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  "type": "article",
  "title": "वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारतीय बाजार में बहार, सेंसेक्स 77,301 और निफ्टी 23,961 पर बंद",
  "summary": "एशियाई बाजारों में भारी गिरावट और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद दलाल स्ट्रीट पर पांचवें दिन रौनक रही, जहां सेंसेक्स 384 अंक और निफ्टी 150 अंक उछलकर दो महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गए।",
  "content": "अंतरराष्ट्रीय वित्तीय हलकों में मची उथल-पुथल के बीच भारतीय शेयर बाजार ने अपनी मजबूती का परिचय दिया है। सामान्य तौर पर जब भी पश्चिमी देशों में कोई राजनीतिक फेरबदल होता था या पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता था, घरेलू सूचकांक दबाव में आ जाते थे और निवेशकों की भारी पूंजी डूब जाती थी। इस बार हालात बिल्कुल जुदा नजर आए। जिस समय दक्षिण कोरिया और जापान के प्रमुख सूचकांकों में 4 प्रतिशत की तीव्र गिरावट दर्ज की जा रही थी, ठीक उसी समय मुंबई के शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा लौटता दिखा और दोनों मुख्य बेंचमार्क सूचकांक मजबूती के साथ बंद हुए।\n\nअमेरिकी मध्यावधि चुनाव के रुझानों और परिणामों के बीच घरेलू इक्विटी बाजार में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बढ़त का सिलसिला जारी रहा। सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी सेक्टर को छोड़ दें तो लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स में खरीदारी हावी रही। बाजार के जानकारों का कहना है कि जो विदेशी संस्थागत निवेशक कुछ समय पहले तक भारतीय शेयर बाजार से बिकवाली कर पूंजी निकाल रहे थे, वे अब नए सिरे से पैसा लगाते दिख रहे हैं। इससे घरेलू बाजार का समग्र रुख काफी सकारात्मक हो गया है।\n\nशुरुआती मुनाफावसूली के बाद शानदार रिकवरी\nबुधवार के कारोबारी दिन की शुरुआत हल्की बिकवाली और मुनाफावसूली के साथ हुई थी, जिससे एक समय ऐसा लगा कि सूचकांक नीचे फिसल सकते हैं। हालांकि, निचले स्तरों पर निवेशकों की भारी लिवाली ने बाजार को मजबूती दी और दोनों सूचकांकों ने जोरदार वापसी की। दिन के कारोबार में निफ्टी 23900 के अहम आंकड़े को पार कर गया, जबकि बैंक निफ्टी ने भी कई दिनों के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।\n\nकारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 384 अंक चढ़कर 77,301 के स्तर पर बंद हुआ। दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 150 अंकों की छलांग लगाकर 23,961 के स्तर पर पहुंच गया। इस ताजा बढ़त के दम पर भारतीय शेयर बाजार करीब दो महीने पुराने स्तरों को दोबारा हासिल करने में कामयाब रहा है। लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप, स्मॉलकैप और माइक्रोकैप शेयरों में भी चौतरफा तेजी देखी गई।\n\nकच्चे तेल में नरमी और डॉलर इंडेक्स की कमजोरी\nबाजार में आई इस ताजा तेजी के पीछे कई महत्वपूर्ण आर्थिक और वैश्विक कारक काम कर रहे हैं। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डोनाल्ड ट्रंप के कमजोर प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में नरमी देखी जा रही है। ब्रेंट क्रूड और कच्चे तेल के भाव फिसलकर 103 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गए हैं, जो कुछ ही समय पहले 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए थे। विश्लेषकों का मानना है कि राजनीतिक दबाव के चलते ट्रंप के रुख में नरमी आ सकती है और ईरान के साथ कूटनीतिक समझौतों पर बात आगे बढ़ सकती है।\n\nइसके अलावा अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में आई कमजोरी ने बहुमूल्य धातुओं को पंख लगा दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आए बदलावों के कारण सोने और चांदी में जोरदार खरीदारी दर्ज की गई। चांदी की कीमतों में 3 प्रतिशत का उछाल आया, जबकि सोना 2 प्रतिशत चढ़ गया। कीमती धातुओं में आई तेजी का सीधा फायदा स्वर्ण ऋण देने वाली वित्तीय कंपनियों को मिला, जिसके चलते मुथूट फाइनेंस के शेयरों में 7 प्रतिशत तक की जोरदार बढ़त दर्ज की गई।\n\nदिग्गज शेयरों में लिवाली और कैबिनेट के अहम फैसले\nसेक्टर के लिहाज से रियल्टी और रक्षा से जुड़े शेयरों में जबरदस्त मांग देखने को मिली। दिग्गज कंपनियों में रिलायंस और एचडीएफसी बैंक के साथ-साथ एफएमसीजी क्षेत्र की कंपनियों ने निफ्टी को ऊपर खींचने में मुख्य भूमिका निभाई। बेहतर तिमाही और वित्तीय आंकड़ों के दम पर फ्रैक्टल एनालिटिक्स के शेयरों में निवेशकों की भारी रुचि दिखी, जिससे यह शेयर लगभग 13 प्रतिशत की छलांग लगाने में सफल रहा।