व्यापार अधिशेष में भारी गिरावट और मजबूत अमेरिकी डॉलर से ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा में कमजोरी, 0.6945 के करीब फिसला AUD/USD ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष अगस्त में तेजी से घटकर 495 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रह गया, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दो महीने के निचले स्तर के पास दबाव में बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में गुरुवार के शुरुआती एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में कमजोरी दर्ज की गई और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यह फिसलकर 0.6945 के आसपास आ गया। ऑस्ट्रेलिया के आधिकारिक सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा जारी ताजा व्यापारिक आंकड़ों में अधिशेष में भारी कमी देखी गई है, जिसका सीधा असर मुद्रा की चाल पर पड़ा। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर अमेरिकी मुद्रा में आई तेजी और बॉन्ड यील्ड्स के ऊंचे स्तर ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव बनाए रखा है। चालू कारोबारी सत्र में AUD/USD की जोड़ी अपने पिछले बंद 0.6989 से 0.64 प्रतिशत टूटकर 0.6944 के स्तर पर कारोबार कर रही है, जो पिछले 52 हफ्तों के दायरे 0.6422 से 0.7277 के निचले हिस्से की ओर झुकाव दर्शाती है। अगस्त में ऑस्ट्रेलिया के व्यापार अधिशेष में दर्ज हुई तेज गिरावट ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स द्वारा गुरुवार को प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक अगस्त महीने में ऑस्ट्रेलिया का ट्रेड सरप्लस यानी व्यापार अधिशेष घटकर 495 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रह गया। यह स्तर पूर्व अवधि के संशोधित आंकड़े 1,351 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की तुलना में काफी कम है, जिसे पहले 1,923 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बताया गया था। व्यापार अधिशेष में यह संकुचन आयात और निर्यात की गति में आए बदलावों के कारण हुआ है। आंकड़ों के बारीक विश्लेषण से पता चलता है कि अगस्त में ऑस्ट्रेलिया का मासिक निर्यात 3.7 प्रतिशत बढ़ा, जबकि इससे पिछले महीने इसमें 3.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी (जिसे पहले -3.3 प्रतिशत संशोधित किया गया था)। वहीं दूसरी तरफ, देश के आयात में 5.8 प्रतिशत की मासिक वृद्धि देखी गई, जो पिछले महीने की 2.4 प्रतिशत की गिरावट (संशोधित -2.5 प्रतिशत) से बिल्कुल उलट रुख पेश करती है। आयात में आई इस तेज बढ़त ने निर्यात के लाभ को सीमित कर दिया, जिसके चलते कुल व्यापार संतुलन में तीव्र गिरावट दर्ज हुई। मुद्रास्फीति और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर संभावनाएं वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने नीतिगत ब्याज दरों की दिशा को लेकर बाजार की अपेक्षाओं को नए सिरे से परिभाषित किया है। अमेरिका के मुख्य व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी कोर पीसीई सूचकांक, जिसमें खाद्य और ऊर्जा जैसे अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाले घटकों को बाहर रखा जाता है, अगस्त में सालाना आधार पर 3.0 प्रतिशत बढ़ा। यह जुलाई के संशोधित 3.0 प्रतिशत के बराबर रहा और बाजार के 3.3 प्रतिशत के अनुमान की तुलना में ठंडा साबित हुआ। सरकार के वार्षिक संशोधन में जुलाई के कोर पीसीई रीडिंग को 3.3 प्रतिशत से घटाकर 3.0 प्रतिशत कर दिया गया था। इन आंकड़ों के आने के बाद व्यापारियों ने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में अगली बढ़ोतरी की संभावित तारीख को 28 अक्टूबर से खिसकाकर 9 दिसंबर कर दिया है। बाजार में अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना 38.2 प्रतिशत आंकी जा रही है। भले ही कोर पीसीई में नरमी आई हो, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों से उपजी महंगाई की चिंताओं ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स को कई वर्षों के उच्च स्तर के करीब बनाए रखा है, जिससे डॉलर इंडेक्स को मजबूती मिल रही है। तकनीकी संकेतकों और प्रमुख चार्ट स्तरों का विश्लेषण चार्ट के तकनीकी पहलुओं पर नजर डालें तो दैनिक समय सीमा में AUD/USD लंबे समय के डाउनट्रेंड में दिखाई दे रहा है। 