पश्चिम एशिया में तनाव और तेल उछाल के बीच डॉलर चढ़ा, कनाडाई डॉलर पर दबाव मध्य पूर्व में हमलों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी के कारण डॉलर में खरीदारी लौटी, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में सुधार ने कनाडाई डॉलर की गिरावट को सीमित किया। वैश्विक वित्तीय बाजारों में बुधवार के कारोबारी सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर की मांग में नया उभार देखने को मिला है। पिछले सत्र में मुनाफावसूली के कारण दर्ज हुई गिरावट के बाद निवेशकों ने निचले स्तरों पर डॉलर की खरीदारी में रुचि दिखाई। इस तेजी के चलते USD/CAD मुद्रा जोड़ी को सहारा मिला, हालांकि तेजी की गति बेहद सीमित रही। दूसरी तरफ, मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक संकट और तेल आपूर्ति बाधित होने की चिंताओं के बीच कच्चे तेल की कीमतों में एक महीने के निचले स्तर से उछाल आया है। कच्चे तेल में आई इस मजबूती ने कमोडिटी से जुड़ी कनाडाई मुद्रा यानी लूनी को नीचे से सहारा दिया, जिसके कारण USD/CAD की बढ़त ऊपरी स्तरों पर सीमित रह गई। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ कनाडा के नीतिगत रुख में अंतर भी जोड़ी के रुझान को प्रभावित कर रहा है। पश्चिम एशिया में सैन्य टकराव और तेल आपूर्ति पर संकट कच्चे तेल की कीमतों में आई रिकवरी का मुख्य कारण मध्य पूर्व में गंभीर होता सैन्य तनाव है। सऊदी समर्थित यमनी सरकार ने लाल सागर तट के किनारे कई रणनीतिक ठिकानों पर अपना नियंत्रण स्थापित करने का दावा किया है, जिसमें बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास के महत्वपूर्ण इलाके शामिल हैं। इस सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान समर्थित हुती समूह ने सऊदी अरब के भीतर कई अहम बुनियादी ढांचों पर जवाबी हमले किए, जिनमें रियाद स्थित अरामको की एक रिफाइनरी भी शामिल है। इसके अलावा, पिछले एक सप्ताह के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की ओर से हमलों की रफ्तार तेज हुई है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल समुद्री मार्गों में इस प्रकार की आक्रामकता ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम को ऊंचा बनाए रखा है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, क्रूड ऑयल (CL=F) का भाव 1.15 प्रतिशत की दैनिक बढ़त के साथ 90.46 डॉलर पर पहुंच गया है, जो पिछले बंद स्तर 89.43 डॉलर से ऊपर है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर के बीच रहा है, जबकि वर्तमान में वॉल्यूम 20 दिनों के औसत का 0.03 गुना दर्ज हुआ है। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय RSI 47 पर है, जबकि MACD 0.03 और सिग्नल लाइन 1.20 पर होने से हिस्टोग्राम -1.18 का मंदी का संकेत दिखा रहा है। 20-दिवसीय EMA 92.60 डॉलर, 50-दिवसीय EMA 90.19 डॉलर और 200-दिवसीय EMA 80.90 डॉलर पर है, जहां EMA50 का EMA200 से ऊपर होना दीर्घकालिक अपट्रेंड और गोल्डन क्रॉस को दर्शाता है। 50-दिवसीय SMA 88.74 डॉलर तथा 200-दिवसीय SMA 82.73 डॉलर पर स्थित है। बोलिंजर बैंड्स 85.77 डॉलर से 105.85 डॉलर के दायरे में हैं जिसका मध्य स्तर 95.81 डॉलर है। 14-दिवसीय ADX 20 पर एक कमजोर या सीमित दायरे का संकेत दे रहा है, वहीं स्टोकेस्टिक की फास्ट लाइन 16 और सिग्नल लाइन 13 पर है। दैनिक अस्थिरता के लिए 14-दिवसीय ATR 4.34 डॉलर पर है। 