# व्यापार अधिशेष में भारी उछाल से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर मजबूत, अमेरिकी राजनीतिक हलचल के बीच ग्रीनबैक फिसला

> सितंबर में ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष उछलकर 2,826 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक पहुंच गया। वहीं अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक बढ़त और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रमों से अमेरिकी डॉलर में कमजोरी दर्ज की गई।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-11-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/vyapara-adhishesha-men-bhari-uchhala-se-australian-dollar-majabuta-ameriki-rajanitika-halachala-ke-bicha-us-dollar-phisala-56788 · **Language:** Hindi
**Tags:** ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, अमेरिकी डॉलर, विदेशी मुद्रा, व्यापार अधिशेष, मुद्रा बाजार, अमेरिकी चुनाव

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने शानदार बढ़त दर्ज करते हुए अपनी स्थिति मजबूत की है। ऑस्ट्रेलिया के मजबूत व्यापारिक आंकड़ों और अमेरिकी मुद्रा पर बने चौतरफा दबाव ने विदेशी मुद्रा विनिमय दरों को खासा प्रभावित किया है। सिडनी से लेकर न्यूयॉर्क तक के बाजारों में इस बदलाव का असर साफ दिखाई दे रहा है, जहां एक ओर निर्यात में लगातार तेजी ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था को सहारा दे रही है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के अप्रत्याशित नतीजों ने ग्रीनबैक की चाल सुस्त कर दी है।

## ऑस्ट्रेलियाई व्यापार अधिशेष में बड़ा उछाल
सितंबर महीने में ऑस्ट्रेलिया के व्यापार संतुलन में जबरदस्त सुधार देखने को मिला है। आधिकारिक व्यापार आंकड़ों के मुताबिक, देश का व्यापार अधिशेष महीने-दर-महीने आधार पर तेजी से बढ़कर 2,826 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर पहुंच गया। यह आंकड़ा पिछले महीने की तुलना में एक बड़ी छलांग दर्शाता है, जहां अगस्त का अधिशेष संशोधित होकर 185 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दर्ज किया गया था, जिसे शुरुआत में 495 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बताया गया था। व्यापार संतुलन में इस व्यापक विस्तार ने ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था की बाहरी व्यापारिक ताकत को नई मजबूती दी है।

इस उल्लेखनीय व्यापारिक विस्तार के पीछे मुख्य कारण निर्यात का बढ़ना और आयात में कमी आना रहा है। सितंबर में ऑस्ट्रेलियाई निर्यात में 2.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे पहले अगस्त महीने में निर्यात में संशोधित रूप से 3.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी, जो प्रारंभिक अनुमानों में 3.7 प्रतिशत बताई गई थी। इसके विपरीत, आयात के मोर्चे पर गिरावट देखने को मिली। सितंबर महीने में आयात 3.3 प्रतिशत घट गया, जबकि इससे पिछले महीने यानी अगस्त में इसमें 6.2 प्रतिशत की संशोधित वृद्धि देखी गई थी, जिसका प्रारंभिक आंकड़ा 5.8 प्रतिशत दर्ज था। आयात बिल घटने और निर्यात बढ़ने से व्यापारिक स्थिति काफी अनुकूल हो गई।

## अमेरिकी मध्यावधि चुनाव और ग्रीनबैक पर दबाव
विदेशी मुद्रा बाजार में AUD/USD की जोड़ी को न केवल ऑस्ट्रेलिया के मजबूत आंकड़ों से बल मिला, बल्कि अमेरिकी डॉलर की व्यापक कमजोरी ने भी इसे पंख दिए। मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा दोनों सदनों, यानी कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल करने की खबरों के बाद अमेरिकी डॉलर भारी बिकवाली के दबाव में आ गया। वाशिंगटन के सत्ता गलियारों में राजनीतिक गतिरोध और नीतिगत टकराव की आशंकाओं ने निवेशकों को अमेरिकी मुद्रा से दूरी बनाने पर मजबूर किया।