14-दिवसीय आरएसआई 26 पर स्थित है, जो ओवरसोल्ड क्षेत्र की स्थिति को इंगित करता है। वहीं एमएसीडी हिस्टोग्राम -0.00 के साथ मंदी का रुख दर्शा रहा है। औसत दिशात्मक सूचकांक यानी एडीएक्स 34 पर दर्ज है, जो एक मजबूत ट्रेंडिंग बाजार का संकेत देता है। स्टोकेस्टिक ऑसिलेटर की फास्ट लाइन 0 और सिग्नल लाइन 11 पर बनी हुई है। बोलिंगर बैंड्स के पैमाने पर 20-दिवसीय दायरा 0.6944 से 0.7276 के बीच फैला है, जिसका मध्य बैंड 0.7110 पर स्थित है। तकनीकी स्तरों के लिहाज से ऊपर की ओर पहला बड़ा प्रतिरोध 100-दिवसीय एसएमए के पास 0.7060 पर बना हुआ है। इसके बाद 0.7100 का मध्य बैंड प्रतिरोध का कार्य करेगा, जिसके पार जाने पर ऊपरी सीमा 0.7272 के स्तर सामने आ सकते हैं। नीचे की तरफ तत्काल सहारा लोअर बोलिंगर बैंड और 0.6925 पर स्थित है। लाइव डेटा के अनुसार 20-दिवसीय समर्थन स्तर लगभग 0.6943 और प्रतिरोध 0.7239 पर आंका गया है। आज के सत्र के लिए मुख्य धुरी बिंदु यानी पिवट स्तर 0.6946 पर है, जिसके ऊपर आर1 0.6949 और आर2 0.6953 के प्रतिरोध स्तर हैं, जबकि नीचे एस1 0.6942 और एस2 0.6939 के समर्थन बिंदु मौजूद हैं। यदि मुद्रा जोड़ी 0.6925 के नीचे फिसलती है तो गिरावट का दायरा और गहरा हो सकता है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया और ब्याज दर नीति का प्रभाव ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मूल्यांकन में रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा तय की जाने वाली आधिकारिक नकद दर सबसे अहम भूमिका निभाती है। केंद्रीय बैंक उस ब्याज दर को निर्धारित करता है जिस पर ऑस्ट्रेलियाई वाणिज्यिक बैंक आपस में रातों-रात उधार का लेन-देन करते हैं। यह दर पूरी अर्थव्यवस्था में ऋण की लागत और प्रतिफल को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया का प्राथमिक उद्देश्य ब्याज दरों को आवश्यकतानुसार बढ़ाकर या घटाकर मुद्रास्फीति की दर को 2 से 3 प्रतिशत के दायरे में स्थिर रखना है। जब अन्य प्रमुख वैश्विक केंद्रीय बैंकों की तुलना में ऑस्ट्रेलिया की ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो विदेशी पूंजी प्रवाह आकर्षित होने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन मिलता है। इसके विपरीत अपेक्षाकृत कम ब्याज दरें मुद्रा को कमजोर करती हैं। इसके अलावा केंद्रीय बैंक क्रेडिट स्थितियों को नियंत्रित करने के लिए क्वांटिटेटिव ईजिंग यानी मात्रात्मक सहजता और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग का उपयोग करता है। मात्रात्मक सहजता से मुद्रा आपूर्ति बढ़ने पर मुद्रा पर नकारात्मक असर पड़ता है, जबकि मौद्रिक सख्ती मुद्रा के लिए सकारात्मक मानी जाती है। चीन की आर्थिक स्थिति और लौह अयस्क व्यापार की भूमिका संसाधनों से संपन्न देश होने के कारण ऑस्ट्रेलिया का आर्थिक भविष्य काफी हद तक उसके विदेशी व्यापार पर निर्भर करता है। चीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, इसलिए चीनी अर्थव्यवस्था का स्वास्थ्य ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के उतार-चढ़ाव को सीधे तौर पर नियंत्रित करता है। जब चीनी अर्थव्यवस्था में मजबूती होती है और विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार होता है, तो वह ऑस्ट्रेलिया से भारी मात्रा में कच्चा माल, उत्पाद और सेवाएं खरीदता है। इससे विदेशी विनिमय बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की मांग बढ़ती है और उसकी कीमत में उछाल आता है। इसके उलट यदि चीन की विकास दर धीमी पड़ती है, तो मांग घटने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर कमजोर होता है। लौह अयस्क ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद है। वर्ष 2021 के आंकड़ों के अनुसार, इस धातु का वार्षिक निर्यात मूल्य 118 बिलियन डॉलर रहा था, जिसमें सबसे बड़ा आयातक देश चीन था। