# विदेशी बॉन्ड बाजार से जापानी निवेशकों की भारी निकासी, वैश्विक बॉन्ड यील्ड पर पड़ा सीधा असर

> जापान के निवेशकों ने पिछले एक साल में खरीद के मुकाबले करीब 5 लाख करोड़ येन के विदेशी बॉन्ड बेचे हैं, जिससे दुनिया भर में सरकारी उधारी लागत और यील्ड के रुझान प्रभावित हो रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/videshi-bond-bajara-se-japanese-niveshakon-ki-bhari-nikasi-vaishvika-bond-yield-para-para-sidha-asara-45583 · **Language:** Hindi
**Tags:** जापान, विदेशी बॉन्ड, ग्लोबल यील्ड, फॉरेक्स बाजार, सोना, अमेरिकी डॉलर

अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में जापान के बड़े संस्थागत निवेशकों की चाल हमेशा से दुनिया भर की सरकारी उधारी दरों को तय करने में अहम भूमिका निभाती रही है। हाल के बारह महीनों के दौरान जापानी पूंजीपतियों ने विदेशी ऋण प्रतिभूतियों की खरीद के मुकाबले उनकी शुद्ध बिकवाली पर ज्यादा जोर दिया है। इस दौरान जापानी निवेशकों ने जितनी विदेशी बॉन्ड की खरीदारी की, उससे करीब 5 लाख करोड़ येन यानी लगभग 30 अरब यूरो अधिक मूल्य के बॉन्ड अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेच दिए हैं। वैश्विक स्तर पर ऋण प्रतिभूतियों पर मिलने वाले प्रतिफल यानी यील्ड में दर्ज की जा रही बढ़ोतरी और जापानी पूंजी के स्वदेश में बने रहने के फैसले के बीच सीधा तालमेल देखा जा रहा है।

## बीते दो दशकों में तीसरी बार बना ऐसा बिकवाली का दौर
अगर पिछले 20 वर्षों के वित्तीय इतिहास पर नजर डालें, तो रोलिंग 12 महीने के आधार पर ऐसे केवल तीन विशिष्ट अवसर सामने आए हैं जब जापानी निवेशकों ने विदेशी ऋण प्रतिभूतियों की इतनी आक्रामक शुद्ध बिकवाली की हो। सबसे पहला ऐसा दौर वर्ष 2013-14 में देखने को मिला था, जब वैश्विक केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों में भारी बदलाव आ रहे थे। इसके बाद कोरोना महामारी के बाद के समय यानी वर्ष 2022-23 में जापानी निवेशकों ने अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड बाजार से अपनी पूंजी तेजी से वापस खींची थी। अब तीसरा ऐसा मौका पिछले तीन महीनों के दौरान दर्ज किया गया है, जहां जापानी निवेशकों का शुद्ध बिकवाल रुख लगातार गहराता दिख रहा है।

## ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और अंतरराष्ट्रीय पूंजी प्रवाह का गणित
पूरी दुनिया के ऋण बाजारों के लिए यह बुनियादी बात काफी मायने रखती है कि क्या जापान के बड़े पेंशन फंड और वित्तीय संस्थान हर महीने लगातार विदेशी डेट पेपर खरीदते हैं या फिर वे शुद्ध बिकवाल बन जाते हैं। जब दुनिया का एक सबसे बड़ा ऋणदाता देश विदेशी डेट परिसंपत्तियों में पैसा लगाना कम या बंद कर देता है, तो अमेरिका और यूरोप के बाजारों में बॉन्ड की कीमतों पर दबाव बनता है और वहां की सरकारी यील्ड अपने आप ऊपर की ओर चढ़ने लगती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरकारी ऋण पर बढ़ते प्रतिफल और जापानी निवेशकों द्वारा विदेशों में धन आवंटित करने को लेकर दिखाई जा रही अनिच्छा के बीच एक स्पष्ट और गहरा रिश्ता नजर आ रहा है।