राजनीतिक अनिश्चितता के अलावा भू-राजनीतिक मोर्चे पर भी समीकरण बदले हैं। चुनाव नतीजों के बाद पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों ने जोर पकड़ा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। ऊर्जा की कीमतों में आई इस तेज नरमी ने भी अमेरिकी डॉलर पर अतिरिक्त नकारात्मक दबाव डालने का काम किया। इसके चलते जोखिम वाली मुद्राओं के प्रति निवेशकों का रुझान अचानक बढ़ गया।

## वैश्विक मुद्राओं की स्थिति और स्कॉटियाबैंक का विश्लेषण
विदेशी मुद्राओं के प्रदर्शन पर विश्लेषण पेश करते हुए स्कॉटियाबैंक के विश्लेषकों का कहना है कि मध्यावधि चुनाव परिणामों के बाद अमेरिकी डॉलर सभी प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले कमजोर हुआ है। उनके अनुसार, प्रमुख मुद्राओं के उतार-चढ़ाव का यह रुख बाजार में जोखिम उठाने की धारणा में स्पष्ट सुधार का संकेत देता है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं की G10 मुद्राओं के बीच प्रदर्शन ने साफ कर दिया कि वैश्विक निवेशक अब अधिक जोखिम लेने के मूड में आ चुके हैं।

मुद्राओं के इस दौर में मैक्सिकन पेसो सबसे आगे रहा, जिसने दिन के कारोबार में करीब 1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की। वहीं न्यूजीलैंड डॉलर, नॉर्वेजियन क्रोन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर प्रत्येक में 0.6 से 0.7 प्रतिशत की जोरदार तेजी देखी गई। केवल कमोडिटी आधारित मुद्राएं ही नहीं, बल्कि यूरो और ब्रिटिश पाउंड भी मंगलवार के बंद स्तर से 0.5 प्रतिशत की मजबूत तेजी दिखाने में सफल रहे, जिससे डॉलर की कमजोरी साफ रेखांकित हुई।

## मुद्रा जोड़ों की तकनीकी स्थिति और आगामी अमेरिकी आंकड़े
गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान AUD/USD 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर मजबूती से बना रहा। तीन सप्ताह के निचले स्तर से उबरने के बाद यह जोड़ी अपनी बढ़त को समेटती दिखी। हालांकि, अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक स्वीप और ईरान के साथ कूटनीतिक प्रगति की उम्मीदें डॉलर पर दबाव बनाए हुए हैं, लेकिन आगे की चाल को लेकर खरीदार सतर्क भी नजर आ रहे हैं। इस सतर्कता की बड़ी वजह शुक्रवार को जारी होने वाली अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल यानी NFP रिपोर्ट है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

दूसरी ओर, USD/JPY लगातार दूसरे दिन नकारात्मक दायरे में कारोबार करता रहा। बैंक ऑफ जापान की बैठक के मिनट्स में नीति निर्माताओं द्वारा ब्याज दरें बढ़ाते रहने की सहमति और मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप के जोखिम ने जापानी येन को मजबूती प्रदान की। अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के लचीलेपन ने फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख को समर्थन दिया है, जिससे डॉलर में अत्यधिक गिरावट पर एक सीमा भी लगी हुई है। इसके साथ ही, गिरती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के कारण एशियाई सत्र में सोना उछलकर 4,080 डॉलर तक पहुंच गया, हालांकि दिसंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा दर वृद्धि की संभावना इस तेजी पर कुछ हद तक ब्रेक लगा सकती है।

## इसका आप पर असर
वैश्विक मुद्रा बाजारों में आए इस उतार-चढ़ाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, विदेश यात्रा और कमोडिटी की कीमतों पर पड़ता है।

