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  "type": "article",
  "title": "वॉशिंगटन के तरलता फैसले से ब्रिटिश पाउंड में उछाल, GBP/USD तीन महीने के उच्चतम स्तर 1.3600 के पार पहुँचा",
  "summary": "यूएस ट्रेजरी द्वारा बायबैक का आकार बढ़ाने के फैसले से अमरीकी डॉलर पर दबाव बना है। इसके चलते यूके मुद्रास्फीति आंकड़ों के बावजूद ब्रिटिश पाउंड 0.53% चढ़कर 1.3600 के स्तर को पार कर गया।",
  "content": "अंतर्राष्ट्रीय विदेशी मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) ने जबरदस्त बढ़त दर्ज करते हुए 1.3600 के स्तर को पार कर लिया है, जो मई के मध्य के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। पाउंड स्टर्लिंग में आई यह तेजी घरेलू आर्थिक आंकड़ों के बजाय अमेरिकी राजधानी वॉशिंगटन में लिए गए वित्तीय निर्णयों से संचालित हुई है। दैनिक सत्र में 0.53% की बढ़त के साथ बंद हुआ यह व्यापारिक जोड़ा पिछले तीन महीनों के अपने सबसे मजबूत बंद स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी डॉलर पर बने भारी बिकवाली के दबाव ने वैश्विक स्तर पर कई प्रमुख मुद्राओं को मजबूती प्रदान की है, जिसमें पाउंड भी शामिल है।\n\n \n\nयूएस ट्रेजरी के बायबैक फैसले से डॉलर में आई गिरावट\n\nपाउंड स्टर्लिंग में आई इस महत्वपूर्ण तेजी का मुख्य कारण अमेरिकी वित्त विभाग यानी यूएस ट्रेजरी का एक बड़ा फैसला रहा। यूएस ट्रेजरी ने लंबी अवधि की नाममात्र कूपन प्रतिभूतियों (दीर्घकालिक सरकारी बॉन्ड) के लिए अपनी तरलता सहायता बायबैक अभियानों के आकार को दोगुना करने की घोषणा की। इस कदम से अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज गिरावट आई और अमेरिकी डॉलर सूचकांक पर गहरा दबाव देखा गया। जब अमेरिकी सरकार अपनी प्रतिभूतियों की बायबैक प्रक्रिया को बढ़ाती है, तो बाजार में डॉलर की आपूर्ति पर असर पड़ता है और निवेशक अन्य उच्च प्रतिफल वाली संपत्तियों का रुख करते हैं।\n\nअमेरिकी डॉलर में आई इस कमजोरी का असर व्यापक विदेशी मुद्रा बाजार पर पड़ा। केवल ब्रिटिश पाउंड ही नहीं, बल्कि स्विस फ्रैंक ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 1.8% की जोरदार बढ़त बनाई, जबकि न्यूजीलैंड डॉलर ने भी करीब 1% का लाभ हासिल किया। जब वैश्विक बाजार में डॉलर बिकवाली का दौर चलता है, तो निवेशक अन्य मुद्राओं की मांग बढ़ाते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि पाउंड का 1.3400 के औसत मूविंग बैंड को पार कर 1.3600 तक पहुंचना यूके की अपनी मजबूत आर्थिक स्थिति का नतीजा कम और अमेरिकी डॉलर की कमजोरी का परिणाम ज्यादा है।\n\n \n\nयूके मुद्रास्फीति आंकड़े और बैंक ऑफ इंग्लैंड की नीति\n\nब्रिटेन में जारी हालिया आर्थिक आंकड़ों में जुलाई महीने की वार्षिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) दर बढ़कर 2.9% दर्ज की गई, जो जून में 2.6% थी। यह आंकड़ा बाजार के अनुमानों के बिल्कुल सटीक अनुरूप रहा, लेकिन मार्च के बाद यह पहला मौका है जब ब्रिटेन में मुख्य मुद्रास्फीति दर में वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं दूसरी ओर, मुख्य मुद्रास्फीति (कोर CPI) 2.6% पर स्थिर बनी रही, जिसने बाजार के 2.5% के पूर्वानुमान को थोड़ा पीछे छोड़ दिया। सेवाओं की मुद्रास्फीति, जिस पर बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) अपनी मौद्रिक नीति तय करने के लिए सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित करता है, 3.6% से धीमी होकर 3.4% पर आ गई।