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में लौह अयस्क की कीमतें ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा की मुख्य प्रेरक मानी जाती हैं। जब लौह अयस्क की कीमतों में तेजी आती है, तो ऑस्ट्रेलिया के निर्यात राजस्व में इजाफा होता है, जिससे मुद्रा की मांग और मूल्य दोनों बढ़ते हैं। कीमतों में वृद्धि से देश का व्यापार संतुलन भी मजबूत होता है, जो अंततः ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती प्रदान करता है। व्यापार संतुलन और बाजार धारणा का महत्व किसी भी देश का व्यापार संतुलन इस बात का लेखा-जोखा होता है कि उसने अपने निर्यातों से कितनी विदेशी मुद्रा अर्जित की और आयातों के भुगतान में कितनी रकम खर्च की। जब वैश्विक बाजार में ऑस्ट्रेलिया के उत्पादों की मांग अधिक होती है, तो विदेशी खरीदार इन वस्तुओं के भुगतान के लिए ऑस्ट्रेलियाई डॉलर खरीदते हैं, जिससे शुद्ध मांग बढ़ती है और मुद्रा अधिशेष के दम पर मजबूत होती है। वहीं जब व्यापार अधिशेष सिकुड़ता है या घाटा होता है, तो मुद्रा के मूल्य पर नकारात्मक दबाव उत्पन्न होता है। इसके अतिरिक्त समग्र बाजार धारणा यानी मार्केट सेंटीमेंट भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के उतार-चढ़ाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वित्तीय बाजारों में निवेशक जब जोखिम लेने के मूड में होते हैं (रिस्क-ऑन धारणा), तो वे कमोडिटी से जुड़ी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं में निवेश बढ़ाते हैं, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को बड़ा लाभ मिलता है। दूसरी ओर, जब वैश्विक मंदी या तनाव के कारण निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर भागते हैं (रिस्क-ऑफ धारणा), तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से पूंजी निकलकर अमेरिकी डॉलर जैसी सेफ-हेवन मुद्राओं में चली जाती है। अन्य वैश्विक संपत्तियों और मुद्राओं का प्रदर्शन वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में व्यापक अमेरिकी डॉलर की मजबूती का असर अन्य प्रमुख मुद्रा जोड़ियों पर भी साफ देखा गया। यूएसडी/जेपीवाई एशियाई सत्र के दौरान 158.00 के स्तर से ऊपर अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी सिरे पर टिका रहा। बैंक ऑफ जापान की संभावित दरों में वृद्धि और जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार हस्तक्षेप के जोखिमों के बावजूद ऊंचे बॉन्ड यील्ड्स ने इस जोड़ी को सहारा दिया। इसके अतिरिक्त अमेरिका और ईरान के बीच जारी गतिरोध के चलते सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग बनी हुई है। यूरोपीय मुद्रा के मोर्चे पर ईयूआर/यूएसडी गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। यह जोड़ी बुधवार को 1.1312 तक लुढ़क गई थी और जनवरी के उच्च स्तर 1.2082 से काफी नीचे कारोबार कर रही है, हालांकि यूरोज़ोन में नए मुद्रास्फीति झटके से यूरो को अस्थायी समर्थन मिलने की संभावना पर नजर रखी जा रही है। वहीं सोने के बाजार में भी सुस्ती देखी गई और पीली धातु गुरुवार को 4,150 डॉलर प्रति औंस के आसपास संघर्ष करती रही, जो पिछले सत्र में 4,220 डॉलर से नीचे आई थी। सुरक्षित अमेरिकी डॉलर की बढ़त और बढ़ती बॉन्ड यील्ड्स ने बिना ब्याज वाली इस परिसंपत्ति के आकर्षण को सीमित कर दिया है। इसका आप पर असर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के कमजोर होने और अमेरिकी डॉलर की मजबूती से वैश्विक और भारतीय बाजारों पर सीधा असर पड़ेगा। • भारत में: विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे आयातित कच्चे माल और तेल की लागत महंगी हो सकती है। आयातकों को अपने हेजिंग सौदों की तुरंत समीक्षा करनी होगी ताकि मुद्रा में आने वाले उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम किया जा सके। • ऑस्ट्रेलियाई डॉलर खरीदारों के लिए: जिन भारतीय छात्रों या पर्यटकों को ऑस्ट्रेलिया की यात्रा करनी है या ट्यूशन फीस जमा करनी है, उन्हें ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा में आई कमजोरी से आंशिक राहत मिलेगी। मुद्रा में नरमी का लाभ उठाने के लिए वे मौजूदा निचले स्तरों पर अपनी फीस या यात्रा खर्च की मुद्रा बुक कर सकते हैं। • विदेशी मुद्रा और कमोडिटी ट्रेडर्स के लिए: 14-दिवसीय आरएसआई के 26 पर जाने से AUD/USD तकनीकी तौर पर ओवरसोल्ड जोन में है, जहां 0.6925 एक अहम सहारा स्तर है। व्यापारियों को सख्त स्टॉप-लॉस का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि 0.6925 टूटने पर नई तेज