- **भारत में प्रभाव:** डॉलर की कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट से भारत का आयात बिल नियंत्रित रहने की उम्मीद है। इससे भारतीय रुपये को स्थिरता मिल सकती है और घरेलू स्तर पर आयातित मुद्रास्फीति का दबाव कम हो सकता है।
- **वैश्विक निवेशकों के लिए:** जोखिम वाली संपत्तियों और कमोडिटी से जुड़ी मुद्राओं में तेजी आने से विदेशी पोर्टफोलियो प्रवाह में सुधार हो सकता है। निवेशक अब सुरक्षित माने जाने वाले डॉलर से हटकर अन्य उभरते और संसाधन-आधारित बाजारों में पूंजी लगाने पर विचार कर सकते हैं।
- **ऑस्ट्रेलियाई आयात-निर्यात से जुड़े कारोबार:** मजबूत व्यापार अधिशेष से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में आई मजबूती वहां पढ़ने वाले छात्रों और आयातकों के लिए लागत बढ़ा सकती है। वहीं ऑस्ट्रेलिया को सामान निर्यात करने वाले भारतीय व्यापारियों को बेहतर विनिमय मूल्य का लाभ मिल सकता है।
- **कमोडिटी और सोना खरीदार:** डॉलर पर दबाव और बॉन्ड यील्ड में नरमी से सोने के भाव 4,080 डॉलर तक चढ़ गए हैं। आने वाले दिनों में अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद कीमती धातुओं की कीमतों में और हलचल देखने को मिल सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
विदेशी मुद्रा बाजार में यह फेरबदल ऑस्ट्रेलिया के मजबूत आर्थिक प्रदर्शन और अमेरिकी राजनीतिक समीकरणों के एक साथ बदलने की वजह से हुआ है।

- **ऑस्ट्रेलियाई व्यापार संतुलन में उछाल:** सितंबर में निर्यात में 2.3 प्रतिशत की वृद्धि और आयात में 3.3 प्रतिशत की गिरावट के चलते देश का व्यापार अधिशेष 2,826 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक जा पहुंचा। निर्यात से विदेशी मुद्रा की आमद बढ़ने और आयात खर्च घटने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सीधा समर्थन मिला।
- **अमेरिकी चुनाव नतीजे और नीतिगत गतिरोध:** अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा संसद के दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल करने से वाशिंगटन में नीतिगत गतिरोध की चिंताएं बढ़ गईं। इस अनिश्चितता ने निवेशकों को ग्रीनबैक में बिकवाली करने के लिए प्रेरित किया।
- **कच्चे तेल में नरमी और कूटनीतिक उम्मीदें:** चुनावी नतीजों के बाद पश्चिम एशिया में कूटनीतिक समाधान और ईरान से बातचीत की आशाओं ने तेल की कीमतों को नीचे गिरा दिया। ऊर्जा कीमतों में इस गिरावट ने डॉलर पर दोहरा दबाव बनाया और गैर-अमेरिकी संपत्तियों की मांग को बढ़ाया।

## सवाल-जवाब

### 1. सितंबर महीने में ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष कितना दर्ज किया गया?
सितंबर में ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष बढ़कर 2,826 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले महीने संशोधित 185 मिलियन डॉलर था।

### 2. ऑस्ट्रेलियाई निर्यात और आयात में सितंबर के दौरान क्या बदलाव आया?
सितंबर में देश के निर्यात में 2.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि आयात में 3.3 प्रतिशत की गिरावट आई।

### 3. अमेरिकी डॉलर में बिकवाली का मुख्य कारण क्या रहा?
मध्यावधि चुनावों में दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक जीत के बाद वाशिंगटन में राजनीतिक गतिरोध की आशंका और तेल की कीमतों में गिरावट से डॉलर कमजोर हुआ।

### 4. AUD/USD मुद्रा जोड़ी का हालिया कारोबारी स्तर क्या रहा?
गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यह जोड़ी 0.7000 के स्तर से ऊपर मजबूती से टिकी रही।

### 5. जापानी येन को किन कारणों से मजबूती मिल रही है?
बैंक ऑफ जापान द्वारा दरें बढ़ाने के संकेत देने वाले मिनट्स और बाजार में संभावित हस्तक्षेप के जोखिम ने येन को सहारा दिया है।

### 6. मुद्रा बाजार के प्रतिभागी अब किस प्रमुख रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं?
बाजार के सभी प्रतिभागी और निवेशक अब शुक्रवार को जारी होने वाली अमेरिकी गैर-कृषि पेरोल यानी NFP रिपोर्ट पर नजर बनाए हुए हैं।

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