# विदेशी निवेशकों ने सितंबर में भारतीय बाजार से निकाले ₹13,138 करोड़, कच्चे तेल और मजबूत डॉलर से दबाव बढ़ा

> सितंबर के शुरुआती पखवाड़े में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने घरेलू शेयर बाजार से 13,138 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली की है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम 110 डॉलर के करीब पहुंचने और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने बिकवाली का रुख तेज कर दिया है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/videshi-niveshakon-ne-sitnbara-men-bharatiya-bajara-se-nikale-13-138-karora-kachche-tela-aura-majabuta-dollar-se-dabava-barha-36441 · **Language:** Hindi
**Tags:** शेयर बाजार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक, कच्चा तेल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, इक्विटी बिकवाली, भारतीय अर्थव्यवस्था

भारतीय शेयर बाजार में दो महीने तक शुद्ध खरीदारी करने के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने सितंबर में अपनी रणनीति बदल दी है। महीने के शुरुआती दो हफ्तों यानी 11 सितंबर तक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने घरेलू इक्विटी बाजार से कुल 13,138 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतें, अमेरिकी डॉलर में लगातार मजबूती, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल जैसे अंतरराष्ट्रीय कारकों ने वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को सीमित कर दिया है।

## लगातार दो महीने की खरीदारी पर लगा ब्रेक
सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड के रिकॉर्ड के अनुसार, सितंबर की इस तेज निकासी से पहले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने घरेलू बाजार में जोरदार पूंजी डाली थी। जुलाई के महीने में विदेशी निवेशकों ने 20,200 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे, जबकि अगस्त में यह शुद्ध निवेश बढ़कर 29,630 करोड़ रुपये पर पहुंच गया था। हालांकि साल के शुरुआती हिस्से में स्थिति बिल्कुल उलट थी, जब मार्च से लेकर जून तक लगातार चार महीनों में विदेशी फंड्स ने भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली की थी।

## चालू वर्ष में कुल निकासी 2.37 लाख करोड़ रुपये के पार
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड के आंकड़ों से पता चलता है कि 11 सितंबर तक हुई 13,138 करोड़ रुपये की इस निकासी के बाद 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों द्वारा की गई कुल बिकवाली का आंकड़ा 2.37 लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार कर चुका है। यह पूंजी निकासी पिछले पूरे साल के मुकाबले काफी अधिक है, क्योंकि वर्ष 2025 के दौरान विदेशी निवेशकों ने घरेलू बाजार से कुल 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी की थी। चालू वर्ष के ताजा आंकड़ों से साफ है कि वैश्विक उथल-पुथल के चलते विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से जोखिम वाली संपत्तियां घटाने में जुटे हैं।

## घरेलू मोर्चे के बजाय वैश्विक रुझानों का असर
निवेश मंच ट्रैक के सह-संस्थापक और सीईओ वेदांत गुप्ते ने बाजार के इस ताजा रुख पर टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि सितंबर की इस तेज निकासी के पीछे घरेलू अर्थव्यवस्था या कंपनियों के वित्तीय नतीजे जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि वैश्विक घटनाएं मुख्य वजह हैं। उनके अनुसार जब भी कच्चे तेल के भाव चढ़ते हैं और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी होती है, तब भारत जैसे उभरते बाजारों से विदेशी फंड्स का सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करना एक स्वाभाविक वित्तीय प्रक्रिया मानी जाती है।

## कच्चे तेल में तेजी और मुद्रास्फीति की चिंताएं
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के असर से ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव शुक्रवार को 109.97 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक जा पहुंचा। तेल के इस उच्च स्तर ने दुनिया भर के वित्तीय नीति निर्माताओं के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं में मुद्रास्फीति का दबाव तेजी से गहराने की आशंका पैदा हो गई है, जिससे केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं को बड़ा झटका लग सकता है।

## बॉन्ड यील्ड और शेयर बाजार पर विशेषज्ञों का नजरिया
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी. के. विजयकुमार ने आगाह किया है कि कच्चे तेल के महंगे होने और बढ़ती महंगाई के दबाव में मौद्रिक नीतियों को और सख्त किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस स्थिति से बॉन्ड यील्ड में और अधिक तेजी आ सकती है। विजयकुमार के अनुसार, यदि अमेरिकी 10 साल की परिपक्वता वाले बॉन्ड का यील्ड 5 प्रतिशत के स्तर तक पहुंच जाता है, तो पूरी दुनिया के शेयर बाजारों में एक तेज गिरावट देखने को मिल सकती है। ऐसे चुनौतीपूर्ण आर्थिक माहौल में विदेशी निवेशक इक्विटी से पूंजी निकालकर निश्चित और बेहतर रिटर्न देने वाले सरकारी बॉन्ड में निवेश करने को प्राथमिकता देते हैं।