\n\nमुद्रास्फीति आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण करने पर पता चलता है कि इसमें आई तेजी किसी मजबूत घरेलू मांग का संकेत नहीं है। जुलाई में लागू हुई विनियमित घरेलू ऊर्जा सीमा में 13.5% की वृद्धि इसका मुख्य कारण रही, जिसके तहत घरेलू गैस की कीमतों में महीने दर महीने आधार पर 14.7% की बढ़ोतरी हुई। इसके विपरीत, परिवहन मुद्रास्फीति सस्ते डीजल के कारण 5.7% से घटकर 3.6% रह गई और खाद्य पदार्थों की महंगाई दर घटकर 1.3% पर आ गई। यह स्पष्ट करता है कि मुद्रास्फीति में वृद्धि प्रशासनिक रूप से तय ऊर्जा कीमतों के कारण हुई है। इसलिए, बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति समिति, जिसने जुलाई में ब्याज दरों को यथावत रखने के पक्ष में 6-3 से मतदान किया था, के पास 17 सितंबर की अगली बैठक में दरों में बदलाव करने का कोई नया कारण नहीं है।\n\nबैंक ऑफ इंग्लैंड के नीति निर्माताओं के लिए यह उछाल अप्रत्याशित नहीं था। बैंक के जुलाई के अनुमानों में पहले ही यह अनुमान जताया गया था कि वर्ष की अंतिम तिमाही में ऊर्जा कीमतों के प्रभाव के कारण मुद्रास्फीति 3.2% के आसपास शीर्ष पर पहुंच सकती है। इसलिए, जुलाई का यह आंकड़ा बाजार द्वारा काफी पहले ही भांप लिया गया था। मंगलवार को जारी ब्रिटेन के श्रम बाजार रिपोर्ट ने पाउंड पर दबाव बनाया था, जिससे मुद्रा जोड़ा घरेलू नकारात्मकता के साथ बुधवार के सत्र में दर्ज हुआ था, लेकिन अमेरिकी घटनाक्रम के बाद यह विदेशी सकारात्मकता के सहारे ऊपर निकल गया।\n\n \n\nआगामी आर्थिक डेटा और खुदरा बिक्री के अनुमान\n\nपाउंड स्टर्लिंग के अल्पकालिक रुझान के लिए आने वाले दिन अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। यूके GfK उपभोक्ता विश्वास सूचकांक के आंकड़े जारी होने वाले हैं, जिसके लिए आम सहमति -18 की है, जबकि पिछला आंकड़ा -17 का था। इसके बाद ब्रिटेन के जुलाई महीने के खुदरा बिक्री के आंकड़े सामने आएंगे। खुदरा बिक्री में मासिक आधार पर -0.5% की गिरावट का अनुमान जताया गया है, जबकि पिछले महीने इसमें 1% की वृद्धि हुई थी। ईंधन को छोड़कर खुदरा बिक्री में भी -0.5% की गिरावट की संभावना है, जो पहले 1.1% थी।\n\nवार्षिक आधार पर खुदरा बिक्री में तेज गिरावट की उम्मीद की जा रही है, जहां आंकड़ा पिछले 4.2% से घटकर 2.2% पर आने का अनुमान है। वार्षिक आंकड़े का लगभग आधा रह जाना बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण संख्या होगी, क्योंकि यह एक महीने की सुस्ती को एक स्थायी नकारात्मक दिशा में बदल देता है। इसके अतिरिक्त, अगस्त महीने के क्रय प्रबंधक सूचकांक (PMI) के आंकड़े भी निचले स्तर पर रहने की भविष्यवाणी की गई है। यदि खुदरा बिक्री और PMI के आंकड़े कमजोर रहते हैं, तो यह पाउंड की हालिया तेजी पर ब्रेक लगा सकते हैं।\n\n \n\nGBP/USD का तकनीकी विश्लेषण और महत्वपूर्ण स्तर\n\nतकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो GBP/USD जोड़े ने 1.3600 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। प्रतिरोध स्तरों की बात करें तो सत्र का उच्चतम स्तर 1.3650 से ठीक नीचे पहला बड़ा अवरोध है। इसके बाद मई की शुरुआत का शिखर स्तर, जो 1.3650 के ठीक ऊपर स्थित है, दूसरा मुख्य प्रतिरोध बना हुआ है। यदि यह जोड़ा 1.3700 के स्तर को पार करने में सफल होता है, तो यह केवल डॉलर में आई गिरावट का अस्थाई असर न रहकर एक पूर्ण दीर्घकालिक तेजी के रुझान (Trend Break) में बदल जाएगा।