पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव के बीच तेहरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी, वैश्विक बाजारों पर असर की आशंका ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने सैन्य बलों को अमेरिका और इसराइल के खिलाफ जवाबी विकल्पों के विस्तार का निर्देश दिया है, जबकि राजनयिक बातचीत जारी रहने के बीच वैश्विक वित्तीय बाजारों में सतर्कता बढ़ गई है। पश्चिम एशिया में सप्ताहांत के दौरान सामने आए नए घटनाक्रमों ने कूटनीतिक वार्ताओं और सैन्य टकराव की आशंकाओं को एक साथ चर्चा के केंद्र में ला दिया है। ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने अपने शीर्ष सैन्य कमांडरों को आदेश दिया है कि वे अमेरिका और इसराइल के साथ नए सिरे से होने वाले संभावित टकराव के लिए पूरी तरह तैयार रहें। खामेनेई ने तेहरान के जवाबी विकल्पों को व्यापक बनाने का निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर और किसी भी प्रकार के खतरे का तत्काल और प्रभावी जवाब दिया जाना चाहिए, जिसमें कोई भौगोलिक सीमाएं आड़े नहीं आएंगी। यह सख्त सैन्य रुख ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान के शीर्ष राजनयिक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के साथ जारी बातचीत में प्रगति के संकेत दे रहे हैं। राजनयिक बातचीत और तेहरान की प्रमुख शर्तें ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पुष्टि की है कि एक ईरानी प्रतिनिधिमंडल कतर में मौजूद है और वहां मध्यस्थों के साथ सक्रिय चर्चा कर रहा है। अराघची के अनुसार, इन वार्ताओं की सफलता कुछ स्पष्ट शर्तों पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि इन शर्तों में इस्लामाबाद ज्ञापन के बाद लगाए गए प्रतिबंधों को हटाना और क्षेत्र में अमेरिकी सेना की मौजूदगी को कम करना शामिल है। इसके अलावा, अराघची ने मांग की कि तेल छूट को बहाल किया जाए और कतर में रखे गए धन सहित ईरान के सभी जब्त फंडों को अविलंब जारी किया जाए। इस कूटनीतिक प्रक्रिया के समांतर, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वाशिंगटन ने तेहरान पर दोबारा हमले शुरू करने का कोई निर्णय नहीं लिया है। रुबियो ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप राजनयिक समाधान को प्राथमिकता देते हैं, हालांकि अमेरिका के पास उन सभी सैन्य उद्देश्यों को पूरा करने की पूरी क्षमता मौजूद है जिन्हें राष्ट्रपति आगे बढ़ाने का निर्णय लेंगे। वैश्विक वित्तीय बाजारों में जोखिम की स्थिति और निवेशकों का रुख भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का सीधा संबंध वित्तीय बाजारों की हलचल से जुड़ा होता है, जहां निवेशक अक्सर अपनी रणनीतियों को परिस्थितियों के अनुसार ढालते हैं। वित्तीय शब्दावली में दो प्रमुख अवधारणाएं इस्तेमाल की जाती हैं, जिन्हें रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ कहा जाता है। ये अवधारणाएं इस बात को दर्शाती हैं कि किसी दिए गए समय में निवेशक कितना वित्तीय जोखिम उठाने के लिए तैयार हैं। जब बाजार में रिस्क-ऑन का माहौल होता है, तब निवेशक भविष्य के प्रति आशावादी होते हैं और वे जोखिम वाली संपत्तियों में निवेश बढ़ाने के इच्छुक रहते हैं। इसके विपरीत, जब बाजार रिस्क-ऑफ की स्थिति में प्रवेश करता है, तो निवेशक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं और अपने निवेश को सुरक्षित संपत्तियों की ओर मोड़ते हैं ताकि कम लेकिन निश्चित रिटर्न प्राप्त हो सके। रिस्क-ऑन बनाम रिस्क-ऑफ का विभिन्न संपत्तियों पर असर आमतौर पर, रिस्क-ऑन के दौर में शेयर बाजारों में तेजी देखने को मिलती है। सोने को छोड़कर अधिकांश कमोडिटीज के मूल्यों