20 दिनों का सपोर्ट लगभग 88.06 डॉलर और रेजिस्टेंस 106.75 डॉलर पर है। मुख्य स्तरों में पिवट 90.23 डॉलर, रेजिस्टेंस R1 90.84 डॉलर और R2 91.22 डॉलर, जबकि सपोर्ट S1 89.85 डॉलर और S2 89.24 डॉलर पर बना हुआ है। USD/CAD के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी स्तर तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो USD/CAD जोड़ी के लिए शुरुआती समर्थन 23.6 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट स्तर 1.4163 पर बना हुआ है। यदि बिकवाली का दबाव बढ़ता है और जोड़ी इस स्तर से नीचे फिसलती है, तो 38.2 प्रतिशत फिबोनाची स्तर 1.4086 पर नई लिवाली देखी जा सकती है। इसके बाद 50 प्रतिशत रिट्रेसमेंट स्तर 1.4024 पर एक बेहद मजबूत सहारा मौजूद है, जो किसी भी बड़े सुधार को रोकने का काम कर सकता है। ऊपरी मोर्चे पर, इस मुद्रा जोड़ी के लिए सबसे बड़ा संरचनात्मक प्रतिरोध 1.4288 के स्तर पर स्थित है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह जोड़ी 1.4288 के रेजिस्टेंस को निर्णायक रूप से पार करने में सफल होती है, तो मौजूदा तेजी के चक्र में नए उच्च स्तर छूने के रास्ते खुल जाएंगे। हालांकि, जब तक तेल की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी, तब तक कनाडाई डॉलर में मजबूती बनी रह सकती है, जिससे इस बाधा को पार करना एक बड़ी चुनौती साबित होगा। कनाडाई डॉलर को दिशा देने वाले बुनियादी आर्थिक कारक कनाडाई डॉलर के मूल्य निर्धारण में कई प्रमुख आर्थिक कारक केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। इनमें बैंक ऑफ कनाडा (BoC) द्वारा तय की जाने वाली आधिकारिक ब्याज दरें, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें, कनाडा की समग्र आर्थिक सेहत, मुद्रास्फीति की दर और देश का व्यापार संतुलन प्रमुख हैं। व्यापार संतुलन से यह तय होता है कि कनाडा के कुल निर्यात और आयात के मूल्य में कितना अंतर है। इसके अलावा, वैश्विक बाजारों का जोखिम मिजाज भी बेहद अहम है। जब वैश्विक निवेशक जोखिम लेने को तैयार होते हैं यानी रिस्क-ऑन माहौल होता है, तो कनाडाई डॉलर को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत जब सुरक्षित निवेश की तलाश यानी रिस्क-ऑफ माहौल होता है, तो यह मुद्रा दबाव में आ जाती है। कनाडा का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार होने के नाते अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सेहत भी कनाडाई डॉलर की दिशा तय करने में सीधी भूमिका निभाती है। बैंक ऑफ कनाडा ब्याज दरों को तय करके बैंकिंग प्रणाली और वाणिज्यिक उधारी की लागत को सीधे तौर पर नियंत्रित करता है। बैंक ऑफ कनाडा का प्राथमिक लक्ष्य देश में महंगाई दर को 1 से 3 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखना होता है। जब केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को अपेक्षाकृत उच्च स्तर पर रखता है, तो यह कनाडाई डॉलर के लिए सकारात्मक माना जाता है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय बैंक ऋण स्थितियों को नियंत्रित करने के लिए क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग का उपयोग करता है। क्वांटिटेटिव ईजिंग जहां मुद्रा के लिए नकारात्मक असर डालती है, वहीं क्वांटिटेटिव टाइटनिंग से मुद्रा को समर्थन मिलता है। कच्चे तेल का निर्यात और आधुनिक मुद्रास्फीति का प्रभाव पेट्रोलियम उत्पाद कनाडा का सबसे बड़ा निर्यात घटक हैं, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों का कनाडाई डॉलर पर तत्काल असर पड़ता है। सामान्य नियम के अनुसार, जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो कनाडाई मुद्रा की वैश्विक मांग में इजाफा होता है और इसका मूल्य बढ़ता है। इसके विपरीत तेल की कीमतें गिरने पर मुद्रा में कमजोरी दर्ज की जाती है। तेल की ऊंची कीमतों से कनाडा के व्यापार संतुलन के सकारात्मक होने की संभावना भी बढ़ जाती है, जिससे लूनी को सीधा समर्थन मिलता है। पारंपरिक आर्थिक सिद्धांतों के अनुसार मुद्रास्फीति को किसी भी मुद्रा के लिए नकारात्मक माना जाता था क्योंकि यह पैसे की क्रय शक्ति को घटाती है। हालांकि, आधुनिक वित्तीय व्यवस्था में सीमा पार पूंजी नियंत्रण हटने के बाद यह समीकरण बदल चुका है। जब किसी अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति बढ़ती है, तो वहां का केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है। उच्च ब्याज दरों की तलाश में वैश्विक निवेशक