व्यापार और एआई पर चीन के साथ बातचीत बेहद सफल रही, अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट का बयान डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के शिखर सम्मेलन से पहले अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने चीन के साथ वार्ता को कामयाब बताया। दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आगामी संवाद और व्यापार समझौते के प्रारूप पर काम करने के लिए सहमत हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाले उच्चस्तरीय शिखर सम्मेलन से ठीक पहले वाशिंगटन और बीजिंग के बीच आर्थिक व तकनीकी संबंधों को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने जानकारी दी है कि व्यापार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के मुद्दे पर चीनी प्रतिनिधियों के साथ उनका संवाद अत्यंत सफल रहा है। दोनों पक्षों ने भविष्य में भी एआई से जुड़े मामलों पर विस्तृत संवाद की नई बैठक आयोजित करने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही वाशिंगटन ने इस संवेदनशील तकनीक को लेकर दोनों महाशक्तियों के बीच एक पारस्परिक सूचना प्रणाली स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा है ताकि किसी भी तरह के असमंजस या तकनीकी विवाद से समय रहते निपटा जा सके। व्यापार समझौते के नए प्रारूप पर जारी है काम आर्थिक मोर्चे पर जारी गतिविधियों के बीच अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी और चीनी टीमें एक साझा व्यापार समझौते की रूपरेखा पर लगातार काम कर रही हैं। इस प्रस्तावित समझौते के तहत दोनों देशों के बीच वस्तुओं के आदान-प्रदान का दायरा तय किया जा रहा है। चीन की ओर से इस व्यापार समझौते में मुख्य रूप से उपभोक्ता सामान और निम्न तकनीकी उत्पादों को शामिल किए जाने की संभावना है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका की प्राथमिक सूची में ऊर्जा उत्पाद, कृषि जिंस और संभावित रूप से चिकित्सा उपकरण शामिल किए जा सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह समझौता मूर्त रूप लेता है तो दोनों देशों के द्विपक्षीय वाणिज्यिक संबंधों में एक नया संतुलन स्थापित हो सकता है। आर्थिक संघर्ष और टैरिफ की पुरानी पृष्ठभूमि अमेरिका और चीन के बीच यह आर्थिक टकराव कोई नया नहीं है बल्कि इसकी जड़ें वर्ष 2018 में शुरू हुए व्यापार युद्ध में हैं। उस समय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एशियाई दिग्गज पर अनुचित व्यापारिक प्रथाओं और बौद्धिक संपदा की चोरी का आरोप लगाते हुए चीनी आयातों पर कड़े व्यापारिक प्रतिबंध थोप दिए थे। इसके जवाब में चीन ने भी सख्त कदम उठाए और अमेरिकी ऑटोमोबाइल तथा सोयाबीन जैसे कई प्रमुख उत्पादों पर जवाबी टैरिफ लगा दिए थे। यह तनाव तब जाकर कुछ थमा जब जनवरी 2020 में दोनों देशों ने ऐतिहासिक अमेरिका चीन चरण एक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत चीन के आर्थिक और व्यापारिक तंत्र में ढांचागत सुधारों और बदलावों की मांग की गई थी ताकि दोनों देशों में आपसी स्थिरता और विश्वास बहाल हो सके। हालांकि इसके बाद फैली कोरोना वायरस महामारी ने दुनिया का ध्यान इस व्यापारिक संघर्ष से पूरी तरह भटका दिया। इसके बाद जब जो बाइडन अमेरिका के राष्ट्रपति बने, तो उन्होंने न केवल उन टैरिफ को बरकरार रखा बल्कि कुछ अतिरिक्त लेवी भी लगा दीं। व्हाइट हाउस में ट्रंप की वापसी और ताजा टैरिफ का असर डोनाल्ड ट्रंप के 47वें अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में व्हाइट हाउस लौटने से दोनों देशों के बीच तनाव की एक नई लहर पैदा हुई है। वर्ष 2024 के चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप ने सत्ता में वापसी पर चीन से आने वाले सामान पर 60 प्रतिशत टैरिफ लगाने का कड़ा संकल्प लिया था, जिसे उन्होंने 20 जनवरी 2025 को कार्यभार संभालते ही लागू कर दिया। ट्रंप की इस वापसी के साथ ही अमेरिका और चीन का व्यापार युद्ध ठीक वहीं से फिर शुरू होने की दिशा में बढ़ गया जहां यह पहले छूटा था। इन जैसे को तैसा वाली संरक्षणवादी नीतियों के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में गंभीर व्यवधान पैदा हो रहे हैं। कंपनियों और उपभोक्ताओं के स्तर पर खर्चों तथा विशेष रूप से पूंजीगत निवेश में कमी आ रही है, जिसका सीधा असर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी मुद्रास्फीति पर पड़ रहा है और आम जनजीवन में महंगाई बढ़ रही है। मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव और केंद्रीय बैंकों के फैसले इन कूटनीतिक और आर्थिक गतिविधियों का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र में डॉलर के मुकाबले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.03 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 0.7127 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया और यह 0.7100 के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर बना रहा। बाजार में अमेरिकी डॉलर अपनी पिछली गिरावट को रोकते हुए मजबूत बना हुआ है, जिसे फेडरल रिजर्व के आक्रामक दृष्टिकोण और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का समर्थन मिल रहा है। दूसरी ओर रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी के दांव ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा दे रहे हैं, जबकि निवेशकों की नजरें गवर्नर बुलॉक के भाषण और आगामी ऑस्ट्रेलियाई रोजगार आंकड़ों पर टिकी हैं। इसी तरह डॉलर के मुकाबले जापानी येन में भी हलचल तेज है। अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी 158.00 के स्तर से फिसलने के बाद संभलती हुई दिखी। पिछले