआ, लेकिन बाद में इसमें 17% की तेजी आई. 4. कच्चे तेल की कीमतों का ताजा स्तर क्या रहा? कच्चे तेल के दाम लगभग 3% उछलकर 106 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचे, हालांकि बाद में ब्रेंट क्रूड गिरकर 102.13 डॉलर और डब्ल्यूटीआई 91.56 डॉलर पर आ गया. 5. डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का क्या भाव रहा? भारतीय रुपया 11 पैसे की कमजोरी के साथ डॉलर के मुकाबले 95.84 के स्तर पर आ गया. 6. अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी का क्या प्रभाव पड़ा? 10 साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 2007 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जिससे अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना 70% हो गई. https://trendkia.com/market/vaishvika-tanava-aura-inshyorensa-sheyaron-men-bikavali-se-gharelu-bajara-lurhaka-nifty-aura-sensex-men-bhari-giravata-37717 TrendKia — Har trend, sabse pehle.