उस देश में पूंजी निवेश बढ़ाते हैं, जिससे स्थानीय मुद्रा की मांग बढ़ जाती है। कनाडा के संदर्भ में भी यही स्थिति लागू होती है, जहां महंगाई बढ़ने पर दर वृद्धि की उम्मीदें कनाडाई डॉलर की मांग को बढ़ा देती हैं। मैक्रोइकॉनॉमिक आंकड़े और आर्थिक विकास की भूमिका मैक्रोइकॉनॉमिक आंकड़ों के रिलीज होने से किसी भी देश की आर्थिक मजबूती का आकलन किया जाता है और इसका असर मुद्रा पर साफ दिखाई देता है। जीडीपी वृद्धि दर, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज पीएमआई, रोजगार के आंकड़े तथा उपभोक्ता भावना सर्वेक्षण जैसे प्रमुख संकेतक कनाडाई डॉलर की दिशा निर्धारित करते हैं। एक मजबूत अर्थव्यवस्था कनाडाई डॉलर के लिए अनुकूल होती है क्योंकि यह न केवल अधिक विदेशी निवेश को आकर्षित करती है बल्कि बैंक ऑफ कनाडा को ब्याज दरें बढ़ाने के लिए भी प्रेरित करती है। इसके विपरीत, यदि आर्थिक आंकड़े निराशाजनक आते हैं, तो मुद्रा में भारी गिरावट का जोखिम बढ़ जाता है। वैश्विक बाजारों का हाल: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, येन, सोना और केंद्रीय बैंक वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार के अन्य हिस्सों में भी बुधवार के कारोबारी सत्र में खासी हलचल देखी गई। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) अपने तीन महीने के निचले स्तर 0.6900 से पिछले तीन दिनों से जारी रिकवरी को आगे बढ़ाने में संघर्ष करता नजर आया और नकारात्मक रुझान के साथ कारोबार करता रहा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी के कारण अमेरिकी डॉलर 0.7000 के स्तर से नीचे दबाव बनाए हुए है, हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा संभावित दर वृद्धि के अनुमान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा दे रहे हैं, जबकि निवेशक FOMC मिनट्स का इंतजार कर रहे हैं। अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) एशियाई सत्र के दौरान डेढ़ सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। निवेशक अब FOMC मिनट्स से पहले 158.00 के मध्य स्तर पर मौजूद 200-दिवसीय एसएमए के पार जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और जापान की राजकोषीय नीति को लेकर उपजी चिंताओं ने जापानी येन पर भारी दबाव बनाया हुआ है। कीमती धातुओं के बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। पीली धातु 4,100 डॉलर प्रति औंस के दो महीने के निचले स्तर से पिछले दिन की अपनी मजबूत उछाल को बरकरार रखने में विफल रही। सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की नए सिरे से खरीदारी और बॉन्ड यील्ड में तेजी ने बिना यील्ड वाले सोने की बढ़त को रोक दिया है, जो पिछले एक सप्ताह से एक सीमित दायरे में बना हुआ है। केंद्रीय बैंकों के स्तर पर, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बुधवार को सुबह 10:00 बजे अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा करने जा रहा है। बाजार की आम सहमति के अनुसार, इस कैलेंडर वर्ष में नीतिगत दरें स्थिर रखने के बाद केंद्रीय बैंक अब ब्याज दरों में बढ़ोतरी का चक्र शुरू कर सकता है। उम्मीद जताई जा रही है कि आरबीआई अपनी प्रमुख रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.25 प्रतिशत से 5.5 प्रतिशत कर सकता है। वहीं दूसरी ओर, यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के सामने भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आमतौर पर लक्ष्य से लगभग दोगुनी चल रही मुद्रास्फीति पर दरें बढ़ाना सीधा कदम होता है, लेकिन वर्तमान में बॉन्ड बाजार पहले ही आंशिक रूप से वित्तीय सख्ती कर चुका है, जिससे ईसीबी के समक्ष एक जटिल नीतिगत दुविधा पैदा हो गई है। इसका आप पर असर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर की मजबूती से वैश्विक ऊर्जा लागत और मुद्रा विनिमय दरों पर सीधा असर पड़ सकता है। • भारत में