\n\nसपोर्ट स्तरों के संदर्भ में, 1.3600 का स्तर अब इस ब्रेकआउट के लिए एक मजबूत धरातल (Floor) के रूप में कार्य करेगा। यदि कीमत इससे नीचे आती है, तो 1.3550 का स्तर अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट होगा। इससे नीचे 50-दिवसीय घातीय गतिमान औसत (EMA) लगभग 1.3450 पर और 200-दिवसीय EMA 1.3400 के करीब स्थित है। डेली स्टोकेस्टिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (Stoch RSI) वर्तमान में 90 के करीब है, जो यह दर्शाता है कि बाजार अत्यधिक खरीदारी (Overbought) के क्षेत्र में है। ऐसे में किसी भी नई तेजी से पहले मूल्य में कुछ समय के लिए समेकन (Consolidation) देखने को मिल सकता है। जब तक कीमत 1.3550 से ऊपर बनी रहती है, तब तक अल्पकालिक दृष्टिकोण तेजी का ही रहेगा।\n\n \n\nब्रिटिश पाउंड का इतिहास और वैश्विक फॉरेक्स बाजार में स्थिति\n\nब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग दुनिया की सबसे पुरानी चालू मुद्रा है, जिसका इतिहास वर्ष 886 ईस्वी से शुरू होता है। यह यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक मुद्रा है और वैश्विक विदेशी मुद्रा (FX) बाजार में चौथी सबसे अधिक कारोबार वाली इकाई है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार आंकड़ों के अनुसार, कुल वैश्विक मुद्रा लेनदेन में पाउंड की हिस्सेदारी लगभग 12% है, जिसका दैनिक औसत कारोबार 630 अरब डॉलर के आसपास होता है।\n\nपाउंड स्टर्लिंग के प्रमुख ट्रेडिंग जोड़ों में GBP/USD सबसे प्रमुख है, जिसे व्यापारी वर्ग में 'केबल' (Cable) के नाम से जाना जाता है। वैश्विक फॉरेक्स व्यापार में केबल की हिस्सेदारी 11% है। इसके अलावा, GBP/JPY (जिसे व्यापारियों द्वारा 'ड्रैगन' कहा जाता है) की हिस्सेदारी 3% और EUR/GBP की हिस्सेदारी 2% है। पाउंड स्टर्लिंग का निर्गमन और विनियमन यूके के केंद्रीय बैंक, बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) द्वारा किया जाता है।\n\n \n\nमौद्रिक नीति और व्यापार संतुलन का प्रभाव\n\nपाउंड स्टर्लिंग के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा तय की जाने वाली मौद्रिक नीति है। बैंक ऑफ इंग्लैंड का प्राथमिक लक्ष्य मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसके तहत वह मुद्रास्फीति दर को लगभग 2% के आसपास नियंत्रित रखने का प्रयास करता है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्रीय बैंक का मुख्य उपकरण ब्याज दरों में समायोजन करना है।\n\nजब मुद्रास्फीति बहुत अधिक होती है, तो बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरों में वृद्धि करके ऋण को महंगा बनाता है, जिससे अर्थव्यवस्था में खपत और निवेश की गति धीमी होती है। उच्च ब्याज दरें वैश्विक निवेशकों को यूके में पूंजी निवेश के लिए आकर्षित करती हैं, जिससे पाउंड स्टर्लिंग को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति अत्यधिक गिर जाती है या आर्थिक सुस्ती का संकेत मिलता है, तो बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरों में कटौती करता है ताकि व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके, जिससे पाउंड में कमजोरी आती है।\n\nइसके अलावा, सकल घरेलू उत्पाद (GDP), विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के PMI, और रोजगार के आंकड़े भी पाउंड की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। एक अन्य महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतक व्यापार संतुलन (Trade Balance) है, जो किसी देश के निर्यात और आयात के अंतर को मापता है। यदि किसी देश के निर्यात की वैश्विक बाजार में अत्यधिक मांग होती है, तो उसकी मुद्रा की मांग स्वतः बढ़ जाती है। इसलिए, सकारात्मक व्यापार संतुलन मुद्रा को मजबूत करता है, जबकि नकारात्मक संतुलन इसे कमजोर करता है।