## इसका आप पर असर
विदेशी निवेशकों की तेज बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल सीधे तौर पर भारतीय शेयर बाजार के मूल्यांकन और घरेलू मुद्रास्फीति को प्रभावित कर सकते हैं।

- **शेयर बाजार निवेशकों के लिए:** लगातार विदेशी बिकवाली से प्रमुख सूचकांकों में तेज उतार-चढ़ाव और सुधार देखने को मिल सकता है। रिटेल निवेशकों को जोखिम भरे दांव लगाने के बजाय व्यवस्थित निवेश और उच्च गुणवत्ता वाले शेयरों पर ध्यान देना चाहिए।
- **घरेलू उपभोक्ताओं के लिए:** कच्चे तेल का 110 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंचना भारत में ईंधन और परिवहन लागत बढ़ा सकता है। इससे रोजमर्रा के जरूरी सामानों की कीमतों और घरेलू बजट पर दबाव बढ़ सकता है।
- **फिक्स्ड इनकम निवेशकों के लिए:** वैश्विक स्तर पर बॉन्ड यील्ड बढ़ने से केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में जल्दी राहत देने से बच सकते हैं। इसका मतलब है कि बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट और ऋण प्रतिभूतियों पर आकर्षक रिटर्न कुछ और समय तक मिल सकते हैं।
- **मुद्रा विनिमय और आयातकों के लिए:** डॉलर की मजबूती और रुपये से पूंजी बाहर निकलने से आयातित सामान महंगे हो सकते हैं। विदेशों में पढ़ाई या यात्रा करने वालों के लिए खर्च में बढ़ोतरी दर्ज हो सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
सितंबर में भारतीय इक्विटी बाजार से विदेशी पूंजी की तेज निकासी कई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक कारकों के एक साथ उभरने के कारण हुई है। वैश्विक अनिश्चितता ने विदेशी निवेशकों को अपने जोखिम वाले पोर्टफोलियो को कम करने के लिए विवश किया है।

- **कच्चे तेल की कीमतों में उछाल:** भू-राजनीतिक तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड 109.97 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। भारी ऊर्जा आयातक होने के कारण भारत के चालू खाता घाटे और महंगाई पर इसका सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- **अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी:** अमेरिकी सरकारी प्रतिभूतियों पर यील्ड में बढ़ोतरी से सुरक्षित संपत्तियों का आकर्षण बढ़ गया है। यदि 10 वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5 प्रतिशत के स्तर को छूता है, तो निवेशक उभरते बाजारों के शेयरों से पूंजी निकाल लेते हैं।
- **मजबूत डॉलर का दबाव:** अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती से गैर-अमेरिकी मुद्राओं और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की संपत्तियों पर दबाव बढ़ा है। विदेशी फंड्स मुनाफावसूली कर डॉलर आधारित संपत्तियों में शरण ले रहे हैं।
- **मौद्रिक सख्ती की आशंकाएं:** कच्चे तेल की महंगाई से दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने की संभावना बन गई है। इस नीतिगत अनिश्चितता ने शेयर बाजारों से पूंजी पलायन को गति दी है।

## सवाल-जवाब

### 1. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने सितंबर में अब तक भारतीय बाजार से कितना पैसा निकाला है?
11 सितंबर तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से कुल 13,138 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं।

### 2. सितंबर में विदेशी निवेशकों की इस बिकवाली की मुख्य वजह क्या है?
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, मजबूत होता अमेरिकी डॉलर, भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी इसकी प्रमुख वजहें हैं।

### 3. जुलाई और अगस्त में विदेशी निवेशकों का रुख कैसा था?
विदेशी निवेशक जुलाई और अगस्त में शुद्ध खरीदार रहे थे, जिन्होंने जुलाई में 20,200 करोड़ रुपये और अगस्त में 29,630 करोड़ रुपये का निवेश किया था।

### 4. वर्ष 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों की कुल बिकवाली कितनी हो चुकी है?
2026 में अब तक विदेशी निवेशकों की कुल शुद्ध बिकवाली 2.37 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है, जो पूरे 2025 की 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी से ज्यादा है।

### 5. कच्चे तेल के भाव में हाल ही में क्या बदलाव आया है?
भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत बढ़कर 109.97 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।

### 6. अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5 प्रतिशत पहुंचने पर शेयर बाजार पर क्या असर हो सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5 प्रतिशत पर पहुंचता है, तो वैश्विक शेयर बाजारों में तेज गिरावट देखने को मिल सकती है क्योंकि निवेशक पैसा बॉन्ड में लगाने लगेंगे।

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