\n\nकेंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लिए गए नीतिगत फैसलों ने भी ऊर्जा और खनन क्षेत्र के शेयरों को गति दी। सरकार ने ग्रिड स्केल एनर्जी स्टोरेज के विकास के लिए एक नई योजना को मंजूरी दी है, जबकि क्रिटिकल मिनरल कैपेक्स को बढ़ावा देने के लिए भी बड़ी राशि की नई योजना शुरू की गई है। इस सरकारी घोषणा के बाद जीएमडीसी के शेयरों में 10 प्रतिशत की जोरदार उछाल देखने को मिली।\n\nबाजार की तकनीकी स्थिति और आगामी स्तर\nबाजार की चाल और रणनीतिक दिशा पर राय रखते हुए अनुज सिंघल ने बताया कि निचले स्तरों से वैश्विक बाजारों में भी सुधार के संकेत मिले हैं। राजनीतिक घटनाक्रमों और कच्चे तेल के सस्ता होने से बाजार को अतिरिक्त ऊर्जा मिली है। उन्होंने रेखांकित किया कि एचडीएफसी बैंक जैसे प्रमुख संस्थान अब बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जो पूरे वित्तीय क्षेत्र को नई ताकत दे रहा है। मिडकैप और स्मॉलकैप में शेयरों के चढ़ने और गिरने का अनुपात यानी एडवांस डिक्लाइन रेशियो भी काफी मजबूत बना हुआ है।\n\nतकनीकी स्तरों के विश्लेषण के अनुसार निफ्टी के लिए 23750 से 23800 का दायरा एक मजबूत सपोर्ट जोन का काम कर रहा है, जबकि ऊपरी स्तरों पर 23950 से 24050 पर कड़ा प्रतिरोध देखा जा रहा है। यदि निफ्टी इस बाधा को पार करता है तो इसमें 24050 की ओर नई चाल देखने को मिल सकती है। बैंक निफ्टी के लिए 55300 से 55500 के बीच सपोर्ट मौजूद है, जबकि 56000 से 56200 का स्तर प्रतिरोध बना हुआ है। एक्सपायरी के चलते बाजार में आगे और भी रिकवरी आने की संभावना जताई गई है।\n\nइसका आप पर असर\nशेयर बाजार में लगातार पांचवें दिन आई तेजी और कच्चे तेल के दाम गिरने से घरेलू अर्थव्यवस्था और आम निवेशकों के पोर्टफोलियो को मजबूती मिलने की उम्मीद है।\n\n• खुदरा निवेशकों पर: म्यूचुअल फंड और इक्विटी पोर्टफोलियो की वैल्यू में सुधार देखने को मिलेगा। जो निवेशक पिछले दो महीनों की गिरावट से परेशान थे, उनके घाटे की भरपाई हो रही है।\n• ईंधन और महंगाई पर: कच्चे तेल के 116 डॉलर से घटकर 103 डॉलर पर आने से आयात बिल घटेगा। इससे घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखने और महंगाई को काबू में रखने में मदद मिलेगी।\n• सोना-चांदी खरीदारों पर: सोने की कीमतों में 2% और चांदी में 3% की बढ़त से खुदरा आभूषण खरीदना महंगा हो गया है। हालांकि पहले से निवेश कर चुके लोगों की संपत्ति का मूल्य बढ़ गया है।\n• बैंकिंग और लोन ग्राहकों पर: प्रमुख बैंकों के शेयरों में मजबूती वित्तीय क्षेत्र की स्थिरता दर्शाती है। यदि बाजार का यह रुख टिका रहता है तो ब्याज दरों में स्थिरता बनी रह सकती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nवैश्विक बाजारों में मंदी के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में तेजी आने के मुख्य कारण कच्चे तेल में भारी गिरावट, डॉलर का कमजोर होना और घरेलू नीतिगत फैसले रहे।\n\n• कच्चे तेल में नरमी: अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के भाव 116 डॉलर से गिरकर 103 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, इसलिए तेल सस्ता होना बाजार के लिए सकारात्मक रहा।\n• अमेरिकी चुनाव और डॉलर की कमजोरी: अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को झटका लगने से डॉलर इंडेक्स कमजोर पड़ा। इसके कारण बहुमूल्य धातुओं में तेजी आई और विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में पुनः खरीदारी शुरू की।\n• दिग्गज शेयरों और कैबिनेट का सहारा: रिलायंस और एचडीएफसी बैंक जैसे दिग्गजों में खरीदारी लौटी, जबकि केंद्रीय कैबिनेट द्वारा ऊर्जा भंडारण और क्रिटिकल मिनरल्स पर नई योजनाओं के ऐलान से बाजार का भरोसा और बढ़ा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी कितने अंकों पर बंद हुए?\nसेंसेक्स 384 अंक चढ़कर 77,301 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 150 अंक बढ़कर 23,961 के स्तर पर पहुंचा।\n\n2. एशियाई बाजारों में क्या रुख देखने को मिला?\nदक्षिण कोरिया और जापान के शेयर बाजारों में करीब 4 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई।\n\n3. कच्चे तेल की कीमतों में कितना बदलाव आया?\nकच्चा तेल 116 डॉलर प्रति बैरल के हालिया स्तर से घटकर लगभग 103 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।\n\n4. सोने और चांदी के भाव में कितनी तेजी दर्ज की गई?\nचांदी की कीमतों में 3 प्रतिशत की तेजी आई, जबकि सोने के भाव 2 प्रतिशत बढ़ गए।\n\n5. निफ्टी और बैंक निफ्टी के लिए प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर क्या हैं?\nनिफ्टी के लिए 23750-23800 पर सपोर्ट और 23950-24050 पर रेजिस्टेंस है, जबकि बैंक निफ्टी के लिए 55300-55500 पर सपोर्ट और 56000-56200 पर रेजिस्टेंस है।",
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