## फ्रांस के सरकारी बॉन्ड बाजार में जापानी रुख की हकीकत
हालिया महीनों में यूरोपीय ऋण बाजार, विशेष रूप से फ्रांस के डेट मार्केट में देखने को मिली उथल-पुथल को लेकर भी जापानी बिकवाली की चर्चा तेज रही है। आंकड़ों के अनुसार, यह सच है कि जापानी निवेशक पिछले बारह महीनों के दौरान लंबी अवधि के फ्रांसीसी बॉन्ड के शुद्ध बिकवाल रहे हैं। इसके साथ ही वर्ष 2014 की शुरुआत से अब तक की जापानी संचयी शुद्ध खरीद में महामारी के बाद से उल्लेखनीय गिरावट भी दर्ज की गई है। इसके बावजूद, पिछले तीन महीनों के ताजा घटनाक्रम बताते हैं कि जापानी निवेशक पहले ही खरीदार के रूप में फ्रांसीसी बाजार में लौट चुके हैं। इस बदले हुए रुख को देखते हुए यह संभावना बेहद कम लगती है कि फ्रांस के बॉन्ड बाजार में हाल में पैदा हुए व्यवधानों के लिए जापानी निवेशक जिम्मेदार थे या उन्होंने इसमें कोई भौतिक योगदान दिया था।

## करेंसी बाजार में हलचल और घरेलू खर्च में लगातार गिरावट
मुद्रा विनिमय बाजारों में भी इन व्यापक आर्थिक आंकड़ों और ब्याज दरों की हलचल का गहरा असर देखा जा रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र में शुक्रवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले साप्ताहिक निचले स्तर से उबरते हुए 0.7000 के स्तर की ओर बढ़ने की कोशिश में दिखा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में रात भर आई नरमी ने अमेरिकी डॉलर को उसके 18 महीने के उच्च स्तर से नीचे बनाए रखा, जिससे इस मुद्रा युग्म को जरूरी समर्थन मिला। इसके अतिरिक्त, रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया की ओर से सख्त मौद्रिक नीति बनाए रखने की उम्मीदें भी इस जोड़ी को सहारा दे रही हैं। दूसरी ओर, डॉलर और येन की विनिमय दर 158.00 के इर्द-गिर्द अपनी मजबूती बनाए रखने में सफल रही, क्योंकि शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार जापान में घरेलू खर्च में लगातार नौवें महीने गिरावट दर्ज की गई, जिसने जापानी येन को कमजोर किया। हालांकि, अमेरिकी यील्ड में गिरावट और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं डॉलर की बढ़त को सीमित करने का भी काम कर रही हैं।

## सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की कीमतों पर दबाव
वैश्विक कमोडिटी बाजारों में सोना शुक्रवार को शुरुआती तेजी के बाद अपने साप्ताहिक उच्च स्तर से थोड़ा नीचे फिसलता नजर आया। पीली धातु अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रति ट्रॉय औंस 4,200 डॉलर के महत्वपूर्ण आंकड़े से नीचे आ गई। अमेरिकी डॉलर की तेज मजबूती और पूरी परिपक्वता अवधि में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड की बढ़ती गति ने सोने में आगे होने वाली बढ़त पर दबाव बना दिया है, जिससे निवेशक अपनी स्थिति का सावधानीपूर्वक आकलन कर रहे हैं।

## इसका आप पर असर
वैश्विक बॉन्ड यील्ड और विदेशी पूंजी प्रवाह में आए इस बदलाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ब्याज दरों और परिसंपत्ति कीमतों पर पड़ रहा है।

- **वैश्विक कर्ज लागत पर असर:** दुनिया भर में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से सरकारों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए उधारी महंगी हो जाती है। इसका सीधा मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में कॉरपोरेट और होम लोन की ब्याज दरों में नरमी आने में अधिक समय लग सकता है।
- **मुद्रा बाजार और विनिमय दर:** जापानी येन की कमजोरी और अमेरिकी डॉलर की चाल वैश्विक व्यापार और आयात लागत को सीधे प्रभावित करती है। डॉलर मजबूत रहने से भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए कच्चे तेल और अन्य आयातों का बिल बढ़ता है।
- **सोने में निवेश के अवसर:** सोने की कीमतों का 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के नीचे आना शॉर्ट-टर्म निवेशकों के लिए सतर्कता का संकेत है। बॉन्ड यील्ड में तेजी सुरक्षित निवेश के तौर पर बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों जैसे सोने की मांग को सीमित करती है।
- **भारतीय निवेशकों के पोर्टफोलियो:** अंतरराष्ट्रीय बाजारों में होने वाली पूंजीगत बिकवाली से उभरते बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेश के प्रवाह में उतार-चढ़ाव आ सकता है। भारतीय शेयर और डेट फंडों में निवेश करने वाले खुदरा निवेशकों को वैश्विक ब्याज दरों पर नजर रखने की सलाह दी जाती है।