प्रभाव: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है। इससे घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों और समग्र मुद्रास्फीति पर दबाव पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। • वैश्विक यात्रियों और छात्रों पर: अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से विदेश यात्रा और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के खर्चों में इजाफा हो सकता है। डॉलर के मुकाबले कमजोर होती अन्य मुद्राओं के कारण विदेशी खर्चों के लिए अधिक स्थानीय मुद्रा चुकानी पड़ सकती है। • फॉरेक्स और कमोडिटी ट्रेडर्स के लिए: USD/CAD में 1.4163 और 1.4288 के प्रमुख तकनीकी स्तरों पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा। कच्चे तेल में 4.34 डॉलर के दैनिक उतार-चढ़ाव (ATR) को देखते हुए स्टॉप-लॉस प्रबंधन बेहद आवश्यक हो जाता है। • ऊर्जा क्षेत्र के निवेशकों पर: मध्य पूर्व में शिपिंग मार्गों पर बढ़ते हमलों से तेल आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान की आशंकाएं बनी हुई हैं। इससे आने वाले समय में ऊर्जा से जुड़े शेयरों और कमोडिटी अनुबंधों में अस्थिरता बढ़ सकती है। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य संघर्षों और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी के कारण सामने आया है, जिसने सुरक्षित निवेश की मांग और ऊर्जा आपूर्ति जोखिम दोनों को एक साथ बढ़ा दिया। • लाल सागर और होर्मुज में सैन्य टकराव: यमन के तटवर्ती इलाकों पर यमनी बलों के नियंत्रण के बाद हुती गुट ने सऊदी अरब में अरामको रिफाइनरी पर हमला किया। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी कार्रवाइयों ने तेल आपूर्ति के प्रमुख मार्गों पर खतरा उत्पन्न कर दिया। • अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नई तेजी: मंगलवार की मुनाफावसूली के बाद अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में ताजा उछाल देखा गया, जिसने डॉलर के प्रति आकर्षण को फिर से जगा दिया। सुरक्षित निवेश की खोज में वैश्विक पूंजी ने डॉलर की ओर रुख किया। • कमोडिटी लिंकेज और मौद्रिक अंतर: कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने कनाडा की मुद्रा को निचले स्तरों पर सपोर्ट दिया क्योंकि पेट्रोलियम उसका मुख्य निर्यात है। वहीं दूसरी ओर फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ कनाडा के नीतिगत कदमों में संभावित अंतर ने मुद्रा जोड़ी के उतार-चढ़ाव को सीमित रखा। सवाल-जवाब 1. USD/CAD जोड़ी में हालिया बढ़त का मुख्य कारण क्या है? अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक तनाव के चलते अमेरिकी डॉलर में निचले स्तरों से खरीदारी लौटी है, जिससे इस जोड़ी को सहारा मिला। 2. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का कनाडाई डॉलर पर क्या असर पड़ा? कनाडा का सबसे बड़ा निर्यात पेट्रोलियम होने के कारण तेल की कीमतों में उछाल ने कनाडाई डॉलर को मजबूती दी और USD/CAD की बढ़त को सीमित रखा। 3. मध्य पूर्व में कौन सी घटनाएं तेल बाजार को प्रभावित कर रही हैं? यमनी सरकार का लाल सागर तट पर दावा, रियाद में अरामको रिफाइनरी पर हुती हमला और होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी हमलों ने आपूर्ति संकट की चिंताएं बढ़ा दी हैं। 4. USD/CAD के लिए प्रमुख तकनीकी स्तर कौन से हैं? नीचे की ओर 1.4163, 1.4086 और 1.4024 पर समर्थन स्तर हैं, जबकि ऊपर की ओर 1.4288 का स्तर मुख्य प्रतिरोध का काम कर रहा है। 5. भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति बैठक से बाजार को क्या उम्मीद है? बाजार के अनुमान के अनुसार आरबीआई अपनी रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.25 प्रतिशत से 5.5 प्रतिशत कर सकता है। https://trendkia.com/market/west-asia-men-tanava-aura-crude-oil-uchhala-ke-bicha-usd-charha-cad-para-dabava-44244 TrendKia — Har trend, sabse pehle.