सप्ताह बैंक ऑफ जापान ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सात के मुकाबले दो के बहुमत से अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया था। मौद्रिक नीति के सामान्यीकरण की दिशा में उठाया गया यह कदम बाजार की अपेक्षाओं के बिल्कुल अनुरूप था। इसके अलावा मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और फेडरल रिजर्व द्वारा इस साल एक और दर वृद्धि की संभावनाओं ने डॉलर को मजबूती दी है, जिससे येन के खरीदार अभी भी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। सोने के भाव पर बना हुआ है दबाव वैश्विक बाजार में कीमती धातुओं के रुख की बात करें तो सोना पिछले दो दिनों के सुधार लाभ को आगे बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रहा है और नए हफ्ते की शुरुआत में बिकवाली के दबाव में आ गया। मध्य पूर्व में व्यापक संघर्ष के जोखिम के चलते निवेशकों ने सुरक्षित पनाहगाह के तौर पर अमेरिकी डॉलर का रुख किया है, जिसने डॉलर इंडेक्स को जुलाई के अंत के उच्चतम स्तर के करीब सहारा दिया है। इसके अलावा फेडरल रिजर्व का सख्त नीतिगत रुख बिना ब्याज वाली सर्राफा संपत्तियों के प्रति आकर्षण को घटा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव 4,400 डॉलर प्रति औंस के नीचे दबाव में बने हुए हैं। आने वाले दिनों में दोनों महाशक्तियों के बीच होने वाली वार्ताओं के नतीजे ही इन वित्तीय संपत्तियों की अगली दिशा तय करेंगे। इसका आप पर असर अमेरिका और चीन के बीच नए व्यापार और एआई समझौते की दिशा में प्रगति से वैश्विक आपूर्ति और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है। • महंगाई और आयात शुल्क: यदि नए व्यापार समझौते से आयात शुल्कों में कोई राहत मिलती है तो अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ता वस्तुओं की लागत घट सकती है। हालांकि 60 प्रतिशत टैरिफ बने रहने पर विनिर्माण लागत बढ़ेगी और रोजमर्रा के उत्पादों की खुदरा कीमतों में तेजी आ सकती है। • इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी उत्पाद: एआई और तकनीकी संचार पर दोनों देशों के बीच सहयोग बनने से तकनीकी नवाचार में स्थिरता आएगी। इससे सॉफ्टवेयर विकास और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों को स्पष्ट दिशानिर्देश मिलेंगे। • मुद्रा विनिमय दरें: फेडरल रिजर्व के रुख और केंद्रीय बैंकों के फैसलों से विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में अस्थिरता बनी रहेगी। विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और आयातकों को अपनी लागत और खर्चों की योजना बहुत सावधानी से बनानी होगी। • सोने में निवेश: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के 4,400 डॉलर के नीचे रहने और डॉलर की मजबूती से सर्राफा बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की खरीद करने वाले निवेशकों को केंद्रीय बैंकों के आगामी फैसलों पर नजर रखनी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ अमेरिका और चीन के बीच आर्थिक तनाव वर्षों की व्यापारिक प्रतिस्पर्धा और हालिया नेतृत्व परिवर्तनों की वजह से गहराया है। दोनों देशों के बीच संरक्षणवादी नीतियों और तकनीकी आधिपत्य की होड़ ने वर्तमान स्थिति को जन्म दिया है। • टैरिफ और व्यापार असंतुलन: वर्ष 2018 में बौद्धिक संपदा और व्यापारिक नियमों को लेकर शुरू हुआ टकराव नए दौर में पहुंच चुका है। जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीनी आयातों पर 60 प्रतिशत टैरिफ लगाने से यह आर्थिक संघर्ष दोबारा चरम पर पहुंच गया। • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में प्रतिस्पर्धा: उभरती हुई एआई तकनीक और डेटा सुरक्षा को लेकर दोनों महाशक्तियों के बीच गहरी संवेदनशीलता है। इसी जोखिम को नियंत्रित करने के लिए वाशिंगटन ने एक पारस्परिक सूचना प्रणाली और संवाद का प्रस्ताव रखा है। • केंद्रीय बैंकों के मौद्रिक कदम: वैश्विक मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक तनावों के बीच फेडरल रिजर्व का आक्रामक रुख और बैंक ऑफ जापान द्वारा दरों को बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत करना बाजारों में अस्थिरता बढ़ा रहा है। सवाल-जवाब 1. स्कॉट बेसेंट ने चीन के साथ वार्ता को लेकर क्या कहा? अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बताया कि व्यापार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर चीन के साथ उनकी बातचीत बेहद सफल रही है। 2. अमेरिका और चीन के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते में क्या शामिल हो सकता है? चीन की तरफ से उपभोक्ता सामान और निम्न तकनीकी उत्पाद, जबकि अमेरिका की तरफ से ऊर्जा, कृषि उत्पाद और मेडिकल डिवाइस शामिल होने की संभावना है। 3. डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर 60 प्रतिशत टैरिफ कब लागू किया? डोनाल्ड ट्रंप ने 20 जनवरी 2025 को राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालने के तुरंत बाद चीन पर 60 प्रतिशत टैरिफ लागू किया था। 4. बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है? बैंक ऑफ जापान ने 7 के मुकाबले 2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। 5. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की क्या स्थिति है? फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण सोने की कीमतें 4,400 डॉलर प्रति औंस के नीचे दबाव में बनी हुई हैं। https://trendkia.com/market/vyapara-aura-ai-para-china-ke-satha-batachita-behada-saphala-rahi-us-treasury-secretary-scott-bessent-ka-bayana-35457 TrendKia — Har trend, sabse pehle.