\n\n \n\nअन्य करेंसी जोड़ों और सोने में हलचल\n\nअमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी का व्यापक असर अन्य वैश्विक संपत्तियों पर भी स्पष्ट रूप से देखा गया। EUR/USD जोड़ा बुधवार को अपनी तेजी को बनाए रखते हुए 1.1650 के स्तर के पार पहुंच गया, जो जून की शुरुआत के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। निवेशक अब फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति समिति (FOMC) के मिनट्स का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं ताकि अमेरिका में भविष्य की ब्याज दर नीति के संकेत मिल सकें।\n\nवहीं दूसरी ओर, कीमती धातुओं में भी मजबूती दर्ज की गई। अमेरिकी डॉलर के नरम पड़ने और लंबी अवधि की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई गिरावट के चलते सोने (XAU/USD) ने अमेरिकी कारोबारी घंटों में जोरदार वापसी की। सोने ने अपने पिछले दिन के सभी नुकसान की भरपाई करते हुए बढ़त हासिल की। कुल मिलाकर, वैश्विक वित्तीय बाजार में इस समय अमेरिकी राजकोषीय और मौद्रिक गतिविधियों का गहरा असर देखा जा रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nव्यापारियों और निवेशकों के लिए: यूएस ट्रेजरी द्वारा बायबैक बढ़ाने से अमेरिकी डॉलर कमजोर हुआ है और पाउंड 1.3600 के पार निकल गया है। यदि आप फॉरेक्स या अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में निवेश करते हैं, तो डॉलर आधारित संपत्तियों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।\n\nयूके यात्रा और शिक्षा पर प्रभाव: भारतीय छात्रों और यात्रियों के लिए पाउंड के मजबूत होने से ब्रिटेन में पढ़ाई, रहना और यात्रा करना थोड़ा महंगा हो सकता है क्योंकि रुपये के मुकाबले पाउंड की विनिमय दर पर असर पड़ेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. GBP/USD में हालिया तेजी का मुख्य कारण क्या है?\nयूएस ट्रेजरी द्वारा लंबी अवधि की प्रतिभूतियों के बायबैक का आकार दोगुना करने की घोषणा से अमेरिकी डॉलर कमजोर हुआ, जिससे पाउंड स्टर्लिंग बढ़कर 1.3600 के पार पहुंच गया।\n\n2. क्या यूके मुद्रास्फीति आंकड़ों से बैंक ऑफ इंग्लैंड की दरों पर असर पड़ेगा?\nजुलाई में वार्षिक CPI बढ़कर 2.9% हुई, लेकिन यह वृद्धि मुख्यतः विनियमित ऊर्जा दरों में 13.5% की बढ़ोतरी के कारण थी। इसलिए बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा सितंबर की बैठक में ब्याज दरों में बदलाव की संभावना कम है।\n\n3. GBP/USD के लिए कौन से तकनीकी सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर महत्वपूर्ण हैं?\nपहला प्रमुख रेजिस्टेंस 1.3650 और उसके बाद 1.3700 है। नीचे की तरफ 1.3600 और 1.3550 महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर हैं।\n\n4. पाउंड स्टर्लिंग को फॉरेक्स बाजार में 'केबल' क्यों कहा जाता है?\nलंदन और न्यूयॉर्क के बीच मुद्रा की दरों को प्रसारित करने के लिए अटलांटिक महासागर में बिछाए गए टेलीग्राफ केबल के कारण GBP/USD जोड़े को ऐतिहासिक रूप से 'केबल' कहा जाता है।",
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  "publishedAt": "2026-08-19",
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