बिकवाली शुरू हो सकती है। • निर्यातकों और निवेशकों के लिए: वैश्विक जिंस बाजार में लौह अयस्क और कच्चे तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव से धातु कंपनियों के शेयरों में हलचल देखी जा सकती है। निवेशकों को संसाधन आधारित कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर सतर्क नजर बनाए रखनी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में आई इस हालिया गिरावट के पीछे घरेलू व्यापार संतुलन में तेज संकुचन और वैश्विक स्तर पर अमेरिकी ब्याज दरों की गतिशीलता मुख्य कारक रहे हैं। इसके साथ ही कच्चे तेल से जुड़ी मुद्रास्फीति की चिंताएं भी अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल को सहारा दे रही हैं। • व्यापार अधिशेष में तीव्र गिरावट: ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष अगस्त में 1,351 मिलियन डॉलर से गिरकर महज 495 मिलियन डॉलर रह गया। निर्यात में 3.7 प्रतिशत की वृद्धि के मुकाबले आयात में 5.8 प्रतिशत का तेज उछाल आने से शुद्ध व्यापार अधिशेष तेजी से सिमट गया। • अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड्स की मजबूती: भले ही कोर पीसीई मुद्रास्फीति 3.0 प्रतिशत पर ठंडी रही हो, लेकिन तेल की बढ़ती कीमतों ने लंबी अवधि की मुद्रास्फीति चिंताओं को जीवित रखा है। इसके चलते अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स कई वर्षों के उच्चतम स्तर के करीब बने हुए हैं, जिससे अमेरिकी डॉलर को मजबूत सहारा मिल रहा है। • फेडरल रिजर्व की दरों का नया चक्र: व्यापारियों ने फेडरल रिजर्व की संभावित दर वृद्धि को 28 अक्टूबर से बढ़ाकर 9 दिसंबर कर दिया है, लेकिन अक्टूबर में बढ़ोतरी की 38.2 प्रतिशत संभावना बनी हुई है। मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता और अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सुरक्षित निवेश मांग डॉलर को बढ़ावा दे रही है। • चीन और लौह अयस्क का प्रभाव: ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े निर्यात उत्पाद लौह अयस्क की कीमतों और उसके प्रमुख खरीदार चीन की आर्थिक स्थिति पर अनिश्चितता का असर मुद्रा की मांग पर लगातार दबाव बना रहा है। सवाल-जवाब 1. अगस्त में ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष कितना रहा? अगस्त में ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष घटकर 495 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रह गया, जो पिछले महीने के संशोधित 1,351 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से काफी कम है। 2. अगस्त के दौरान ऑस्ट्रेलिया के निर्यात और आयात में क्या बदलाव हुआ? अगस्त में देश के निर्यात में 3.7 प्रतिशत की मासिक बढ़त हुई, जबकि आयात में 5.8 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई। 3. अमेरिकी कोर पीसीई मुद्रास्फीति दर कितनी दर्ज की गई? अगस्त में कोर पीसीई सूचकांक सालाना आधार पर 3.0 प्रतिशत बढ़ा, जो जुलाई के संशोधित 3.0 प्रतिशत के बराबर था और अनुमानित 3.3 प्रतिशत से कम रहा। 4. बाजार के अनुसार अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दर वृद्धि की संभावना कितनी है? बाजार अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की 38.2 प्रतिशत संभावना देख रहे हैं, जबकि अगली संभावित वृद्धि का समय 28 अक्टूबर से खिसककर 9 दिसंबर हो गया है। 5. चार्ट पर AUD/USD के लिए प्रमुख तकनीकी समर्थन और प्रतिरोध स्तर क्या हैं? जोड़ी के लिए तत्काल समर्थन 0.6925 के पास स्थित है, जबकि ऊपर की ओर पहला बड़ा प्रतिरोध 100-दिवसीय एसएमए के पास 0.7060 और उसके बाद 0.7100 पर है। 6. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए लौह अयस्क का निर्यात क्यों महत्वपूर्ण है? लौह अयस्क ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा निर्यात है जिसका मूल्य 2021 के आंकड़ों के अनुसार सालाना 118 बिलियन डॉलर रहा है, और इसकी कीमतें सीधे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की मांग को तय करती हैं। https://trendkia.com/market/vyapara-adhishesha-men-bhari-giravata-aura-majabuta-us-dollar-se-australian-dollar-men-kamajori-0-6945-ke-kariba-phisala-aud-usd-40897 TrendKia — Har trend, sabse pehle.