में वृद्धि दर्ज की जाती है, क्योंकि वे सकारात्मक आर्थिक विकास के परिदृश्य से लाभान्वित होती हैं। भारी कमोडिटी निर्यातक देशों की मुद्राएं बढ़ती मांग के कारण मजबूत होती हैं, और क्रिप्टोकरेंसी परिसंपत्तियों में भी उछाल आता है। इसके विपरीत, रिस्क-ऑफ के माहौल में बॉन्ड्स की कीमतें चढ़ती हैं, विशेष रूप से प्रमुख सरकारी बॉन्ड्स की मांग में तेजी आती है। ऐसे समय में सोना चमकता है और सेफ-हेवन के रूप में पहचानी जाने वाली मुद्राएं, जैसे जापानी येन, स्विस फ्रैंक और अमेरिकी डॉलर को सीधा लाभ मिलता है। कमोडिटी आधारित मुद्राएं और उनकी प्रतिक्रिया रिस्क-ऑन बाजारों में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD), कनाडाई डॉलर (CAD), न्यूजीलैंड डॉलर (NZD) के साथ-साथ रूसी रूबल (RUB) और दक्षिण अफ्रीकी रैंड (ZAR) जैसी मुद्राएं बढ़त दर्ज करती हैं। इसका प्राथमिक कारण यह है कि इन मुद्राओं से जुड़ी अर्थव्यवस्थाएं विकास के लिए कमोडिटी निर्यात पर अत्यधिक निर्भर करती हैं। जब आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं और कच्चे माल की भविष्य की मांग बढ़ने की संभावना बनती है, तब कमोडिटीज की कीमतें बढ़ती हैं और इन देशों की मुद्राओं को सीधा समर्थन मिलता है। सेफ-हेवन मुद्राओं की भूमिका जब बाजार रिस्क-ऑफ के दौर से गुजरते हैं, तब अमेरिकी डॉलर (USD), जापानी येन (JPY) और स्विस फ्रैंक (CHF) जैसी प्रमुख मुद्राओं में मजबूती आती है। अमेरिकी डॉलर को दुनिया की प्रमुख रिजर्व करेंसी होने का लाभ मिलता है, और संकट के समय निवेशक अमेरिकी सरकारी ऋण खरीदते हैं क्योंकि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के डिफॉल्ट होने की संभावना नहीं मानी जाती। जापानी येन को जापानी सरकारी बॉन्ड की बढ़ती मांग से मजबूती मिलती है, क्योंकि इसका एक बड़ा हिस्सा घरेलू निवेशकों के पास होता है जो संकट के समय भी उन्हें बेचने से बचते हैं। वहीं, स्विस फ्रैंक को स्विट्जरलैंड के सख्त बैंकिंग कानूनों और निवेशकों को मिलने वाली पूंजी सुरक्षा के कारण मजबूती हासिल होती है। विदेशी मुद्रा बाजार और सोने की ताजा चाल एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान शुक्रवार को AUD/USD जोड़ी में मजबूती देखी गई और यह 0.7035 के करीब पहुंच गई। ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले उस समय बढ़त मिली जब ऑस्ट्रेलिया के सीपीआई मुद्रास्फीति आंकड़ों ने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को बल दिया। दूसरी ओर, USD/JPY शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन गिरावट के साथ 157.00 के स्तर पर पहुंच गया, जिसके बाद इसमें कुछ सुधार का प्रयास देखा गया। निवेशक बैंक ऑफ जापान (BoJ) की बैठक के नतीजों का आकलन कर रहे हैं, जहां केंद्रीय बैंक ने दरों को अपरिवर्तित छोड़ दिया था। बाजारों में रिस्क-ऑफ के माहौल के बावजूद, सोना शुक्रवार को नए साल के निचले स्तर पर फिसल गया। फेडरल रिजर्व (Fed) द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की निरंतर उम्मीदों के कारण सोने की कीमतों पर दबाव बना रहा, जिससे पीली धातु महीने का समापन नकारात्मक दायरे में करने की ओर अग्रसर रही। इसका आप पर असर पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक केंद्रीय बैंकों के निर्णयों से मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है। • कच्चे तेल पर प्रभाव: ईरान द्वारा संभावित जवाबी कार्रवाई और प्रतिबंधों की शर्तों से तेल आपूर्ति में अनिश्चितता पैदा हो सकती है। इसका सीधा असर वैश्विक ईंधन लागत और परिवहन खर्चों पर पड़ सकता है। • सुरक्षित संपत्तियां: बाजार में अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक डॉलर और बॉन्ड्स जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख करते हैं। इससे जोखिम वाली संपत्तियों और उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव देखा जा सकता है। • सोने की कीमतें: फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों के कारण सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। यह आभूषण खरीदारों और धातु निवेशकों के लिए खरीद के स्तरों को प्रभावित कर सकता है। • मुद्रा विनिमय दरें: विदेशी मुद्रा बाजारों में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और जापानी येन में आ रहे उतार-चढ़ाव से अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो सकता है। आयात-निर्यात से जुड़ी कंपनियों को मुद्रा जोखिम के प्रबंधन पर ध्यान देना होगा। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम सैन्य चेतावनी और राजनयिक चर्चाओं के एक साथ आगे बढ़ने तथा वैश्विक स्तर पर ब्याज दर नीतियों के प्रभाव के कारण सामने आया है। • सैन्य आदेश: ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने कमांडरों को अमेरिका और इसराइल के संभावित खतरों का तत्काल और प्रभावी जवाब देने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है। इसके चलते दोनों पक्षों के बीच जवाबी कार्रवाई के विकल्पों में विस्तार हुआ है। • राजनयिक वार्ता की शर्तें: कतर में मध्यस्थों के साथ बातचीत कर रहे ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने प्रतिबंध हटाने, अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटाने और तेल छूट बहाल करने की मांग रखी है। इन सख्त शर्तों के कारण समाधान की दिशा में सहमति बनने में समय लग रहा है। • मौद्रिक नीति की भूमिका: फेडरल रिजर्व की दर वृद्धि की उम्मीदों और बैंक ऑफ जापान द्वारा नीति स्थिर रखने से मुद्रा तथा धातु बाजारों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। इससे सुरक्षित संपत्तियों के सामान्य व्यवहार में भी बदलाव आया है। सवाल-जवाब 1. ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने अपने कमांडरों को क्या आदेश दिया है? उन्होंने कमांडरों को अमेरिका और इसराइल के खिलाफ संभावित टकराव के लिए तैयार रहने और जवाबी विकल्पों को बिना भौगोलिक सीमाओं के तत्काल लागू करने का निर्देश दिया है। 2. कतर में चल रही वार्ता में ईरान की प्रमुख मांगें क्या हैं? ईरान ने इस्लामाबाद ज्ञापन के बाद लगे प्रतिबंधों को हटाने, क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटाने, तेल छूट बहाल करने और कतर में रखे फंड सहित जब्त संपत्तियों को जारी करने की मांग की है। 3. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्या बयान दिया? मार्को रुबियो ने कहा कि वाशिंगटन ने हमले फिर शुरू करने का कोई फैसला नहीं किया है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप राजनयिक समाधान को प्राथमिकता देते हैं। 4. वित्तीय बाजारों में रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ का क्या अर्थ है? रिस्क-ऑन में निवेशक आशावादी होकर जोखिम वाली संपत्तियां खरीदते हैं, जबकि रिस्क-ऑफ में चिंता के कारण वे सरकारी बॉन्ड और सेफ-हेवन मुद्राओं जैसी सुरक्षित संपत्तियों को चुनते हैं। 5. बाजार में अनिश्चितता के बावजूद सोना निचले स्तर पर क्यों फिसला? फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की लगातार बनी उम्मीदों के कारण सोने की कीमतों पर दबाव रहा और वह कमजोर हुआ। https://trendkia.com/market/west-asia-men-sainya-tanava-ke-bicha-tehran-ne-di-javabi-karravai-ki-chetavani-vaishvika-bajaron-para-asara-ki-ashnka-54632 TrendKia — Har trend, sabse pehle.