## ऐसा क्यों हुआ
जापानी निवेशकों की विदेशी बॉन्ड से बड़े पैमाने पर निकासी और वैश्विक यील्ड में बढ़ोतरी कई परस्पर जुड़े आर्थिक कारकों का परिणाम है। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय ब्याज दरों के अंतर और जापानी घरेलू नीतियों में बदलाव के कारण उत्पन्न हुई है।

- **घरेलू ब्याज दरों का दबाव:** जापान में आर्थिक परिस्थितियों और मुद्रास्फीति के दबावों के कारण जापानी निवेशकों ने अपने धन को विदेशी जोखिमों से हटाकर सुरक्षित रखने को प्राथमिकता दी है। वैश्विक स्तर पर हेजिंग लागत बढ़ने से विदेशी डेट सिक्योरिटीज पर मिलने वाला शुद्ध रिटर्न जापानी संस्थानों के लिए काफी घट गया है।
- **जापान में कमजोर घरेलू खपत:** जापान के घरेलू खर्च में लगातार नौवें महीने आई गिरावट ने वहां की अर्थव्यवस्था और मुद्रा विनिमय दरों पर दबाव बनाए रखा है। आर्थिक सुस्ती और कमजोर येन के चलते संस्थागत फंड मैनेजर्स को अपने विदेशी एक्सपोजर की समीक्षा करने के लिए बाध्य होना पड़ा है।
- **फ्रांस और यूरोप में पोर्टफोलियो पुनर्संतुलन:** महामारी के बाद जापानी निवेशकों ने यूरोपीय और फ्रांसीसी सरकारी बॉन्ड में अपना निवेश लगातार घटाया था। हालांकि हालिया तीन महीनों में उन्होंने सीमित खरीद शुरू की है, लेकिन कुल मिलाकर पिछले बारह महीनों में वे बड़े शुद्ध बिकवाल ही बने रहे।

## सवाल-जवाब

### 1. जापानी निवेशकों ने पिछले 12 महीनों में विदेशी बॉन्ड की कितनी शुद्ध बिकवाली की है?
जापानी निवेशकों ने पिछले बारह महीनों में अपनी कुल खरीद के मुकाबले लगभग 5 लाख करोड़ येन यानी करीब 30 अरब यूरो अधिक के विदेशी बॉन्ड बेचे हैं।

### 2. बीते 20 वर्षों में जापानी निवेशकों की ऐसी शुद्ध बिकवाली कब-कब देखने को मिली है?
पिछले 20 वर्षों में ऐसी भारी बिकवाली केवल तीन बार हुई है: वर्ष 2013-14 में, महामारी के बाद वर्ष 2022-23 में, और हाल के तीन महीनों में।

### 3. क्या जापानी निवेशकों की बिकवाली से फ्रांस के बॉन्ड बाजार में व्यवधान आया था?
इसकी संभावना बहुत कम है, क्योंकि जापानी निवेशक पिछले तीन महीनों के दौरान फ्रांसीसी बॉन्ड बाजार में खरीदार के रूप में लौट चुके हैं।

### 4. जापान के घरेलू खर्च से संबंधित नवीनतम आंकड़े क्या बताते हैं?
ताजा आंकड़ों के मुताबिक जापान में घरेलू खर्च में लगातार नौवें महीने गिरावट दर्ज की गई है, जिससे जापानी येन पर दबाव बना हुआ है।

### 5. शुक्रवार को सोने की कीमतों में क्या रुझान दर्ज किया गया?
सोने की कीमतें शुरुआती बढ़त के बाद शुक्रवार को प्रति ट्रॉय औंस 4,200 डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गईं।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._